अक्षांश से उत्तर-दक्षिण, देशांतर से पूर्व-पश्चिम
ग्लोब पृथ्वी का लघु प्रतिरूप है। विषुवत् वृत्त (0°) से ध्रुवों (90°) तक के समानांतर वृत्त अक्षांश हैं; इनमें कर्क रेखा, मकर रेखा और ध्रुव वृत्त पृथ्वी को उष्ण, शीतोष्ण और शीत कटिबंधों में बाँटते हैं।
ध्रुव से ध्रुव तक के अर्धवृत्त देशांतरीय याम्योत्तर हैं, जिनकी गिनती ग्रीनिच (0°) से होती है। दोनों का ग्रिड हर स्थान का पता देता है। 15° = 1 घंटा; भारत का मानक समय 82½° पू. से, ग्रीनिच से 5 घंटे 30 मिनट आगे।
याद रखें
- विषुवत् वृत्त 0°; ध्रुव 90° उ. और 90° द.।
- कर्क 23½° उ., मकर 23½° द., ध्रुव वृत्त 66½°।
- प्रमुख याम्योत्तर 0° ग्रीनिच; 180° पू. = 180° प.।
- 15° = 1 घंटा, 1° = 4 मिनट; पूर्व में समय आगे।
- भारतीय मानक समय: 82½° पू., ग्रीनिच से 5 घंटे 30 मिनट आगे।
नोट्सपढ़ने और पढ़ाने के लिए पूरी जानकारी
NCERT कक्षा 6 · पृथ्वी: हमारा आवास (पुरानी किताब) · अध्याय 2: ग्लोब: अक्षांश एवं देशांतर
1पृथ्वी का आकार और ग्लोब
- पिछले अध्याय में पढ़ा था कि हमारी पृथ्वी पूरी गोल नहीं है। यह उत्तर और दक्षिण ध्रुवों पर थोड़ी चपटी और मध्य में थोड़ी उभरी हुई है।
- यह कैसी दिखती है, यह समझने के लिए कक्षा में ग्लोब को ध्यान से देखिए।
NCERT: "ग्लोब पृथ्वी का लघु रूप में एक वास्तविक प्रतिरूप है।"
ग्लोब की बातें
- ग्लोब अलग-अलग आकार और प्रकार के होते हैं:
- बड़े ग्लोब, जिन्हें आसानी से एक जगह से दूसरी जगह नहीं ले जाया जा सकता;
- जेब में रखने लायक छोटे ग्लोब;
- गुब्बारे जैसे ग्लोब, जिनमें हवा भरी जा सकती है और जो आसानी से कहीं भी ले जाए जा सकते हैं।
- ग्लोब स्थिर नहीं होते। इसे वैसे ही घुमाया जा सकता है, जैसे कुम्हार का पहिया या लट्टू घूमता है।
- ग्लोब पर देशों, महाद्वीपों और महासागरों को उनके सही आकार में दिखाया जाता है।
स्थिति बताने की समस्या
पृथ्वी जैसे किसी गोले पर किसी बिंदु की स्थिति बताना कठिन है। इसके लिए हमें कुछ संदर्भ बिंदुओं और रेखाओं की ज़रूरत होती है। यही बिंदु और रेखाएँ इस अध्याय का विषय हैं।
2अक्ष, ध्रुव और विषुवत् वृत्त
आओ कुछ करके सीखें
एक बड़ा, गोलाकार आलू या गेंद लीजिए और उसमें स्वेटर बुनने वाली सलाई घुसा दीजिए। यह सलाई ग्लोब पर दिखाए गए अक्ष जैसी है। अब आलू या गेंद को उसके अक्ष पर बाएँ से दाएँ घुमाइए।
अक्ष
- ग्लोब में एक सुई झुकी हुई अवस्था में लगी होती है। इसे अक्ष कहते हैं।
- जिन दो बिंदुओं से होकर सुई गुज़रती है, वे उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव हैं।
- ग्लोब को इस सुई के चारों ओर पृथ्वी की तरह पश्चिम से पूर्व की ओर घुमाया जा सकता है।
- अंतर याद रखें: पृथ्वी पर ऐसी कोई सुई सच में नहीं होती। पृथ्वी जिस अक्ष पर घूमती है, वह एक काल्पनिक रेखा है।
- (3D मॉडल का दृश्य 1: स्टैंड पर झुका ग्लोब अपने अक्ष पर घूमता है।)
विषुवत् वृत्त
- एक और काल्पनिक रेखा ग्लोब को दो बराबर भागों में बाँटती है। इसे विषुवत् वृत्त कहते हैं।
- पृथ्वी के उत्तर वाला आधा भाग उत्तरी गोलार्ध और दक्षिण वाला आधा भाग दक्षिणी गोलार्ध कहलाता है। दोनों बराबर आधे भाग हैं।
- विषुवत् वृत्त पृथ्वी पर एक काल्पनिक वृत्त बनाता है। यह पृथ्वी पर अलग-अलग स्थानों की स्थिति बताने का सबसे महत्त्वपूर्ण संदर्भ बिंदु है। (3D मॉडल में "उत्तरी / दक्षिणी गोलार्ध" दबाइए।)
3अक्षांश (समानांतर) रेखाएँ
NCERT: "विषुवत् वृत्त से ध्रुवों तक स्थित सभी समानांतर वृत्तों को अक्षांश (समानांतर) रेखाएँ कहा जाता है।"
- अक्षांशों को अंश (°) में मापा जाता है।
- विषुवत् वृत्त शून्य अंश (0°) अक्षांश है।
- विषुवत् वृत्त से किसी भी ध्रुव तक की दूरी, पृथ्वी के चारों ओर के वृत्त का एक-चौथाई है। इसलिए इसका माप होगा 360° का 1/4, यानी 90°।
- इसलिए 90° उत्तरी अक्षांश = उत्तरी ध्रुव और 90° दक्षिणी अक्षांश = दक्षिणी ध्रुव।
- विषुवत् वृत्त के उत्तर की सभी समानांतर रेखाएँ उत्तरी अक्षांश, और दक्षिण की सभी दक्षिणी अक्षांश कहलाती हैं।
दिशा लिखना ज़रूरी
- इसलिए हर अक्षांश के मान के साथ उसकी दिशा (उत्तर या दक्षिण) भी लिखी जाती है: छोटे रूप में उ. या द.।
- किताब का उदाहरण: महाराष्ट्र में चंद्रपुर और ब्राज़ील (दक्षिण अमेरिका) में बेलो होरिज़ोंटे, दोनों 20 अंश अक्षांश पर हैं। पर चंद्रपुर विषुवत् वृत्त के 20° उत्तर में है और बेलो होरिज़ोंटे 20° दक्षिण में। इसलिए चंद्रपुर 20° उ. पर और बेलो होरिज़ोंटे 20° द. पर है। (3D मॉडल के दृश्य 3 में "अगला स्थान" दबाकर दोनों देखिए।)
- विषुवत् वृत्त से जितना दूर जाते हैं, अक्षांश वृत्त उतने छोटे होते जाते हैं (चित्र 2.2)।
क्या आप जानते हैं?
अपने स्थान से ध्रुव तारे का कोण नापकर आप अपने स्थान का अक्षांश जान सकते हैं। (उदाहरण के लिए: जहाँ ध्रुव तारा क्षितिज से लगभग 23° ऊपर दिखे, वह स्थान लगभग 23° उ. अक्षांश पर है।)
4महत्त्वपूर्ण अक्षांश रेखाएँ और ताप कटिबंध
महत्त्वपूर्ण अक्षांश (समानांतर) रेखाएँ
विषुवत् वृत्त (0°), उत्तरी ध्रुव (90° उ.) और दक्षिणी ध्रुव (90° द.) के अलावा चार महत्त्वपूर्ण अक्षांश रेखाएँ और हैं:
| क्रम | रेखा | अक्षांश | किस गोलार्ध में |
|---|---|---|---|
| 1 | कर्क रेखा | 23½° उ. | उत्तरी गोलार्ध |
| 2 | मकर रेखा | 23½° द. | दक्षिणी गोलार्ध |
| 3 | आर्कटिक वृत्त (किताब में: आर्कटिक वृत्त) | 66½° उ. | विषुवत् वृत्त के 66½° उत्तर में |
| 4 | अंटार्कटिक वृत्त | 66½° द. | विषुवत् वृत्त के 66½° दक्षिण में |
पृथ्वी के ताप कटिबंध
| कटिबंध | कहाँ से कहाँ तक | क्यों |
|---|---|---|
| उष्ण कटिबंध | कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच | यहाँ हर अक्षांश पर सूर्य वर्ष में एक बार दोपहर में सिर के ठीक ऊपर होता है; सबसे अधिक ऊष्मा |
| शीतोष्ण कटिबंध (उत्तरी और दक्षिणी) | उत्तरी गोलार्ध में कर्क रेखा और आर्कटिक वृत्त के बीच; दक्षिणी गोलार्ध में मकर रेखा और अंटार्कटिक वृत्त के बीच | दोपहर का सूर्य कभी सिर के ऊपर नहीं; ध्रुवों की ओर किरणें तिरछी; तापमान मध्यम |
| शीत कटिबंध (उत्तरी और दक्षिणी) | आर्कटिक वृत्त और उत्तरी ध्रुव के बीच; अंटार्कटिक वृत्त और दक्षिणी ध्रुव के बीच | सूर्य क्षितिज से ज़्यादा ऊपर नहीं आ पाता; ठंड बहुत अधिक |
सीधी और तिरछी किरणें (चित्र 2.4)
- (अ) सीधी सतह पर टॉर्च का प्रकाश तेज़ होता है और कम क्षेत्र में फैलता है।
- (ब) तिरछी सतह पर टॉर्च का प्रकाश कम तेज़ होता है, पर अधिक क्षेत्र में फैलता है।
- यही सूर्य की किरणों के साथ होता है: विषुवत् वृत्त के पास सीधी किरणें (अधिक गर्मी), ध्रुवों की ओर तिरछी किरणें (कम गर्मी)। (3D मॉडल का दृश्य 2 देखिए।)
5देशांतर क्या हैं?
- किसी स्थान की स्थिति बताने के लिए अक्षांश के अलावा कुछ और जानकारी भी चाहिए।
- किताब का उदाहरण: प्रशांत महासागर का टोंगा द्वीप और हिंद महासागर का मॉरीशस द्वीप, दोनों एक ही अक्षांश (20°00′ द.) पर हैं। उनकी सही स्थिति जानने के लिए यह पता करना होगा कि उत्तरी ध्रुव को दक्षिणी ध्रुव से जोड़ने वाली संदर्भ रेखा से ये पूर्व या पश्चिम की ओर कितनी दूर हैं।
NCERT: इन संदर्भ रेखाओं को देशांतरीय याम्योत्तर कहते हैं, और उनके बीच की दूरी को देशांतर के अंशों में मापा जाता है।
देशांतर की विशेषताएँ
- हर अंश को मिनट में, और मिनट को सेकंड में बाँटा जाता है (जैसे 20°00′ = 20 अंश 00 मिनट)।
- देशांतरीय याम्योत्तर अर्धवृत्त हैं।
- उनके बीच की दूरी ध्रुवों की ओर बढ़ने पर घटती जाती है और ध्रुवों पर शून्य हो जाती है, जहाँ सभी याम्योत्तर आपस में मिलते हैं।
- अक्षांश रेखाओं से अलग, सभी देशांतरीय याम्योत्तरों की लंबाई समान होती है। इसलिए इन्हें केवल संख्याओं से अलग-अलग बताना कठिन था।
अक्षांश और देशांतर में अंतर
| अक्षांश (समानांतर) रेखाएँ | देशांतरीय याम्योत्तर |
|---|---|
| विषुवत् वृत्त के समानांतर पूरे वृत्त | ध्रुव से ध्रुव तक अर्धवृत्त |
| ध्रुवों की ओर छोटे होते जाते हैं | सबकी लंबाई समान |
| 0° (विषुवत् वृत्त) से 90° उ. और 90° द. | 0° (प्रमुख याम्योत्तर) से 180° पू. और 180° प. |
| स्थान की उत्तर-दक्षिण स्थिति बताते हैं | स्थान की पूर्व-पश्चिम स्थिति बताते हैं |
6प्रमुख याम्योत्तर और पूर्वी-पश्चिमी गोलार्ध
- सभी देशों ने तय किया कि ग्रीनिच, जहाँ ब्रिटिश राजकीय वेधशाला है, से गुज़रने वाले याम्योत्तर से पूर्व और पश्चिम की ओर गिनती शुरू की जाए।
- इस याम्योत्तर को प्रमुख याम्योत्तर कहते हैं। इसका मान 0° देशांतर है। यहाँ से हम 180° पूर्व या 180° पश्चिम तक गिनते हैं।
- प्रमुख याम्योत्तर और 180° याम्योत्तर मिलकर पृथ्वी को दो बराबर भागों में बाँटते हैं: पूर्वी गोलार्ध और पश्चिमी गोलार्ध।
- इसलिए किसी स्थान के देशांतर के आगे पूर्व के लिए पू. और पश्चिम के लिए प. लिखते हैं।
- रोचक: 180° पूर्व और 180° पश्चिम याम्योत्तर एक ही रेखा पर हैं।
- (3D मॉडल के दृश्य 3 में "पूर्वी / पश्चिमी गोलार्ध" दबाइए।)
आओ कुछ करके सीखें
एक वृत्त खींचिए। मान लीजिए प्रमुख याम्योत्तर उसे दो बराबर भागों में बाँटता है। पूर्वी और पश्चिमी गोलार्ध को रंगकर नाम लिखिए। फिर एक और वृत्त खींचिए, जिसे विषुवत् वृत्त दो बराबर भागों में बाँटे; अब उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध को रंग दीजिए।
7ग्रिड: किसी स्थान का सही पता
- ग्लोब पर अक्षांश (समानांतर) रेखाओं और देशांतरीय याम्योत्तरों से बने जाल को ग्रिड कहते हैं।
- अगर किसी स्थान का अक्षांश और देशांतर पता हो, तो ग्लोब पर उसे आसानी से ढूँढा जा सकता है।
- किताब का उदाहरण: असम में धुबरी 26° उ. अक्षांश और 90° पू. देशांतर पर है। जिस बिंदु पर ये दोनों रेखाएँ एक-दूसरे को काटती हैं, वही धुबरी की सही स्थिति है। (3D मॉडल का दृश्य 3: सुनहरी रेखाएँ जहाँ मिलती हैं, वहीं स्थान है।)
कागज़ पर ग्रिड का अभ्यास (किताब की गतिविधि)
- कागज़ पर बराबर दूरी वाली क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर रेखाएँ खींचिए।
- ऊर्ध्वाधर रेखाओं को 1, 2, 3, 4 और क्षैतिज रेखाओं को क, ख, ग, घ, ङ नाम दीजिए।
- जहाँ रेखाएँ काटती हैं, वहाँ छोटे वृत्त बनाकर उन्हें अ, ब, स, द, ध नाम दीजिए।
- मान लीजिए ऊर्ध्वाधर रेखाएँ पूर्वी देशांतर और क्षैतिज रेखाएँ उत्तरी अक्षांश हैं।
- किताब बताती है: वृत्त अ, ख° उत्तरी अक्षांश और 1° पूर्वी देशांतर पर है।
बाकी वृत्तों की स्थिति (किताब के चित्र के अनुसार):
| वृत्त | अक्षांश | देशांतर |
|---|---|---|
| अ | ख° उ. | 1° पू. |
| ब | घ° उ. | 1° पू. |
| स | ग° उ. | 3° पू. |
| द | ङ° उ. | 3° पू. |
| ध | ख° उ. | 4° पू. |
8देशांतर और समय
- समय मापने का सबसे अच्छा साधन पृथ्वी, चंद्रमा और ग्रहों की गति है।
- सूर्योदय और सूर्यास्त रोज़ होते हैं, इसलिए यह पूरे विश्व में समय निर्धारण का सबसे अच्छा साधन है।
- स्थानीय समय का अनुमान सूर्य से बनने वाली परछाईं से लगाया जा सकता है: परछाईं दोपहर में सबसे छोटी और सूर्योदय-सूर्यास्त के समय सबसे लंबी होती है।
ग्रीनिच से तुलना
- ग्रीनिच के प्रमुख याम्योत्तर पर सूर्य जब आकाश के सबसे ऊँचे बिंदु पर होगा, तब उस याम्योत्तर पर स्थित सभी स्थानों पर दोपहर होगी।
- पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है, इसलिए ग्रीनिच के पूर्व के स्थानों का समय ग्रीनिच से आगे, और पश्चिम के स्थानों का समय पीछे होगा।
समय की गणना
- पृथ्वी लगभग 24 घंटे में अपने अक्ष पर 360° घूमती है।
- यानी 1 घंटे में 15° और 4 मिनट में 1°।
- किताब का उदाहरण: जब ग्रीनिच में दोपहर के 12 बजे हों:
- ग्रीनिच से 15° पूर्व: 15 × 4 = 60 मिनट, यानी 1 घंटा आगे: दोपहर का 1 बजा।
- ग्रीनिच से 15° पश्चिम: 1 घंटा पीछे: सुबह के 11 बजे।
- 180° पर: मध्य रात्रि।
- (3D मॉडल का दृश्य 4: घूमती पृथ्वी पर ग्रीनिच, भारत और 180° की घड़ियाँ साथ-साथ चलती हैं।)
स्थानीय समय
किसी स्थान पर जब सूर्य आकाश में सबसे ऊँचे बिंदु पर हो, तब घड़ी में दिन के 12 बजते हैं। घड़ी का यह समय उस स्थान का स्थानीय समय है। एक ही याम्योत्तर पर स्थित सभी स्थानों का स्थानीय समय समान होता है।
अभ्यास के लिए हल किए उदाहरण
| प्रश्न | हल |
|---|---|
| ग्रीनिच में दोपहर 12 बजे; 30° पू. पर कितने बजे? | 30 × 4 = 120 मिनट = 2 घंटे आगे → दोपहर 2 बजे |
| ग्रीनिच में दोपहर 12 बजे; 45° प. पर कितने बजे? | 45 × 4 = 180 मिनट = 3 घंटे पीछे → सुबह 9 बजे |
| ग्रीनिच में दोपहर 12 बजे; 90° पू. पर कितने बजे? | 90 × 4 = 360 मिनट = 6 घंटे आगे → शाम 6 बजे |
9हम मानक समय क्यों मानते हैं?
- अलग-अलग याम्योत्तरों पर स्थित स्थानों के स्थानीय समय में अंतर होता है।
- उदाहरण: कई देशांतरों से गुज़रने वाली रेलगाड़ियों की समय-सारणी बनाना कठिन होगा।
- भारत में गुजरात के द्वारका और असम के डिब्रूगढ़ के स्थानीय समय में लगभग 1 घंटा 45 मिनट का अंतर है।
- इसलिए ज़रूरी है कि देश के मध्य भाग से गुज़रने वाले किसी याम्योत्तर के स्थानीय समय को पूरे देश का मानक समय माना जाए।
- भारत में 82½° पू. (82° 30′ पू.) को मानक याम्योत्तर माना गया है। इसके स्थानीय समय को पूरे देश का मानक समय माना जाता है, जिसे भारतीय मानक समय कहते हैं।
कबीर और आलोक का प्रश्न
- कबीर भोपाल के पास एक छोटे नगर में रहता है। वह अपने मित्र आलोक से कहता है कि आज रात वे सो नहीं पाएँगे, क्योंकि भारत और इंग्लैंड का क्रिकेट मैच लंदन में अपराह्न 2 बजे शुरू होगा, यानी भारत में शाम 7:30 बजे, और देर रात में खत्म होगा।
- क्यों? भारत ग्रीनिच के पूर्व में 82° 30′ पू. पर है, और यहाँ का समय ग्रीनिच से 5 घंटे 30 मिनट आगे है। (82½ × 4 = 330 मिनट = 5 घंटे 30 मिनट)
- इसलिए लंदन में दोपहर 2 बजे = भारत में शाम 7:30।
एक से अधिक मानक समय और समय क्षेत्र
- जिन देशों का देशांतरीय विस्तार अधिक है, वहाँ एक से अधिक मानक समय अपनाए गए हैं। उदाहरण: रूस में 11 मानक समय।
- पृथ्वी को एक-एक घंटे वाले 24 समय क्षेत्रों में बाँटा गया है। हर समय क्षेत्र 15° देशांतर का क्षेत्र घेरता है (किताब का चित्र 2.7: विश्व के समय क्षेत्र)।
10महत्त्वपूर्ण शब्द
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| ग्लोब | पृथ्वी का लघु रूप में वास्तविक प्रतिरूप |
| अक्ष | ग्लोब में झुकी हुई सुई; पृथ्वी पर एक काल्पनिक रेखा जिस पर वह घूमती है |
| उत्तरी / दक्षिणी ध्रुव | अक्ष के दोनों छोर |
| विषुवत् वृत्त | ग्लोब को दो बराबर भागों में बाँटने वाली काल्पनिक रेखा; 0° अक्षांश |
| गोलार्ध | पृथ्वी का आधा भाग (उत्तरी, दक्षिणी, पूर्वी, पश्चिमी) |
| अक्षांश (समानांतर) रेखाएँ | विषुवत् वृत्त से ध्रुवों तक के समानांतर वृत्त |
| कर्क / मकर रेखा | 23½° उ. / 23½° द. |
| उत्तर / अंटार्कटिक वृत्त | 66½° उ. / 66½° द. |
| ताप कटिबंध | उष्ण, शीतोष्ण, शीत |
| देशांतरीय याम्योत्तर | उत्तरी ध्रुव को दक्षिणी ध्रुव से जोड़ने वाली संदर्भ रेखाएँ (अर्धवृत्त) |
| प्रमुख याम्योत्तर | ग्रीनिच से गुज़रने वाला 0° देशांतर |
| ग्रिड | अक्षांश और देशांतर रेखाओं का जाल |
| स्थानीय समय | जब सूर्य सबसे ऊँचा हो तब 12 बजे मानकर उस स्थान का समय |
| मानक समय | देश के मानक याम्योत्तर का स्थानीय समय, पूरे देश के लिए |
| भारतीय मानक समय | 82½° पू. याम्योत्तर का स्थानीय समय; ग्रीनिच से 5 घंटे 30 मिनट आगे |
11पाठ्यपुस्तक के अभ्यास-प्रश्नों के उत्तरपरीक्षा के प्रश्न
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए।
(i) पृथ्वी का सही आकार क्या है? पृथ्वी पूरी गोल नहीं है। यह उत्तर और दक्षिण ध्रुवों पर थोड़ी चपटी और मध्य में थोड़ी उभरी हुई है।
(ii) ग्लोब क्या है? ग्लोब पृथ्वी का लघु रूप में एक वास्तविक प्रतिरूप है। इस पर देश, महाद्वीप और महासागर सही आकार में दिखाए जाते हैं, और इसे अपने अक्ष पर घुमाया जा सकता है।
(iii) कर्क रेखा का अक्षांशीय मान क्या है? 23½° उत्तर (23½° उ.)।
(iv) पृथ्वी के तीन ताप कटिबंध कौन-से हैं? उष्ण कटिबंध, शीतोष्ण कटिबंध और शीत कटिबंध।
(v) अक्षांश एवं देशांतर रेखाएँ क्या हैं? विषुवत् वृत्त से ध्रुवों तक स्थित सभी समानांतर वृत्त अक्षांश (समानांतर) रेखाएँ हैं; इनका मान 0° से 90° उ. या द. तक होता है। उत्तरी ध्रुव को दक्षिणी ध्रुव से जोड़ने वाली संदर्भ रेखाएँ देशांतरीय याम्योत्तर हैं; इनकी गिनती प्रमुख याम्योत्तर (0°) से 180° पू. और 180° प. तक होती है।
(vi) ऊष्मा की सबसे अधिक मात्रा उष्ण कटिबंध क्यों प्राप्त करते हैं? कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच के सभी अक्षांशों पर सूर्य वर्ष में एक बार दोपहर में सिर के ठीक ऊपर होता है। सीधी किरणें कम क्षेत्र में अधिक तेज़ ऊष्मा देती हैं, इसलिए यहाँ सबसे अधिक ऊष्मा मिलती है।
(vii) जब भारत में शाम के 5:30 बजते हैं, तब लंदन में दोपहर के 12 क्यों बजते हैं? भारत ग्रीनिच (लंदन) के पूर्व में 82° 30′ पू. पर है। पृथ्वी पश्चिम से पूर्व घूमती है, इसलिए पूर्व के स्थानों का समय आगे होता है। 82½ × 4 मिनट = 330 मिनट = 5 घंटे 30 मिनट। इसलिए भारत का समय लंदन से 5 घंटे 30 मिनट आगे है: लंदन में दोपहर 12 बजे = भारत में शाम 5:30।
2. सही उत्तर चिह्नित (✓) कीजिए।
- (i) प्रमुख याम्योत्तर का मान: (ख) 0° ✓
- (ii) शीत कटिबंध किसके नज़दीक पाया जाता है: (क) ध्रुवों ✓
- (iii) देशांतरों की कुल संख्या: (क) 360 ✓
- (iv) अंटार्कटिक वृत्त स्थित है: (ख) दक्षिणी गोलार्ध में ✓
- (v) ग्रिड किसका जाल है: (क) अक्षांशों (समानांतर) रेखाओं एवं देशांतरीय याम्योत्तरों का ✓
3. खाली स्थान भरें।
- (i) मकर रेखा 23½° द. अक्षांश पर स्थित है।
- (ii) भारत का मानक याम्योत्तर 82½° पू. है।
- (iii) 0° याम्योत्तर को प्रमुख याम्योत्तर के नाम से जाना जाता है।
- (iv) देशांतरों के बीच की दूरी ध्रुवों की तरफ़ घटती जाती है।
- (v) आर्कटिक वृत्त उत्तरी गोलार्ध में स्थित है।
12आओ कुछ करें और आओ खेलेंपरीक्षा के प्रश्न
आओ कुछ करें
पृथ्वी के अक्ष, विषुवत् वृत्त, कर्क रेखा, मकर रेखा, आर्कटिक वृत्त और अंटार्कटिक वृत्त को दिखाते हुए एक चित्र बनाइए। (ऊपर दिए "महत्त्वपूर्ण अक्षांश और पृथ्वी के ताप कटिबंध" वाले चित्र की तरह; हर रेखा पर उसका अंश लिखिए।)
आओ खेलें: गत्ते का ग्लोब
- कार्ड बोर्ड पर बराबर आकार (लगभग 3 सेमी त्रिज्या) के 6 वृत्त बनाकर काट लें।
- हर वृत्त पर उसके व्यास (उ.-द., पू.-प.) और 23½° के कोण चिह्नित करें।
- उ. और द. रेखा पर वृत्तों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर उ.-द. रेखा को सिल दें। अब 12 अर्धवृत्त बन जाते हैं।
- मान लें एक अर्धवृत्त ग्रीनिच याम्योत्तर (प्रमुख याम्योत्तर, 0°) है। यहाँ से छठा अर्धवृत्त 180° याम्योत्तर होगा। दोनों तरफ़ 0° और 180° के बीच पाँच अर्धवृत्त होंगे, जो 180° की दूरी पर पूर्व और पश्चिम देशांतर हैं।
- ध्रुव दिखाने के लिए उ.-द. रेखा के दोनों छोरों पर पिन लगा दें।
- पूर्व-पश्चिम बिंदुओं को छूता हुआ एक रबरबैंड लगाएँ: यह विषुवत् वृत्त है।
- पू.-प. बिंदुओं के 23½° उत्तर और दक्षिण बिंदुओं पर दो रबरबैंड लगाएँ: ये कटिबंध दिखाएँगे (कर्क और मकर रेखा)।
13अभ्यास: 25 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (उत्तर सहित)परीक्षा के प्रश्न
ग्लोब है: (a) पृथ्वी का सपाट नक्शा (b) पृथ्वी का लघु रूप में वास्तविक प्रतिरूप (c) एक तारा (d) केवल भारत का मॉडल
(b)।
पृथ्वी का आकार: (a) पूरी तरह गोल (b) ध्रुवों पर थोड़ी चपटी, मध्य में थोड़ी उभरी (c) चपटी थाली (d) अंडे जैसी लंबी
(b)।
ग्लोब में झुकी हुई सुई को कहते हैं: (a) ध्रुव (b) अक्ष (c) विषुवत् वृत्त (d) याम्योत्तर
(b) अक्ष; पृथ्वी पर यह काल्पनिक रेखा है।
पृथ्वी किस दिशा में घूमती है? (a) पूर्व से पश्चिम (b) पश्चिम से पूर्व (c) उत्तर से दक्षिण (d) दक्षिण से उत्तर
(b) पश्चिम से पूर्व।
ग्लोब को दो बराबर भागों में बाँटने वाली काल्पनिक रेखा: (a) कर्क रेखा (b) विषुवत् वृत्त (c) मकर रेखा (d) ध्रुव वृत्त
(b) विषुवत् वृत्त।
विषुवत् वृत्त का अक्षांश: (a) 90° (b) 23½° (c) 0° (d) 66½°
(c) 0°।
उत्तरी ध्रुव का अक्षांश: (a) 0° (b) 90° उ. (c) 66½° उ. (d) 180°
(b) 90° उ.; 360° का एक-चौथाई।
अक्षांश मापे जाते हैं: (a) किलोमीटर में (b) अंश में (c) घंटों में (d) मीटर में
(b) अंश में।
चंद्रपुर और बेलो होरिज़ोंटे दोनों किस अक्षांश पर हैं? (a) 20° उ. दोनों (b) 20°; चंद्रपुर 20° उ., बेलो होरिज़ोंटे 20° द. (c) 23½° (d) 0°
(b); इसलिए दिशा लिखना ज़रूरी है।
विषुवत् वृत्त से दूर जाने पर अक्षांश वृत्तों का आकार: (a) बढ़ता है (b) घटता है (c) समान रहता है (d) पहले बढ़ता फिर घटता है
(b) घटता है।
मकर रेखा का अक्षांश: (a) 23½° उ. (b) 23½° द. (c) 66½° द. (d) 0°
(b)।
आर्कटिक वृत्त का अक्षांश: (a) 66½° उ. (b) 23½° उ. (c) 90° उ. (d) 66½° द.
(a)।
सूर्य वर्ष में एक बार दोपहर में सिर के ठीक ऊपर कहाँ होता है? (a) शीत कटिबंध (b) कर्क और मकर रेखा के बीच (c) ध्रुवों पर (d) शीतोष्ण कटिबंध
(b) उष्ण कटिबंध में।
शीत कटिबंध में ठंड अधिक क्यों? (a) समुद्र पास है (b) सूर्य क्षितिज से ज़्यादा ऊपर नहीं आ पाता (c) बादल अधिक (d) पहाड़ अधिक
(b)।
तिरछी सतह पर टॉर्च का प्रकाश: (a) तेज़, कम क्षेत्र (b) कम तेज़, अधिक क्षेत्र (c) बिल्कुल नहीं (d) बराबर
(b)।
टोंगा और मॉरीशस किस अक्षांश पर हैं? (a) 20°00′ द. (b) 20°00′ उ. (c) 0° (d) 23½° द.
(a); इनकी सही स्थिति के लिए देशांतर चाहिए।
उत्तरी ध्रुव को दक्षिणी ध्रुव से जोड़ने वाली संदर्भ रेखाएँ: (a) अक्षांश (b) देशांतरीय याम्योत्तर (c) कटिबंध (d) अक्ष
(b)।
देशांतरीय याम्योत्तरों के बीच की दूरी: (a) ध्रुवों की ओर बढ़ती है (b) ध्रुवों की ओर घटती है और ध्रुवों पर शून्य (c) समान रहती है (d) विषुवत् वृत्त पर शून्य
(b)।
प्रमुख याम्योत्तर किस स्थान से गुज़रता है? (a) दिल्ली (b) ग्रीनिच (c) न्यूयॉर्क (d) टोक्यो
(b) ग्रीनिच, जहाँ ब्रिटिश राजकीय वेधशाला है।
180° पूर्व और 180° पश्चिम याम्योत्तर: (a) अलग-अलग रेखाएँ (b) एक ही रेखा (c) ध्रुवों पर (d) भारत में
(b) एक ही रेखा।
धुबरी (असम) की स्थिति: (a) 26° उ., 90° पू. (b) 26° द., 90° प. (c) 20° उ., 82½° पू. (d) 0°, 0°
(a)।
पृथ्वी 1° घूमने में लगभग कितना समय लेती है? (a) 1 मिनट (b) 4 मिनट (c) 15 मिनट (d) 1 घंटा
(b) 4 मिनट; 1 घंटे में 15°।
ग्रीनिच में दोपहर 12 बजे हों तो 15° पश्चिम पर समय: (a) 1 बजे दोपहर (b) सुबह 11 बजे (c) शाम 6 बजे (d) मध्य रात्रि
(b) सुबह 11 बजे।
भारत का मानक याम्योत्तर: (a) 0° (b) 82½° पू. (c) 90° पू. (d) 68° पू.
(b) 82° 30′ पू.।
लंदन में अपराह्न 2 बजे हों तो भारत में: (a) सुबह 8:30 (b) शाम 7:30 (c) रात 10 बजे (d) दोपहर 2 बजे
(b) शाम 7:30; भारत 5 घंटे 30 मिनट आगे।
14सही/गलत, लघु, दीर्घ और HOTS प्रश्नपरीक्षा के प्रश्न
सही या ग़लत
- पृथ्वी पर अक्ष के रूप में सचमुच एक सुई लगी है। ग़लत (अक्ष काल्पनिक रेखा है)।
- सभी देशांतरीय याम्योत्तरों की लंबाई समान होती है। सही।
- अक्षांश वृत्त ध्रुवों की ओर बड़े होते जाते हैं। ग़लत (छोटे होते जाते हैं)।
- शीतोष्ण कटिबंध में दोपहर का सूर्य कभी सिर के ऊपर नहीं होता। सही।
- ग्रीनिच के पश्चिम के स्थानों का समय ग्रीनिच से आगे होता है। ग़लत (पीछे होता है)।
- रूस में 11 मानक समय अपनाए गए हैं। सही।
लघु उत्तरीय प्रश्न (2-3 अंक)
- विषुवत् वृत्त का क्या महत्त्व है? (ग्लोब को दो बराबर भागों, उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में बाँटता है; 0° अक्षांश; स्थिति बताने का सबसे महत्त्वपूर्ण संदर्भ बिंदु)
- अक्षांश के साथ उ. या द. लिखना क्यों ज़रूरी है? (एक ही मान के दो अक्षांश होते हैं; चंद्रपुर 20° उ. और बेलो होरिज़ोंटे 20° द.)
- शीतोष्ण कटिबंध कहाँ है और वहाँ तापमान मध्यम क्यों रहता है? (कर्क रेखा-आर्कटिक वृत्त और मकर रेखा-अंटार्कटिक वृत्त के बीच; दोपहर का सूर्य कभी सिर के ऊपर नहीं, किरणें तिरछी)
- ग्रिड क्या है? इसका क्या उपयोग है? (अक्षांश और देशांतर रेखाओं का जाल; दोनों मान पता हों तो स्थान ठीक-ठीक मिलता है, जैसे धुबरी)
- स्थानीय समय और मानक समय में अंतर लिखिए। (सूर्य सबसे ऊँचा हो तब 12 बजे; एक याम्योत्तर पर समान / देश के मानक याम्योत्तर का समय पूरे देश के लिए)
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)
- पृथ्वी के ताप कटिबंधों का वर्णन कीजिए। (चार महत्त्वपूर्ण अक्षांश; उष्ण: कर्क-मकर, सूर्य सिर के ऊपर, सबसे अधिक ऊष्मा; शीतोष्ण: तिरछी किरणें, मध्यम; शीत: सूर्य क्षितिज से ऊपर नहीं, बहुत ठंड; टॉर्च का उदाहरण; चित्र)
- देशांतर और समय का संबंध समझाइए। (24 घंटे में 360°; 15° = 1 घंटा, 1° = 4 मिनट; पश्चिम से पूर्व घूमना, पूर्व में समय आगे; ग्रीनिच 12 बजे → 15° पू. 1 बजे, 15° प. 11 बजे, 180° मध्य रात्रि)
- भारत को मानक समय की आवश्यकता क्यों है? भारतीय मानक समय कैसे तय हुआ? (स्थानीय समय में अंतर; द्वारका-डिब्रूगढ़ 1 घंटा 45 मिनट; रेलगाड़ियों की समय-सारणी; 82½° पू.; ग्रीनिच से 5 घंटे 30 मिनट आगे; 24 समय क्षेत्र, रूस 11)
HOTS (सोचकर उत्तर दीजिए)
- ध्रुवों पर सभी देशांतर मिल जाते हैं। तो उत्तरी ध्रुव पर खड़े व्यक्ति का देशांतर क्या होगा? (संकेत: सभी याम्योत्तर वहीं मिलते हैं, इसलिए ध्रुव पर देशांतर का कोई एक मान नहीं होता; केवल अक्षांश 90° उ.)
- अगर पृथ्वी पूर्व से पश्चिम घूमती, तो भारत का समय ग्रीनिच से आगे होता या पीछे? (संकेत: तब पूर्व के स्थानों का समय पीछे होता)
- ग्रीनिच में सुबह 6 बजे हैं। भारत में क्या समय होगा? (संकेत: 5 घंटे 30 मिनट आगे → सुबह 11:30)
- अक्षांश रेखाओं को "समानांतर" क्यों कहते हैं, जबकि देशांतर रेखाएँ समानांतर नहीं हैं? (संकेत: अक्षांश वृत्त कभी नहीं मिलते; देशांतर ध्रुवों पर मिल जाते हैं)
15याद रखेंयाद रखें
- ग्लोब: पृथ्वी का लघु रूप में वास्तविक प्रतिरूप; पृथ्वी ध्रुवों पर थोड़ी चपटी, मध्य में उभरी।
- अक्ष: काल्पनिक रेखा; पृथ्वी पश्चिम से पूर्व घूमती है।
- विषुवत् वृत्त (0°): दो बराबर भाग, उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध।
- अक्षांश: 0° से 90° उ./द.; ध्रुवों की ओर वृत्त छोटे; दिशा लिखना ज़रूरी (चंद्रपुर 20° उ., बेलो होरिज़ोंटे 20° द.)।
- कर्क रेखा 23½° उ., मकर रेखा 23½° द., आर्कटिक वृत्त 66½° उ., अंटार्कटिक वृत्त 66½° द.
- ताप कटिबंध: उष्ण (कर्क-मकर), शीतोष्ण, शीत।
- देशांतरीय याम्योत्तर: ध्रुव से ध्रुव तक अर्धवृत्त, लंबाई समान, ध्रुवों पर दूरी शून्य; प्रमुख याम्योत्तर 0° ग्रीनिच; 180° पू. = 180° प.।
- ग्रिड: धुबरी 26° उ., 90° पू.।
- समय: 15° = 1 घंटा, 1° = 4 मिनट; पूर्व में समय आगे, पश्चिम में पीछे।
- भारतीय मानक समय: 82½° पू.; ग्रीनिच से 5 घंटे 30 मिनट आगे; द्वारका-डिब्रूगढ़ अंतर लगभग 1 घंटा 45 मिनट; 24 समय क्षेत्र, रूस में 11।
© Pankaj Bediya · TGT Geography · Geoland.in
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