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हिग्स बोसॉन: "गॉड पार्टिकल"

कणों को भार (द्रव्यमान) कहाँ से मिलता है? 27 किमी लंबी LHC सुरंग, प्रोटॉनों की टक्कर, अदृश्य हिग्स क्षेत्र और ब्रह्मांड के 17 मूल कण, चार दृश्यों में, 3D में।

1.2GEOGRAPHY · फेज 13D मॉडलUPSC · विज्ञान-प्रौद्योगिकी
दृश्य 1 / 4LHC

द्रव्यमान हिग्स क्षेत्र देता है, बोसॉन नहीं

हिग्स क्षेत्र पूरे ब्रह्मांड में फैला अदृश्य "माध्यम" है। कण उससे जितना उलझते हैं, उतने भारी होते हैं। हिग्स बोसॉन उस क्षेत्र में उठी लहर है; इसे खोजकर वैज्ञानिकों ने सिद्ध किया कि क्षेत्र सच में है, जैसे लहर देखकर पानी का पता चलता है।

"गॉड पार्टिकल" नाम 1993 की एक लोकप्रिय किताब से आया; इसका धर्म से कोई संबंध नहीं। और "बोसॉन" शब्द भारतीय वैज्ञानिक सत्येंद्रनाथ बोस के सम्मान में है।

याद रखें

  • हिग्स क्षेत्र मूल कणों को द्रव्यमान देता है; उसकी लहर हिग्स बोसॉन है।
  • खोज 4 जुलाई 2012, CERN के LHC में (ATLAS, CMS); नोबेल 2013: हिग्स और एंगलर्ट।
  • द्रव्यमान लगभग 125 GeV; स्पिन 0; जीवन-काल लगभग 10⁻²² सेकंड।
  • मानक मॉडल के 17 कण: 6 क्वार्क, 6 लेप्टॉन, 4 बल-वाहक, 1 हिग्स।
  • "बोसॉन" = सत्येंद्रनाथ बोस; भारत 2017 से CERN का सहयोगी सदस्य।

नोट्सपढ़ने और पढ़ाने के लिए पूरी जानकारी

UPSC प्रीलिम्स और मेन्स (सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान-प्रौद्योगिकी; GS-1: ब्रह्मांड की उत्पत्ति) के स्तर पर · स्रोत: CERN, नोबेल समिति, CERN परिषद (मई 2026), LS3 घोषणा (जुलाई 2026)

1परिचय: द्रव्यमान (भार) कहाँ से आता है?

पदार्थ के भीतर: परमाणु, नाभिक, प्रोटॉन और क्वार्क

हर चीज़ में द्रव्यमान (Mass) होता है: पत्थर, पानी, हमारा शरीर। द्रव्यमान बताता है कि किसी वस्तु में कितना पदार्थ है और उसे चलाना या रोकना कितना कठिन है (जड़त्व)। पर एक गहरा प्रश्न है: सबसे छोटे मूल कणों को द्रव्यमान मिला कहाँ से?

1964 में कुछ वैज्ञानिकों ने उत्तर सुझाया: पूरे अंतरिक्ष में एक अदृश्य क्षेत्र (Field) फैला है, जिसे आज हिग्स क्षेत्र कहते हैं। जो कण इस क्षेत्र से जितना अधिक "उलझता" है, उसका द्रव्यमान उतना अधिक होता है। इस क्षेत्र में उठी छोटी-सी लहर ही एक कण के रूप में दिखती है, जिसे हिग्स बोसॉन कहते हैं। 48 वर्ष बाद, 4 जुलाई 2012 को CERN की लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (LHC) में यह कण मिल गया।

द्रव्यमान और भार में अंतर

आधारद्रव्यमान (Mass)भार (Weight)
क्या हैपदार्थ की मात्रा, जड़त्व का मापद्रव्यमान पर गुरुत्व का बल
इकाईकिलोग्राम (kg)न्यूटन (N)
जगह बदलने परनहीं बदलताबदलता है (चंद्रमा पर लगभग 1/6)
सूत्र—भार = द्रव्यमान × g

आम बोलचाल में "भार" कहते हैं, पर इस पेज में "भार" का मतलब द्रव्यमान ही है।

भूगोल के विद्यार्थी के लिए यह क्यों ज़रूरी

  • पृथ्वी की उत्पत्ति की कहानी बिग बैंग से शुरू होती है (पेज 1.1)। बिग बैंग के लगभग 10⁻¹² सेकंड बाद कणों को द्रव्यमान मिला; उसके बिना न परमाणु बनते, न तारे, न पृथ्वी।
  • UPSC में यह विषय सामान्य अध्ययन-3 (विज्ञान और प्रौद्योगिकी) और प्रीलिम्स के विज्ञान भाग में बार-बार आता है, और भूगोल (GS-1) में ब्रह्मांड की उत्पत्ति से जुड़ता है।

2पदार्थ की बनावट: परमाणु से क्वार्क तक

खोजों का क्रम

वर्षवैज्ञानिकखोज
प्राचीन काल (तिथि पर मतभेद)महर्षि कणाद (भारत)पदार्थ के सबसे छोटे अविभाज्य कण "परमाणु" का विचार (वैशेषिक दर्शन)
1808जॉन डाल्टनपरमाणु सिद्धांत: हर तत्व अपने परमाणुओं से बना
1897जे. जे. थॉमसनइलेक्ट्रॉन; परमाणु अविभाज्य नहीं
1911अर्नेस्ट रदरफ़ोर्डस्वर्ण-पत्र प्रयोग: परमाणु के केंद्र में छोटा, भारी, धनावेशित नाभिक
1913नील्स बोरइलेक्ट्रॉन निश्चित कक्षाओं (ऊर्जा स्तरों) में
1919रदरफ़ोर्डप्रोटॉन की पहचान
1932जेम्स चैडविकन्यूट्रॉन
1964मरे गेल-मान, जॉर्ज ज़्वाइगप्रोटॉन-न्यूट्रॉन भी "क्वार्क" से बने हैं (सिद्धांत)
1968SLAC (अमेरिका)प्रोटॉन के भीतर बिंदु जैसे कणों के प्रमाण
1995फ़र्मीलैबसबसे भारी क्वार्क "टॉप" की खोज
2012CERNहिग्स बोसॉन; मानक मॉडल का अंतिम कण

आकार का अंदाज़ा

  • परमाणु लगभग 10⁻¹⁰ मीटर; नाभिक लगभग 10⁻¹⁴ मीटर; यानी नाभिक परमाणु से लगभग 10,000 गुना छोटा। अगर परमाणु एक क्रिकेट मैदान जितना हो, तो नाभिक बीच में रखा एक मटर का दाना।
  • प्रोटॉन लगभग 10⁻¹⁵ मीटर (1 फ़ेम्टोमीटर)। क्वार्क और इलेक्ट्रॉन अब तक के मापों में बिंदु जैसे हैं, 10⁻¹⁸ मीटर से भी छोटे।
  • प्रोटॉन = 2 अप क्वार्क + 1 डाउन क्वार्क (आवेश +⅔ +⅔ −⅓ = +1); न्यूट्रॉन = 1 अप + 2 डाउन (+⅔ −⅓ −⅓ = 0)।
  • क्वार्क कभी अकेले नहीं मिलते; वे ग्लूऑन से बँधे रहते हैं ("रंग परिरोध", Colour confinement)।

ऊर्जा और द्रव्यमान की इकाई: इलेक्ट्रॉन-वोल्ट

कण-भौतिकी में द्रव्यमान को ऊर्जा की इकाई में लिखते हैं (आइंस्टीन का E = mc²):

  • 1 eV = एक इलेक्ट्रॉन को 1 वोल्ट से तेज़ करने पर मिली ऊर्जा।
  • 1 MeV = 10 लाख eV; 1 GeV = 100 करोड़ eV; 1 TeV = 1,000 GeV।
  • प्रोटॉन का द्रव्यमान ≈ 0.938 GeV; हिग्स बोसॉन ≈ 125 GeV, यानी लगभग 133 प्रोटॉनों जितना।

3मानक मॉडल (Standard Model): 17 मूल कण

मानक मॉडल के 17 कण: 6 क्वार्क, 6 लेप्टॉन, 4 बल-वाहक बोसॉन और हिग्स बोसॉन

कण-भौतिकी का सबसे सफल सिद्धांत मानक मॉडल है। यह बताता है कि सारा दिखने वाला पदार्थ किन मूल कणों से बना है और वे तीन बलों (प्रबल, विद्युत-चुंबकीय, दुर्बल) से कैसे जुड़ते हैं। गुरुत्व इसमें शामिल नहीं है।

दो बड़े परिवार

परिवारपहचानउदाहरणकाम
फ़र्मियॉन (Fermion)आधा-पूर्णांक स्पिन (½); दो एक जैसे फ़र्मियॉन एक ही अवस्था में नहीं रह सकते (पाउली का अपवर्जन नियम)क्वार्क, इलेक्ट्रॉन, न्यूट्रिनोपदार्थ बनाते हैं
बोसॉन (Boson)पूर्णांक स्पिन (0, 1); कितने भी एक ही अवस्था में रह सकते हैंफ़ोटॉन, ग्लूऑन, W, Z, हिग्सबल पहुँचाते हैं (हिग्स द्रव्यमान से जुड़ा)

नाम के पीछे: "फ़र्मियॉन" इतालवी वैज्ञानिक एनरिको फ़र्मी के नाम पर, और "बोसॉन" भारतीय वैज्ञानिक सत्येंद्रनाथ बोस के नाम पर है। बोस ने 1924 में ढाका विश्वविद्यालय में काम करते हुए प्रकाश के कणों की गिनती का नया तरीका खोजा, जिसे आइंस्टीन ने आगे बढ़ाया: बोस-आइंस्टीन सांख्यिकी।

12 पदार्थ-कण (तीन पीढ़ियाँ)

पहली पीढ़ीदूसरी पीढ़ीतीसरी पीढ़ी
ऊपरी क्वार्क (+⅔)अप (u)चार्म (c)टॉप (t)
निचले क्वार्क (−⅓)डाउन (d)स्ट्रेंज (s)बॉटम (b)
आवेशित लेप्टॉन (−1)इलेक्ट्रॉन (e)म्यूऑन (μ)टाऊ (τ)
न्यूट्रिनो (0)इलेक्ट्रॉन न्यूट्रिनोम्यूऑन न्यूट्रिनोटाऊ न्यूट्रिनो
  • हमारे आस-पास का सारा सामान्य पदार्थ पहली पीढ़ी (u, d, e) से बना है। दूसरी और तीसरी पीढ़ी के कण भारी हैं और जल्दी टूट जाते हैं; ये ब्रह्मांडीय किरणों और त्वरकों में बनते हैं।
  • हर पीढ़ी पिछली से भारी है। सबसे भारी टॉप क्वार्क (लगभग 173 GeV) सोने के एक परमाणु जितना भारी है।
  • हर कण का एक प्रतिकण (Antiparticle) होता है: समान द्रव्यमान, उलटा आवेश (जैसे इलेक्ट्रॉन का पॉज़िट्रॉन)।

5 बोसॉन

  • फ़ोटॉन (γ): विद्युत-चुंबकीय बल; द्रव्यमान शून्य।
  • ग्लूऑन (g): प्रबल बल, क्वार्कों को बाँधता है; द्रव्यमान शून्य; 8 प्रकार।
  • W⁺, W⁻ और Z⁰: दुर्बल बल (रेडियोधर्मी बीटा क्षय, सूर्य में संलयन का पहला चरण); भारी (80 और 91 GeV); 1983 में CERN में खोजे गए।
  • हिग्स (H): स्पिन 0 वाला अकेला मूल कण (अदिश, Scalar); कणों को द्रव्यमान देने वाले क्षेत्र का कण।

गिनती का तरीका: 6 क्वार्क + 6 लेप्टॉन + 4 बल-वाहक (g, γ, Z, W) + 1 हिग्स = 17। (W⁺ और W⁻ को एक गिना जाता है।)

4प्रकृति के चार मूल बल

चार मूल बल, उनके वाहक कण, सापेक्ष शक्ति और पहुँच
बलकहाँ काम आता हैउदाहरण
गुरुत्वद्रव्यमान वाली हर वस्तु के बीच, बहुत कमज़ोर पर अनंत दूरी तकग्रहों की कक्षा, ज्वार-भाटा, पर्वतों का भार
विद्युत-चुंबकीयआवेशित कणों के बीचप्रकाश, बिजली, रासायनिक बंधन, घर्षण
प्रबल नाभिकीयनाभिक के भीतर, सबसे शक्तिशालीप्रोटॉनों को आपस में बाँधे रखना
दुर्बल नाभिकीयकणों के रूप बदलने मेंरेडियोधर्मिता, सूर्य में हाइड्रोजन से हीलियम बनना

बलों का एकीकरण

  • 1860 के दशक में मैक्सवेल ने बिजली और चुंबकत्व को एक बल (विद्युत-चुंबकीय) दिखाया।
  • 1960-70 के दशक में ग्लैशो, अब्दुस सलाम और वाइनबर्ग ने दिखाया कि बहुत ऊँची ऊर्जा पर विद्युत-चुंबकीय और दुर्बल बल एक ही "विद्युत-दुर्बल" (Electroweak) बल हैं (1979 का नोबेल)।
  • तो फिर आज ये अलग क्यों दिखते हैं? क्योंकि फ़ोटॉन भारहीन है (दूर तक पहुँचता है) और W, Z भारी हैं (बहुत छोटी दूरी)। यह भारीपन हिग्स क्षेत्र से आता है। यही हिग्स विचार की असली ज़रूरत थी।
  • बिग बैंग के ठीक बाद चारों बल एक माने जाते हैं; ठंडा होने के साथ वे अलग हुए (पेज 1.1 का चित्र "एक बल से चार बल")। गुरुत्व को बाकी बलों से जोड़ने वाला पूरा सिद्धांत ("क्वांटम गुरुत्व") अभी नहीं बना।

5हिग्स क्षेत्र और हिग्स बोसॉन: सरल भाषा में

भरे कमरे का उदाहरण: अनजान व्यक्ति तेज़ निकल जाता है, प्रसिद्ध व्यक्ति भीड़ में धीमा पड़ता है

क्षेत्र (Field) क्या है

क्षेत्र वह चीज़ है जो अंतरिक्ष के हर बिंदु पर कोई मान रखती है। जैसे किसी कमरे के हर बिंदु पर तापमान होता है, या पृथ्वी के चारों ओर हर जगह गुरुत्व और चुंबकीय क्षेत्र होता है। आधुनिक भौतिकी में हर कण किसी क्षेत्र की लहर (कंपन) है: फ़ोटॉन विद्युत-चुंबकीय क्षेत्र की लहर है, इलेक्ट्रॉन "इलेक्ट्रॉन क्षेत्र" की।

हिग्स क्षेत्र

  • यह पूरे ब्रह्मांड में, खाली दिखने वाले अंतरिक्ष में भी, फैला है और इसका मान कहीं शून्य नहीं है।
  • मूल कण चलते समय इस क्षेत्र से परस्पर क्रिया करते हैं। जितनी अधिक क्रिया, उतना अधिक द्रव्यमान:
कणक्षेत्र से क्रियाद्रव्यमान
फ़ोटॉन, ग्लूऑनबिल्कुल नहींशून्य; प्रकाश की चाल से चलते
इलेक्ट्रॉनबहुत कमहल्का (0.511 MeV)
W, Z बोसॉनअधिकभारी (80-91 GeV)
टॉप क्वार्कसबसे अधिकसबसे भारी (लगभग 173 GeV)

भरे कमरे का उदाहरण (1993, डेविड मिलर)

ब्रिटेन के एक मंत्री ने वैज्ञानिकों से पूछा था कि हिग्स को एक पन्ने में समझाइए। प्रो. डेविड मिलर का उत्तर: एक कमरे में पार्टी है और लोग बराबर फैले खड़े हैं (यह हिग्स क्षेत्र है)। कोई अनजान व्यक्ति आता है तो सीधा पार निकल जाता है (भारहीन कण)। पर कोई प्रसिद्ध व्यक्ति आए, तो लोग उसके चारों ओर जमा हो जाते हैं; उसे चलना कठिन हो जाता है, जैसे वह "भारी" हो गया हो (द्रव्यमान वाला कण)।

  • और अगर कमरे में कोई अफ़वाह फैले, तो लोग खुद आपस में झुंड बनाकर एक लहर बना देते हैं; यह लहर हिग्स बोसॉन है।

हिग्स क्षेत्र और हिग्स बोसॉन का अंतर

हिग्स क्षेत्रहिग्स बोसॉन
हर जगह फैला, अदृश्य माध्यमउस क्षेत्र में उठी लहर (कण)
कणों को द्रव्यमान देता हैक्षेत्र के होने का प्रमाण है
सीधे नहीं दिखताबहुत ऊँची ऊर्जा की टक्कर में थोड़े समय के लिए बनता है

सबसे ज़रूरी बात: द्रव्यमान हिग्स क्षेत्र देता है, हिग्स बोसॉन नहीं। बोसॉन को खोजना इसलिए ज़रूरी था कि उसी से पता चलता कि क्षेत्र सच में है। जैसे समुद्र में लहर देखकर पानी के होने का पता चलता है।

ऊपर के 3D मॉडल में "हिग्स क्षेत्र" दृश्य खोलिए: फ़ोटॉन बिना रुके दौड़ता है, इलेक्ट्रॉन के चारों ओर क्षेत्र थोड़ा घिरता है और टॉप क्वार्क के चारों ओर बहुत। "हिग्स लहर" दबाने पर क्षेत्र में लहर, यानी हिग्स बोसॉन, दिखेगा।

6सममिति का टूटना: बिग बैंग से संबंध

"मैक्सिकन टोपी": गर्म ब्रह्मांड में क्षेत्र का मान शून्य, ठंडा होने पर गेंद किनारे के गड्ढे में
  • बिग बैंग के तुरंत बाद ब्रह्मांड बहुत गर्म था। तब हिग्स क्षेत्र का औसत मान शून्य था, सब मूल कण भारहीन थे, और विद्युत-चुंबकीय और दुर्बल बल एक थे।
  • लगभग 10⁻¹² सेकंड बाद, जब तापमान लगभग 10¹⁵ K तक गिरा, हिग्स क्षेत्र "जम" गया; उसका मान शून्य नहीं रहा। इसे विद्युत-दुर्बल सममिति का टूटना (Electroweak Symmetry Breaking) कहते हैं।
  • मैक्सिकन टोपी का उदाहरण: टोपी के बीच के उभार पर रखी गेंद अस्थिर है; वह किसी भी ओर लुढ़ककर किनारे के गोल गड्ढे में आ जाती है। सममिति (हर दिशा बराबर) थी, पर गेंद ने एक दिशा "चुन" ली। गड्ढे में गेंद का कंपन = हिग्स बोसॉन।
  • जीवन के लिए महत्त्व: इलेक्ट्रॉन भारहीन होता, तो वह नाभिक के चारों ओर टिकता ही नहीं; परमाणु, अणु, तारे, ग्रह और जीवन कुछ नहीं बनता।
  • पेज 1.1 (बिग बैंग) में तीसरा चरण "कणों को भार" यही घटना है।

इस सिद्धांत के जनक

1964 में लगभग एक साथ तीन समूहों ने यह विचार दिया:

  1. फ़्रांस्वा एंगलर्ट और रॉबर्ट ब्राउट (बेल्जियम), अगस्त 1964
  2. पीटर हिग्स (ब्रिटेन, एडिनबरा), अक्टूबर 1964; इन्होंने स्पष्ट लिखा कि इससे एक नया कण बनना चाहिए
  3. गुरल्निक, हेगेन और किबल, नवंबर 1964

इसीलिए इसे कभी-कभी "BEH क्रियाविधि" (ब्राउट-एंगलर्ट-हिग्स) भी कहते हैं।

7ग़लतफ़हमी: हमारा सारा भार हिग्स से नहीं

प्रोटॉन के द्रव्यमान में हिग्स का हिस्सा लगभग 1%, बाकी प्रबल बल की ऊर्जा से
  • प्रोटॉन का द्रव्यमान लगभग 938 MeV है, पर उसके तीन क्वार्कों का अपना (हिग्स से मिला) द्रव्यमान जोड़ें तो केवल लगभग 9 MeV यानी लगभग 1% बनता है।
  • बाकी लगभग 99% द्रव्यमान क्वार्कों और ग्लूऑनों की तेज़ गति और प्रबल बल की बंधन-ऊर्जा से आता है (E = mc² से ऊर्जा ही द्रव्यमान बनती है)।
  • इसलिए हमारे शरीर और पृथ्वी का ज़्यादातर द्रव्यमान प्रबल बल से है। फिर भी हिग्स ज़रूरी है, क्योंकि:
  1. इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान पूरा हिग्स से है; इसके बिना परमाणु नहीं बनते।
  2. W और Z का द्रव्यमान हिग्स से है; इसके बिना दुर्बल बल लंबी दूरी तक काम करता और सूर्य बहुत तेज़ी से जलकर ख़त्म हो जाता।
  3. अप और डाउन क्वार्कों के द्रव्यमान का छोटा अंतर ही तय करता है कि न्यूट्रॉन प्रोटॉन से थोड़ा भारी हो; उलटा होता तो हाइड्रोजन टिकता नहीं।
  • न्यूट्रिनो का द्रव्यमान बहुत छोटा है; यह हिग्स से आता है या किसी और तरीके से, यह अभी खुला प्रश्न है (न्यूट्रिनो दोलन की खोज पर 2015 का नोबेल)।

8"गॉड पार्टिकल" नाम क्यों पड़ा

  • 1993 में नोबेल विजेता भौतिकविद लियोन लेडरमैन (और डिक टेरेसी) की लोकप्रिय विज्ञान पुस्तक का नाम था "The God Particle"।
  • कहा जाता है कि लेखक इसे "Goddamn Particle" (कमबख़्त कण) कहना चाहते थे, क्योंकि यह मिल ही नहीं रहा था; प्रकाशक ने छोटा नाम रखा।
  • मीडिया ने यह नाम अपना लिया, पर ज़्यादातर वैज्ञानिक, स्वयं पीटर हिग्स भी, इसे पसंद नहीं करते थे, क्योंकि इसका धर्म या ईश्वर से कोई संबंध नहीं है।
  • यह नाम केवल इसके महत्त्व को दिखाता है: मानक मॉडल का यह अंतिम और सबसे कठिन से मिलने वाला कण था, जो बाकी कणों को द्रव्यमान देने की व्याख्या से जुड़ा है।

परीक्षा में लिखें: "हिग्स बोसॉन, जिसे लोकप्रिय भाषा में 'गॉड पार्टिकल' कहा जाता है"। नाम को वैज्ञानिक तथ्य न बताएँ।

9सिद्धांत से खोज तक: 48 वर्ष की तलाश

1924 से 2030 तक: बोस, हिग्स सिद्धांत, LHC, खोज, नोबेल और आगे की योजनाएँ

हिग्स बोसॉन को खोजना इतना कठिन क्यों था

  1. सिद्धांत ने द्रव्यमान नहीं बताया: वैज्ञानिकों को पता नहीं था कि कितनी ऊर्जा पर खोजें।
  2. बनाने के लिए बहुत ऊर्जा चाहिए: E = mc² के अनुसार भारी कण बनाने के लिए टक्कर में उतनी ऊर्जा चाहिए।
  3. बहुत दुर्लभ: LHC में लगभग एक अरब टक्करों में से एक में हिग्स बनता है।
  4. तुरंत टूट जाता है: जीवन-काल लगभग 1.6 × 10⁻²² सेकंड; इसे सीधे नहीं देखा जा सकता, केवल उसके टूटने से बने कणों से पहचाना जाता है।

तलाश के पड़ाव

त्वरककहाँकबपरिणाम
LEP (इलेक्ट्रॉन-पॉज़िट्रॉन)CERN, इसी 27 किमी सुरंग में1989-2000हिग्स 114 GeV से हल्का नहीं
टेवाट्रॉन (प्रोटॉन-प्रतिप्रोटॉन)फ़र्मीलैब, अमेरिका1987-20112012 तक हल्का संकेत
LHCCERN2008 से2012 में खोज

4 जुलाई 2012

CERN में एक सेमिनार में ATLAS और CMS, दोनों प्रयोगों ने अलग-अलग बताया कि लगभग 125 GeV द्रव्यमान का नया कण मिला है, जिसकी सांख्यिकीय विश्वसनीयता लगभग 5 सिग्मा है। सभागार में बैठे पीटर हिग्स की आँखें भर आई थीं। मार्च 2013 तक और डेटा से पुष्टि हुई कि इसके गुण (स्पिन 0 आदि) हिग्स बोसॉन जैसे ही हैं।

नोबेल पुरस्कार, 2013 (भौतिकी)

फ़्रांस्वा एंगलर्ट और पीटर हिग्स को। रॉबर्ट ब्राउट का 2011 में निधन हो चुका था (नोबेल मृत्यु के बाद नहीं दिया जाता)। पीटर हिग्स का 8 अप्रैल 2024 को 94 वर्ष की आयु में निधन हुआ।

10CERN और लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (LHC)

प्रोटॉन छोटे त्वरकों से होते हुए LHC तक: हर चरण में ऊर्जा बढ़ती है

CERN

  • पूरा नाम: यूरोपीय नाभिकीय अनुसंधान संगठन (फ़्रेंच के पुराने नाम Conseil Européen pour la Recherche Nucléaire से CERN)।
  • स्थापना: 1954; मुख्यालय मेरिन, जिनेवा (स्विट्ज़रलैंड) के पास; प्रयोगशाला फ़्रांस-स्विट्ज़रलैंड सीमा के दोनों ओर।
  • दुनिया की सबसे बड़ी कण-भौतिकी प्रयोगशाला; 20 से अधिक सदस्य देश, कई सहयोगी सदस्य (भारत भी) और 100 से अधिक देशों के हज़ारों वैज्ञानिक।
  • वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) का जन्म यहीं 1989 में टिम बर्नर्स-ली के प्रस्ताव से हुआ।
  • 2026 से महानिदेशक मार्क थॉमसन (ब्रिटेन)।

LHC: एक नज़र में

बातमान
लंबाई (परिधि)लगभग 27 किमी (26.7 किमी)
गहराई50 से 175 मीटर, औसत लगभग 100 मीटर
किरणेंदो प्रोटॉन किरणें, उलटी दिशाओं में, अलग-अलग नलियों में
ऊर्जा (Run 3, 2022-2026)6.8 TeV प्रति किरण, टक्कर 13.6 TeV
प्रोटॉन की चालप्रकाश की चाल का 99.9999991%
चक्करएक सेकंड में लगभग 11,245 चक्कर
चुंबक1,232 मुख्य द्विध्रुव चुंबक (हर एक 15 मीटर), अतिचालक, लगभग 8 टेस्ला
तापमान−271.3 °C (1.9 K), बाहरी अंतरिक्ष (2.7 K) से भी ठंडा; तरल हीलियम से
नलियों के भीतरलगभग पूरा निर्वात, चंद्रमा की सतह जैसा
टक्करप्रति सेकंड लगभग एक अरब तक
पहली किरण10 सितंबर 2008

प्रोटॉन कहाँ से आते हैं

हाइड्रोजन गैस के परमाणुओं से इलेक्ट्रॉन हटाकर प्रोटॉन मिलते हैं। उन्हें क्रम से Linac 4 → PS बूस्टर → PS → SPS → LHC में तेज़ किया जाता है। LHC में लगभग 2,800 "गुच्छे" (Bunches) एक साथ घूमते हैं, हर गुच्छे में लगभग 10,000 करोड़ प्रोटॉन।

3D मॉडल का पहला दृश्य "LHC" यही दिखाता है: ज़मीन के नीचे गोल सुरंग, उलटी दिशा में दौड़ती दो किरणें, चार बड़े डिटेक्टर और छोटा SPS।

11डिटेक्टर: टक्कर को "देखा" कैसे जाता है

डिटेक्टर की परतें और हर तरह के कण का निशान

चार बड़े प्रयोग

प्रयोगपूरा नामउद्देश्य
ATLASA Toroidal LHC ApparatuSसामान्य-उद्देश्य; हिग्स और नए कण; 46 मी लंबा, 25 मी ऊँचा, लगभग 7,000 टन
CMSCompact Muon Solenoidसामान्य-उद्देश्य; 3.8 टेस्ला का विशाल चुंबक; लगभग 14,000 टन
ALICEA Large Ion Collider Experimentसीसे के नाभिकों की टक्कर से "क्वार्क-ग्लूऑन प्लाज़्मा", यानी बिग बैंग के तुरंत बाद जैसी अवस्था
LHCbLHC-beautyबॉटम क्वार्क से पदार्थ-प्रतिपदार्थ का अंतर
  • दो अलग प्रयोग (ATLAS और CMS) इसलिए, ताकि एक का परिणाम दूसरा स्वतंत्र रूप से जाँच सके। विज्ञान में यही विश्वसनीयता है।

डिटेक्टर प्याज़ की परतों जैसा है (अंदर से बाहर)

  1. ट्रैकर: आवेशित कणों का रास्ता; चुंबक में रास्ते का मुड़ना कण का संवेग और आवेश बताता है।
  2. विद्युत-चुंबकीय कैलोरीमीटर (ECAL): फ़ोटॉन और इलेक्ट्रॉन को रोककर ऊर्जा नापता है।
  3. हैड्रॉन कैलोरीमीटर (HCAL): प्रोटॉन, न्यूट्रॉन, पायॉन जैसे भारी कणों की ऊर्जा।
  4. चुंबक: रास्ते मोड़ने के लिए।
  5. म्यूऑन कक्ष: म्यूऑन सब परतें पार कर जाते हैं; सबसे बाहर इन्हें पकड़ा जाता है।
  • न्यूट्रिनो कोई निशान नहीं छोड़ते; कुल ऊर्जा में "कमी" से उनका पता चलता है।

इतना डेटा कैसे सँभलता है

हर सेकंड करोड़ों टक्करों में से तेज़ इलेक्ट्रॉनिक "ट्रिगर" केवल लगभग 1,000 रोचक घटनाएँ चुनता है। फिर भी हर वर्ष करोड़ों GB डेटा बनता है, जिसे विश्वव्यापी LHC कंप्यूटिंग ग्रिड (WLCG) के 40 से अधिक देशों के केंद्रों में बाँटकर जाँचा जाता है; भारत में भी इसके केंद्र हैं।

3D मॉडल का दूसरा दृश्य "टक्कर" खोलिए: दोनों ओर से प्रोटॉन आते हैं, टकराते हैं, आवेशित कणों के घुमावदार रास्ते बनते हैं और दो सुनहरी सीधी रेखाएँ (दो फ़ोटॉन) ECAL में रुकती हैं।

12खोज कैसे पक्की हुई: उभार, सिग्मा और क्षय

हिग्स बोसॉन किन कणों में कितने प्रतिशत टूटता है

हिग्स कैसे बनता है

LHC में ज़्यादातर (लगभग 87%) हिग्स दो ग्लूऑनों के मिलने (Gluon fusion) से बनते हैं; बाकी W/Z के साथ या टॉप क्वार्क के जोड़े के साथ।

हिग्स किसमें टूटता है

हिग्स भारी कणों से अधिक "जुड़ता" है, इसलिए सबसे ज़्यादा (लगभग 58%) बॉटम क्वार्क जोड़े में टूटता है। पर LHC में बॉटम क्वार्क बहुत सारी दूसरी प्रक्रियाओं से भी बनते हैं, इसलिए वहाँ पहचान कठिन है। खोज दुर्लभ पर साफ़ निशानों से हुई:

  • H → γγ (दो फ़ोटॉन): केवल लगभग 0.23%, पर दो ऊँची ऊर्जा वाले फ़ोटॉन बहुत साफ़ दिखते हैं।
  • H → ZZ → 4 लेप्टॉन (चार इलेक्ट्रॉन/म्यूऑन): "स्वर्णिम चैनल"।
दो फ़ोटॉनों के संयुक्त द्रव्यमान के ग्राफ़ में 125 GeV पर उभार

उभार (Bump) का तर्क

हर घटना में दो फ़ोटॉनों की ऊर्जा और दिशा से उनका संयुक्त द्रव्यमान निकाला जाता है। अगर वे किसी कण के टूटने से आए हों, तो यह मान हर बार उस कण के द्रव्यमान के आसपास आएगा। ग्राफ़ में चिकनी "पृष्ठभूमि" के ऊपर 125 GeV पर उभार दिखा।

3 सिग्मा "संकेत" और 5 सिग्मा "खोज"

5 सिग्मा क्यों

  • संयोग से भी आँकड़ों में उभार आ सकता है, जैसे सिक्का लगातार कई बार चित आ जाए।
  • कण-भौतिकी में 5σ (लगभग 35 लाख में 1 संयोग की संभावना) मिलने पर ही "खोज" मानी जाती है; 3σ को केवल "संकेत" (Evidence)।

हिग्स बोसॉन के गुण

गुणमान
द्रव्यमानलगभग 125 GeV (लगभग 125.2)
विद्युत आवेश0
स्पिन0 (अकेला ज्ञात मूल अदिश कण)
रंग आवेशनहीं (प्रबल बल से सीधा नहीं जुड़ता)
जीवन-काललगभग 1.6 × 10⁻²² सेकंड
प्रतिकणस्वयं ही अपना प्रतिकण

13खोज के बाद: अब तक क्या पता चला, आगे क्या

2012 के बाद की पुष्टियाँ

  • 2018: हिग्स का टॉप क्वार्क के साथ बनना (ttH) और बॉटम क्वार्क में टूटना (H → bb) देखा गया; यानी हिग्स तीसरी पीढ़ी के क्वार्कों को सचमुच द्रव्यमान देता है।
  • 2017-18: टाऊ लेप्टॉन जोड़े में टूटने की पुष्टि।
  • 2020: CMS ने हिग्स के म्यूऑन जोड़े में टूटने का संकेत (लगभग 3σ) दिया: पहली बार दूसरी पीढ़ी के कण से जुड़ाव।
  • अब तक के सभी माप मानक मॉडल की भविष्यवाणी से मेल खाते हैं। (रोचक बात: अगर कोई अंतर मिलता, तो वह "नई भौतिकी" का सुराग होता।)

अभी बाकी प्रश्न

  • हिग्स का स्व-युग्मन (Self-coupling): हिग्स खुद से कितना जुड़ता है? यही "मैक्सिकन टोपी" का असली आकार बताएगा। इसके लिए दो हिग्स एक साथ बनने की घटनाएँ गिननी होंगी, जो बहुत दुर्लभ हैं।
  • क्या एक से अधिक प्रकार के हिग्स कण हैं? क्या हिग्स डार्क मैटर से जुड़ता है?
  • निर्वात की स्थिरता: हिग्स और टॉप क्वार्क के मापे गए द्रव्यमान बताते हैं कि हमारा ब्रह्मांड शायद "अर्ध-स्थिर" (Metastable) अवस्था में है; पर कोई भी बदलाव ब्रह्मांड की आयु से अरबों-खरबों गुना अधिक समय बाद ही संभव है, इसलिए यह चिंता की बात नहीं, केवल सिद्धांत का प्रश्न है।

आगे की मशीनें

परियोजनाक्यासमय
LS3 (लंबा विराम 3)LHC की अंतिम किरणें जून 2026 के अंत में; जुलाई 2026 से लगभग चार वर्ष का काम2026-2030
हाई-ल्युमिनोसिटी LHC (HL-LHC)लगभग 10 गुना अधिक टक्करें; हिग्स के बारीक मापपहला संचालन लक्ष्य जून 2030
FCC-ee (फ़्यूचर सर्कुलर कोलाइडर)लगभग 91 किमी सुरंग, इलेक्ट्रॉन-पॉज़िट्रॉन; "हिग्स फ़ैक्टरी" (15 वर्ष में लगभग 30 लाख हिग्स)CERN परिषद ने 22 मई 2026 को यूरोपीय रणनीति में इसे अगली प्रमुख परियोजना माना; निर्णय लगभग 2028; संचालन 2040 के दशक में
CEPC (चीन), ILC (जापान का प्रस्ताव)दूसरी प्रस्तावित हिग्स फ़ैक्टरियाँप्रस्ताव/अध्ययन स्तर

इलेक्ट्रॉन-पॉज़िट्रॉन टक्कर "साफ़" होती है (मूल कण, कोई अंदरूनी क्वार्क नहीं), इसलिए हिग्स के गुण बहुत सटीक नापे जा सकते हैं; प्रोटॉन टक्कर "खोज" के लिए अच्छी है, इलेक्ट्रॉन टक्कर "सटीक माप" के लिए।

14मानक मॉडल की सीमाएँ: जिनका उत्तर अभी नहीं

  1. गुरुत्व इसमें शामिल नहीं; गुरुत्व और क्वांटम सिद्धांत को जोड़ना बाकी।
  2. डार्क मैटर (ब्रह्मांड का लगभग 27%) और डार्क एनर्जी (लगभग 68%) की व्याख्या नहीं; मानक मॉडल केवल लगभग 5% सामान्य पदार्थ बताता है (पेज 1.1)।
  3. न्यूट्रिनो का द्रव्यमान: मूल मॉडल में न्यूट्रिनो भारहीन थे, पर दोलन (Oscillation) के प्रयोगों से सिद्ध हुआ कि उनका छोटा द्रव्यमान है।
  4. पदार्थ-प्रतिपदार्थ असंतुलन: बिग बैंग में दोनों बराबर बनने चाहिए थे, फिर आज ब्रह्मांड में लगभग केवल पदार्थ क्यों है?
  5. पदानुक्रम समस्या (Hierarchy problem): हिग्स का द्रव्यमान केवल 125 GeV क्यों है, जबकि सिद्धांत के हिसाब से क्वांटम प्रभाव इसे बहुत भारी बना देने चाहिए थे? इसके लिए "अति-सममिति" (Supersymmetry) जैसे सिद्धांत दिए गए, पर LHC में अब तक उनके कण नहीं मिले।
  6. तीन पीढ़ियाँ ही क्यों, और कणों के द्रव्यमान इतने अलग-अलग क्यों?

15भारत और CERN

  • सत्येंद्रनाथ बोस (1894-1974): "बोसॉन" शब्द इन्हीं के नाम पर; बोस-आइंस्टीन सांख्यिकी (1924)। भारत सरकार ने इन्हें पद्म विभूषण दिया और कोलकाता का एस. एन. बोस राष्ट्रीय मूलभूत विज्ञान केंद्र इनके नाम पर है।
  • सहयोग का इतिहास: 1960 के दशक से भारतीय वैज्ञानिक CERN में; 1991 में सहयोग समझौता; 2002 में पर्यवेक्षक (Observer) का दर्जा; 16 जनवरी 2017 से सहयोगी सदस्य (Associate Member)। इससे भारतीय उद्योगों को CERN के ठेके और भारतीय नागरिकों को CERN की नौकरियाँ मिल सकती हैं, और भारत परिषद की बैठकों में भाग लेता है।
  • LHC के निर्माण में योगदान: परमाणु ऊर्जा विभाग की संस्थाओं (जैसे RRCAT इंदौर, BARC मुंबई) ने अतिचालक सुधार-चुंबक, चुंबकों को सटीक जगह रखने वाले जैक, सुरक्षा प्रणालियाँ और इंजीनियरिंग सहायता दी।
  • प्रयोगों में भागीदारी: CMS (TIFR मुंबई, BARC, पंजाब विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, SINP कोलकाता, NISER भुवनेश्वर, कई IIT आदि) और ALICE (VECC कोलकाता, अनेक विश्वविद्यालय)। हिग्स की खोज वाले CMS दल में भारतीय वैज्ञानिक भी थे।
  • कंप्यूटिंग: विश्वव्यापी LHC ग्रिड के भारतीय केंद्र (TIFR मुंबई में CMS के लिए, VECC कोलकाता में ALICE के लिए)।
  • भारत की दूसरी "बड़ी विज्ञान" परियोजनाएँ: LIGO-India (हिंगोली, महाराष्ट्र; पेज 1.1), प्रस्तावित भारतीय न्यूट्रिनो वेधशाला (INO), थेनी (तमिलनाडु), जो पर्यावरण और स्थानीय विरोध के कारण अटकी है; अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाएँ ITER (संलयन) और SKA (रेडियो दूरबीन) में भागीदारी।

16मूलभूत अनुसंधान से आम जीवन को लाभ

CERN जैसे प्रयोग "शुद्ध ज्ञान" के लिए हैं, पर उनसे निकली तकनीकें रोज़ के जीवन में आ गईं:

क्षेत्रयोगदान
संचारवर्ल्ड वाइड वेब (1989); बहुत बड़े डेटा को बाँटने की ग्रिड कंप्यूटिंग
चिकित्साPET स्कैन के डिटेक्टर, कैंसर के इलाज में प्रोटॉन-थेरेपी और हैड्रॉन-थेरेपी, MRI में अतिचालक चुंबकों की तकनीक
उद्योगअतिचालक तार, निर्वात तकनीक, विकिरण-रोधी इलेक्ट्रॉनिक्स
सुरक्षासामान की जाँच के स्कैनर, कणों के डिटेक्टर
शिक्षा और मानव संसाधनहज़ारों इंजीनियर-वैज्ञानिकों का प्रशिक्षण; अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की मिसाल ("Science for Peace")

2008 का डर: क्या LHC "ब्लैक होल" बना देगा?

LHC शुरू होने से पहले कुछ लोगों ने डर फैलाया कि टक्करें पृथ्वी को निगलने वाला ब्लैक होल बना देंगी। CERN की सुरक्षा समीक्षा (LSAG) ने बताया कि ब्रह्मांडीय किरणें अरबों वर्षों से पृथ्वी, चंद्रमा और तारों से LHC से भी अधिक ऊर्जा पर टकरा रही हैं, और कुछ नहीं हुआ। LHC 2008 से सुरक्षित चल रहा है।

17महत्त्वपूर्ण शब्दावली (हिंदी-अंग्रेज़ी)

हिंदीअंग्रेज़ीअर्थ
द्रव्यमानMassपदार्थ की मात्रा, जड़त्व का माप
मूल कणElementary particleजो और छोटे कणों से नहीं बना (क्वार्क, इलेक्ट्रॉन)
मानक मॉडलStandard Model17 मूल कण और तीन बलों का सिद्धांत
फ़र्मियॉन / बोसॉनFermion / Bosonपदार्थ-कण (स्पिन ½) / बल-वाहक कण (पूर्णांक स्पिन)
क्वार्क / लेप्टॉनQuark / Leptonप्रबल बल महसूस करने वाले / न करने वाले फ़र्मियॉन
हैड्रॉनHadronक्वार्कों से बने कण (प्रोटॉन, न्यूट्रॉन); LHC का "H"
हिग्स क्षेत्रHiggs fieldपूरे अंतरिक्ष में फैला क्षेत्र जो कणों को द्रव्यमान देता है
सममिति का टूटनाSymmetry breakingगर्म अवस्था की बराबरी का ठंडा होने पर टूट जाना
कण-त्वरकParticle acceleratorकणों को बहुत तेज़ करने की मशीन
कोलाइडरColliderदो किरणों को आमने-सामने टकराने वाला त्वरक
ल्युमिनोसिटीLuminosityएक समय में कितनी टक्करें संभव, इसका माप
इलेक्ट्रॉन-वोल्टElectron-volt (eV)ऊर्जा और द्रव्यमान की इकाई
अतिचालकताSuperconductivityबहुत कम तापमान पर बिना प्रतिरोध के धारा
सांख्यिकीय विश्वसनीयताStatistical significance (σ)परिणाम संयोग न होने का माप
जीवन-कालLifetimeकण के टूटने से पहले का औसत समय

18आम ग़लतफ़हमियाँ और सही बात

ग़लतफ़हमीसही बात
"गॉड पार्टिकल" का संबंध ईश्वर से हैकेवल एक किताब का नाम था; वैज्ञानिक इसे हिग्स बोसॉन कहते हैं
हिग्स बोसॉन कणों को द्रव्यमान देता हैद्रव्यमान हिग्स क्षेत्र देता है; बोसॉन उसकी लहर और प्रमाण है
हमारा सारा भार हिग्स से हैप्रोटॉन-न्यूट्रॉन का लगभग 99% भार प्रबल बल की ऊर्जा से; हिग्स से लगभग 1%
हिग्स गुरुत्व पैदा करता हैनहीं; गुरुत्व का संबंध द्रव्यमान-ऊर्जा से है, हिग्स केवल मूल कणों का द्रव्यमान तय करता है
हिग्स बोसॉन को सीधे देखा गयायह 10⁻²² सेकंड में टूट जाता है; उसके टूटने से बने कणों से पहचाना गया
हिग्स की खोज से भौतिकी "पूरी" हो गईडार्क मैटर, गुरुत्व, न्यूट्रिनो द्रव्यमान जैसे बड़े प्रश्न बाकी
बोसॉन शब्द हिग्स के नाम पर हैसत्येंद्रनाथ बोस के नाम पर
LHC केवल हिग्स के लिए बनाहिग्स के साथ-साथ नए कण, क्वार्क-ग्लूऑन प्लाज़्मा, पदार्थ-प्रतिपदार्थ का अध्ययन भी
LHC से ब्लैक होल बनकर पृथ्वी ख़त्म हो सकती हैब्रह्मांडीय किरणें इससे अधिक ऊर्जा पर अरबों वर्षों से टकरा रही हैं; कोई ख़तरा नहीं

19UPSC: प्रीलिम्स के तथ्यUPSC विशेष

  • हिग्स सिद्धांत: 1964 (एंगलर्ट-ब्राउट, हिग्स, गुरल्निक-हेगेन-किबल)। खोज: 4 जुलाई 2012, CERN, LHC, ATLAS और CMS। नोबेल 2013: हिग्स और एंगलर्ट।
  • द्रव्यमान लगभग 125 GeV; आवेश 0; स्पिन 0; जीवन-काल लगभग 10⁻²² सेकंड।
  • "गॉड पार्टिकल" नाम: लियोन लेडरमैन की 1993 की किताब।
  • "बोसॉन": सत्येंद्रनाथ बोस; बोस-आइंस्टीन सांख्यिकी 1924।
  • मानक मॉडल: 17 कण = 6 क्वार्क + 6 लेप्टॉन + 4 बल-वाहक + हिग्स; गुरुत्व शामिल नहीं।
  • प्रोटॉन = uud; न्यूट्रॉन = udd; सबसे भारी मूल कण: टॉप क्वार्क।
  • बल-वाहक: फ़ोटॉन (विद्युत-चुंबकीय), ग्लूऑन (प्रबल), W/Z (दुर्बल); ग्रैविटॉन केवल परिकल्पना।
  • CERN: 1954, जिनेवा के पास, फ़्रांस-स्विट्ज़रलैंड सीमा; WWW का जन्मस्थान (1989)।
  • LHC: लगभग 27 किमी; −271.3 °C; Run 3 में 13.6 TeV; प्रोटॉन (और सीसे के नाभिक) टकराता है।
  • चार प्रयोग: ATLAS, CMS (सामान्य), ALICE (क्वार्क-ग्लूऑन प्लाज़्मा), LHCb (पदार्थ-प्रतिपदार्थ)।
  • भारत: CERN का सहयोगी सदस्य, 2017 से।
  • खोज की कसौटी: 5σ। खोज के चैनल: γγ और ZZ → 4ℓ।
  • LHC: जुलाई 2026 से LS3; HL-LHC लक्ष्य 2030; FCC-ee लगभग 91 किमी (मई 2026 रणनीति)।

कथन वाले प्रश्न (अभ्यास)

हिग्स बोसॉन के संदर्भ में: (1) यह मानक मॉडल का एकमात्र स्पिन-0 मूल कण है। (2) यह सब मूल कणों को समान द्रव्यमान देता है। (3) इसकी खोज CERN के LHC में हुई। सही कथन?

(1) और (3)। (2) ग़लत: हर कण का द्रव्यमान हिग्स क्षेत्र से उसकी अलग-अलग क्रिया पर निर्भर है, और फ़ोटॉन-ग्लूऑन को कोई द्रव्यमान नहीं मिलता।

निम्न युग्मों पर विचार कीजिए: (1) ALICE: क्वार्क-ग्लूऑन प्लाज़्मा (2) LHCb: पदार्थ-प्रतिपदार्थ असममिति (3) CMS: गुरुत्वीय तरंगें। कौन-से सही सुमेलित हैं?

(1) और (2)। गुरुत्वीय तरंगें LIGO, Virgo जैसी वेधशालाओं का विषय हैं।

मानक मॉडल किसकी व्याख्या नहीं करता? (1) गुरुत्व (2) डार्क मैटर (3) विद्युत-चुंबकीय बल (4) न्यूट्रिनो का द्रव्यमान (मूल रूप में)

(1), (2) और (4)। विद्युत-चुंबकीय बल इसमें शामिल है।

20इस विषय से प्रश्न किस तरह आते हैंUPSC विशेष

  • सीधे तथ्य: खोज का वर्ष और स्थान, नोबेल, "गॉड पार्टिकल" नाम, बोसॉन का नामकरण, मानक मॉडल के कण।
  • कथन वाले प्रश्न: हिग्स क्षेत्र और बोसॉन का अंतर, द्रव्यमान किसे मिलता है किसे नहीं, LHC के प्रयोगों के उद्देश्य।
  • ताज़ा घटनाओं से जोड़कर: पीटर हिग्स का निधन (2024), LHC का LS3 और HL-LHC, FCC-ee, भारत की CERN सदस्यता, LIGO-India और INO जैसी परियोजनाएँ।
  • मेन्स GS-3 (विज्ञान-प्रौद्योगिकी): मूलभूत अनुसंधान का महत्त्व, "बड़ा विज्ञान" (Mega science) और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, भारत का योगदान और लाभ।
  • निबंध और नैतिकता: "ज्ञान के लिए ज्ञान", विज्ञान और समाज, विज्ञान में सहयोग और शांति।
  • भूगोल GS-1 से जुड़ाव: बिग बैंग, ब्रह्मांड का विकास, पदार्थ की उत्पत्ति।

तैयारी का तरीका: पहले 3D मॉडल के चारों दृश्य देखें; फिर "हिग्स क्षेत्र और बोसॉन का अंतर", "17 कण" और "भारत और CERN" ठीक से याद करें; ताज़ा घटनाक्रम वाली तालिका परीक्षा से पहले दोबारा देखें।

21UPSC मेन्स: पूरे आदर्श उत्तरUPSC विशेष

हिग्स बोसॉन क्या है? इसकी खोज मूलभूत भौतिकी के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण थी? इसमें भारत की भूमिका बताइए। (15 अंक, 250 शब्द)

भूमिका: हिग्स बोसॉन, हिग्स क्षेत्र का कण है। यह क्षेत्र पूरे ब्रह्मांड में फैला है और मूल कणों को द्रव्यमान देता है। 1964 में पीटर हिग्स, एंगलर्ट-ब्राउट आदि ने इसकी भविष्यवाणी की; 4 जुलाई 2012 को CERN के LHC में ATLAS और CMS प्रयोगों ने लगभग 125 GeV के इस कण की खोज घोषित की; 2013 में हिग्स और एंगलर्ट को नोबेल मिला।

महत्त्व: (1) मानक मॉडल पूरा हुआ: इसके 17 कणों में यह अंतिम अनदेखा कण था। (2) द्रव्यमान की व्याख्या: W, Z बोसॉन और क्वार्क-लेप्टॉन को द्रव्यमान कैसे मिला, इसकी पुष्टि; विद्युत-दुर्बल सममिति के टूटने का प्रमाण। (3) ब्रह्मांड का विकास: बिग बैंग के लगभग 10⁻¹² सेकंड बाद की घटना की समझ, जिसके बिना परमाणु, तारे और जीवन संभव नहीं। (4) नई भौतिकी की खिड़की: हिग्स के सटीक माप से डार्क मैटर, निर्वात स्थिरता और पदानुक्रम समस्या के सुराग। (5) विज्ञान की पद्धति: सिद्धांत की भविष्यवाणी के 48 वर्ष बाद प्रयोग से पुष्टि; दो स्वतंत्र प्रयोग; 5σ की कसौटी। भारत की भूमिका: (1) "बोसॉन" नाम सत्येंद्रनाथ बोस के सम्मान में। (2) LHC के निर्माण में RRCAT, BARC आदि का योगदान: अतिचालक चुंबक, सटीक जैक, सुरक्षा प्रणाली। (3) CMS और ALICE में TIFR, BARC, विश्वविद्यालयों और IIT के वैज्ञानिक। (4) ग्रिड कंप्यूटिंग केंद्र। (5) 2017 से CERN का सहयोगी सदस्य, जिससे भारतीय उद्योग और युवा वैज्ञानिकों को अवसर। निष्कर्ष: हिग्स की खोज मानव ज्ञान की बड़ी उपलब्धि और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की मिसाल है; भारत को इस तरह के मूलभूत अनुसंधान में भागीदारी और बढ़ानी चाहिए।

"बड़ा विज्ञान" (Mega Science) परियोजनाओं में भारत की भागीदारी के लाभ और चुनौतियों की चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

भूमिका: बड़ा विज्ञान उन परियोजनाओं को कहते हैं जिनमें बहुत बड़ा निवेश, विशाल उपकरण और अनेक देशों का सहयोग होता है, जैसे CERN का LHC, ITER (संलयन ऊर्जा), SKA (रेडियो दूरबीन), LIGO-India, TMT (तीस मीटर दूरबीन)। भारत 2017 से CERN का सहयोगी सदस्य है।

लाभ: (1) ज्ञान और प्रतिष्ठा: दुनिया के अग्रणी प्रश्नों पर काम; नोबेल स्तर की खोजों में भागीदारी। (2) तकनीक का विकास: अतिचालक चुंबक, निर्वात, क्रायोजेनिक्स, डिटेक्टर, बड़ा डेटा और ग्रिड कंप्यूटिंग; इनका उपयोग चिकित्सा, अंतरिक्ष, रक्षा और उद्योग में। (3) उद्योग को ठेके: "मेक इन इंडिया" के लिए उच्च-तकनीकी निर्माण का अनुभव। (4) मानव संसाधन: युवा वैज्ञानिकों-इंजीनियरों का प्रशिक्षण और प्रतिभा-पलायन को कम करना। (5) विज्ञान कूटनीति: अंतर्राष्ट्रीय संबंध और शांति के लिए सहयोग। चुनौतियाँ: (1) ऊँची लागत और लंबी अवधि; स्वास्थ्य-शिक्षा जैसी तात्कालिक ज़रूरतों से प्रतिस्पर्धा। (2) अनुसंधान पर कुल खर्च GDP का केवल लगभग 0.6-0.7%। (3) परियोजनाओं में देरी: INO (थेनी) पर्यावरण और स्थानीय विरोध से अटका; LIGO-India में भूमि और निर्माण में देरी। (4) निजी क्षेत्र की कम भागीदारी। (5) केवल "भागीदार" बने रहने का ख़तरा, नेतृत्व की कमी। आगे का रास्ता: अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फ़ाउंडेशन (ANRF) से दीर्घकालीन धन; उद्योग-अकादमिक साझेदारी; स्थानीय समुदायों से संवाद; भारत में भी एक बड़ी अंतर्राष्ट्रीय सुविधा का लक्ष्य। निष्कर्ष: मूलभूत विज्ञान में निवेश दीर्घकालीन राष्ट्रीय क्षमता में निवेश है; WWW जैसी अनपेक्षित खोजें इसका प्रमाण हैं।

"मूलभूत अनुसंधान का तुरंत कोई उपयोग नहीं दिखता, फिर भी समाज के लिए यह अनिवार्य है।" CERN के उदाहरण से स्पष्ट कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)

भूमिका: मूलभूत अनुसंधान का उद्देश्य प्रकृति को समझना है, किसी तात्कालिक उत्पाद को बनाना नहीं। CERN (1954) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

मुख्य भाग: (1) अनपेक्षित तकनीकें: वैज्ञानिकों के बीच सूचना बाँटने के लिए बना वर्ल्ड वाइड वेब (1989) आज पूरी अर्थव्यवस्था का आधार है। (2) चिकित्सा: PET स्कैन, प्रोटॉन-थेरेपी, MRI में अतिचालक चुंबक। (3) कंप्यूटिंग: ग्रिड कंप्यूटिंग से आगे क्लाउड जैसी व्यवस्थाओं को प्रेरणा। (4) मानव संसाधन और सहयोग: हज़ारों प्रशिक्षित इंजीनियर; शीतयुद्ध के समय भी पूर्व-पश्चिम के वैज्ञानिकों का साथ काम करना। (5) इतिहास का प्रमाण: 19वीं सदी में बिजली और चुंबकत्व का "बेकार" अध्ययन ही आज की पूरी बिजली व्यवस्था बना। निष्कर्ष: मूलभूत अनुसंधान वह बीज है जिसका फल पीढ़ियों बाद मिलता है; इसलिए इसमें धैर्य से निवेश दूरदर्शी नीति है।

अभ्यास के लिए और प्रश्न (उत्तर का ढाँचा)

मानक मॉडल क्या है? इसकी सीमाएँ बताइए। (150 शब्द)

17 कण, तीन बल; सफल भविष्यवाणियाँ (W, Z, टॉप, हिग्स); सीमाएँ: गुरुत्व, डार्क मैटर-एनर्जी, न्यूट्रिनो द्रव्यमान, पदार्थ-प्रतिपदार्थ असंतुलन, पदानुक्रम समस्या; आगे के प्रयोग (HL-LHC, FCC-ee)।

भारत के CERN का सहयोगी सदस्य बनने के क्या लाभ हैं? (150 शब्द)

2017; उद्योगों को ठेके, नागरिकों को रोज़गार, परिषद में भागीदारी, प्रशिक्षण, तकनीक; पूर्ण सदस्यता के लिए अधिक योगदान की ज़रूरत।

22ताज़ा घटनाक्रम (अक्टूबर 2026 तक)UPSC विशेष

विषयक्या हुआकिस बात से जुड़ा
LHC का LS3अंतिम किरणें जून 2026 के अंत में; जुलाई 2026 से लगभग चार वर्ष का "लंबा विराम 3", जिसमें लगभग 1.2 किमी के चुंबक और उपकरण बदले जाएँगेLHC, HL-LHC
HL-LHCपहला संचालन लक्ष्य जून 2030; मशीन का धीरे-धीरे पुनः आरंभ 2028 के मध्य से; लगभग 10 गुना अधिक टक्करेंहिग्स के सटीक माप
यूरोपीय रणनीति (कण-भौतिकी)CERN परिषद ने 22 मई 2026 को अद्यतन रणनीति अपनाई; HL-LHC पहली प्राथमिकता, उसके बाद FCC-ee (लगभग 91 किमी, पहला चरण लगभग 16 अरब यूरो) अगली प्रमुख परियोजना; अंतिम निर्णय लगभग 2028भविष्य के कोलाइडर
CERN नेतृत्व1 जनवरी 2026 से मार्क थॉमसन महानिदेशक (फ़ैबियोला जियानोटी के बाद)CERN
पीटर हिग्स8 अप्रैल 2024 को निधन (94 वर्ष)हिग्स बोसॉन
LHC Run 32022 से 13.6 TeV की रिकॉर्ड ऊर्जा पर टक्करेंLHC

यह भाग समय के साथ बदलता है; परीक्षा से पहले ताज़ा स्थिति अवश्य देखें।

23अभ्यास: 50 बहुविकल्पीय प्रश्न (व्याख्या सहित)परीक्षा के प्रश्न

हिग्स बोसॉन की खोज की घोषणा कब हुई? (a) 4 जुलाई 2012 (b) 10 सितंबर 2008 (c) 8 अक्टूबर 2013 (d) 14 सितंबर 2015

(a) 4 जुलाई 2012। 2008 में LHC शुरू हुआ; अक्टूबर 2013 में नोबेल घोषित हुआ; 2015 में गुरुत्वीय तरंगें पकड़ी गईं।

हिग्स बोसॉन की खोज किस त्वरक में हुई? (a) टेवाट्रॉन (b) LEP (c) LHC (d) SLAC

(c) CERN का LHC। LEP उसी सुरंग में पहले चला था, पर हिग्स नहीं मिला।

किन दो प्रयोगों ने खोज की घोषणा की? (a) ALICE और LHCb (b) ATLAS और CMS (c) LIGO और Virgo (d) Super-K और SNO

(b) ATLAS और CMS, दोनों ने स्वतंत्र रूप से।

2013 का भौतिकी नोबेल किन्हें मिला? (a) हिग्स और एंगलर्ट (b) हिग्स और ब्राउट (c) लेडरमैन और हिग्स (d) ग्लैशो और सलाम

(a)। ब्राउट का 2011 में निधन हो चुका था; ग्लैशो-सलाम को 1979 में मिला।

"बोसॉन" शब्द किसके नाम पर है? (a) नील्स बोर (b) सत्येंद्रनाथ बोस (c) जगदीश चंद्र बोस (d) मैक्स बॉर्न

(b) सत्येंद्रनाथ बोस, बोस-आइंस्टीन सांख्यिकी (1924) के लिए।

"The God Particle" पुस्तक किसकी है? (a) पीटर हिग्स (b) स्टीफ़न हॉकिंग (c) लियोन लेडरमैन (d) कार्ल सेगन

(c) लियोन लेडरमैन (1993)। हिग्स स्वयं यह नाम पसंद नहीं करते थे।

हिग्स बोसॉन का द्रव्यमान लगभग: (a) 0.938 GeV (b) 91 GeV (c) 125 GeV (d) 173 GeV

(c) 125 GeV। 0.938 प्रोटॉन, 91 Z बोसॉन और 173 टॉप क्वार्क के हैं।

हिग्स बोसॉन का स्पिन: (a) ½ (b) 1 (c) 0 (d) 2

(c) 0। यह अकेला ज्ञात मूल अदिश कण है; 2 स्पिन परिकल्पित ग्रैविटॉन का है।

मूल कणों को द्रव्यमान कौन देता है? (a) हिग्स बोसॉन (b) हिग्स क्षेत्र (c) ग्लूऑन (d) गुरुत्व

(b) हिग्स क्षेत्र। बोसॉन उस क्षेत्र की लहर और उसका प्रमाण है।

किसे हिग्स क्षेत्र से कोई द्रव्यमान नहीं मिलता? (a) इलेक्ट्रॉन (b) W बोसॉन (c) फ़ोटॉन (d) टॉप क्वार्क

(c) फ़ोटॉन, इसलिए वह प्रकाश की चाल से चलता है।

मानक मॉडल में कुल मूल कण: (a) 12 (b) 17 (c) 24 (d) 61

(b) 17: 6 क्वार्क, 6 लेप्टॉन, 4 बल-वाहक, 1 हिग्स। (रंग और प्रतिकण अलग गिनें तो 61 बनते हैं।)

सबसे भारी ज्ञात मूल कण: (a) हिग्स बोसॉन (b) Z बोसॉन (c) टॉप क्वार्क (d) टाऊ

(c) टॉप क्वार्क (लगभग 173 GeV)।

प्रोटॉन किन क्वार्कों से बना है? (a) uud (b) udd (c) uuu (d) usd

(a) uud: +⅔ +⅔ −⅓ = +1। udd न्यूट्रॉन है।

क्वार्कों को आपस में कौन बाँधता है? (a) फ़ोटॉन (b) ग्लूऑन (c) W बोसॉन (d) हिग्स

(b) ग्लूऑन, प्रबल बल का वाहक।

दुर्बल बल के वाहक: (a) फ़ोटॉन (b) ग्लूऑन (c) W और Z (d) ग्रैविटॉन

(c) W और Z (1983 में CERN में खोजे गए)।

कौन-सा बल मानक मॉडल में शामिल नहीं? (a) प्रबल (b) दुर्बल (c) विद्युत-चुंबकीय (d) गुरुत्व

(d) गुरुत्व।

फ़र्मियॉन की पहचान: (a) पूर्णांक स्पिन (b) आधा-पूर्णांक स्पिन, अपवर्जन नियम मानते हैं (c) द्रव्यमान शून्य (d) केवल बल पहुँचाते हैं

(b)। पूर्णांक स्पिन वाले बोसॉन हैं।

निम्न में लेप्टॉन नहीं है: (a) इलेक्ट्रॉन (b) म्यूऑन (c) न्यूट्रिनो (d) प्रोटॉन

(d) प्रोटॉन हैड्रॉन है (क्वार्कों से बना)।

विद्युत-दुर्बल एकीकरण के लिए 1979 का नोबेल: (a) हिग्स, एंगलर्ट (b) ग्लैशो, सलाम, वाइनबर्ग (c) फ़ेनमैन, श्विंगर, तोमोनागा (d) गेल-मान

(b)। अब्दुस सलाम पाकिस्तान के पहले नोबेल विजेता थे।

हिग्स क्षेत्र "जमने" (सममिति टूटने) की घटना बिग बैंग के लगभग कितने समय बाद? (a) 10⁻⁴³ से. (b) 10⁻¹² से. (c) 3 मिनट (d) 3 लाख वर्ष

(b) 10⁻¹² सेकंड। 3 मिनट पर नाभिक और 3 लाख वर्ष पर परमाणु बने।

प्रोटॉन के द्रव्यमान में हिग्स से मिला हिस्सा लगभग: (a) 1% (b) 50% (c) 90% (d) 100%

(a) लगभग 1%; बाकी प्रबल बल की ऊर्जा से।

हिग्स बोसॉन का जीवन-काल लगभग: (a) 15 मिनट (b) 1 सेकंड (c) 10⁻²² सेकंड (d) अनंत

(c) 1.6 × 10⁻²² सेकंड। 15 मिनट मुक्त न्यूट्रॉन का है।

हिग्स सबसे अधिक किसमें टूटता है? (a) दो फ़ोटॉन (b) बॉटम क्वार्क जोड़ा (c) चार लेप्टॉन (d) दो म्यूऑन

(b) बॉटम क्वार्क जोड़ा (लगभग 58%)। फ़ोटॉन जोड़ा केवल 0.23% पर पहचान में आसान।

हिग्स की खोज के मुख्य "साफ़" चैनल थे: (a) bb̄ और cc̄ (b) γγ और ZZ → 4ℓ (c) gg और ττ (d) केवल WW

(b) γγ और ZZ → 4 लेप्टॉन।

कण-भौतिकी में "खोज" के लिए सांख्यिकीय कसौटी: (a) 1σ (b) 3σ (c) 5σ (d) 10σ

(c) 5σ (लगभग 35 लाख में 1 संयोग); 3σ "संकेत" है।

CERN की स्थापना और स्थान: (a) 1954, जिनेवा के पास (b) 1945, पेरिस (c) 1960, बर्लिन (d) 1954, ब्रुसेल्स

(a) 1954; प्रयोगशाला फ़्रांस-स्विट्ज़रलैंड सीमा पर।

वर्ल्ड वाइड वेब का आविष्कार कहाँ हुआ? (a) MIT (b) CERN (c) बेल लैब्स (d) DARPA

(b) CERN, 1989, टिम बर्नर्स-ली। इंटरनेट (नेटवर्क) अलग है, जिसकी जड़ें अमेरिकी ARPANET में हैं।

LHC की परिधि लगभग: (a) 7 किमी (b) 27 किमी (c) 91 किमी (d) 100 किमी

(b) 27 किमी। 7 किमी SPS है और 91 किमी प्रस्तावित FCC।

LHC के चुंबकों का कार्य-तापमान: (a) 0 °C (b) −196 °C (c) −271.3 °C (d) −100 °C

(c) −271.3 °C (1.9 K), तरल हीलियम से; −196 °C तरल नाइट्रोजन का है।

LHC Run 3 में टक्कर की ऊर्जा: (a) 7 TeV (b) 13.6 TeV (c) 100 TeV (d) 1 TeV

(b) 13.6 TeV (6.8 + 6.8)।

LHC में मुख्य रूप से कौन-से कण टकराए जाते हैं? (a) इलेक्ट्रॉन-पॉज़िट्रॉन (b) प्रोटॉन-प्रोटॉन (और सीसे के नाभिक) (c) न्यूट्रॉन-न्यूट्रॉन (d) फ़ोटॉन-फ़ोटॉन

(b)। इलेक्ट्रॉन-पॉज़िट्रॉन टक्कर LEP में होती थी और FCC-ee में प्रस्तावित है।

"LHC" का "H" किस शब्द के लिए है? (a) हिग्स (b) हाइड्रोजन (c) हैड्रॉन (d) हीलियम

(c) हैड्रॉन: क्वार्कों से बने कण, जैसे प्रोटॉन।

क्वार्क-ग्लूऑन प्लाज़्मा का अध्ययन मुख्य रूप से कौन-सा प्रयोग करता है? (a) ATLAS (b) ALICE (c) LHCb (d) CMS

(b) ALICE, सीसे के नाभिकों की टक्कर से।

पदार्थ-प्रतिपदार्थ के अंतर का अध्ययन, बॉटम क्वार्क से: (a) LHCb (b) ALICE (c) LIGO (d) IceCube

(a) LHCb ("b" = beauty/बॉटम)।

डिटेक्टर में फ़ोटॉन की पहचान: (a) ट्रैकर में रेखा, म्यूऑन कक्ष तक (b) ट्रैकर में रेखा नहीं, ECAL में रुकता (c) HCAL में रुकता (d) कोई निशान नहीं

(b)। फ़ोटॉन आवेश-रहित है, इसलिए ट्रैकर में रेखा नहीं; ऊर्जा ECAL में।

कौन-सा कण डिटेक्टर में कोई निशान नहीं छोड़ता? (a) म्यूऑन (b) इलेक्ट्रॉन (c) न्यूट्रिनो (d) प्रोटॉन

(c) न्यूट्रिनो; ऊर्जा की कमी से पता चलता है।

भारत CERN का सहयोगी सदस्य कब बना? (a) 2002 (b) 2012 (c) 2017 (d) 2021

(c) 16 जनवरी 2017। 2002 में पर्यवेक्षक बना था।

भारत की कौन-सी संस्था LHC के घटक बनाने से जुड़ी रही? (a) RRCAT इंदौर (b) ISRO बेंगलुरु (c) IMD पुणे (d) NIO गोवा

(a) RRCAT (BARC के साथ), परमाणु ऊर्जा विभाग की संस्था।

प्रस्तावित भारतीय न्यूट्रिनो वेधशाला (INO) कहाँ है? (a) हिंगोली, महाराष्ट्र (b) थेनी, तमिलनाडु (c) हानले, लद्दाख (d) माउंट आबू

(b) थेनी। हिंगोली में LIGO-India और हानले में भारतीय खगोलीय वेधशाला है।

पीटर हिग्स का निधन: (a) 2018 (b) 2021 (c) 2024 (d) 2026

(c) 8 अप्रैल 2024।

LHC का "लंबा विराम 3" (LS3) कब शुरू हुआ? (a) जुलाई 2024 (b) जुलाई 2026 (c) 2030 (d) 2018

(b) जुलाई 2026; हाई-ल्युमिनोसिटी LHC का लक्ष्य 2030।

प्रस्तावित FCC-ee की लंबाई लगभग: (a) 27 किमी (b) 50 किमी (c) 91 किमी (d) 200 किमी

(c) लगभग 91 किमी; मई 2026 की यूरोपीय रणनीति में अगली प्रमुख परियोजना के रूप में अनुशंसित।

FCC-ee को "हिग्स फ़ैक्टरी" क्यों कहा जाता है? (a) यह हिग्स को नष्ट करेगी (b) बहुत अधिक हिग्स बनाकर सटीक माप करेगी (c) यह केवल फ़ोटॉन टकराएगी (d) यह गुरुत्वीय तरंग नापेगी

(b) इलेक्ट्रॉन-पॉज़िट्रॉन की साफ़ टक्करों से लाखों हिग्स बनाकर बारीक माप।

हिग्स का तीसरी पीढ़ी के क्वार्कों (टॉप, बॉटम) से जुड़ाव कब देखा गया? (a) 2012 (b) 2015 (c) 2018 (d) 2024

(c) 2018 (ttH और H → bb)।

न्यूट्रिनो में द्रव्यमान होने का प्रमाण किससे मिला? (a) हिग्स की खोज (b) न्यूट्रिनो दोलन (c) CMB (d) गुरुत्वीय तरंगें

(b) न्यूट्रिनो दोलन (2015 का नोबेल); यह मानक मॉडल के मूल रूप से बाहर की बात है।

"पदानुक्रम समस्या" किससे जुड़ी है? (a) हिग्स का द्रव्यमान इतना हल्का क्यों (b) ग्रहों का क्रम (c) तारों का वर्गीकरण (d) चट्टानों की परतें

(a) क्वांटम प्रभावों के बावजूद हिग्स का द्रव्यमान केवल 125 GeV क्यों है।

1 GeV बराबर: (a) 10⁶ eV (b) 10⁹ eV (c) 10¹² eV (d) 10³ eV

(b) 10⁹ eV (100 करोड़); 10¹² eV = 1 TeV।

रदरफ़ोर्ड के स्वर्ण-पत्र प्रयोग से क्या पता चला? (a) इलेक्ट्रॉन (b) छोटा, भारी, धनावेशित नाभिक (c) न्यूट्रॉन (d) क्वार्क

(b) नाभिक (1911)। इलेक्ट्रॉन थॉमसन (1897) और न्यूट्रॉन चैडविक (1932) ने खोजे।

"मैक्सिकन टोपी" का उदाहरण किसे समझाने के लिए है? (a) पृथ्वी का आकार (b) हिग्स क्षेत्र की ऊर्जा और सममिति का टूटना (c) ब्लैक होल (d) ज्वार-भाटा

(b) गर्म अवस्था में क्षेत्र का मान शून्य, ठंडा होने पर किनारे के गड्ढे में।

LHC से ब्लैक होल के डर को ग़लत बताने का मुख्य तर्क: (a) LHC बहुत छोटा है (b) ब्रह्मांडीय किरणें इससे अधिक ऊर्जा पर अरबों वर्षों से टकरा रही हैं (c) ब्लैक होल का अस्तित्व ही नहीं (d) LHC में गुरुत्व नहीं

(b), CERN की LSAG समीक्षा के अनुसार।

24एक नज़र मेंयाद रखें

  • हिग्स क्षेत्र पूरे ब्रह्मांड में फैला है और मूल कणों को द्रव्यमान देता है; उसकी लहर हिग्स बोसॉन है।
  • सिद्धांत 1964 (हिग्स, एंगलर्ट-ब्राउट, गुरल्निक-हेगेन-किबल); खोज 4 जुलाई 2012, CERN के LHC में, ATLAS और CMS; नोबेल 2013 (हिग्स, एंगलर्ट)।
  • द्रव्यमान लगभग 125 GeV, स्पिन 0, आवेश 0, जीवन-काल लगभग 10⁻²² सेकंड; खोज γγ और ZZ → 4ℓ से, 5σ पर।
  • "गॉड पार्टिकल": लेडरमैन की 1993 की किताब; "बोसॉन": सत्येंद्रनाथ बोस।
  • मानक मॉडल: 17 कण = 6 क्वार्क + 6 लेप्टॉन + 4 बल-वाहक + हिग्स; गुरुत्व, डार्क मैटर शामिल नहीं।
  • फ़ोटॉन-ग्लूऑन भारहीन; टॉप क्वार्क सबसे भारी; प्रोटॉन के भार में हिग्स का हिस्सा केवल लगभग 1%।
  • सममिति का टूटना: बिग बैंग के लगभग 10⁻¹² सेकंड बाद (पेज 1.1 का तीसरा चरण)।
  • LHC: 27 किमी, लगभग 100 मी नीचे, −271.3 °C, 13.6 TeV; प्रयोग ATLAS, CMS, ALICE, LHCb; CERN 1954, जिनेवा; WWW 1989।
  • भारत: CERN का सहयोगी सदस्य 2017; RRCAT-BARC का निर्माण में योगदान; CMS और ALICE में भागीदारी।
  • ताज़ा: LS3 जुलाई 2026 से; HL-LHC 2030; FCC-ee (91 किमी) मई 2026 की रणनीति में; पीटर हिग्स का निधन 8 अप्रैल 2024।

© Pankaj Bediya · TGT Geography · geoland.in

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