बिग बैंग धमाका नहीं, फैलाव था
बिग बैंग अंतरिक्ष में किसी एक जगह हुआ विस्फोट नहीं था। उस समय पूरा अंतरिक्ष ही उस छोटे बिंदु में था, और अंतरिक्ष खुद फैलने लगा। इसलिए ब्रह्मांड का कोई केंद्र नहीं है: किसी भी आकाशगंगा से देखें, बाकी सब दूर जाती दिखती हैं।
NCERT इसे फूलते गुब्बारे से समझाती है। गुब्बारे पर बने बिंदु आकाशगंगाएँ हैं। गुब्बारा फूलता है तो बिंदु एक-दूसरे से दूर होते जाते हैं, पर बिंदु खुद बड़े नहीं होते। चित्र में "दो आकाशगंगाओं की दूरी" चालू करके यही देखिए।
याद रखें
- बिग बैंग सिद्धांत को विस्तरित ब्रह्मांड परिकल्पना भी कहते हैं।
- बिग बैंग लगभग 1370 करोड़ वर्ष पहले हुआ (NCERT); नए माप लगभग 1380 करोड़ वर्ष बताते हैं।
- 3 मिनट में पहले नाभिक, 3 लाख वर्ष में पहले परमाणु बने (तापमान 4500 K)।
- एडविन हबल ने बताया कि ब्रह्मांड फैल रहा है; दूर की आकाशगंगा ज़्यादा तेज़ दूर जाती है।
- सौरमंडल लगभग 460 करोड़ वर्ष पहले बना।
नोट्सपढ़ने और पढ़ाने के लिए पूरी जानकारी
UPSC प्रीलिम्स और मेन्स (सामान्य अध्ययन-1, भौतिक भूगोल) के स्तर पर · NCERT कक्षा 11 अध्याय 2 से आगे
1ब्रह्मांड: परिचय और मूल शब्द
ब्रह्मांड (Universe / Cosmos) यानी वह सब कुछ जो मौजूद है: सारा अंतरिक्ष, समय, पदार्थ, ऊर्जा और उन्हें चलाने वाले नियम। ग्रह, तारे, आकाशगंगाएँ, गैस, धूल, प्रकाश, सब ब्रह्मांड के भाग हैं।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| खगोल विज्ञान (Astronomy) | आकाशीय पिंडों (तारे, ग्रह, आकाशगंगा) का वैज्ञानिक अध्ययन |
| ब्रह्मांड विज्ञान (Cosmology) | पूरे ब्रह्मांड की उत्पत्ति, बनावट, विकास और भविष्य का अध्ययन |
| ब्रह्मांड उत्पत्ति शास्त्र (Cosmogony) | ब्रह्मांड या सौरमंडल के बनने की कहानी/सिद्धांत |
| ज्योतिष (Astrology) | ग्रहों से भविष्य बताने की मान्यता; यह विज्ञान नहीं है |
| खगोलीय पिंड (Celestial Body) | अंतरिक्ष में मौजूद प्राकृतिक पिंड: तारा, ग्रह, उपग्रह, क्षुद्रग्रह, धूमकेतु |
| तारा (Star) | गर्म गैस का विशाल गोला, जो अपने भीतर नाभिकीय संलयन से प्रकाश और ऊष्मा बनाता है; जैसे सूर्य |
| नीहारिका (Nebula) | अंतरिक्ष में गैस (मुख्यतः हाइड्रोजन) और धूल का विशाल बादल; तारों का जन्मस्थान |
| आकाशगंगा (Galaxy) | अरबों तारों, गैस, धूल और अदृश्य पदार्थ का गुरुत्व से बँधा विशाल समूह |
| दृश्य ब्रह्मांड (Observable Universe) | ब्रह्मांड का वह भाग, जहाँ से प्रकाश अब तक हम तक पहुँच सका है |
ब्रह्मांड की बनावट: छोटे से बड़े की ओर
- ग्रह और उपग्रह (जैसे पृथ्वी और चंद्रमा)
- तारा और उसका परिवार (सौरमंडल)
- आकाशगंगा (हमारी: मंदाकिनी, Milky Way)
- आकाशगंगाओं का स्थानीय समूह (Local Group, लगभग 50 से अधिक आकाशगंगाएँ)
- आकाशगंगा-गुच्छ (Cluster) और महागुच्छ (Supercluster; हमारा: लानियाकिया)
- पूरा दृश्य ब्रह्मांड, जिसमें अरबों से लेकर लगभग 2 लाख करोड़ तक आकाशगंगाएँ होने के अनुमान हैं
दृश्य ब्रह्मांड में लगभग 68% डार्क एनर्जी, 27% डार्क मैटर और केवल लगभग 5% सामान्य पदार्थ है। जो कुछ हम देख पाते हैं, वह ब्रह्मांड का बहुत छोटा हिस्सा है।
2खगोलीय दूरियाँ और उनकी इकाइयाँ
ब्रह्मांड की दूरियाँ इतनी बड़ी हैं कि किलोमीटर में लिखना कठिन है। इसलिए विशेष इकाइयाँ बनाई गईं:
| इकाई | परिभाषा | मान |
|---|---|---|
| खगोलीय इकाई (AU) | पृथ्वी से सूर्य की औसत दूरी | 14.96 करोड़ किमी (लगभग 15 करोड़ किमी) |
| प्रकाश वर्ष (Light Year) | प्रकाश द्वारा निर्वात में एक वर्ष में तय की गई दूरी | 9.461 × 10¹² किमी (लगभग 9.46 लाख करोड़ किमी) |
| पारसेक (Parsec) | वह दूरी, जहाँ से 1 AU, 1 आर्क-सेकंड का कोण बनाता है | 3.26 प्रकाश वर्ष (लगभग 3.09 × 10¹³ किमी) |
| किलोपारसेक, मेगापारसेक | 1,000 पारसेक, 10 लाख पारसेक | आकाशगंगाओं की दूरी के लिए |
प्रकाश वर्ष कैसे निकलता है (हल करके)
प्रकाश की गति = लगभग 3,00,000 किमी प्रति सेकंड एक वर्ष = 365.25 × 24 × 60 × 60 = 3,15,57,600 सेकंड प्रकाश वर्ष = 3,00,000 × 3,15,57,600 ≈ 9.46 × 10¹² किमी
कुछ दूरियाँ प्रकाश के हिसाब से
| कहाँ से कहाँ | प्रकाश को लगने वाला समय / दूरी |
|---|---|
| पृथ्वी से चंद्रमा | लगभग 1.3 सेकंड (3.84 लाख किमी) |
| सूर्य से पृथ्वी | लगभग 8 मिनट 20 सेकंड (NCERT: 8.311 मिनट) |
| सूर्य से नेपच्यून | लगभग 4 घंटे |
| सबसे पास का तारा (प्रॉक्सिमा सेंटॉरी) | लगभग 4.24 प्रकाश वर्ष |
| मंदाकिनी का व्यास | लगभग 1 लाख प्रकाश वर्ष |
| एंड्रोमेडा आकाशगंगा | लगभग 25 लाख प्रकाश वर्ष |
| दृश्य ब्रह्मांड का व्यास | लगभग 9,300 करोड़ प्रकाश वर्ष |
प्रकाश वर्ष समय नहीं, दूरी की इकाई है। यह परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है। और जब हम कोई दूर की आकाशगंगा देखते हैं, तो उसका आज का नहीं, बल्कि वर्षों पुराना रूप देखते हैं, क्योंकि उसका प्रकाश इतने समय से चलकर आ रहा है। इसलिए दूरबीन एक तरह की टाइम मशीन है।
पारसेक कैसे बना: लंबन (Parallax)
एक उँगली आँख के सामने रखकर बारी-बारी एक-एक आँख बंद कीजिए: उँगली पीछे की चीज़ों के सापेक्ष खिसकती दिखती है। इसे लंबन कहते हैं। पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा में छह महीने में अपनी कक्षा के दूसरी ओर पहुँच जाती है; इन दो स्थितियों से पास का तारा दूर के तारों के सापेक्ष थोड़ा खिसका दिखता है। जिस दूरी पर यह खिसकाव (लंबन कोण) 1 आर्क-सेकंड (1° का 3600वाँ भाग) हो, वह 1 पारसेक (Parallax + Second) है।
- दूरी (पारसेक) = 1 ÷ लंबन (आर्क-सेकंड)। जैसे प्रॉक्सिमा सेंटॉरी का लंबन लगभग 0.768'' है, तो दूरी ≈ 1.3 पारसेक ≈ 4.24 प्रकाश वर्ष।
- बहुत दूर की आकाशगंगाओं के लिए लंबन काम नहीं करता; वहाँ मानक मोमबत्तियाँ (सेफ़िड परिवर्ती तारे, Ia प्रकार के सुपरनोवा) और लाल विचलन से दूरी निकाली जाती है। इसे "ब्रह्मांडीय दूरी की सीढ़ी" कहते हैं।
3ब्रह्मांड के बारे में विचारों का इतिहास
| समय | कौन | विचार / खोज |
|---|---|---|
| प्राचीन काल | अनेक सभ्यताएँ | पृथ्वी चपटी है या ब्रह्मांड का केंद्र है जैसी मान्यताएँ |
| लगभग 150 ई. | टॉलेमी (यूनान-मिस्र) | भूकेंद्रीय मत (Geocentric): पृथ्वी केंद्र में, सूर्य-ग्रह उसके चारों ओर |
| 5वीं सदी | आर्यभट (भारत) | पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है; ग्रहण का वैज्ञानिक कारण |
| 1543 | कोपरनिकस (पोलैंड) | सूर्यकेंद्रीय मत (Heliocentric): सूर्य केंद्र में, पृथ्वी उसकी परिक्रमा करती है |
| 1609-1619 | केप्लर (जर्मनी) | ग्रहों की कक्षाएँ दीर्घवृत्ताकार हैं; ग्रह-गति के तीन नियम |
| 1610 | गैलीलियो (इटली) | दूरबीन से बृहस्पति के चार चंद्रमा, शुक्र की कलाएँ; आकाशगंगा तारों से बनी है |
| 1687 | न्यूटन (इंग्लैंड) | सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण का नियम |
| 1755 | कांट (जर्मनी) | नीहारिका से सौरमंडल बनने का विचार; दूर के धुंधले धब्बे अलग "द्वीप-ब्रह्मांड" हो सकते हैं |
| 1915 | आइंस्टीन | सामान्य सापेक्षता: गुरुत्व = अंतरिक्ष-समय का मुड़ना |
| 1920 | शेपली और कर्टिस | "महान बहस": क्या मंदाकिनी ही पूरा ब्रह्मांड है? |
| 1924-1925 | एडविन हबल (अमेरिका) | एंड्रोमेडा मंदाकिनी से बहुत दूर, अलग आकाशगंगा है; ब्रह्मांड में अनेक आकाशगंगाएँ हैं |
| 1927 | जॉर्ज लेमेत्र (बेल्जियम) | फैलते ब्रह्मांड और "आदिम परमाणु" का विचार (बिग बैंग की नींव) |
| 1929 | एडविन हबल | आकाशगंगाएँ दूर जा रही हैं; दूरी जितनी अधिक, चाल उतनी अधिक (हबल का नियम) |
| 1948 | गैमो, एल्फ़र, हरमन | बिग बैंग में हल्के तत्वों का बनना; बची गर्मी (विकिरण) की भविष्यवाणी |
| 1948 | हॉयल, बॉन्डी, गोल्ड | स्थिर अवस्था सिद्धांत |
| 1965 | पेंज़ियास और विल्सन | ब्रह्मांडीय सूक्ष्मतरंग पृष्ठभूमि विकिरण (CMB) की खोज |
| 1998 | दो वैज्ञानिक दल | ब्रह्मांड का फैलाव तेज़ हो रहा है (डार्क एनर्जी) |
| 2012 | CERN | हिग्स बोसॉन की खोज |
NCERT में लिखा है कि एडविन हबल ने 1920 में प्रमाण दिया कि ब्रह्मांड फैल रहा है। विद्यालय की परीक्षा में यही लिखें। प्रतियोगी परीक्षा के लिए याद रखें: एंड्रोमेडा के अलग आकाशगंगा होने का प्रमाण 1924-25 में और हबल का नियम 1929 में आया।
4ब्रह्मांड की उत्पत्ति के सिद्धांत (विस्तार से)
1. बिग बैंग सिद्धांत (विस्तरित ब्रह्मांड परिकल्पना)
- ब्रह्मांड लगभग 1370-1380 करोड़ वर्ष पहले एक अत्यंत गर्म, घने बिंदु से फैलना शुरू हुआ और आज भी फैल रहा है।
- ब्रह्मांड का एक आरंभ है; समय और अंतरिक्ष भी उसी के साथ शुरू हुए।
- आज का सबसे मान्य सिद्धांत, क्योंकि इसके पक्ष में अनेक प्रमाण हैं।
2. स्थिर अवस्था सिद्धांत (Steady State Theory)
- फ्रेड हॉयल, हरमन बॉन्डी और थॉमस गोल्ड ने 1948 में दिया।
- ब्रह्मांड का न कोई आरंभ है, न अंत; यह हमेशा से ऐसा ही है और ऐसा ही रहेगा।
- ब्रह्मांड फैलता है, पर फैलाव से बनी खाली जगह में लगातार नया पदार्थ (हाइड्रोजन) बनता रहता है, इसलिए उसका घनत्व और रूप हर समय एक-सा रहता है।
- कमज़ोरी: यह CMB विकिरण, पुरानी (दूर की) आकाशगंगाओं के अलग रूप और हल्के तत्वों के अनुपात को नहीं समझा पाया। इसलिए 1965 के बाद यह लगभग छोड़ दिया गया।
3. दोलायमान ब्रह्मांड सिद्धांत (Oscillating / Pulsating Universe)
- ब्रह्मांड फैलता है, फिर गुरुत्व के कारण सिकुड़ता है (महा-संकुचन, Big Crunch), और फिर एक नया बिग बैंग होता है। यह चक्र चलता रहता है।
- आज के माप बताते हैं कि फैलाव तेज़ हो रहा है, इसलिए यह सिद्धांत मान्य नहीं माना जाता।
4. स्फीति सिद्धांत (Inflationary Theory)
- एलन गुथ (1980 के आसपास) ने दिया; यह बिग बैंग का सुधार है, उसका विरोधी नहीं।
- बिग बैंग के बाद सेकंड के अत्यंत छोटे अंश (लगभग 10⁻³⁶ से 10⁻³² सेकंड) में ब्रह्मांड बहुत तेज़ी से (कम-से-कम 10²⁶ गुना) फूला।
- इससे समझ आता है कि ब्रह्मांड हर दिशा में लगभग एक-सा क्यों है और सपाट (flat) क्यों दिखता है।
| आधार | बिग बैंग | स्थिर अवस्था |
|---|---|---|
| आरंभ | है (लगभग 1380 करोड़ वर्ष पहले) | कोई आरंभ नहीं |
| घनत्व | समय के साथ घटता है | हमेशा एक-सा |
| नया पदार्थ | शुरुआत में ही बना | लगातार बनता रहता है |
| CMB | समझाता है (बची गर्मी) | नहीं समझा पाता |
| आज की मान्यता | सर्वमान्य | अस्वीकृत |
5बिग बैंग की मूल बातें और चार मूल बल
बिग बैंग की मूल मान्यताएँ
- ब्रह्मांडीय सिद्धांत (Cosmological Principle): बड़े पैमाने पर ब्रह्मांड हर जगह एक-सा (समांगी) और हर दिशा में एक-सा (समदैशिक) है।
- एकाकी परमाणु / विलक्षणता (Singularity): शुरुआत में सारा पदार्थ और ऊर्जा एक बिंदु में था; आयतन लगभग शून्य, तापमान और घनत्व अनंत।
- अंतरिक्ष का फैलाव: विस्फोट किसी जगह पर नहीं हुआ; अंतरिक्ष खुद फैला। इसलिए ब्रह्मांड का कोई केंद्र नहीं।
- फैलते हुए ठंडा होना: जैसे-जैसे ब्रह्मांड फैला, वह ठंडा हुआ और ऊर्जा से कण, कणों से नाभिक, नाभिक से परमाणु बने।
- ऊर्जा का पदार्थ में बदलना: आइंस्टीन का सूत्र E = mc² (E = ऊर्जा, m = द्रव्यमान, c = प्रकाश की गति) बताता है कि ऊर्जा और द्रव्यमान एक-दूसरे में बदल सकते हैं।
प्रकृति के चार मूल बल
| बल | काम | सापेक्ष शक्ति |
|---|---|---|
| प्रबल नाभिकीय बल (Strong) | नाभिक में प्रोटॉन-न्यूट्रॉन को बाँधता है | सबसे शक्तिशाली |
| विद्युत-चुंबकीय बल (Electromagnetic) | आवेशित कणों के बीच; प्रकाश, बिजली, रसायन | प्रबल से लगभग 100 गुना कमज़ोर |
| दुर्बल नाभिकीय बल (Weak) | रेडियोधर्मी क्षय; तारों में संलयन की शुरुआत | बहुत कमज़ोर |
| गुरुत्वाकर्षण (Gravity) | द्रव्यमान वाली हर चीज़ के बीच; ग्रह, तारे, आकाशगंगाएँ | सबसे कमज़ोर, पर सबसे दूर तक असर |
बिग बैंग के तुरंत बाद ये चारों बल एक ही थे। ब्रह्मांड ठंडा होने पर सबसे पहले गुरुत्व अलग हुआ (लगभग 10⁻⁴³ सेकंड), फिर प्रबल बल (लगभग 10⁻³⁶ सेकंड), और लगभग 10⁻¹² सेकंड पर विद्युत-चुंबकीय और दुर्बल बल अलग हुए। इसी समय हिग्स क्षेत्र से कणों को द्रव्यमान मिला।
6स्फीति (Inflation): बिग बैंग की तीन पहेलियों का हल
1980 के आसपास वैज्ञानिकों ने देखा कि सीधा-सादा बिग बैंग सिद्धांत तीन बातों का उत्तर नहीं दे पाता। एलन गुथ (और बाद में आंद्रेई लिंडे आदि) के स्फीति सिद्धांत ने इन्हें हल किया: बिग बैंग के लगभग 10⁻³⁶ से 10⁻³² सेकंड के बीच ब्रह्मांड कम-से-कम 10²⁶ गुना फूल गया।
| पहेली | प्रश्न | स्फीति का उत्तर |
|---|---|---|
| क्षितिज समस्या (Horizon Problem) | आकाश के दो बिल्कुल उलटे छोर कभी आपस में संपर्क में नहीं आ सकते थे, फिर उनका CMB तापमान लगभग बिल्कुल बराबर (2.725 K) क्यों है? | स्फीति से पहले ये सब भाग एक छोटे, आपस में जुड़े क्षेत्र में थे और एक-से तापमान पर आ चुके थे; फिर अचानक दूर-दूर फैल गए |
| सपाटपन समस्या (Flatness Problem) | ब्रह्मांड का आकार (ज्यामिति) लगभग बिल्कुल "सपाट" क्यों है, जबकि थोड़ा-सा भी अंतर समय के साथ बहुत बढ़ जाता? | जैसे बहुत बड़े गुब्बारे की सतह का छोटा हिस्सा सपाट दिखता है, वैसे ही स्फीति ने हर वक्रता को लगभग मिटा दिया |
| एकध्रुव समस्या (Monopole Problem) | सिद्धांत के अनुसार भारी "चुंबकीय एकध्रुव" कण बहुत बनने चाहिए थे, पर एक भी नहीं मिला | स्फीति ने उन्हें इतना पतला फैला दिया कि अब मिलना लगभग असंभव |
ब्रह्मांड के छोटे उतार-चढ़ाव: स्फीति के दौरान क्वांटम स्तर के बहुत छोटे उतार-चढ़ाव विशाल आकार तक खिंच गए। यही CMB में दिखने वाले "एक लाख में एक भाग" के अंतर और आगे चलकर आकाशगंगाओं के बीज बने।
खुले प्रश्न: स्फीति किस क्षेत्र ("इन्फ्लैटॉन") से चली, इसके सीधे प्रमाण (जैसे CMB में आदिम गुरुत्वीय तरंगों के निशान) अभी खोजे जा रहे हैं। कुछ स्फीति मॉडल "बहु-ब्रह्मांड" (Multiverse) की कल्पना तक जाते हैं, जो अभी केवल सिद्धांत है।
7बिग बैंग से आज तक: पूरी समय-रेखा
ऊपर के 3D मॉडल के नौ चरण इसी समय-रेखा पर बने हैं।
| काल का नाम | समय (बिग बैंग के बाद) | तापमान | क्या हुआ |
|---|---|---|---|
| आरंभ (विलक्षणता) | 0 | अनंत | सब कुछ एक बिंदु में |
| प्लांक काल | 10⁻⁴³ सेकंड तक | लगभग 10³² K | चारों बल एक; भौतिकी के आज के नियम लागू नहीं |
| महा-एकीकरण काल (GUT) | 10⁻⁴³ से 10⁻³⁶ सेकंड | लगभग 10²⁸ K | गुरुत्व अलग हुआ |
| स्फीति काल | 10⁻³⁶ से 10⁻³² सेकंड | — | अत्यंत तेज़ फैलाव |
| विद्युत-दुर्बल काल | 10⁻¹² सेकंड तक | लगभग 10¹⁵ K | हिग्स क्षेत्र से कणों को द्रव्यमान |
| क्वार्क काल | 10⁻¹² से 10⁻⁶ सेकंड | 10¹⁵ से 10¹² K | क्वार्क, इलेक्ट्रॉन, न्यूट्रिनो मुक्त घूमते |
| हैड्रॉन काल | 10⁻⁶ सेकंड से 1 सेकंड | लगभग 10¹² K | क्वार्क जुड़कर प्रोटॉन-न्यूट्रॉन बने |
| लेप्टॉन काल | 1 सेकंड से 10 सेकंड | लगभग 10¹⁰ K | इलेक्ट्रॉन-पॉज़िट्रॉन प्रमुख |
| नाभिकीय संश्लेषण | 10 सेकंड से 20 मिनट (मुख्यतः पहले 3 मिनट) | लगभग 10⁹ K (100 करोड़) | हाइड्रोजन, हीलियम, थोड़ी लिथियम के नाभिक |
| फ़ोटॉन काल | 20 मिनट से 3.8 लाख वर्ष | ठंडा होता गया | प्रकाश, नाभिक और इलेक्ट्रॉन की गर्म धुंध (प्लाज़्मा) |
| पुनर्संयोजन | लगभग 3.8 लाख वर्ष (NCERT: 3 लाख) | लगभग 3000 K (NCERT: 4500 K) | पूरे परमाणु बने; ब्रह्मांड पारदर्शी; CMB मुक्त हुआ |
| अंधकार युग | 3.8 लाख से लगभग 10 करोड़ वर्ष | ठंडा | कोई तारा नहीं |
| ब्रह्मांडीय सवेरा | लगभग 10 से 20 करोड़ वर्ष | — | पहले तारे जले |
| पुनः आयनीकरण | लगभग 15 करोड़ से 100 करोड़ वर्ष | — | पहले तारों और आकाशगंगाओं के प्रकाश से गैस फिर आयनित |
| आकाशगंगाओं का बनना | लगभग 100 करोड़ वर्ष से | — | आकाशगंगाएँ और उनके समूह |
| सौरमंडल | लगभग 920 करोड़ वर्ष (आज से 460 करोड़ वर्ष पहले) | — | सूर्य, पृथ्वी और ग्रह |
| पृथ्वी पर जीवन | आज से लगभग 380 करोड़ वर्ष पहले | — | सबसे पुराने जीवन के प्रमाण |
| आज | लगभग 1370-1380 करोड़ वर्ष | 2.7 K (−270 °C) | फैलाव जारी, और तेज़ होता हुआ |
याद रखने का तरीका: "बल अलग → कण बने → नाभिक बने (3 मिनट) → परमाणु बने (3 लाख वर्ष) → तारे → आकाशगंगाएँ → सौरमंडल → जीवन"।
8मूल कण: ब्रह्मांड की ईंटें
| कण | पहचान | उदाहरण / कहाँ |
|---|---|---|
| क्वार्क (Quark) | सबसे मूल कण; छह प्रकार (अप, डाउन, चार्म, स्ट्रेंज, टॉप, बॉटम) | प्रोटॉन = 2 अप + 1 डाउन; न्यूट्रॉन = 1 अप + 2 डाउन |
| लेप्टॉन (Lepton) | छह प्रकार; इनमें इलेक्ट्रॉन और न्यूट्रिनो | इलेक्ट्रॉन परमाणु के बाहर घूमता है |
| प्रोटॉन | धनावेशित, नाभिक में | हाइड्रोजन का नाभिक = 1 प्रोटॉन |
| न्यूट्रॉन | आवेश-रहित, नाभिक में | हीलियम नाभिक = 2 प्रोटॉन + 2 न्यूट्रॉन |
| फ़ोटॉन | प्रकाश का कण; द्रव्यमान नहीं | CMB के फ़ोटॉन |
| बोसॉन | बल ढोने वाले कण | फ़ोटॉन, ग्लूऑन, W-Z बोसॉन, हिग्स बोसॉन |
| न्यूट्रिनो | लगभग द्रव्यमान-रहित, बहुत कम क्रिया करता है | हर सेकंड अरबों हमारे शरीर से गुज़रते हैं |
पदार्थ और प्रति-पदार्थ (Matter–Antimatter)
हर कण का एक "उल्टा जुड़वाँ" होता है, जैसे इलेक्ट्रॉन का पॉज़िट्रॉन। कण और प्रति-कण मिलते हैं तो दोनों नष्ट होकर ऊर्जा बन जाते हैं। बिग बैंग में दोनों लगभग बराबर बने, पर पदार्थ थोड़ा-सा (लगभग एक अरब में एक) अधिक था। वही बचा हुआ पदार्थ आज का पूरा ब्रह्मांड है। यह अधिकता क्यों थी, यह आज भी विज्ञान का बड़ा अनसुलझा प्रश्न है।
9तत्व कैसे बने: नाभिकीय संश्लेषण
बिग बैंग नाभिकीय संश्लेषण (पहले कुछ मिनट)
- तापमान लगभग 100 करोड़ K था। प्रोटॉन और न्यूट्रॉन जुड़कर हल्के नाभिक बने: ड्यूटेरियम, हीलियम-3, हीलियम-4 और थोड़ी लिथियम-7।
- भार के हिसाब से लगभग 75% हाइड्रोजन और 25% हीलियम।
- ब्रह्मांड बहुत तेज़ी से ठंडा हुआ, इसलिए भारी तत्व नहीं बन पाए।
तारकीय नाभिकीय संश्लेषण (तारों के भीतर)
- तारों के केंद्र में हाइड्रोजन से हीलियम, फिर कार्बन, ऑक्सीजन, नियॉन, सिलिकॉन... और बड़े तारों में लोहे तक के तत्व बनते हैं।
- लोहे से भारी तत्व (जैसे सोना, यूरेनियम) बड़े तारों के सुपरनोवा विस्फोट और न्यूट्रॉन तारों की टक्कर में बनते हैं।
- ये तत्व विस्फोटों से अंतरिक्ष में फैलते हैं और नई नीहारिकाओं, नए तारों, ग्रहों और जीवों का हिस्सा बनते हैं।
इसलिए कहते हैं कि हम तारों की धूल से बने हैं: हमारी हड्डियों का कैल्शियम, खून का लोहा और साँस की ऑक्सीजन किसी पुराने तारे के भीतर बनी थी।
ड्यूटेरियम की "अड़चन" (Deuterium Bottleneck)
हीलियम बनने के लिए पहले एक प्रोटॉन और एक न्यूट्रॉन जुड़कर ड्यूटेरियम बनाते हैं। बहुत ऊँचे तापमान पर ऊर्जावान फ़ोटॉन ड्यूटेरियम को तुरंत तोड़ देते थे। ब्रह्मांड लगभग 100 करोड़ K तक ठंडा हुआ, तब जाकर ड्यूटेरियम टिक सका और फिर तेज़ी से हीलियम बना। तब तक कई मुक्त न्यूट्रॉन क्षय हो चुके थे; इसीलिए हीलियम केवल लगभग 25% बनी, ज़्यादा नहीं।
मुक्त न्यूट्रॉन और 25% का हिसाब
न्यूट्रॉन अकेले में लगभग 15 मिनट (आधा-जीवन लगभग 10 मिनट) में टूट जाते हैं। नाभिक बनने के समय लगभग हर 7 प्रोटॉन पर 1 न्यूट्रॉन बचा था। 2 न्यूट्रॉन 2 प्रोटॉन के साथ एक हीलियम-4 बनाते हैं; इस हिसाब से भार का लगभग 25% हीलियम बनता है, जो ब्रह्मांड में मापे गए अनुपात से मेल खाता है। यह बिग बैंग का बहुत मज़बूत प्रमाण है।
10ब्रह्मांडीय सूक्ष्मतरंग पृष्ठभूमि विकिरण (CMB)
- क्या है: बिग बैंग की "बची हुई गर्मी"। लगभग 3.8 लाख वर्ष पर ब्रह्मांड पारदर्शी हुआ, तब जो प्रकाश स्वतंत्र हुआ, वह फैलते ब्रह्मांड में खिंचते-खिंचते आज सूक्ष्मतरंगों (माइक्रोवेव) में बदल गया है।
- तापमान: लगभग 2.725 K (−270.4 °C); आकाश की हर दिशा से लगभग बराबर।
- भविष्यवाणी: 1948 में राल्फ़ एल्फ़र और रॉबर्ट हरमन ने ऐसे विकिरण की भविष्यवाणी की थी।
- खोज: 1965 में अमेरिका की बेल लैब्स के आर्नो पेंज़ियास और रॉबर्ट विल्सन ने एक बड़े एंटीना में लगातार आती "सनसनाहट" के रूप में इसे संयोग से पाया। 1978 का भौतिकी नोबेल।
- उपग्रह: COBE (1989, नासा; इसके वैज्ञानिक जॉन मेदर और जॉर्ज स्मूट को 2006 का नोबेल), WMAP (2001, नासा), प्लैंक (2009, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी)।
- छोटे अंतर: CMB के तापमान में लगभग एक लाख में एक भाग का अंतर है। यही छोटे-छोटे घने भाग आगे चलकर आकाशगंगाओं के बीज बने।
पुराने टेलीविज़न पर चैनल न होने पर जो "झिलमिल" दिखती थी, उसका एक छोटा भाग भी CMB से आता था।
CMB की बारीकियाँ (UPSC स्तर)
- समदैशिकता (Isotropy): हर दिशा में तापमान लगभग बराबर; यह ब्रह्मांडीय सिद्धांत का सबसे मज़बूत प्रमाण है।
- द्विध्रुव (Dipole): एक दिशा में CMB थोड़ा गर्म और उलटी दिशा में थोड़ा ठंडा दिखता है। यह इसलिए कि हमारी आकाशगंगा (और स्थानीय समूह) CMB के सापेक्ष लगभग 370 किमी/सेकंड की चाल से चल रही है (डॉप्लर प्रभाव)।
- विषमदैशिकता (Anisotropy): लगभग 10⁻⁵ (एक लाख में एक भाग) के छोटे अंतर; इनके आकार और फैलाव ("ध्वनिक शिखर") से ब्रह्मांड की आयु, डार्क मैटर, डार्क एनर्जी और सामान्य पदार्थ की मात्रा नापी गई।
- ध्रुवण (Polarization): CMB के प्रकाश का हल्का ध्रुवण भी नापा गया है; इसमें स्फीति के समय की गुरुत्वीय तरंगों के निशान ("B-मोड") खोजे जा रहे हैं।
- प्लैंक उपग्रह के मुख्य नतीजे (2018): ब्रह्मांड की आयु लगभग 1378-1380 करोड़ वर्ष; H₀ लगभग 67.4 किमी/से./Mpc; सामान्य पदार्थ लगभग 4.9%, डार्क मैटर लगभग 26.8%, डार्क एनर्जी लगभग 68.3%।
11बिग बैंग के प्रमाण
- लाल विचलन और हबल का नियम: दूर की आकाशगंगाओं का प्रकाश लाल रंग की ओर खिसका हुआ दिखता है। इसका अर्थ है कि वे हमसे दूर जा रही हैं, और जो जितनी दूर है, वह उतनी तेज़ दूर जा रही है। पूरा ब्रह्मांड फैल रहा है, तो पीछे चलें तो कभी सब एक जगह था।
- CMB विकिरण: बिग बैंग के अनुमान के अनुसार बची गर्मी हर दिशा में मिली, ठीक उसी तापमान के पास।
- हल्के तत्वों का अनुपात: ब्रह्मांड में हाइड्रोजन, हीलियम, ड्यूटेरियम और लिथियम का अनुपात बिग बैंग की गणना से मेल खाता है।
- आकाशगंगाओं का विकास: बहुत दूर (यानी बहुत पुरानी) आकाशगंगाएँ छोटी, अनियमित और अलग तरह की हैं। ब्रह्मांड समय के साथ बदला है, जो स्थिर अवस्था सिद्धांत के विरुद्ध है।
- सबसे पुराने तारों की आयु: सबसे पुराने तारे लगभग 1300 करोड़ वर्ष के हैं, जो ब्रह्मांड की आयु से कम है, जैसा होना चाहिए।
- रात का आकाश अँधेरा क्यों (ओल्बर्स विरोधाभास): यदि ब्रह्मांड अनंत, अनादि और स्थिर होता, तो हर दिशा में कोई तारा होता और रात भी चमकीली होती। ब्रह्मांड की सीमित आयु और फैलाव इसका उत्तर देते हैं।
12लाल विचलन और हबल का नियम (हल किए उदाहरण)
डॉप्लर प्रभाव से समझें
पास आती ट्रेन की सीटी तीखी और दूर जाती ट्रेन की सीटी भारी सुनाई देती है। यही प्रकाश के साथ होता है: दूर जाते स्रोत का प्रकाश लाल की ओर (Red Shift) और पास आते स्रोत का प्रकाश नीले की ओर (Blue Shift) खिसकता है।
- ब्रह्मांडीय लाल विचलन: आकाशगंगाओं का लाल विचलन मुख्यतः इसलिए है कि प्रकाश के रास्ते में अंतरिक्ष खुद खिंचता है और प्रकाश की तरंग भी खिंच जाती है।
- एंड्रोमेडा जैसी बहुत पास की कुछ आकाशगंगाएँ गुरुत्व के कारण हमारी ओर आ रही हैं, इसलिए उनमें नीला विचलन है।
हबल का नियम
v = H₀ × d
- v = आकाशगंगा के दूर जाने की चाल (किमी/सेकंड)
- d = दूरी (मेगापारसेक, Mpc)
- H₀ = हबल स्थिरांक, लगभग 70 किमी/सेकंड प्रति मेगापारसेक (प्लैंक उपग्रह से लगभग 67, तारों की सीढ़ी विधि से लगभग 73; इस अंतर को "हबल तनाव" कहते हैं)
100 मेगापारसेक दूर की आकाशगंगा कितनी तेज़ी से दूर जा रही होगी?
v = 70 × 100 = 7,000 किमी/सेकंड।
एक आकाशगंगा 14,000 किमी/सेकंड से दूर जा रही है। उसकी दूरी कितनी होगी?
d = v ÷ H₀ = 14,000 ÷ 70 = 200 मेगापारसेक (लगभग 65 करोड़ प्रकाश वर्ष)।
हबल समय: 1 ÷ H₀ से ब्रह्मांड की आयु का मोटा अनुमान मिलता है, जो लगभग 1400 करोड़ वर्ष आता है।
लाल विचलन (z) से दूरी और समय
लाल विचलन को z से लिखते हैं: z = (प्रेक्षित तरंगदैर्घ्य − मूल तरंगदैर्घ्य) ÷ मूल तरंगदैर्घ्य।
- z बड़ा = आकाशगंगा ज़्यादा दूर और उसका प्रकाश ज़्यादा पुराना।
- CMB का z लगभग 1100 है, यानी तब से ब्रह्मांड की दूरियाँ लगभग 1100 गुना बढ़ चुकी हैं।
- जेम्स वेब दूरबीन ने z ≈ 14.4 तक की आकाशगंगाएँ देखी हैं; उनका प्रकाश तब निकला जब ब्रह्मांड केवल लगभग 28 करोड़ वर्ष का था।
हबल तनाव (Hubble Tension)
- CMB (प्लैंक उपग्रह) से निकला H₀ ≈ 67-68, जबकि पास की आकाशगंगाओं में सेफ़िड तारों और सुपरनोवा की "सीढ़ी" से H₀ ≈ 73।
- दोनों माप बहुत सटीक हैं, फिर भी मेल नहीं खाते। इसका अर्थ माप की कोई छिपी ग़लती भी हो सकता है, या डार्क एनर्जी और प्रारंभिक ब्रह्मांड के बारे में कोई नई भौतिकी भी। यह आज ब्रह्मांड विज्ञान का सबसे चर्चित खुला प्रश्न है।
13फैलाव को सही समझें: आम ग़लतफ़हमियाँ
- ग़लत: बिग बैंग अंतरिक्ष के किसी एक बिंदु पर हुआ धमाका था। सही: पूरा अंतरिक्ष उस बिंदु में था; अंतरिक्ष खुद फैला। ब्रह्मांड का कोई केंद्र नहीं।
- ग़लत: आकाशगंगाएँ अंतरिक्ष में भाग रही हैं। सही: आकाशगंगाओं के बीच का अंतरिक्ष खिंच रहा है। 3D मॉडल में "अंतरिक्ष का जाल" चालू करके देखिए।
- ग़लत: फैलाव से सब कुछ बड़ा हो रहा है। सही: आकाशगंगा, तारे, पृथ्वी और हम बड़े नहीं हो रहे; गुरुत्व और दूसरे बल इन्हें बाँधे रखते हैं। केवल आकाशगंगाओं के समूहों के बीच की दूरी बढ़ती है।
- ग़लत: ब्रह्मांड 1380 करोड़ वर्ष पुराना है, तो वह 1380 करोड़ प्रकाश वर्ष तक ही फैला है। सही: फैलाव के कारण दृश्य ब्रह्मांड का व्यास लगभग 9300 करोड़ प्रकाश वर्ष है।
- ग़लत: बिग बैंग से पहले क्या था, यह विज्ञान बता देता है। सही: बिग बैंग के साथ ही समय शुरू हुआ माना जाता है; उससे "पहले" का प्रश्न आज भी खुला है।
- ग़लत: "गॉड पार्टिकल" का अर्थ भगवान से जुड़ा है। सही: यह केवल एक लोकप्रिय नाम है; वैज्ञानिक नाम हिग्स बोसॉन है।
तीन आसान उदाहरण
- गुब्बारा (NCERT): गुब्बारे पर बिंदु बनाकर फुलाइए; बिंदु एक-दूसरे से दूर होते जाते हैं। (कमी: बिंदु खुद भी बड़े हो जाते हैं, आकाशगंगाएँ नहीं होतीं।)
- किशमिश वाली ब्रेड: फूलते आटे में हर किशमिश को बाकी सब दूर जाती दिखती हैं, और दूर वाली ज़्यादा तेज़।
- रबर की पट्टी: पट्टी पर बराबर दूरी पर निशान लगाकर खींचिए; दूर वाला निशान ज़्यादा खिसकता है। यही हबल का नियम है।
14डार्क मैटर, डार्क एनर्जी और ब्रह्मांड का भविष्य
डार्क मैटर (अदृश्य पदार्थ), लगभग 27%
- प्रकाश न छोड़ता है, न रोकता है, इसलिए दिखता नहीं; केवल इसके गुरुत्व का असर दिखता है।
- प्रमाण: (1) 1933 में फ़्रिट्ज़ ज़्विकी ने देखा कि आकाशगंगा-गुच्छों में आकाशगंगाएँ इतनी तेज़ घूमती हैं कि दिखने वाले पदार्थ से वे बिखर जातीं। (2) 1970 के दशक में वेरा रुबिन ने पाया कि आकाशगंगाओं के बाहरी तारे भी उतनी ही तेज़ घूमते हैं जितने भीतर के (घूर्णन वक्र)। (3) गुरुत्वीय लेंसिंग: भारी पिंड पीछे के प्रकाश को मोड़ देते हैं। (4) "बुलेट क्लस्टर" में गैस और द्रव्यमान अलग-अलग दिखे।
डार्क एनर्जी (अदृश्य ऊर्जा), लगभग 68%
- 1998 में दूर के सुपरनोवा देखकर पाया गया कि ब्रह्मांड का फैलाव तेज़ हो रहा है। इस खोज पर 2011 का भौतिकी नोबेल सॉल पर्लमटर, ब्रायन श्मिट और एडम रीस को मिला।
- इस तेज़ी का कारण एक अज्ञात ऊर्जा मानी जाती है। आइंस्टीन ने अपने समीकरण में एक "ब्रह्मांडीय स्थिरांक" जोड़ा था, जिसे बाद में उन्होंने अपनी भूल कहा; आज वही डार्क एनर्जी का सबसे सरल रूप माना जाता है।
ब्रह्मांड का भविष्य: तीन संभावनाएँ
| संभावना | क्या होगा | आज की स्थिति |
|---|---|---|
| महा-शीतलन (Big Freeze / ताप मृत्यु) | फैलाव चलता रहेगा, तारे बुझ जाएँगे, सब ठंडा और अँधेरा | आज के माप से सबसे संभावित |
| महा-संकुचन (Big Crunch) | गुरुत्व से फैलाव रुककर सब वापस सिकुड़ेगा | कम संभावना |
| महा-विदारण (Big Rip) | डार्क एनर्जी बढ़ती गई तो आकाशगंगा, तारे, परमाणु तक फट जाएँगे | संभव, पर प्रमाण नहीं |
ताज़ा: क्या डार्क एनर्जी बदल रही है? (DESI, 2025)
- DESI (डार्क एनर्जी स्पेक्ट्रोस्कोपिक इंस्ट्रूमेंट), अमेरिका के एरिज़ोना में किट पीक वेधशाला की 4-मीटर मेयल दूरबीन पर लगा यंत्र है, जो एक साथ 5,000 आकाशगंगाओं का प्रकाश पकड़ता है।
- 19 मार्च 2025 को इसके तीन साल के आँकड़ों (लगभग 1.5 करोड़ आकाशगंगाएँ और क्वासार) के नतीजे आए। उनमें संकेत मिले कि डार्क एनर्जी शायद स्थिर नहीं, समय के साथ कमज़ोर हो रही है।
- यह संकेत अभी "खोज" के स्तर (5 सिग्मा) तक नहीं पहुँचा है; अलग-अलग आँकड़े मिलाने पर 2.8 से 4.2 सिग्मा। अगर पक्का हुआ, तो ब्रह्मांड का भविष्य "महा-शीतलन" से अलग भी हो सकता है।
- दूसरे बड़े सर्वेक्षण: यूरोप का यूक्लिड अंतरिक्ष दूरबीन (2023) और चिली की वेरा सी. रुबिन वेधशाला (पहले चित्र 2025) डार्क मैटर और डार्क एनर्जी के नक्शे बना रहे हैं।
15गुरुत्वीय तरंगें: ब्रह्मांड को "सुनने" का नया तरीका
- क्या हैं: भारी पिंडों (जैसे दो कृष्ण विवर) के तेज़ी से घूमने या टकराने से अंतरिक्ष-समय में उठने वाली लहरें, जो प्रकाश की चाल से चलती हैं। आइंस्टीन ने 1916 में सामान्य सापेक्षता के आधार पर इनकी भविष्यवाणी की।
- पहली सीधी खोज: 14 सितंबर 2015 को अमेरिका की LIGO वेधशालाओं ने लगभग 130 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर दो कृष्ण विवरों के मिलने से निकली तरंगें पकड़ीं (घोषणा फ़रवरी 2016)। 2017 का भौतिकी नोबेल: राइनर वाइस, बैरी बैरिश और किप थॉर्न।
- GW170817 (17 अगस्त 2017): दो न्यूट्रॉन तारों की टक्कर से गुरुत्वीय तरंगें और प्रकाश, दोनों एक साथ देखे गए ("बहु-संदेशवाहक खगोल विज्ञान")। इसने सिद्ध किया कि सोना-प्लैटिनम जैसे भारी तत्व ऐसी टक्करों ("किलोनोवा") में बनते हैं।
- वैश्विक जाल: अमेरिका में LIGO (हैनफ़ोर्ड, लिविंगस्टन), इटली में Virgo, जापान में KAGRA।
LIGO-इंडिया
| बात | विवरण |
|---|---|
| स्थान | हिंगोली ज़िला, महाराष्ट्र |
| स्वीकृति | 2023 में केंद्रीय मंत्रिमंडल से स्वीकृत |
| संचालक | परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), अमेरिका की LIGO प्रयोगशाला के सहयोग से; IUCAA (पुणे) आदि भारतीय संस्थान |
| बनावट | 4-4 किमी की दो भुजाएँ, एक-दूसरे पर 90° |
| महत्त्व | विश्व के जाल का पाँचवाँ केंद्र; तरंगों का स्रोत आकाश में ज़्यादा सही ढूँढा जा सकेगा |
| स्थिति (2026) | काम में देरी की ख़बरें; पूरा होने का लक्ष्य लगभग 2030 |
16हिग्स बोसॉन ("गॉड पार्टिकल") संक्षेप में
- बिग बैंग के लगभग 10⁻¹² सेकंड बाद मूल कणों को द्रव्यमान (भार) मिला। यह द्रव्यमान एक अदृश्य, हर जगह फैले क्षेत्र से आता है, जिसे हिग्स क्षेत्र कहते हैं। इस क्षेत्र का कण हिग्स बोसॉन है।
- 1964 में पीटर हिग्स और फ्रांस्वा एंगलर्ट-रॉबर्ट ब्राउट ने इसकी कल्पना की।
- 4 जुलाई 2012 को CERN (जिनेवा के पास, स्विट्ज़रलैंड-फ़्रांस सीमा) की लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (LHC) में ATLAS और CMS प्रयोगों ने इसकी खोज की घोषणा की। LHC लगभग 27 किमी लंबी गोल सुरंग में बना दुनिया का सबसे बड़ा कण-त्वरक है।
- 2013 का भौतिकी नोबेल पीटर हिग्स और फ्रांस्वा एंगलर्ट को मिला।
- "गॉड पार्टिकल" नाम वैज्ञानिक लियोन लेडरमैन की 1993 की एक किताब से प्रसिद्ध हुआ।
- भारत से जुड़ाव: "बोसॉन" शब्द सत्येंद्रनाथ बोस के नाम पर है (बोस-आइंस्टीन सांख्यिकी, 1924)। भारत 2017 से CERN का सहयोगी सदस्य है।
पूरी कहानी पेज 1.2 (हिग्स बोसॉन: "गॉड पार्टिकल") में आएगी।
17तारे, आकाशगंगाएँ और हमारी मंदाकिनी
तारा कैसे बनता है
नीहारिका का घना भाग गुरुत्व से सिकुड़ता है → केंद्र गर्म होता है (आद्य-तारा, Protostar) → केंद्र का तापमान लगभग 1 करोड़ K पर पहुँचते ही हाइड्रोजन से हीलियम बनने का नाभिकीय संलयन शुरू → तारा चमकने लगता है। (तारे का पूरा जीवन पेज 1.6 में।)
आकाशगंगाओं के प्रकार (हबल का "ट्यूनिंग फ़ोर्क" वर्गीकरण)
| प्रकार | आकार | पहचान |
|---|---|---|
| दीर्घवृत्तीय (Elliptical) | गोल से अंडाकार | पुराने तारे, कम गैस; नए तारे बहुत कम बनते हैं |
| सर्पिल (Spiral) | चपटी तश्तरी, भुजाओं वाली | भुजाओं में नए तारे बनते रहते हैं; जैसे एंड्रोमेडा |
| दंड-सर्पिल (Barred Spiral) | बीच में तारों की पट्टी, उससे निकलती भुजाएँ | हमारी मंदाकिनी इसी प्रकार की है |
| अनियमित (Irregular) | कोई निश्चित आकार नहीं | जैसे बड़ा और छोटा मैगेलानिक बादल |
हमारी मंदाकिनी (आकाशगंगा, Milky Way)
- दंड-सर्पिल आकाशगंगा; व्यास लगभग 1 लाख प्रकाश वर्ष; लगभग 100 से 400 अरब तारे।
- सूर्य केंद्र से लगभग 26,000 प्रकाश वर्ष दूर, ओरियन (शिकारी) भुजा में है।
- सूर्य लगभग 230 किमी/सेकंड की चाल से केंद्र की परिक्रमा करता है; एक चक्कर में लगभग 22-25 करोड़ वर्ष लगते हैं ("आकाशगंगा वर्ष")।
- केंद्र में एक विशाल कृष्ण विवर (ब्लैक होल) सैजिटेरियस A* है, जिसका द्रव्यमान लगभग 40 लाख सूर्यों जितना है; 2022 में इवेंट होराइज़न टेलीस्कोप ने इसका चित्र जारी किया।
- रात में दिखने वाली दूधिया पट्टी असल में मंदाकिनी की चपटी तश्तरी को किनारे से देखना है। भारत में इसे "आकाशगंगा" कहते हैं, मानो आकाश में गंगा बह रही हो।
- एंड्रोमेडा (देवयानी), लगभग 25 लाख प्रकाश वर्ष दूर, स्थानीय समूह की सबसे बड़ी आकाशगंगा है। यह हमारी ओर आ रही है; अरबों वर्ष बाद (मोटे अनुमान से लगभग 450 करोड़ वर्ष में) दोनों आकाशगंगाओं के आपस में मिल जाने की संभावना है।
18भारत और ब्रह्मांड का अध्ययन
प्राचीन और मध्यकाल
- आर्यभट (476-550 ई.), "आर्यभटीय": पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है; सूर्य और चंद्र ग्रहण छाया से होते हैं।
- वराहमिहिर (6वीं सदी), "पंचसिद्धांतिका"; ब्रह्मगुप्त (7वीं सदी), गुरुत्व जैसे आकर्षण का विचार।
- सवाई जय सिंह ने 18वीं सदी में दिल्ली, जयपुर, उज्जैन, वाराणसी और मथुरा में जंतर मंतर वेधशालाएँ बनवाईं।
आधुनिक भारतीय वैज्ञानिक
| वैज्ञानिक | योगदान |
|---|---|
| मेघनाद साहा | साहा आयनीकरण समीकरण (1920): तारों के तापमान और रचना को समझने की कुंजी |
| सत्येंद्रनाथ बोस | बोस-आइंस्टीन सांख्यिकी (1924); "बोसॉन" नाम इन्हीं पर |
| सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर | चंद्रशेखर सीमा (लगभग 1.4 सौर द्रव्यमान): इससे भारी मरता तारा श्वेत वामन नहीं रह पाता; 1983 का नोबेल |
| जयंत नार्लीकर | हॉयल के साथ गुरुत्व पर काम (हॉयल-नार्लीकर सिद्धांत); स्थिर अवस्था विचार के समर्थक |
आज की भारतीय वेधशालाएँ और मिशन
- GMRT (पुणे के पास): विश्व की बड़ी मीटर-तरंग रेडियो दूरबीनों में से एक।
- एस्ट्रोसैट (AstroSat, 2015): भारत की पहली बहु-तरंगदैर्घ्य अंतरिक्ष वेधशाला।
- आदित्य-L1 (2023): सूर्य के अध्ययन के लिए भारत का पहला मिशन, सूर्य-पृथ्वी के L1 बिंदु पर।
- हानले (लद्दाख): भारतीय खगोलीय वेधशाला; हानले को 2022 में डार्क स्काई रिज़र्व घोषित किया गया।
- LIGO-इंडिया: गुरुत्वीय तरंगें पकड़ने की वेधशाला, महाराष्ट्र के हिंगोली में (2023 में स्वीकृत)।
भारत के प्रमुख खगोल संस्थान और दूरबीनें
| संस्थान / दूरबीन | कहाँ | ख़ास बात |
|---|---|---|
| IUCAA (अंतर-विश्वविद्यालय खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी केंद्र) | पुणे | सरस्वती महागुच्छ की खोज (2017); LIGO-इंडिया में भागीदार |
| NCRA-TIFR | पुणे | GMRT का संचालन; "अलकनंदा" आकाशगंगा की खोज (2025) |
| भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) | बेंगलुरु | हानले (लद्दाख) और कवलूर (तमिलनाडु) की वेधशालाएँ |
| ARIES | नैनीताल | देवस्थल में 3.6 मीटर की प्रकाशीय दूरबीन (2016), भारत की सबसे बड़ी प्रकाशीय दूरबीनों में |
| भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL) | अहमदाबाद | माउंट आबू वेधशाला; चंद्रयान, आदित्य मिशनों में योगदान |
| रमन अनुसंधान संस्थान (RRI) | बेंगलुरु | रेडियो खगोल विज्ञान |
भारतीय खोजें जो परीक्षा में पूछी जा सकती हैं
- सरस्वती महागुच्छ (2017): IUCAA (पुणे) के खगोलविदों ने लगभग 400 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर आकाशगंगाओं का एक विशाल महागुच्छ खोजा, जिसे "सरस्वती" नाम दिया गया।
- अलकनंदा आकाशगंगा (दिसंबर 2025): NCRA-TIFR (पुणे) के वैज्ञानिकों ने जेम्स वेब दूरबीन के आँकड़ों से लगभग 1200 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर, बिग बैंग के केवल लगभग 150 करोड़ वर्ष बाद की एक साफ़ भुजाओं वाली सर्पिल आकाशगंगा खोजी, जो हमारी मंदाकिनी जैसी है। नाम हिमालय की नदी अलकनंदा पर रखा गया, जो मंदाकिनी की "बहन" नदी मानी जाती है (मंदाकिनी हमारी आकाशगंगा का हिंदी नाम भी है)। इतनी जल्दी इतनी व्यवस्थित आकाशगंगा का बनना वैज्ञानिकों के लिए आश्चर्य है।
19नई दूरबीनें और ताज़ा खोजें (अक्टूबर 2026 तक)
| दूरबीन / मिशन | किसका, कब | ख़ास बात |
|---|---|---|
| हबल अंतरिक्ष दूरबीन | नासा-ESA, 1990 | ब्रह्मांड के फैलाव की दर और आयु के माप में बड़ा योगदान |
| जेम्स वेब अंतरिक्ष दूरबीन (JWST) | नासा-ESA-कनाडा, 25 दिसंबर 2021 को प्रक्षेपित | 6.5 मीटर का सुनहरा दर्पण; अवरक्त (इन्फ़्रारेड) प्रकाश में देखती है; सूर्य-पृथ्वी के L2 बिंदु पर (पृथ्वी से लगभग 15 लाख किमी) |
| प्लैंक उपग्रह | ESA, 2009 | CMB का सबसे बारीक नक्शा |
| यूक्लिड | ESA, 2023 | डार्क मैटर और डार्क एनर्जी का नक्शा |
| वेरा सी. रुबिन वेधशाला | अमेरिका, चिली में; पहले चित्र 2025 | पूरे दक्षिणी आकाश का बार-बार सर्वेक्षण |
| DESI | अमेरिका, एरिज़ोना | 2025 में डार्क एनर्जी के बदलने के संकेत |
| एस्ट्रोसैट | इसरो, 2015 | भारत की पहली बहु-तरंगदैर्घ्य अंतरिक्ष वेधशाला |
| आदित्य-L1 | इसरो, 2 सितंबर 2023 को प्रक्षेपित | सूर्य का अध्ययन, सूर्य-पृथ्वी के L1 बिंदु पर |
ताज़ा रिकॉर्ड और खोजें
- सबसे दूर की पुष्ट आकाशगंगा: JWST ने MoM-z14 का लाल विचलन z ≈ 14.44 नापा; इसका प्रकाश बिग बैंग के केवल लगभग 28 करोड़ वर्ष बाद निकला था (शोध-पत्र जनवरी 2026 में प्रकाशित)। JWST बार-बार पाती रही है कि शुरुआती ब्रह्मांड में आकाशगंगाएँ अनुमान से ज़्यादा चमकीली और जल्दी बनीं।
- अलकनंदा (2025) और सरस्वती (2017): ऊपर भारत वाले भाग में।
- DESI (2025): डार्क एनर्जी के कमज़ोर होने के संकेत (ऊपर डार्क एनर्जी वाले भाग में)।
L1 और L2 बिंदु (लैग्रांज बिंदु): सूर्य और पृथ्वी के गुरुत्व के ऐसे संतुलन बिंदु, जहाँ कोई यान कम ईंधन में टिका रह सकता है। L1 सूर्य की ओर (आदित्य-L1) और L2 सूर्य से उलटी ओर (JWST), दोनों पृथ्वी से लगभग 15 लाख किमी दूर हैं।
20महत्त्वपूर्ण शब्दावली (हिंदी-अंग्रेज़ी)
| हिंदी | अंग्रेज़ी | एक पंक्ति में |
|---|---|---|
| विस्तरित ब्रह्मांड परिकल्पना | Expanding Universe Hypothesis | बिग बैंग का दूसरा नाम |
| एकाकी परमाणु / विलक्षणता | Singular Atom / Singularity | शुरुआत का अनंत घना बिंदु |
| स्थिर अवस्था सिद्धांत | Steady State Theory | ब्रह्मांड सदा एक-सा (हॉयल) |
| स्फीति | Inflation | शुरुआत का अत्यंत तेज़ फैलाव |
| लाल विचलन | Red Shift | दूर जाते स्रोत का प्रकाश लाल की ओर |
| हबल स्थिरांक | Hubble Constant (H₀) | फैलाव की दर, लगभग 70 किमी/से./Mpc |
| सूक्ष्मतरंग पृष्ठभूमि विकिरण | Cosmic Microwave Background | बिग बैंग की बची गर्मी, 2.7 K |
| नाभिकीय संश्लेषण | Nucleosynthesis | नाभिकों का बनना |
| नाभिकीय संलयन | Nuclear Fusion | हल्के नाभिक जुड़कर भारी बनें, ऊर्जा निकले |
| पुनर्संयोजन | Recombination | नाभिक + इलेक्ट्रॉन = परमाणु; ब्रह्मांड पारदर्शी |
| नीहारिका | Nebula | गैस-धूल का बादल |
| आकाशगंगा / मंदाकिनी | Galaxy / Milky Way | तारों का विशाल समूह / हमारी आकाशगंगा |
| कृष्ण विवर | Black Hole | इतना घना पिंड कि प्रकाश भी न निकल सके |
| प्रकाश वर्ष | Light Year | 9.461 × 10¹² किमी |
| डार्क मैटर / डार्क एनर्जी | Dark Matter / Dark Energy | अदृश्य पदार्थ / फैलाव तेज़ करने वाली ऊर्जा |
| हिंदी | अंग्रेज़ी | एक पंक्ति में |
|---|---|---|
| लंबन | Parallax | देखने की जगह बदलने से पास की चीज़ का खिसकता दिखना |
| ब्रह्मांडीय सिद्धांत | Cosmological Principle | बड़े पैमाने पर ब्रह्मांड हर जगह और हर दिशा में एक-सा |
| क्षितिज समस्या | Horizon Problem | दूर-दूर के भागों का एक-सा तापमान क्यों |
| ड्यूटेरियम | Deuterium | एक प्रोटॉन + एक न्यूट्रॉन वाला हाइड्रोजन |
| गुरुत्वीय तरंग | Gravitational Wave | अंतरिक्ष-समय की लहर |
| गुरुत्वीय लेंसिंग | Gravitational Lensing | भारी पिंड से प्रकाश का मुड़ना |
| लैग्रांज बिंदु | Lagrange Point | दो पिंडों के गुरुत्व का संतुलन बिंदु |
| मानक मोमबत्ती | Standard Candle | ज्ञात चमक वाला पिंड, जिससे दूरी नापते हैं |
21प्रमुख वैज्ञानिक और उनका योगदान
| वैज्ञानिक | देश | योगदान |
|---|---|---|
| आर्यभट | भारत | पृथ्वी का घूर्णन; ग्रहण का कारण |
| निकोलस कोपरनिकस | पोलैंड | सूर्यकेंद्रीय मत (1543) |
| योहानेस केप्लर | जर्मनी | ग्रह-गति के तीन नियम |
| गैलीलियो गैलिली | इटली | दूरबीन से आकाश का अध्ययन (1610) |
| आइज़ैक न्यूटन | इंग्लैंड | गुरुत्वाकर्षण का नियम (1687) |
| अल्बर्ट आइंस्टीन | जर्मनी-अमेरिका | सामान्य सापेक्षता (1915); E = mc²; गुरुत्वीय तरंगों की भविष्यवाणी |
| एडविन हबल | अमेरिका | अन्य आकाशगंगाएँ; ब्रह्मांड का फैलाव; आकाशगंगाओं का वर्गीकरण |
| जॉर्ज लेमेत्र | बेल्जियम | "आदिम परमाणु"; बिग बैंग की नींव (1927) |
| जॉर्ज गैमो, राल्फ़ एल्फ़र, रॉबर्ट हरमन | अमेरिका | हल्के तत्वों का बनना; CMB की भविष्यवाणी (1948) |
| फ्रेड हॉयल | ब्रिटेन | स्थिर अवस्था सिद्धांत; "बिग बैंग" नाम; तारों में तत्व बनने का सिद्धांत |
| आर्नो पेंज़ियास, रॉबर्ट विल्सन | अमेरिका | CMB की खोज (1965), नोबेल 1978 |
| एलन गुथ | अमेरिका | स्फीति सिद्धांत (लगभग 1980) |
| वेरा रुबिन | अमेरिका | आकाशगंगाओं के घूर्णन से डार्क मैटर का प्रमाण |
| पर्लमटर, श्मिट, रीस | अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया | फैलाव का तेज़ होना (1998), नोबेल 2011 |
| पीटर हिग्स, फ्रांस्वा एंगलर्ट | ब्रिटेन, बेल्जियम | हिग्स क्षेत्र, नोबेल 2013 |
| मेघनाद साहा | भारत | साहा आयनीकरण समीकरण (1920) |
| सत्येंद्रनाथ बोस | भारत | बोस-आइंस्टीन सांख्यिकी (1924) |
| एस. चंद्रशेखर | भारत-अमेरिका | चंद्रशेखर सीमा, नोबेल 1983 |
22UPSC: प्रीलिम्स के तथ्यUPSC विशेष
- बिग बैंग = विस्तरित ब्रह्मांड परिकल्पना; आयु लगभग 1370 करोड़ वर्ष (NCERT), 1380 करोड़ वर्ष (प्लैंक)।
- फैलाव का प्रमाण: एडविन हबल; v = H₀ × d; लाल विचलन।
- बिग बैंग नाम: फ्रेड हॉयल (1949), जो स्वयं स्थिर अवस्था सिद्धांत के समर्थक थे।
- स्थिर अवस्था: हॉयल, बॉन्डी, गोल्ड (1948)।
- CMB: पेंज़ियास-विल्सन 1965; 2.725 K; COBE, WMAP, प्लैंक।
- परमाणु बनना, पारदर्शिता: 3 लाख वर्ष, 4500 K (NCERT); 3.8 लाख वर्ष, लगभग 3000 K (आधुनिक)।
- बिग बैंग में बने तत्व: H, He, थोड़ी Li; भारी तत्व तारों और सुपरनोवा में।
- चार बल: प्रबल > विद्युत-चुंबकीय > दुर्बल > गुरुत्व।
- डार्क एनर्जी ≈ 68%, डार्क मैटर ≈ 27%, सामान्य पदार्थ ≈ 5%; फैलाव तेज़ होने की खोज 1998 (नोबेल 2011)।
- हिग्स बोसॉन: 1964 कल्पना, 2012 खोज (CERN, LHC), 2013 नोबेल; बोसॉन = एस. एन. बोस।
- 1 प्रकाश वर्ष = 9.461 × 10¹² किमी; 1 पारसेक ≈ 3.26 प्रकाश वर्ष; 1 AU ≈ 15 करोड़ किमी।
- मंदाकिनी: दंड-सर्पिल; केंद्र में सैजिटेरियस A*; सूर्य केंद्र से लगभग 26,000 प्रकाश वर्ष।
- चंद्रशेखर सीमा ≈ 1.4 सौर द्रव्यमान; साहा आयनीकरण समीकरण।
- भारत: एस्ट्रोसैट (2015), आदित्य-L1 (2023), GMRT, हानले डार्क स्काई रिज़र्व, LIGO-इंडिया।
कथन वाले प्रश्न (अभ्यास)
निम्नलिखित पर विचार कीजिए: (1) स्थिर अवस्था सिद्धांत के अनुसार ब्रह्मांड का घनत्व समय के साथ घटता है। (2) CMB की खोज ने बिग बैंग सिद्धांत को मज़बूत किया। (3) बिग बैंग नाभिकीय संश्लेषण में लोहे तक के तत्व बने। कौन-से सही हैं?
केवल (2)। (1) ग़लत: स्थिर अवस्था में घनत्व एक-सा रहता है। (3) ग़लत: बिग बैंग में केवल H, He और थोड़ी Li बनी।
"लाल विचलन" से क्या पता चलता है? (a) तारे का तापमान घट रहा है (b) आकाशगंगा दूर जा रही है (c) आकाशगंगा पास आ रही है (d) तारा मर रहा है
(b)।
हिग्स बोसॉन किस बात से संबंधित है? (a) प्रकाश की गति (b) कणों का द्रव्यमान (c) गुरुत्वीय तरंगें (d) डार्क एनर्जी
(b)।
और कथन वाले प्रश्न
CMB के बारे में विचार कीजिए: (1) इसका तापमान लगभग 2.7 K है। (2) इसकी खोज हबल दूरबीन ने की। (3) इसके छोटे अंतर आकाशगंगाओं के बीज माने जाते हैं। कौन-से सही हैं?
(1) और (3)। (2) ग़लत: खोज 1965 में पेंज़ियास और विल्सन ने एक रेडियो एंटीना से की; हबल दूरबीन 1990 में गई।
विचार कीजिए: (1) JWST सूर्य-पृथ्वी के L1 बिंदु पर है। (2) आदित्य-L1 सूर्य का अध्ययन करता है। (3) JWST मुख्यतः अवरक्त प्रकाश में देखती है। कौन-से सही हैं?
(2) और (3)। (1) ग़लत: JWST L2 बिंदु पर है; L1 पर आदित्य-L1 है।
विचार कीजिए: (1) गुरुत्वीय तरंगों की भविष्यवाणी आइंस्टीन ने की। (2) LIGO-इंडिया हिंगोली (महाराष्ट्र) में बन रहा है। (3) गुरुत्वीय तरंगें ध्वनि की चाल से चलती हैं। कौन-से सही हैं?
(1) और (2)। (3) ग़लत: ये प्रकाश की चाल से चलती हैं।
"हबल तनाव" किससे संबंधित है? (a) हबल दूरबीन की ख़राबी (b) ब्रह्मांड के फैलाव की दर के दो अलग मापों का मेल न खाना (c) आकाशगंगाओं की टक्कर (d) सूर्य का तापमान
(b)।
23UPSC मेन्स: पूरे आदर्श उत्तरUPSC विशेष
बिग बैंग सिद्धांत क्या है? इसके पक्ष में मिले प्रमाणों की विवेचना कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)
भूमिका: बिग बैंग सिद्धांत, जिसे विस्तरित ब्रह्मांड परिकल्पना भी कहते हैं, ब्रह्मांड की उत्पत्ति का सबसे मान्य वैज्ञानिक सिद्धांत है। इसके अनुसार लगभग 1370-1380 करोड़ वर्ष पहले सारा पदार्थ और ऊर्जा एक अत्यंत छोटे, अनंत तापमान और घनत्व वाले बिंदु ("एकाकी परमाणु") में था, जिससे अंतरिक्ष का फैलाव शुरू हुआ।
मुख्य बातें: (1) सेकंड के अत्यंत छोटे अंश में स्फीति (तेज़ फैलाव) हुई; (2) फैलते हुए ब्रह्मांड के ठंडा होने से चारों मूल बल अलग हुए, ऊर्जा से कण बने (E = mc²) और हिग्स क्षेत्र से कणों को द्रव्यमान मिला; (3) पहले तीन मिनट में हाइड्रोजन-हीलियम के नाभिक बने; (4) लगभग 3-3.8 लाख वर्ष में तापमान 4500-3000 K तक गिरा, परमाणु बने और ब्रह्मांड पारदर्शी हुआ; (5) बाद में गुरुत्व से तारे, आकाशगंगाएँ और सौरमंडल बने। प्रमाण: (क) हबल का नियम (1929): आकाशगंगाओं का लाल विचलन बताता है कि वे दूरी के अनुपात में दूर जा रही हैं; (ख) CMB विकिरण (1965): हर दिशा से 2.7 K की बची गर्मी; (ग) हल्के तत्वों का अनुपात: लगभग 75% हाइड्रोजन, 25% हीलियम, जो गणना से मेल खाता है; (घ) आकाशगंगाओं का विकास: दूर (पुरानी) आकाशगंगाएँ अलग हैं, यानी ब्रह्मांड बदला है; (ङ) सबसे पुराने तारों की आयु ब्रह्मांड की आयु से कम। विरोधी मत: हॉयल का स्थिर अवस्था सिद्धांत CMB और आकाशगंगाओं के विकास को नहीं समझा सका, इसलिए अस्वीकार हुआ। निष्कर्ष: बिग बैंग आज प्रमाणों पर टिका मॉडल है, फिर भी डार्क मैटर, डार्क एनर्जी (DESI के संकेत), हबल तनाव और पदार्थ-प्रति-पदार्थ असंतुलन जैसे प्रश्न खुले हैं। JWST, यूक्लिड और LIGO-इंडिया जैसी परियोजनाएँ इन्हें सुलझाने में लगी हैं। (उत्तर में फूलते गुब्बारे या हबल के ग्राफ़ का छोटा चित्र बनाइए।)
"ब्रह्मांड का फैलाव आकाशगंगाओं की गति नहीं, अंतरिक्ष का खिंचाव है।" स्पष्ट कीजिए। (150 शब्द, 10 अंक)
भूमिका: हबल के प्रेक्षण से पता चला कि लगभग सभी आकाशगंगाएँ हमसे दूर जा रही हैं। पर इसका अर्थ यह नहीं कि वे खाली अंतरिक्ष में भाग रही हैं।
मुख्य भाग: (1) बिग बैंग किसी बिंदु पर हुआ विस्फोट नहीं था; पूरा अंतरिक्ष उस अवस्था में था और अंतरिक्ष खुद फैला। (2) इसलिए ब्रह्मांड का कोई केंद्र नहीं; हर आकाशगंगा से बाकी दूर जाती दिखती हैं। (3) आकाशगंगाओं का लाल विचलन मुख्यतः ब्रह्मांडीय है: रास्ते में अंतरिक्ष खिंचने से प्रकाश की तरंग खिंचती है। (4) गुरुत्व से बँधे पिंड (आकाशगंगा, सौरमंडल, पृथ्वी) नहीं फैलते; केवल आकाशगंगा-समूहों के बीच दूरी बढ़ती है। (5) उदाहरण: फूलता गुब्बारा, किशमिश वाली ब्रेड, खिंचती रबर की पट्टी। निष्कर्ष: फैलाव अंतरिक्ष की ज्यामिति का गुण है; इसी समझ से दृश्य ब्रह्मांड का व्यास (लगभग 9,300 करोड़ प्रकाश वर्ष) उसकी आयु से बड़ा होना समझ आता है।
डार्क मैटर और डार्क एनर्जी में अंतर बताइए। ब्रह्मांड के भविष्य के निर्धारण में इनकी भूमिका स्पष्ट कीजिए। (150 शब्द, 10 अंक)
भूमिका: ब्रह्मांड का केवल लगभग 5% भाग सामान्य पदार्थ है; बाकी अदृश्य है।
डार्क मैटर (लगभग 27%): प्रकाश से क्रिया नहीं करता, पर गुरुत्व रखता है। प्रमाण: ज़्विकी (1933), वेरा रुबिन के घूर्णन वक्र, गुरुत्वीय लेंसिंग, बुलेट क्लस्टर। भूमिका: आकाशगंगाओं को बाँधता है, संरचनाएँ बनाता है। डार्क एनर्जी (लगभग 68%): पूरे अंतरिक्ष में फैली ऊर्जा, जो फैलाव को तेज़ करती है। प्रमाण: दूर के सुपरनोवा (1998, नोबेल 2011), CMB और आकाशगंगा सर्वेक्षण। भविष्य: अगर डार्क एनर्जी स्थिर रहे तो महा-शीतलन; बढ़े तो महा-विदारण; घटे और गुरुत्व भारी पड़े तो महा-संकुचन संभव। DESI (2025) के संकेत कि यह कमज़ोर हो रही है, इस बहस को फिर खोलते हैं। निष्कर्ष: दोनों की प्रकृति अज्ञात है; यूक्लिड, रुबिन वेधशाला जैसे सर्वेक्षण निर्णायक होंगे।
खगोल विज्ञान के क्षेत्र में भारत के योगदान और प्रमुख परियोजनाओं की चर्चा कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)
भूमिका: भारत में खगोल विज्ञान की परंपरा आर्यभट से आज के अंतरिक्ष मिशनों तक फैली है।
प्राचीन-मध्यकाल: आर्यभट (पृथ्वी का घूर्णन, ग्रहण), वराहमिहिर, ब्रह्मगुप्त; सवाई जय सिंह की जंतर मंतर वेधशालाएँ। आधुनिक सिद्धांत: मेघनाद साहा (आयनीकरण समीकरण), एस. एन. बोस (बोसॉन), एस. चंद्रशेखर (चंद्रशेखर सीमा, नोबेल 1983), जयंत नार्लीकर। वेधशालाएँ: GMRT (पुणे) रेडियो दूरबीन; देवस्थल की 3.6 मीटर दूरबीन (नैनीताल); हानले (लद्दाख) वेधशाला और डार्क स्काई रिज़र्व। अंतरिक्ष मिशन: एस्ट्रोसैट (2015), आदित्य-L1 (2023); चंद्रयान और मंगलयान ने भी क्षमता बढ़ाई। अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी: CERN का सहयोगी सदस्य (2017); LIGO-इंडिया (हिंगोली, 2023 में स्वीकृत, लगभग 2030 का लक्ष्य)। हाल की खोजें: सरस्वती महागुच्छ (IUCAA, 2017); अलकनंदा आकाशगंगा (NCRA-TIFR, 2025)। चुनौतियाँ: बड़ी दूरबीनों के लिए धन, परियोजनाओं में देरी (जैसे LIGO-इंडिया), प्रशिक्षित वैज्ञानिकों की कमी। निष्कर्ष: बड़ी परियोजनाओं को समय पर पूरा करना और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना भारत को खगोल विज्ञान में अग्रणी बना सकता है।
24इस विषय से प्रश्न किस तरह आते हैंUPSC विशेष
प्रतियोगी परीक्षाएँ इस टॉपिक को अकेले कम, और दूसरी बातों से जोड़कर ज़्यादा पूछती हैं:
- परिभाषा और तथ्य: प्रकाश वर्ष, पारसेक, लाल विचलन, CMB, हिग्स बोसॉन।
- सिद्धांतों की तुलना: बिग बैंग बनाम स्थिर अवस्था; पुराने और नए सिद्धांत।
- "सही कथन चुनिए" वाले प्रश्न: ताज़ा मिशन (JWST, आदित्य-L1, यूक्लिड, LIGO-इंडिया) के साथ।
- विज्ञान और प्रौद्योगिकी (GS-3) से जुड़ाव: गुरुत्वीय तरंगें, डार्क मैटर, CERN, भारत की परियोजनाएँ।
- भूगोल (GS-1) से जुड़ाव: पृथ्वी की उत्पत्ति और विकास, सौरमंडल, भूवैज्ञानिक समय।
- विश्लेषण वाले मेन्स प्रश्न: "विज्ञान के प्रमाण कैसे बनते हैं", "भारत का योगदान"।
तैयारी का तरीका: NCERT टैब पहले, फिर यह GEOGRAPHY टैब; अंत में ताज़ा खोजों वाला भाग हर कुछ महीने में दोबारा देखें।
25अभ्यास: 50 बहुविकल्पीय प्रश्न (व्याख्या सहित)परीक्षा के प्रश्न
बिग बैंग लगभग कितने वर्ष पहले हुआ (NCERT)? (a) 460 करोड़ (b) 1370 करोड़ (c) 380 करोड़ (d) 13.7 लाख
(b) 1370 करोड़। 460 करोड़ सौरमंडल और 380 करोड़ जीवन की आयु के आसपास है।
प्रकाश वर्ष किसकी इकाई है? (a) समय (b) प्रकाश की तीव्रता (c) दूरी (d) चाल
(c) दूरी। नाम में "वर्ष" है, पर यह प्रकाश द्वारा एक वर्ष में तय की गई दूरी है।
1 पारसेक लगभग कितने प्रकाश वर्ष? (a) 1 (b) 3.26 (c) 9.46 (d) 100
(b) 3.26। 9.46 तो प्रकाश वर्ष का किलोमीटर मान (× 10¹²) है।
पारसेक किस विधि पर आधारित है? (a) लाल विचलन (b) लंबन (c) डॉप्लर (d) ग्रहण
(b) लंबन; 1 आर्क-सेकंड लंबन वाली दूरी।
बिग बैंग के कितने समय बाद पहले नाभिक बने? (a) 3 सेकंड (b) 3 मिनट (c) 3 घंटे (d) 3 लाख वर्ष
(b) 3 मिनट। 3 लाख वर्ष पर पूरे परमाणु बने।
NCERT के अनुसार परमाणवीय पदार्थ बनते समय तापमान: (a) 4500 K (b) 2.7 K (c) 100 करोड़ K (d) 1 करोड़ K
(a) 4500 K। 2.7 K आज का CMB तापमान है।
स्थिर अवस्था सिद्धांत किससे जुड़ा है? (a) हबल (b) हॉयल (c) गैमो (d) लेमेत्र
(b) हॉयल (बॉन्डी, गोल्ड के साथ)। बाकी तीनों बिग बैंग के पक्षधर थे।
"बिग बैंग" नाम किसने दिया? (a) आइंस्टीन (b) हबल (c) फ्रेड हॉयल (d) गैलीलियो
(c) फ्रेड हॉयल, 1949 में, स्वयं इस सिद्धांत के विरोधी होते हुए।
CMB की खोज किसने की? (a) पेंज़ियास और विल्सन (b) हिग्स और एंगलर्ट (c) हबल (d) केप्लर
(a), 1965; हिग्स-एंगलर्ट का संबंध हिग्स बोसॉन से है।
CMB का वर्तमान तापमान लगभग: (a) 0 K (b) 2.7 K (c) 273 K (d) 4500 K
(b) 2.7 K। 273 K पानी के जमने का तापमान है।
CMB में एक दिशा गर्म और उलटी दिशा ठंडी (द्विध्रुव) क्यों दिखती है? (a) सूर्य की गर्मी (b) हमारी आकाशगंगा की CMB के सापेक्ष गति (c) पृथ्वी का वायुमंडल (d) डार्क एनर्जी
(b) लगभग 370 किमी/से. की गति से डॉप्लर प्रभाव।
बिग बैंग नाभिकीय संश्लेषण में सबसे अधिक कौन-सा तत्व बना? (a) हीलियम (b) कार्बन (c) हाइड्रोजन (d) लोहा
(c) हाइड्रोजन, भार का लगभग 75%। कार्बन और लोहा तारों में बने।
बिग बैंग में हीलियम केवल लगभग 25% ही क्यों बनी? (a) तापमान बहुत कम था (b) न्यूट्रॉन सीमित थे और ड्यूटेरियम देर से टिका (c) ऑक्सीजन नहीं थी (d) गुरुत्व बहुत अधिक था
(b) लगभग 7 प्रोटॉन पर 1 न्यूट्रॉन; ड्यूटेरियम की अड़चन।
लोहे से भारी तत्व मुख्यतः कहाँ बनते हैं? (a) बिग बैंग में (b) सुपरनोवा और न्यूट्रॉन तारों की टक्कर में (c) ग्रहों के भीतर (d) नीहारिका में
(b)। तारों का सामान्य संलयन लोहे तक ही तत्व बना पाता है।
प्रकृति का सबसे कमज़ोर मूल बल: (a) प्रबल (b) दुर्बल (c) विद्युत-चुंबकीय (d) गुरुत्व
(d) गुरुत्व; फिर भी द्रव्यमान बहुत अधिक होने से ब्रह्मांड के बड़े पैमाने पर यही हावी है।
बिग बैंग के बाद सबसे पहले कौन-सा बल अलग हुआ? (a) प्रबल (b) गुरुत्व (c) विद्युत-चुंबकीय (d) दुर्बल
(b) गुरुत्व, लगभग 10⁻⁴³ सेकंड पर।
स्फीति सिद्धांत किसने दिया? (a) एलन गुथ (b) फ्रेड हॉयल (c) एडविन हबल (d) स्टीफ़न हॉकिंग
(a) एलन गुथ, लगभग 1980।
"क्षितिज समस्या" का संबंध है: (a) पृथ्वी का क्षितिज (b) CMB का हर दिशा में एक-सा तापमान (c) सूर्यास्त (d) ब्लैक होल
(b); स्फीति इसका उत्तर देती है।
हबल के नियम v = H₀ × d में d है: (a) घनत्व (b) दूरी (c) व्यास (d) समय
(b) दूरी (मेगापारसेक में)।
H₀ = 70 किमी/से./Mpc हो तो 300 Mpc दूर आकाशगंगा की चाल: (a) 2,100 (b) 21,000 (c) 210 (d) 70 किमी/से.
(b) 21,000 किमी/से. (70 × 300)।
"हबल तनाव" है: (a) हबल दूरबीन की ख़राबी (b) H₀ के दो मापों (≈67 और ≈73) का मेल न खाना (c) आकाशगंगाओं का टकराना (d) सूर्य का खिंचाव
(b)।
पास आते तारे के प्रकाश में विचलन: (a) लाल (b) नीला (c) हरा (d) कोई नहीं
(b) नीला; जैसे एंड्रोमेडा।
CMB का लाल विचलन (z) लगभग: (a) 1 (b) 14 (c) 1100 (d) 0
(c) लगभग 1100; z ≈ 14 सबसे दूर की आकाशगंगाओं का है।
ब्रह्मांड का सबसे बड़ा भाग: (a) सामान्य पदार्थ (b) डार्क मैटर (c) डार्क एनर्जी (d) प्रकाश
(c) डार्क एनर्जी, लगभग 68%।
आकाशगंगाओं के घूर्णन से डार्क मैटर का प्रमाण किसने दिया? (a) वेरा रुबिन (b) मैरी क्यूरी (c) हबल (d) पेंज़ियास
(a) वेरा रुबिन (1970 के दशक)।
ब्रह्मांड का फैलाव तेज़ होने की खोज कब हुई? (a) 1929 (b) 1965 (c) 1998 (d) 2012
(c) 1998; 1929 हबल का नियम, 1965 CMB, 2012 हिग्स बोसॉन।
DESI के 2025 के नतीजे किस ओर संकेत करते हैं? (a) डार्क मैटर नहीं है (b) डार्क एनर्जी शायद समय के साथ कमज़ोर हो रही है (c) ब्रह्मांड सिकुड़ रहा है (d) CMB नहीं है
(b); अभी पक्की खोज (5 सिग्मा) नहीं।
आज के माप से ब्रह्मांड का सबसे संभावित भविष्य: (a) महा-संकुचन (b) महा-शीतलन (c) महा-विदारण (d) तुरंत रुक जाना
(b) महा-शीतलन।
हिग्स बोसॉन किससे संबंधित है? (a) प्रकाश की गति (b) कणों का द्रव्यमान (c) गुरुत्वीय तरंगें (d) डार्क एनर्जी
(b)।
हिग्स बोसॉन की खोज कहाँ हुई? (a) नासा (b) इसरो (c) CERN (d) बेल लैब्स
(c) CERN, LHC, 2012।
"बोसॉन" किस भारतीय वैज्ञानिक के नाम पर है? (a) सी. वी. रमन (b) एस. एन. बोस (c) मेघनाद साहा (d) होमी भाभा
(b) सत्येंद्रनाथ बोस।
गुरुत्वीय तरंगों की पहली सीधी खोज किसने की? (a) LIGO (b) JWST (c) प्लैंक (d) GMRT
(a) LIGO, 2015 (घोषणा 2016)।
LIGO-इंडिया कहाँ बन रहा है? (a) हानले (b) हिंगोली, महाराष्ट्र (c) पुणे शहर (d) श्रीहरिकोटा
(b) हिंगोली।
गुरुत्वीय तरंगें किस चाल से चलती हैं? (a) ध्वनि की (b) प्रकाश की (c) प्रकाश से तेज़ (d) बहुत धीमी
(b) प्रकाश की चाल से।
सोना जैसे भारी तत्वों का बनना किस घटना में प्रत्यक्ष देखा गया? (a) GW170817 न्यूट्रॉन तारों की टक्कर (b) सूर्यग्रहण (c) हैली धूमकेतु (d) CMB
(a) 2017 की किलोनोवा।
हमारी मंदाकिनी किस प्रकार की आकाशगंगा है? (a) दीर्घवृत्तीय (b) अनियमित (c) दंड-सर्पिल (d) लेंस आकार
(c) दंड-सर्पिल।
सूर्य मंदाकिनी के केंद्र से लगभग कितनी दूर है? (a) 2,600 (b) 26,000 (c) 2,60,000 (d) 26 लाख प्रकाश वर्ष
(b) लगभग 26,000 प्रकाश वर्ष।
मंदाकिनी के केंद्र का विशाल कृष्ण विवर: (a) सैजिटेरियस A* (b) एंड्रोमेडा (c) ओरियन (d) सिरियस
(a)।
हमारी सबसे पास की बड़ी आकाशगंगा: (a) एंड्रोमेडा (b) मैगेलानिक बादल (c) सैजिटेरियस (d) ओरियन
(a) एंड्रोमेडा, लगभग 25 लाख प्रकाश वर्ष; मैगेलानिक बादल पास हैं पर छोटे।
आकाशगंगा का निर्माण किससे शुरू होता है (NCERT)? (a) धूमकेतु (b) नीहारिका (c) क्षुद्रग्रह (d) ब्लैक होल
(b) नीहारिका।
तारे में संलयन शुरू होने के लिए केंद्र का तापमान लगभग: (a) 1,000 K (b) 1 करोड़ K (c) 2.7 K (d) 4500 K
(b) लगभग 1 करोड़ K।
चंद्रशेखर सीमा लगभग: (a) 1.4 सौर द्रव्यमान (b) 14 (c) 0.4 (d) 140
(a) 1.4 सौर द्रव्यमान।
भारत की पहली बहु-तरंगदैर्घ्य अंतरिक्ष वेधशाला: (a) आदित्य-L1 (b) एस्ट्रोसैट (c) चंद्रयान (d) मंगलयान
(b) एस्ट्रोसैट (2015)।
JWST कहाँ स्थित है? (a) L1 बिंदु (b) L2 बिंदु (c) चंद्रमा पर (d) पृथ्वी की निचली कक्षा में
(b) L2 बिंदु; L1 पर आदित्य-L1 है, निचली कक्षा में हबल दूरबीन।
JWST मुख्यतः किस प्रकाश में देखती है? (a) पराबैंगनी (b) अवरक्त (c) X-किरण (d) रेडियो
(b) अवरक्त; दूर की आकाशगंगाओं का प्रकाश लाल विचलन से अवरक्त में खिसक जाता है।
"सरस्वती" क्या है? (a) एक उपग्रह (b) IUCAA द्वारा खोजा गया आकाशगंगाओं का महागुच्छ (c) एक धूमकेतु (d) एक रॉकेट
(b) 2017 में खोजा गया महागुच्छ।
"अलकनंदा" आकाशगंगा के बारे में सही: (a) इसे इसरो के उपग्रह ने खोजा (b) यह बिग बैंग के लगभग 150 करोड़ वर्ष बाद की सर्पिल आकाशगंगा है, जिसे NCRA-TIFR ने JWST के आँकड़ों से खोजा (c) यह हमारी पड़ोसी आकाशगंगा है (d) यह एक ब्लैक होल है
(b) दिसंबर 2025।
सबसे दूर की पुष्ट आकाशगंगा MoM-z14 का प्रकाश बिग बैंग के लगभग कितने समय बाद निकला? (a) 28 करोड़ वर्ष (b) 280 करोड़ वर्ष (c) 2.8 लाख वर्ष (d) 28 वर्ष
(a) लगभग 28 करोड़ वर्ष।
ओल्बर्स विरोधाभास किससे जुड़ा है? (a) रात का आकाश अँधेरा क्यों है (b) सूर्य गोल क्यों है (c) चंद्रमा की कलाएँ (d) ज्वार-भाटा
(a); इसका उत्तर ब्रह्मांड की सीमित आयु और फैलाव है।
सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक लगभग कितने समय में (NCERT)? (a) 8.311 सेकंड (b) 8.311 मिनट (c) 8.311 घंटे (d) 1 सेकंड
(b) 8.311 मिनट।
26एक नज़र मेंयाद रखें
- सबसे मान्य सिद्धांत: बिग बैंग (विस्तरित ब्रह्मांड परिकल्पना); विरोधी: स्थिर अवस्था (हॉयल), अब अस्वीकृत।
- 1370 करोड़ वर्ष पहले, एकाकी परमाणु से; 3 मिनट: नाभिक; 3 लाख वर्ष, 4500 K: परमाणु, पारदर्शिता (NCERT)।
- चार बल: प्रबल, विद्युत-चुंबकीय, दुर्बल, गुरुत्व; पहले एक थे।
- प्रमाण: हबल का नियम (v = H₀ × d), CMB (2.7 K, 1965), हल्के तत्व (75% H, 25% He), आकाशगंगाओं का विकास।
- ब्रह्मांड: 68% डार्क एनर्जी, 27% डार्क मैटर, 5% सामान्य पदार्थ; फैलाव तेज़ हो रहा है (1998)।
- हिग्स बोसॉन: कणों का द्रव्यमान; CERN 2012; बोसॉन = एस. एन. बोस।
- मंदाकिनी: दंड-सर्पिल, व्यास 1 लाख प्रकाश वर्ष, सूर्य केंद्र से 26,000 प्रकाश वर्ष।
- इकाइयाँ: 1 AU ≈ 15 करोड़ किमी; 1 प्रकाश वर्ष = 9.461 × 10¹² किमी; 1 पारसेक = 3.26 प्रकाश वर्ष।
© Pankaj Bediya · TGT Geography · geoland.in
कक्षा 11 · भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत · अध्याय 2: पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास (ब्रह्मांड वाला भाग)
1कक्षा 9-10 की बुनियाद (और उससे पहले की)बुनियाद
कक्षा 9 और 10 की भूगोल की किताबों (समकालीन भारत 1 और 2) में ब्रह्मांड पर अलग अध्याय नहीं है। इसलिए यह बुनियाद कक्षा 6 से ली गई है: पुरानी किताब "पृथ्वी: हमारा आवास" का अध्याय 1 "सौरमंडल में पृथ्वी"। कक्षा 11 का अध्याय पढ़ने से पहले ये बातें पक्की कर लें:
खगोलीय पिंड
- सूर्य, चंद्रमा और रात में चमकने वाली सभी वस्तुएँ खगोलीय पिंड कहलाती हैं।
- कुछ खगोलीय पिंड बहुत बड़े और गर्म होते हैं। ये गैसों से बने हैं और इनकी अपनी ऊष्मा और प्रकाश होता है। इन्हें तारे कहते हैं। सूर्य भी एक तारा है।
- कुछ पिंडों में अपनी ऊष्मा और प्रकाश नहीं होता; वे तारों के प्रकाश से चमकते हैं। इन्हें ग्रह कहते हैं। पृथ्वी एक ग्रह है।
तारामंडल
- तारों के समूह से बनी विभिन्न आकृतियों को तारामंडल कहते हैं, जैसे सप्तऋषि (बिग बीयर / अर्सा मेजर), जो सात तारों का समूह है।
- ध्रुव तारा उत्तर दिशा बताता है। यह आकाश में लगभग एक ही जगह पर रहता है। पुराने समय में लोग रात में इसी से दिशा पता करते थे।
सौरमंडल
- सूर्य, आठ ग्रह, उपग्रह और कुछ अन्य खगोलीय पिंड, जैसे क्षुद्रग्रह और उल्कापिंड, मिलकर सौरमंडल बनाते हैं। सूर्य इसका मुखिया है।
- ग्रह सूर्य से दूरी के क्रम में: बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण।
आकाशगंगा और ब्रह्मांड
- आकाशगंगा (मंदाकिनी) करोड़ों तारों, बादलों और गैसों की एक प्रणाली है। रात में आकाश में यह एक चौड़ी सफ़ेद पट्टी जैसी दिखती है, मानो आकाश में प्रकाश की नदी बह रही हो।
- लाखों आकाशगंगाएँ मिलकर ब्रह्मांड बनाती हैं।
कक्षा 9-10 से जुड़ाव: कक्षा 9 के अध्याय 1 में आपने अक्षांश, देशांतर और कर्क रेखा पढ़ी; ये सब पृथ्वी के गोल आकार और घूमने से जुड़ी बातें हैं। कक्षा 10 के अध्याय 1 (संसाधन एवं विकास) में पढ़ा कि पृथ्वी के सब संसाधन प्रकृति की देन हैं। कक्षा 11 का यह अध्याय बताता है कि यह पृथ्वी और पूरा ब्रह्मांड बना कैसे।
2अध्याय का परिचय: पृथ्वी की उत्पत्ति के आरंभिक सिद्धांत
NCERT का यह अध्याय पहले पृथ्वी की उत्पत्ति के पुराने विचार बताता है, फिर ब्रह्मांड की उत्पत्ति के आधुनिक सिद्धांत पर आता है। परीक्षा के लिए दोनों ज़रूरी हैं।
आरंभिक सिद्धांत (संक्षेप में)
- कांट की नीहारिका परिकल्पना: जर्मन दार्शनिक इमैनुअल कांट ने कहा कि ग्रह धीमी गति से घूमते हुए पदार्थ के बादल (नीहारिका) से बने।
- लाप्लास (1796): गणितज्ञ लाप्लास ने कांट के विचार में संशोधन किया। इसे नीहारिका परिकल्पना कहते हैं: ग्रहों का निर्माण धीमी गति से घूमते पदार्थ के बादल से हुआ, जो सूर्य की युवा अवस्था से जुड़ा था।
- चैंबरलेन और मोल्टन (1900): एक भटकता हुआ तारा सूर्य के पास से गुज़रा। उसके गुरुत्व से सूर्य की सतह से सिगार के आकार का कुछ पदार्थ अलग हुआ। तारा दूर चला गया, और अलग हुआ पदार्थ सूर्य के चारों ओर घूमता रहा और धीरे-धीरे संघनित होकर ग्रह बना।
- जेम्स जींस और बाद में हेरोल्ड जैफ़्री ने इस मत का समर्थन किया। बाद में कुछ विद्वानों ने सूर्य के साथ एक और साथी तारे के होने की बात कही। इन्हें द्वैतारक सिद्धांत (Binary Theories) कहते हैं।
- 1950: रूस के ऑटो शिमिड और जर्मनी के कार्ल वाइज़ास्कर ने नीहारिका परिकल्पना में संशोधन किया। उनके अनुसार सूर्य एक सौर नीहारिका से घिरा था, जो मुख्यतः हाइड्रोजन, हीलियम और धूलकणों से बनी थी। कणों के घर्षण और टकराव से एक चपटी तश्तरी बनी, और उसी से अभिवृद्धि (Accretion) द्वारा ग्रह बने।
इन सिद्धांतों की पूरी तुलना पेज 1.7 (पुराने सिद्धांत बनाम आज का सिद्धांत) में है।
ध्यान दें
वैज्ञानिक अब केवल पृथ्वी या ग्रहों की ही नहीं, बल्कि पूरे ब्रह्मांड की उत्पत्ति की बात करते हैं। इसी से आधुनिक सिद्धांत आता है।
3आधुनिक सिद्धांत: बिग बैंग
ब्रह्मांड की उत्पत्ति से संबंधित सबसे मान्य सिद्धांत बिग बैंग सिद्धांत है। इसे विस्तरित ब्रह्मांड परिकल्पना (Expanding Universe Hypothesis) भी कहा जाता है।
- एडविन हबल ने 1920 में प्रमाण दिया कि ब्रह्मांड का विस्तार हो रहा है।
- समय बीतने के साथ आकाशगंगाएँ एक-दूसरे से दूर होती जा रही हैं।
- आप प्रयोग करके जान सकते हैं कि ब्रह्मांड के विस्तार का क्या अर्थ है: एक गुब्बारा लें, उस पर कुछ निशान लगाएँ, जिन्हें आकाशगंगाएँ मानें। जब गुब्बारे को फुलाएँगे, तो गुब्बारे पर लगे निशान गुब्बारे के फैलने के साथ एक-दूसरे से दूर जाते दिखेंगे।
- इसी तरह आकाशगंगाओं के बीच की दूरी बढ़ रही है, और ब्रह्मांड फैल रहा है।
ध्यान दें: गुब्बारे पर बने निशान फूलकर बड़े हो जाते हैं, जबकि आकाशगंगाएँ खुद नहीं फैलतीं, केवल उनके बीच की दूरी बढ़ती है। इसलिए गुब्बारा पूरा सही उदाहरण नहीं है; NCERT भी इसे यही कहकर समझाती है। वैज्ञानिक मानते हैं कि आकाशगंगाओं के बीच के अंतरिक्ष का विस्तार हो रहा है।
4बिग बैंग की अवस्थाएँ (NCERT)
बिग बैंग सिद्धांत के अनुसार ब्रह्मांड का विस्तार इन अवस्थाओं में हुआ:
- आरंभिक अवस्था: आरंभ में वे सभी पदार्थ, जिनसे ब्रह्मांड बना है, अति छोटे गोलक (एकाकी परमाणु) के रूप में एक ही स्थान पर स्थित थे। इसका आयतन अत्यधिक सूक्ष्म और तापमान तथा घनत्व अनंत था।
- बिग बैंग: बिग बैंग की प्रक्रिया में इस अति छोटे गोलक में भीषण विस्फोट हुआ। इस प्रकार की विस्फोट प्रक्रिया से वृहत् विस्तार हुआ। वैज्ञानिकों का विश्वास है कि बिग बैंग की घटना आज से 13.7 अरब (1370 करोड़) वर्ष पहले हुई थी। ब्रह्मांड का विस्तार आज भी जारी है। विस्तार के कारण कुछ ऊर्जा पदार्थ में परिवर्तित हो गई। विस्फोट के बाद एक सेकंड के अल्पांश के अंतर्गत ही वृहत् विस्तार हुआ। इसके बाद विस्तार की गति धीमी पड़ गई। बिग बैंग होने के आरंभिक तीन मिनट के अंतर्गत ही पहले परमाणु का निर्माण हुआ।
- परमाणवीय पदार्थ का निर्माण: बिग बैंग से 3 लाख वर्षों के दौरान तापमान 4500 डिग्री केल्विन तक गिर गया और परमाणवीय पदार्थ का निर्माण हुआ। ब्रह्मांड पारदर्शी हो गया।
अंक याद रखने का तरीका: "1370 – 3 – 3 – 4500": 1370 करोड़ वर्ष पहले, 3 मिनट में पहले परमाणु, 3 लाख वर्ष में 4500 K।
आज के विज्ञान का सुधार: 3 मिनट में पूरे परमाणु नहीं, परमाणुओं के केंद्र (नाभिक) बने थे; पूरे परमाणु लगभग 3.8 लाख वर्ष पर बने। विद्यालय की परीक्षा में NCERT वाला उत्तर लिखें।
ऊपर के 3D मॉडल में स्लाइडर चलाकर ये अवस्थाएँ देखिए: चरण 1 (आरंभ), चरण 2 (फैलाव), चरण 4 (पहले नाभिक) और चरण 5 (पहले परमाणु)।
5स्थिर अवस्था संकल्पना
- ब्रह्मांड के विस्तार के बारे में प्रमाण मिलने से पहले कुछ वैज्ञानिक दूसरी विचारधारा रखते थे।
- हॉयल ने इसका विकल्प स्थिर अवस्था संकल्पना (Steady State Concept) के नाम से प्रस्तुत किया।
- इस संकल्पना के अनुसार ब्रह्मांड किसी भी समय में एक ही जैसा रहा है।
- परंतु ब्रह्मांड के विस्तार से संबंधित अनेक प्रमाणों के मिलने पर वैज्ञानिक समुदाय अब विस्तरित ब्रह्मांड सिद्धांत के पक्ष में है।
| आधार | बिग बैंग | स्थिर अवस्था |
|---|---|---|
| किसने दिया | एडविन हबल का प्रमाण, आधुनिक वैज्ञानिक | हॉयल |
| ब्रह्मांड का आरंभ | 1370 करोड़ वर्ष पहले | कोई आरंभ नहीं |
| ब्रह्मांड का रूप | समय के साथ बदलता है | हमेशा एक जैसा |
| आज की मान्यता | सर्वमान्य | मान्य नहीं |
6तारों का निर्माण
- प्रारंभिक ब्रह्मांड में ऊर्जा और पदार्थ का वितरण समान नहीं था।
- घनत्व में आरंभिक भिन्नता से गुरुत्वाकर्षण बलों में भिन्नता आई, जिसके कारण पदार्थ का एकत्रण हुआ। यही एकत्रण आकाशगंगाओं के विकास का आधार बना।
- एक आकाशगंगा असंख्य तारों का समूह है। आकाशगंगाओं का विस्तार इतना अधिक होता है कि उनकी दूरी हज़ारों प्रकाश वर्षों में मापी जाती है।
- एक अकेली आकाशगंगा का व्यास 80 हज़ार से 1 लाख 50 हज़ार प्रकाश वर्ष के बीच हो सकता है।
- एक आकाशगंगा के निर्माण की शुरुआत हाइड्रोजन गैस से बने विशाल बादल के संचयन से होती है, जिसे नीहारिका (Nebula) कहा गया।
- क्रमशः इस बढ़ती हुई नीहारिका में गैस के झुंड विकसित हुए। ये झुंड बढ़ते-बढ़ते घने गैसीय पिंड बने, जिनसे तारों का निर्माण आरंभ हुआ।
- ऐसा विश्वास किया जाता है कि तारों का निर्माण लगभग 5 से 6 अरब वर्ष पहले हुआ।
आज के विज्ञान का सुधार: सबसे पहले तारे बिग बैंग के केवल 10 से 20 करोड़ वर्ष बाद बन गए थे; हमारा सूर्य बहुत बाद में, लगभग 460 करोड़ वर्ष पहले बना। परीक्षा में NCERT वाला उत्तर (5-6 अरब वर्ष) लिखें।
7प्रकाश वर्ष
- प्रकाश वर्ष (Light Year) समय का नहीं, बल्कि दूरी का माप है।
- प्रकाश की गति लगभग 3 लाख किमी प्रति सेकंड है।
- एक साल में प्रकाश जितनी दूरी तय करता है, वह एक प्रकाश वर्ष है। यह 9.461 × 10¹² किमी के बराबर है।
- पृथ्वी और सूर्य के बीच की औसत दूरी 14 करोड़ 95 लाख 98 हज़ार किमी है। प्रकाश वर्ष के संदर्भ में यह प्रकाश वर्ष का केवल 8.311 मिनट है।
हल करके देखें
प्रकाश एक मिनट में कितनी दूरी तय करता है?
3,00,000 किमी × 60 = 1,80,00,000 किमी (1.8 करोड़ किमी)। इसलिए सूर्य की दूरी (लगभग 15 करोड़ किमी) ÷ 1.8 करोड़ ≈ 8.3 मिनट।
8इसी अध्याय के आगे के भाग (संक्षेप में)
परीक्षा में पूरे अध्याय से प्रश्न आते हैं। इस पेज का विषय ब्रह्मांड है; अध्याय के बाकी भाग अगले पेजों पर विस्तार से हैं। यहाँ उनका सार:
- ग्रहों का निर्माण (पेज 1.8): तीन अवस्थाएँ: (1) नीहारिका के अंदर गैस के गुंथित झुंड से तारे बने; (2) तारे के चारों ओर गैस और धूल के बादल से छोटे गोले बने, जिन्हें ग्रहाणु (Planetesimals) कहते हैं; (3) इन छोटे ग्रहाणुओं के जुड़ने से बड़े पिंड, यानी ग्रह बने।
- सौरमंडल (पेज 1.9): सूर्य, 8 ग्रह, उनके उपग्रह और लाखों छोटे पिंड (क्षुद्रग्रह, धूमकेतु, उल्काएँ)। सौर नीहारिका से लगभग 5 से 5.6 अरब वर्ष पहले बनना शुरू, ग्रह लगभग 4.6 अरब वर्ष पहले बने। आंतरिक या पार्थिव ग्रह (बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल): सूर्य और क्षुद्रग्रह पट्टी के बीच, शैलों और धातुओं से बने, अधिक घनत्व। बाहरी या जोवियन / गैस दानव ग्रह (बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण): बड़े, गैसीय, कम घनत्व।
- चंद्रमा (पेज 1.11): माना जाता है कि पृथ्वी बनने के कुछ समय बाद मंगल के आकार से 1 से 3 गुना बड़ा पिंड पृथ्वी से टकराया ("द बिग स्प्लैट"); इससे अलग हुए पदार्थ से लगभग 4.44 अरब वर्ष पहले चंद्रमा बना।
- पृथ्वी का विकास (पेज 1.10, 1.13): पृथ्वी शुरू में गर्म, चट्टानी और वीरान थी; वायुमंडल हाइड्रोजन-हीलियम का पतला था। विभेदन (Differentiation) से हल्के पदार्थ ऊपर और भारी नीचे गए और परतें (भूपर्पटी, प्रावार, क्रोड) बनीं। वायुमंडल तीन अवस्थाओं में बना: (1) आदिकालिक गैसों का सौर पवन से हटना; (2) पृथ्वी के भीतर से गैसों का निकलना (गैस उत्सर्जन, Degassing), जिसमें जलवाष्प, नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, अमोनिया और बहुत कम मुक्त ऑक्सीजन थी; (3) जीवों के प्रकाश-संश्लेषण से ऑक्सीजन बढ़ी। जलवाष्प के संघनन और वर्षा से महासागर बने; लगभग 400 करोड़ वर्ष पहले महासागर बन चुके थे।
- जीवन की उत्पत्ति (पेज 1.14): जीवन रासायनिक प्रतिक्रियाओं से शुरू हुआ; सबसे पुराने जीवाश्म (शैवाल जैसे जीव) लगभग 3.8 अरब वर्ष पुराने हैं।
9NCERT अभ्यास के प्रश्न (उत्तर सहित)परीक्षा के प्रश्न
1. बहुविकल्पीय प्रश्न
निम्नलिखित में से कौन-सी संख्या पृथ्वी की आयु को प्रदर्शित करती है? (a) 46 लाख वर्ष (b) 13.7 अरब वर्ष (c) 4.6 अरब वर्ष (d) 13.7 खरब वर्ष
(c) 4.6 अरब वर्ष।
निम्नलिखित में कौन-सी अवधि सबसे लंबी है? (a) इयॉन (Eon) (b) पीरियड (Period) (c) एरा (Era) (d) इपॉक (Epoch)
(a) इयॉन। (भूवैज्ञानिक समय का क्रम, बड़े से छोटा: इयॉन > एरा > पीरियड > इपॉक > एज; पूरी सारणी पेज 1.22 में)
निम्नलिखित में कौन-सा तत्व वर्तमान वायुमंडल के निर्माण व संशोधन में सहायक नहीं है? (a) सौर पवन (b) गैस उत्सर्जन (c) विभेदन (d) प्रकाश-संश्लेषण
(c) विभेदन। (विभेदन से पृथ्वी की परतें बनीं, वायुमंडल नहीं।)
निम्नलिखित में से भीतरी ग्रह कौन-से हैं? (a) पृथ्वी व सूर्य के बीच के ग्रह (b) सूर्य व क्षुद्रग्रहों की पट्टी के बीच के ग्रह (c) वे ग्रह जो गैसीय हैं (d) बिना उपग्रह वाले ग्रह
(b) सूर्य और क्षुद्रग्रह पट्टी के बीच के ग्रह: बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल।
पृथ्वी पर जीवन निम्नलिखित में से लगभग कितने वर्षों पहले आरंभ हुआ? (a) 13.7 अरब (b) 38 लाख (c) 4.6 अरब (d) 3.8 अरब
(d) लगभग 3.8 अरब (380 करोड़) वर्ष पहले।
2. लघु उत्तर (लगभग 30 शब्द)
पार्थिव ग्रह चट्टानी क्यों हैं?
पार्थिव ग्रह जनक तारे (सूर्य) के बहुत पास बने, जहाँ तापमान अधिक था; वहाँ गैसें संघनित नहीं हो सकीं, केवल चट्टानी पदार्थ और धातुएँ बचीं। सौर पवन ने भी इनकी गैसें उड़ा दीं, और इनका गुरुत्व कम था, इसलिए वे गैसें रोक न सके।
पृथ्वी की उत्पत्ति संबंधित दिए गए तर्कों में निम्न वैज्ञानिकों के मूलभूत अंतर बताएँ: (i) कांट व लाप्लास (ii) चैंबरलेन व मोल्टन
कांट और लाप्लास के अनुसार ग्रह एक ही धीमी गति से घूमते नीहारिका-बादल से बने (एक तारे वाला, नीहारिका परिकल्पना)। चैंबरलेन और मोल्टन के अनुसार एक दूसरा भटकता तारा सूर्य के पास से गुज़रा, उसने सूर्य से पदार्थ खींचा, जिससे ग्रह बने (दो तारों वाला, ग्रहाणु परिकल्पना)।
विभेदन प्रक्रिया से आप क्या समझते हैं?
पृथ्वी बनने के समय वह गर्म और अर्ध-तरल थी। घनत्व के अंतर से भारी पदार्थ (जैसे लोहा) केंद्र की ओर गए और हल्के पदार्थ सतह की ओर आए। इस अलग होने की प्रक्रिया को विभेदन कहते हैं; इसी से भूपर्पटी, प्रावार और क्रोड की परतें बनीं।
प्रारंभिक काल में पृथ्वी के धरातल का स्वरूप क्या था?
प्रारंभ में पृथ्वी चट्टानी, गर्म और वीरान ग्रह थी; उसका वायुमंडल विरल था, जो हाइड्रोजन और हीलियम से बना था। आज जैसा वायुमंडल, जल और जीवन नहीं था।
पृथ्वी के वायुमंडल को निर्मित करने वाली प्रारंभिक गैसें कौन-सी थीं?
शुरुआत में हाइड्रोजन और हीलियम; बाद में पृथ्वी के भीतर से निकली जलवाष्प, नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, अमोनिया और बहुत थोड़ी मुक्त ऑक्सीजन।
3. दीर्घ उत्तर (लगभग 150 शब्द)
बिग बैंग सिद्धांत का विस्तार से वर्णन करें।
परिचय: ब्रह्मांड की उत्पत्ति का सबसे मान्य सिद्धांत, दूसरा नाम विस्तरित ब्रह्मांड परिकल्पना। 1920 में एडविन हबल ने प्रमाण दिया कि ब्रह्मांड फैल रहा है और आकाशगंगाएँ दूर जा रही हैं। अवस्थाएँ: (1) सारा पदार्थ एकाकी परमाणु में, सूक्ष्म आयतन, अनंत तापमान और घनत्व। (2) लगभग 1370 करोड़ वर्ष पहले भीषण विस्फोट और वृहत् विस्तार; ऊर्जा का कुछ भाग पदार्थ में बदला; पहले सेकंड के अल्पांश में तेज़ विस्तार, फिर धीमा; 3 मिनट में पहला परमाणु। (3) 3 लाख वर्ष में तापमान 4500 K, परमाणवीय पदार्थ, ब्रह्मांड पारदर्शी। उदाहरण: फूलते गुब्बारे पर निशान। विरोधी मत: हॉयल की स्थिर अवस्था संकल्पना; प्रमाणों के बाद वैज्ञानिक बिग बैंग के पक्ष में। निष्कर्ष: विस्तार आज भी जारी है। गुब्बारे का चित्र बनाएँ।
पृथ्वी के विकास संबंधी अवस्थाओं को बताते हुए हर अवस्था/चरण को संक्षेप में वर्णित करें।
(1) स्थलमंडल का विकास: ग्रहाणुओं के जुड़ने से पृथ्वी बनी; गर्मी से पदार्थ पिघला, विभेदन से भारी पदार्थ केंद्र में और हल्के ऊपर; भूपर्पटी, प्रावार, बाह्य और आंतरिक क्रोड बने। चंद्रमा बनने की घटना से पृथ्वी फिर गर्म हुई और विभेदन हुआ। (2) वायुमंडल का विकास: तीन अवस्थाएँ: सौर पवन से आदिकालिक हाइड्रोजन-हीलियम का हटना; भीतर से गैस उत्सर्जन और ज्वालामुखी से जलवाष्प, नाइट्रोजन, CO₂, मीथेन, अमोनिया; प्रकाश-संश्लेषण से ऑक्सीजन का बढ़ना। (3) जलमंडल का विकास: ठंडी होती पृथ्वी पर जलवाष्प संघनित हुई, वर्षा का जल गर्तों में भरकर महासागर बने; CO₂ वर्षा जल में घुली। (4) जीवन: लगभग 380 करोड़ वर्ष पहले सरल जीव; लगभग 250-300 करोड़ वर्ष पहले प्रकाश-संश्लेषण शुरू; लगभग 200 करोड़ वर्ष पहले वायुमंडल में ऑक्सीजन भरने लगी।
10बोर्ड शैली के प्रश्न: 3 अंक और 5 अंकपरीक्षा के प्रश्न
3 अंक वाले प्रश्न (लगभग 60-80 शब्द)
ब्रह्मांड के विस्तार का क्या अर्थ है? उदाहरण से समझाइए।
ब्रह्मांड के विस्तार का अर्थ है आकाशगंगाओं के बीच की दूरी का लगातार बढ़ना। एडविन हबल ने 1920 में इसका प्रमाण दिया। एक गुब्बारे पर कुछ निशान बनाकर उसे फुलाएँ तो निशान एक-दूसरे से दूर होते दिखते हैं; इसी तरह आकाशगंगाएँ दूर जा रही हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि असल में आकाशगंगाओं के बीच का अंतरिक्ष फैल रहा है।
स्थिर अवस्था संकल्पना क्या है? इसे क्यों नहीं माना जाता?
हॉयल द्वारा दी गई इस संकल्पना के अनुसार ब्रह्मांड किसी भी समय एक जैसा रहा है; उसका न आरंभ है, न अंत। पर ब्रह्मांड के विस्तार और बिग बैंग के पक्ष में अनेक प्रमाण मिलने पर वैज्ञानिक समुदाय अब विस्तरित ब्रह्मांड सिद्धांत को मानता है।
नीहारिका से आकाशगंगा और तारे कैसे बनते हैं?
प्रारंभिक ब्रह्मांड में पदार्थ का असमान वितरण था; घनत्व के अंतर से गुरुत्व में अंतर आया और पदार्थ जमा होने लगा। हाइड्रोजन गैस का विशाल बादल (नीहारिका) बना। इसमें गैस के झुंड बने, जो बढ़कर घने गैसीय पिंड बने और उनसे तारे बने। ऐसे असंख्य तारों का समूह आकाशगंगा है।
5 अंक वाले प्रश्न (लगभग 120-150 शब्द)
बिग बैंग सिद्धांत की अवस्थाओं का वर्णन कीजिए। इस सिद्धांत का दूसरा नाम क्या है?
बिग बैंग सिद्धांत को विस्तरित ब्रह्मांड परिकल्पना कहते हैं। (1) आरंभ: सारा पदार्थ एकाकी परमाणु में, सूक्ष्म आयतन, अनंत तापमान-घनत्व। (2) विस्फोट और विस्तार: लगभग 1370 करोड़ वर्ष पहले भीषण विस्फोट, वृहत् विस्तार, कुछ ऊर्जा का पदार्थ में बदलना, एक सेकंड के अल्पांश में तेज़ विस्तार फिर धीमा, 3 मिनट में पहला परमाणु। (3) परमाणवीय पदार्थ: 3 लाख वर्ष में तापमान 4500 K, परमाणवीय पदार्थ, पारदर्शी ब्रह्मांड। विस्तार आज भी जारी है। (चित्र: तीन अवस्थाओं के तीन खाने बनाइए।)
पृथ्वी की उत्पत्ति से संबंधित आरंभिक सिद्धांतों की तुलना आधुनिक सिद्धांत से कीजिए।
आरंभिक: कांट-लाप्लास (एक तारा, धीमी गति से घूमता नीहारिका-बादल); चैंबरलेन-मोल्टन (भटकता तारा, सूर्य से पदार्थ खिंचकर ग्रह); जींस-जैफ़्री (समर्थन, द्वैतारक सिद्धांत); शिमिड-वाइज़ास्कर 1950 (सौर नीहारिका से अभिवृद्धि)। ये केवल सौरमंडल की बात करते थे। आधुनिक: बिग बैंग, जो पूरे ब्रह्मांड की उत्पत्ति बताता है, और उसके बाद नीहारिका से आकाशगंगा, तारे और ग्रह (ग्रहाणुओं से) बनने की प्रक्रिया। आधुनिक सिद्धांत के पक्ष में प्रेक्षण के प्रमाण (विस्तार, CMB) हैं।
ऊँची सोच वाले प्रश्न (HOTS)
अगर ब्रह्मांड फैल रहा है, तो हमारा सौरमंडल या पृथ्वी बड़ी क्यों नहीं हो रही?
सौरमंडल और पृथ्वी को गुरुत्व और दूसरे बल मज़बूती से बाँधे रखते हैं। फैलाव केवल बहुत बड़ी दूरियों, यानी आकाशगंगा-समूहों के बीच, दिखता है।
रात का आकाश अँधेरा क्यों है, जबकि ब्रह्मांड में अरबों तारे हैं?
ब्रह्मांड की आयु सीमित है, इसलिए बहुत दूर के तारों का प्रकाश अभी हम तक पहुँचा ही नहीं; और फैलाव से दूर का प्रकाश खिंचकर कमज़ोर और लाल हो जाता है।
दूर की आकाशगंगा को देखना "अतीत में झाँकना" क्यों कहा जाता है?
उसका प्रकाश हम तक पहुँचने में करोड़ों वर्ष लेता है; इसलिए हम उसका उतना पुराना रूप देखते हैं।
11और अभ्यास: एक शब्द, सही-ग़लत, मिलानपरीक्षा के प्रश्न
एक शब्द / एक पंक्ति में उत्तर
विस्तरित ब्रह्मांड परिकल्पना किस सिद्धांत का दूसरा नाम है?
बिग बैंग सिद्धांत।
ब्रह्मांड के विस्तार का प्रमाण किसने और कब दिया?
एडविन हबल ने, 1920 में (NCERT)।
बिग बैंग से पहले सारा पदार्थ किस रूप में था?
एकाकी परमाणु (अति छोटे गोलक) के रूप में।
पहले परमाणु का निर्माण कब हुआ?
बिग बैंग के आरंभिक तीन मिनट के अंदर।
परमाणवीय पदार्थ कब और किस तापमान पर बना?
बिग बैंग के 3 लाख वर्ष बाद, 4500 K पर।
स्थिर अवस्था संकल्पना किसने दी?
हॉयल ने।
आकाशगंगा का व्यास कितना हो सकता है?
80 हज़ार से 1.5 लाख प्रकाश वर्ष।
नीहारिका किससे बनी होती है?
मुख्यतः हाइड्रोजन गैस (और धूल) के विशाल बादल से।
सूर्य से पृथ्वी की दूरी प्रकाश के हिसाब से कितनी है?
8.311 मिनट।
चैंबरलेन और मोल्टन की परिकल्पना में सूर्य के पास से क्या गुज़रा?
एक भटकता हुआ तारा।
1950 में नीहारिका परिकल्पना में संशोधन किसने किया?
ऑटो शिमिड (रूस) और कार्ल वाइज़ास्कर (जर्मनी) ने।
सही या ग़लत
बिग बैंग किसी एक स्थान पर हुआ विस्फोट था, जिससे पदार्थ खाली अंतरिक्ष में फैला।
ग़लत। अंतरिक्ष खुद फैला; ब्रह्मांड का कोई केंद्र नहीं।
प्रकाश वर्ष समय की इकाई है।
ग़लत। यह दूरी की इकाई है।
स्थिर अवस्था संकल्पना के अनुसार ब्रह्मांड हर समय एक जैसा रहता है।
सही।
ब्रह्मांड का विस्तार अब रुक चुका है।
ग़लत। विस्तार आज भी जारी है, और तेज़ हो रहा है।
आकाशगंगा के निर्माण की शुरुआत नीहारिका से होती है।
सही।
मिलान कीजिए
| स्तंभ अ | स्तंभ ब |
|---|---|
| 1. एडविन हबल | (क) स्थिर अवस्था संकल्पना |
| 2. हॉयल | (ख) नीहारिका परिकल्पना |
| 3. लाप्लास | (ग) ब्रह्मांड का विस्तार |
| 4. चैंबरलेन-मोल्टन | (घ) भटकता हुआ तारा |
1-ग, 2-क, 3-ख, 4-घ।
12याद रखेंयाद रखें
- बिग बैंग = विस्तरित ब्रह्मांड परिकल्पना; एडविन हबल (1920): ब्रह्मांड फैल रहा है।
- अवस्थाएँ: एकाकी परमाणु → विस्फोट और विस्तार (1370 करोड़ वर्ष पहले; 3 मिनट में पहला परमाणु) → 3 लाख वर्ष, 4500 K: परमाणवीय पदार्थ, पारदर्शी ब्रह्मांड।
- स्थिर अवस्था संकल्पना: हॉयल; अब मान्य नहीं।
- पुराने सिद्धांत: कांट, लाप्लास (1796, नीहारिका); चैंबरलेन-मोल्टन (1900, भटकता तारा); जींस-जैफ़्री; शिमिड-वाइज़ास्कर (1950, सौर नीहारिका)।
- नीहारिका से आकाशगंगा; आकाशगंगा का व्यास 80 हज़ार से 1.5 लाख प्रकाश वर्ष; तारों का निर्माण 5-6 अरब वर्ष पहले (NCERT)।
- 1 प्रकाश वर्ष = 9.461 × 10¹² किमी; सूर्य-पृथ्वी = 8.311 प्रकाश मिनट।
- पृथ्वी की आयु 4.6 अरब वर्ष; जीवन 3.8 अरब वर्ष पहले।
© Pankaj Bediya · TGT Geography · geoland.in
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