द्रव्यमान ही तारे की "कुंडली" है
हर तारा गैस के एक ठंडे बादल (नीहारिका) से जन्म लेता है और जीवन भर गुरुत्व और क्रोड के नाभिकीय संलयन के दाब के बीच संतुलन पर टिका रहता है। जितना भारी तारा, उतना गर्म, नीला, चमकीला और उतना ही छोटा जीवन।
सूर्य जैसे तारे अंत में श्वेत वामन बनते हैं; 8 सूर्य से भारी तारे सुपरनोवा में फटकर न्यूट्रॉन तारा या ब्लैक होल छोड़ते हैं। इन्हीं विस्फोटों से बिखरे तत्वों से पृथ्वी और हम बने हैं।
याद रखें
- तारे का जन्म नीहारिका से; लगभग 1 करोड़ °C पर संलयन शुरू।
- भारी तारा जल्दी मरता है; नीले तारे सबसे गर्म, लाल सबसे ठंडे।
- सूर्य → लाल दानव → ग्रहीय नीहारिका → श्वेत वामन (कभी ब्लैक होल नहीं)।
- चंद्रशेखर सीमा: श्वेत वामन अधिकतम लगभग 1.4 सौर द्रव्यमान।
- भारी तारा → सुपरनोवा → न्यूट्रॉन तारा (पल्सर) या ब्लैक होल।
नोट्सपढ़ने और पढ़ाने के लिए पूरी जानकारी
UPSC प्रीलिम्स और मेन्स (GS-1: ब्रह्मांड और पृथ्वी की उत्पत्ति; GS-3: अंतरिक्ष विज्ञान) के स्तर पर · NCERT कक्षा 11 अध्याय 2 से आगे
1परिचय: तारे भी जन्म लेते, जीते और मरते हैं
रात में आकाश के तारे हमें हमेशा एक-से लगते हैं, पर वे भी जन्म लेते हैं, लाखों से खरबों वर्ष जीते हैं और फिर मर जाते हैं। मनुष्य का जीवन तारे के जीवन के आगे पलक झपकने से भी छोटा है, इसलिए हम किसी एक तारे को बूढ़ा होते नहीं देख पाते; पर आकाश में अलग-अलग उम्र के करोड़ों तारे दिखते हैं, जैसे किसी मेले की भीड़ में बच्चे, जवान और बूढ़े एक साथ। इन्हीं को मिलाकर वैज्ञानिकों ने तारे की पूरी "जीवन-कथा" बनाई है।
इस कथा का एक ही सबसे बड़ा नियम है: तारे का द्रव्यमान (Mass) ही उसका भाग्य तय करता है। द्रव्यमान से तय होता है कि तारा कितना गर्म और चमकीला होगा, कितने दिन जिएगा, उसके भीतर कौन-से तत्व बनेंगे, और अंत में वह श्वेत वामन बनेगा, न्यूट्रॉन तारा या ब्लैक होल।
भूगोल के विद्यार्थी के लिए यह विषय क्यों? क्योंकि पृथ्वी और हम स्वयं तारों की राख से बने हैं: पृथ्वी की चट्टानों का सिलिकॉन, क्रोड का लोहा, हमारे शरीर का कार्बन-कैल्शियम और गहनों का सोना, सब किसी पुराने तारे के भीतर या उसके विस्फोट में बने। NCERT कक्षा 11 (अध्याय 2) में तारों के बनने की बात है; यह पेज उसे UPSC के स्तर तक पूरा करता है।
इस पेज में: तारे का जन्म, मुख्य अनुक्रम, H-R आरेख, सूर्य का भविष्य, छोटे और भारी तारों के दो अलग अंत, श्वेत वामन और चंद्रशेखर सीमा, सुपरनोवा, न्यूट्रॉन तारे और पल्सर, ब्लैक होल, तत्वों का निर्माण और इससे जुड़ा ताज़ा घटनाक्रम।
2खोज का इतिहास
| वर्ष | वैज्ञानिक | योगदान |
|---|---|---|
| 1054 | चीनी और अरब खगोलविद | "अतिथि तारा" दर्ज किया; आज वहाँ केकड़ा नीहारिका (Crab Nebula) है |
| 1572, 1604 | टाइको ब्राहे, केप्लर | आकाश में "नए तारे" देखे; सिद्ध हुआ कि तारों का आकाश अपरिवर्तनीय नहीं |
| 1902 | जेम्स जींस | किस दशा में गैस का बादल अपने ही गुरुत्व से ढहता है (जींस अस्थिरता) |
| 1910 के आसपास | हर्ट्ज़स्प्रंग और रसेल | तारों की चमक और तापमान का आरेख: H-R आरेख |
| 1920 | मेघनाद साहा (भारत) | साहा आयनन समीकरण: तारों के स्पेक्ट्रम से उनका तापमान समझना |
| 1925 | सेसिलिया पेन | तारे मुख्यतः हाइड्रोजन और हीलियम से बने हैं |
| 1930 | सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर (भारतीय मूल) | श्वेत वामन की अधिकतम सीमा, लगभग 1.4 सौर द्रव्यमान (1983 का नोबेल) |
| 1934 | बाडे और ज़्विकी | सुपरनोवा से न्यूट्रॉन तारे बनने का विचार; "सुपरनोवा" शब्द |
| 1938-39 | हान्स बेथे | सूर्य की ऊर्जा का स्रोत: हाइड्रोजन से हीलियम का नाभिकीय संलयन (1967 नोबेल) |
| 1939 | ओपेनहाइमर और साथी | भारी तारे का क्रोड ढहकर "ब्लैक होल" बन सकता है |
| 1957 | बर्बिज, बर्बिज, फ़ाउलर, हॉयल (B²FH) | तारों में तत्व बनने की पूरी प्रक्रिया |
| 1967 | जॉसलिन बेल बर्नेल | पहला पल्सर खोजा (1974 का नोबेल उनके निर्देशक ह्यूइश को मिला) |
| 1971-72 | कई टीमें | सिग्नस X-1: पहला पक्का ब्लैक होल |
| 1987 | विश्व भर के वैज्ञानिक | SN 1987A: पास का सुपरनोवा; उसके न्यूट्रिनो पहली बार पकड़े |
| 2017 | LIGO-Virgo | GW170817: दो न्यूट्रॉन तारों की टक्कर; सोना-प्लैटिनम बनते देखा |
| 2019, 2022 | इवेंट होराइज़न टेलीस्कोप | ब्लैक होल (M87*, फिर हमारी आकाशगंगा का Sgr A*) की पहली "छाया" |
| 2024 | JWST | SN 1987A के भीतर न्यूट्रॉन तारे के ठोस संकेत |
| 2025 | जेमिनी नॉर्थ, नासा | आर्द्रा (Betelgeuse) का साथी तारा "सिवरहा" पहली बार देखा |
3तारा क्या है: दो बलों का संतुलन
तारा गर्म गैस (मुख्यतः हाइड्रोजन और हीलियम) का एक विशाल गोला है, जो अपने क्रोड में नाभिकीय संलयन से स्वयं ऊर्जा और प्रकाश बनाता है। ग्रह और चंद्रमा अपना प्रकाश नहीं बनाते, वे तारे का प्रकाश लौटाते हैं।
जीवन भर की रस्साकशी
हर तारे में जीवन भर दो बल लड़ते रहते हैं:
- गुरुत्व (भीतर की ओर): तारे का अपना भारी द्रव्यमान उसे केंद्र की ओर दबाता है।
- दाब (बाहर की ओर): क्रोड के संलयन से निकली गर्मी गैस और प्रकाश का दाब बनाती है, जो तारे को फुलाए रखता है।
जब तक दोनों बराबर हैं, तारा स्थिर रहता है; इसे द्रवस्थैतिक संतुलन (Hydrostatic Equilibrium) कहते हैं। तारे का पूरा जीवन इसी संतुलन की कहानी है: ईंधन ख़त्म होने पर दाब घटता है, गुरुत्व जीतने लगता है, तारा सिकुड़ता है, गर्म होता है, नया ईंधन जलता है, और अंत में जब कोई ईंधन नहीं बचता तो जो "दाब" बचता है (इलेक्ट्रॉनों या न्यूट्रॉनों का), वही अवशेष को रोकता है; और जब वह भी हार जाए तो ब्लैक होल।
संलयन: तारों का ईंधन
- क्रोड का तापमान लगभग 1 करोड़ °C पार करते ही हाइड्रोजन के नाभिक (प्रोटॉन) इतनी तेज़ी से टकराते हैं कि जुड़कर हीलियम बनाते हैं।
- चार हाइड्रोजन नाभिकों का द्रव्यमान एक हीलियम से लगभग 0.7% अधिक होता है; यह "खोया" द्रव्यमान आइंस्टीन के E = mc² से ऊर्जा बन जाता है।
- सूर्य हर सेकंड लगभग 60 करोड़ टन हाइड्रोजन को हीलियम में बदलता है और लगभग 40 लाख टन द्रव्यमान ऊर्जा में खोता है; फिर भी उसके पास अरबों वर्ष का ईंधन है।
- सूर्य जैसे तारों में यह प्रोटॉन-प्रोटॉन श्रृंखला से होता है; सूर्य से भारी, गर्म तारों में CNO चक्र (कार्बन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन की मदद से) अधिक चलता है।
तारों के रंग और वर्ग
तारे का रंग उसकी सतह के तापमान से तय होता है, जैसे लोहे की छड़ गर्म करने पर पहले लाल, फिर पीली, फिर सफ़ेद-नीली चमकती है:
| वर्ग | रंग | सतह का तापमान (लगभग) | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| O | नीला | 30,000 °C से अधिक | ओरायन की पेटी का अलनिटक |
| B | नीला-सफ़ेद | 10,000-30,000 °C | राइजेल, स्पाइका (चित्रा) |
| A | सफ़ेद | 7,500-10,000 °C | व्याध (Sirius), वेगा (अभिजित) |
| F | पीला-सफ़ेद | 6,000-7,500 °C | प्रोसियॉन, ध्रुव तारा |
| G | पीला | 5,200-6,000 °C | सूर्य (G2) |
| K | नारंगी | 3,700-5,200 °C | आर्कटूरस (स्वाती), एल्डेबरान (रोहिणी) |
| M | लाल | 3,700 °C से कम | आर्द्रा (Betelgeuse), प्रॉक्सिमा सेंटॉरी |
याद रखने का सूत्र: O B A F G K M ("Oh Be A Fine Girl/Guy, Kiss Me")। तारों के स्पेक्ट्रम को तापमान से जोड़ने का सैद्धांतिक आधार मेघनाद साहा के आयनन समीकरण (1920) ने दिया।
ध्यान दें: रोज़मर्रा में "लाल = गर्म, नीला = ठंडा" माना जाता है, पर तारों में उलटा है: नीले तारे सबसे गर्म, लाल तारे सबसे ठंडे।
4तारे का जन्म: नीहारिका से तारे तक
1. आणविक बादल (Molecular Cloud)
आकाशगंगा की सर्पिल भुजाओं में गैस और धूल के विशाल, बहुत ठंडे (लगभग −260 °C) बादल होते हैं, जिन्हें नीहारिका (Nebula) या आणविक बादल कहते हैं। इनका 99% भाग गैस (अधिकतर हाइड्रोजन अणु H₂) और 1% धूल है। एक बादल में हज़ारों से लाखों सूर्यों जितना पदार्थ हो सकता है।
2. ढहना (Collapse)
बादल सामान्यतः स्थिर रहता है। पर किसी पास के सुपरनोवा की आघात-तरंग, दो बादलों की टक्कर या आकाशगंगा की सर्पिल भुजा का दबाव उसके किसी भाग को घना कर देता है। जब किसी भाग का गुरुत्व उसके भीतर की गैस के दाब से अधिक हो जाए (जींस अस्थिरता, 1902), तो वह भाग अपने ही भार से ढहने लगता है और कई टुकड़ों में बँट जाता है। इसीलिए तारे प्रायः समूहों (गुच्छों) में जन्म लेते हैं; उदाहरण: कृत्तिका (प्लीएडीज़) तारा गुच्छ।
3. आदि-तारा (Protostar) और चकती
ढहता टुकड़ा घूमता भी है। जैसे स्केटिंग करने वाला बाँहें समेटने पर तेज़ घूमता है (कोणीय संवेग का संरक्षण), वैसे ही सिकुड़ता बादल तेज़ घूमता है और चपटा होकर एक चकती (Disk) बन जाता है। बीच में गर्म, घना गोला आदि-तारा है। सिकुड़ने से गुरुत्व की ऊर्जा गर्मी में बदलती है, इसलिए आदि-तारा अभी संलयन के बिना भी गर्म है और अवरक्त में चमकता है।
चकती से ही ग्रह बनते हैं: यही हमारे सौरमंडल की कहानी है (पेज 1.8, नीहारिका परिकल्पना)। आज JWST और ALMA दूरबीनें कई नवजात तारों के चारों ओर ग्रह बनाती चकतियाँ देख रही हैं।
4. T-टॉरी अवस्था और धाराएँ (Jets)
आदि-तारा अपने ध्रुवों से गैस की दो पतली, तेज़ धाराएँ (Jets) छोड़ता है और तेज़ तारकीय पवन चलती है, जो आसपास की बची गैस को उड़ा देती है। इस किशोर अवस्था को T-टॉरी (T Tauri तारे के नाम पर) कहते हैं।
5. मुख्य अनुक्रम पर पहुँचना: "जन्म" पूरा
जब क्रोड का तापमान लगभग 1 करोड़ °C पहुँचता है, हाइड्रोजन का संलयन शुरू होता है। अब बाहर का दाब गुरुत्व को रोक लेता है, सिकुड़ना थमता है और तारा मुख्य अनुक्रम (Main Sequence) पर आ जाता है। यही तारे का असली "जन्म" है।
| बात | आँकड़ा (लगभग) |
|---|---|
| सूर्य जैसे तारे को बनने में | लगभग 5 करोड़ वर्ष |
| बहुत भारी तारे को | लगभग 1 लाख वर्ष |
| संलयन शुरू होने का तापमान | लगभग 1 करोड़ °C |
| तारा बनने की न्यूनतम सीमा | लगभग 0.08 सौर द्रव्यमान (बृहस्पति का लगभग 80 गुना) |
| अधिकतम | लगभग 150-300 सौर द्रव्यमान |
भूरे बौने (Brown Dwarfs): "असफल तारे"
जिस पिंड में 0.08 सौर द्रव्यमान से कम पदार्थ हो, उसका क्रोड कभी इतना गर्म नहीं होता कि हाइड्रोजन जले। ये भूरे बौने हैं: ग्रह से बड़े, तारे से छोटे; हल्के अवरक्त में धीमे-धीमे चमकते हैं।
तारों के प्रसिद्ध जन्मस्थान
- ओरायन नीहारिका (M42): लगभग 1,300-1,350 प्रकाश वर्ष दूर, सबसे पास का बड़ा तारा-जन्मस्थान; कालपुरुष की "तलवार" में नंगी आँख से धुँधला धब्बा।
- "सृष्टि के स्तंभ" (Pillars of Creation), ईगल नीहारिका (M16): हबल (1995) और JWST (2022) के प्रसिद्ध चित्र।
- कैरिना नीहारिका और टारेंटुला नीहारिका (बड़े मैगेलानिक बादल में): बहुत भारी तारों के जन्मस्थान।
5मुख्य अनुक्रम: तारे का लंबा, स्थिर "वयस्क जीवन"
तारा अपने जीवन का लगभग 90% समय मुख्य अनुक्रम पर बिताता है, जिसमें वह क्रोड में हाइड्रोजन को हीलियम में बदलता है। हमारा सूर्य अभी इसी अवस्था में है, लगभग आधा जीवन बीत चुका है।
भारी तारा, छोटा जीवन: क्यों?
भारी तारे के पास ईंधन अधिक है, फिर भी वह जल्दी मरता है। कारण:
- भारी तारे का गुरुत्व अधिक है, इसलिए संतुलन के लिए उसके क्रोड को बहुत अधिक गर्म और दाब वाला होना पड़ता है।
- अधिक तापमान पर संलयन बहुत तेज़ चलता है। मोटे तौर पर चमक ∝ द्रव्यमान³ से ⁴: दोगुना भारी तारा लगभग 10-16 गुना चमकीला।
- इसलिए आयु ∝ 1 / द्रव्यमान²·⁵ (लगभग): 10 गुना भारी तारा लगभग 300 गुना कम जीता है।
उपमा: एक छोटी कार और एक बड़ा ट्रक; ट्रक की टंकी बड़ी है, पर वह ईंधन इतनी तेज़ी से पीता है कि पहले ख़ाली हो जाता है।
हल किया उदाहरण
सूर्य की आयु लगभग 1,000 करोड़ वर्ष। 10 सौर द्रव्यमान वाले तारे की आयु? 10²·⁵ ≈ 316, इसलिए आयु ≈ 1,000 करोड़ ÷ 316 ≈ 3 करोड़ वर्ष (सही मॉडलों से लगभग 2-3 करोड़ वर्ष)।
लाल बौने: ब्रह्मांड के सबसे आम तारे
- 0.08 से 0.5 सौर द्रव्यमान; ठंडे, मंद, लाल।
- मंदाकिनी के लगभग तीन-चौथाई तारे लाल बौने हैं, पर कोई भी नंगी आँख से नहीं दिखता।
- ये पूरे तारे में गैस को मथते (संवहन) रहते हैं, इसलिए लगभग सारी हाइड्रोजन जला पाते हैं और खरबों वर्ष जीते हैं। ब्रह्मांड की आयु (लगभग 1,380 करोड़ वर्ष) में कोई भी लाल बौना अभी तक मरा नहीं।
- सबसे पास का तारा प्रॉक्सिमा सेंटॉरी (4.24 प्रकाश वर्ष) एक लाल बौना है, और इसके चारों ओर ग्रह भी हैं।
6H-R आरेख: तारों का "जनगणना चार्ट"
1910 के आसपास डेनमार्क के एज्नार हर्ट्ज़स्प्रंग और अमेरिका के हेनरी नॉरिस रसेल ने अलग-अलग तारों को एक ग्राफ़ पर रखा: क्षैतिज अक्ष पर सतह का तापमान (उलटा: बाएँ गर्म, दाएँ ठंडा) और ऊर्ध्वाधर अक्ष पर ज्योति (असली चमक)। तारे बेतरतीब नहीं बिखरे, बल्कि कुछ निश्चित क्षेत्रों में मिले। यह हर्ट्ज़स्प्रंग-रसेल (H-R) आरेख खगोल विज्ञान का सबसे महत्त्वपूर्ण चित्र माना जाता है।
| क्षेत्र | कहाँ | विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| मुख्य अनुक्रम | ऊपर बाएँ से नीचे दाएँ तिरछी पट्टी | हाइड्रोजन जलाने वाले तारे; लगभग 90% तारे | सूर्य, व्याध, प्रॉक्सिमा |
| दानव (Giants) | ऊपर दाएँ | ठंडे पर बहुत बड़े, इसलिए चमकीले | आर्कटूरस, एल्डेबरान |
| महादानव (Supergiants) | सबसे ऊपर | सबसे बड़े और चमकीले | आर्द्रा, राइजेल, अंतारेस (ज्येष्ठा) |
| श्वेत वामन | नीचे बाएँ | गर्म पर बहुत छोटे, इसलिए मंद | व्याध B (Sirius B) |
आरेख से क्या पता चलता है
- मुख्य अनुक्रम पर स्थान द्रव्यमान बताता है: ऊपर बाएँ भारी-गर्म-कम आयु, नीचे दाएँ हल्के-ठंडे-लंबी आयु।
- चमक = आकार × तापमान: एक ही तापमान पर अधिक चमकीला तारा बड़ा होगा। लाल दानव ठंडे होकर भी चमकीले हैं क्योंकि बहुत बड़े हैं; श्वेत वामन गर्म होकर भी मंद हैं क्योंकि बहुत छोटे हैं।
- तारा जीवन भर आरेख पर "यात्रा" करता है: जन्म पर दाएँ से आकर मुख्य अनुक्रम पर, फिर बूढ़ा होकर ऊपर दाएँ (दानव), और सूर्य जैसा तारा अंत में नीचे बाएँ (श्वेत वामन)। (3D मॉडल का दृश्य 2 देखें।)
- तारा गुच्छों की आयु: किसी गुच्छ के सारे तारे एक साथ जन्मे; भारी तारे पहले मुख्य अनुक्रम छोड़ते हैं। गुच्छ के आरेख में मुख्य अनुक्रम जहाँ "मुड़ता" है (टर्न-ऑफ़ बिंदु), उससे गुच्छ की आयु निकलती है। गोलाकार गुच्छों से ब्रह्मांड की न्यूनतम आयु का अनुमान भी इसी से मिला।
7हमारे सूर्य का जीवन और भविष्य
| विशेषता | आँकड़ा |
|---|---|
| आयु | लगभग 460 करोड़ वर्ष (उल्कापिंडों की आयु से) |
| वर्ग | G2 V (पीला बौना, मुख्य अनुक्रम) |
| क्रोड का तापमान | लगभग 1.5 करोड़ °C |
| सतह (प्रकाशमंडल) | लगभग 5,500 °C |
| रचना (द्रव्यमान से) | लगभग 73% हाइड्रोजन, 25% हीलियम, 2% अन्य |
| क्रोड की ऊर्जा को सतह तक पहुँचने में | हज़ारों से लाखों वर्ष; सतह से पृथ्वी तक प्रकाश केवल 8 मिनट 20 सेकंड |
| मुख्य अनुक्रम की कुल आयु | लगभग 1,000 करोड़ वर्ष |
सूर्य का भविष्य, क्रम से
- धीरे-धीरे अधिक चमकीला: सूर्य आज जन्म के समय से लगभग 30% अधिक चमकीला है, और हर 100 करोड़ वर्ष में लगभग 10% और बढ़ेगा। लगभग 100 करोड़ वर्ष बाद पृथ्वी इतनी गर्म हो सकती है कि महासागर भाप बनने लगें; यानी पृथ्वी पर जीवन का समय सूर्य के मरने से बहुत पहले समाप्त हो जाएगा।
- लाल दानव (लगभग 500-600 करोड़ वर्ष बाद): क्रोड की हाइड्रोजन ख़त्म होगी; क्रोड सिकुड़ेगा, उसके चारों ओर की परत में हाइड्रोजन जलेगी और बाहरी भाग 100-200 गुना फूलकर लाल दानव बनेगा। बुध और शुक्र निगले जाएँगे; पृथ्वी बचेगी या नहीं, इस पर बहस है (सूर्य द्रव्यमान खोएगा तो ग्रहों की कक्षाएँ फैलेंगी)।
- हीलियम संलयन: क्रोड लगभग 10 करोड़ °C पर पहुँचेगा तो हीलियम से कार्बन-ऑक्सीजन बनेगी (अचानक शुरुआत: "हीलियम फ़्लैश")।
- दूसरी बार दानव (AGB) और ग्रहीय नीहारिका: हीलियम भी ख़त्म होने पर सूर्य फिर फूलेगा, धड़कने लगेगा और अपनी बाहरी परतें अंतरिक्ष में उड़ा देगा: चमकता गैस का छल्ला, ग्रहीय नीहारिका।
- श्वेत वामन: बचा हुआ गर्म कार्बन-ऑक्सीजन का क्रोड, लगभग पृथ्वी जितना, अरबों वर्ष में धीरे-धीरे ठंडा होगा।
सूर्य कभी सुपरनोवा नहीं बनेगा और कभी ब्लैक होल नहीं बनेगा: उसका द्रव्यमान बहुत कम है। यह प्रीलिम्स का प्रिय प्रश्न है।
8हल्के तारों का अंत: लाल दानव, ग्रहीय नीहारिका और श्वेत वामन
लगभग 8 सौर द्रव्यमान से कम वाले सभी तारे (यानी लगभग सारे तारे) सूर्य जैसा रास्ता लेते हैं।
लाल दानव (Red Giant)
- क्रोड हीलियम का बनकर सिकुड़ता-गर्म होता है; बाहरी परतें फूलकर ठंडी (लाल) हो जाती हैं।
- उदाहरण: आर्कटूरस (स्वाती), एल्डेबरान (रोहिणी)।
ग्रहीय नीहारिका (Planetary Nebula)
- तारे की बाहरी परतें धीमे-धीमे अंतरिक्ष में फैलती हैं; बीच का गर्म क्रोड उन्हें पराबैंगनी प्रकाश से चमकाता है।
- नाम भ्रामक है: इसका ग्रहों से कोई संबंध नहीं। 18वीं सदी में विलियम हर्शेल को पुरानी दूरबीन में ये गोल, हरे-नीले धब्बे ग्रहों जैसे लगे, इसलिए यह नाम पड़ा।
- आयु बहुत छोटी: केवल लगभग 10-20 हज़ार वर्ष तक चमकती है, फिर गैस फैलकर अदृश्य।
- उदाहरण: वलय नीहारिका (Ring Nebula, M57), हेलिक्स नीहारिका ("ईश्वर की आँख")।
- महत्त्व: इसी से तारे में बने कार्बन और नाइट्रोजन अंतरिक्ष में लौटते हैं; हमारे शरीर का अधिकांश कार्बन ऐसे ही तारों से आया।
श्वेत वामन (White Dwarf)
- बचा हुआ क्रोड: सूर्य जितना द्रव्यमान, पृथ्वी जितना आकार।
- इतना घना कि एक चम्मच पदार्थ का भार कई टन।
- इसमें संलयन नहीं होता; यह केवल बची गर्मी से चमकता है।
- इसे गिरने से इलेक्ट्रॉनों का एक क्वांटम दाब (इलेक्ट्रॉन अपभ्रष्टता दाब, Electron Degeneracy Pressure) रोकता है: इलेक्ट्रॉन एक-दूसरे की "जगह" में नहीं घुस सकते।
- उदाहरण: व्याध B (Sirius B), रात के सबसे चमकीले तारे व्याध का छोटा साथी।
- खरबों वर्ष बाद ठंडा होकर काला वामन (Black Dwarf) बनेगा; ब्रह्मांड अभी इतना पुराना नहीं कि कोई काला वामन बन चुका हो।
9चंद्रशेखर सीमा: एक भारतीय की सबसे बड़ी खोज
1930 में 19 वर्ष के सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर भारत से इंग्लैंड जाते हुए जहाज़ पर गणना कर रहे थे। उन्होंने आइंस्टीन की विशेष आपेक्षिकता को श्वेत वामन के इलेक्ट्रॉनों पर लगाया और पाया:
कोई भी श्वेत वामन लगभग 1.4 सौर द्रव्यमान से अधिक भारी नहीं हो सकता। इससे अधिक होने पर इलेक्ट्रॉन दाब गुरुत्व को रोक नहीं पाता और तारा आगे ढह जाता है।
इसे चंद्रशेखर सीमा (Chandrasekhar Limit) कहते हैं।
विरोध और मान्यता
- उस समय के सबसे प्रसिद्ध खगोलविद आर्थर एडिंगटन ने 1935 में सभा में खुलकर इसका मज़ाक उड़ाया; उन्हें यह विचार "बेतुका" लगा कि तारा अनंत तक ढह सकता है।
- बाद में यह पूरी तरह सही सिद्ध हुआ, और यही विचार आगे न्यूट्रॉन तारों और ब्लैक होल की नींव बना।
- 1983 का भौतिकी नोबेल (विलियम फ़ाउलर के साथ)।
- सम्मान: नासा की एक्स-रे दूरबीन का नाम चंद्रा (1999), और क्षुद्रग्रह 1958 चंद्रा।
- वे सी. वी. रमन के भतीजे थे।
सीमाओं का सार
| अवशेष | किससे टिका | द्रव्यमान की सीमा |
|---|---|---|
| श्वेत वामन | इलेक्ट्रॉन अपभ्रष्टता दाब | लगभग 1.4 सौर द्रव्यमान (चंद्रशेखर) |
| न्यूट्रॉन तारा | न्यूट्रॉन अपभ्रष्टता दाब और नाभिकीय बल | लगभग 2-3 सौर द्रव्यमान (TOV सीमा, टॉलमैन-ओपेनहाइमर-वोल्कॉफ़) |
| ब्लैक होल | कुछ भी नहीं रोक पाता | इससे ऊपर |
सावधान: "चंद्रशेखर सीमा" श्वेत वामन (या क्रोड) के द्रव्यमान पर है, पूरे तारे के जन्म-द्रव्यमान पर नहीं। 8 सूर्य वाला तारा भी अपनी परतें उड़ाकर 1.4 से कम का श्वेत वामन छोड़ सकता है।
दूरी नापने में उपयोग
श्वेत वामन किसी साथी तारे से पदार्थ खींचते-खींचते 1.4 पर पहुँचे तो फट जाता है (Ia सुपरनोवा)। हर बार लगभग एक-से द्रव्यमान पर फटने से इनकी असली चमक लगभग एक-सी होती है, इसलिए ये ब्रह्मांड नापने की "मानक मोमबत्ती" हैं (पेज 1.5)।
10भारी तारों का अंत: प्याज़ जैसी भट्ठी से सुपरनोवा तक
लगभग 8 सौर द्रव्यमान से भारी तारों की कहानी बहुत नाटकीय है।
नीला महादानव से लाल महादानव
भारी तारा जन्म से ही नीला, बहुत गर्म और चमकीला होता है (जैसे राइजेल)। क्रोड की हाइड्रोजन कुछ लाख-करोड़ वर्ष में ख़त्म होती है और वह फूलकर लाल महादानव (जैसे आर्द्रा, ज्येष्ठा/अंतारेस) बनता है, जो सूर्य से सैकड़ों-हज़ार गुना बड़ा हो सकता है।
प्याज़ जैसी परतें
भारी तारे का क्रोड इतना गर्म हो सकता है कि एक ईंधन ख़त्म होते ही वह सिकुड़कर अगला, भारी ईंधन जलाने लगता है। धीरे-धीरे भीतर प्याज़ की तरह परतें बन जाती हैं, हर परत में अलग संलयन:
| परत (बाहर से भीतर) | संलयन | लगभग तापमान | लगभग अवधि (25 सौर द्रव्यमान का तारा) |
|---|---|---|---|
| हाइड्रोजन | H → He | 4 करोड़ °C | 70 लाख वर्ष |
| हीलियम | He → C, O | 20 करोड़ °C | 7 लाख वर्ष |
| कार्बन | C → Ne, Na, Mg | 60-80 करोड़ °C | लगभग 600 वर्ष |
| नियॉन | Ne → O, Mg | 120-150 करोड़ °C | लगभग 1 वर्ष |
| ऑक्सीजन | O → Si, S | 150-200 करोड़ °C | लगभग 6 महीने |
| सिलिकॉन | Si → Fe, Ni | 300 करोड़ °C | लगभग 1 दिन |
| लोहे का क्रोड | कोई संलयन नहीं |
ध्यान दें: हर अगला चरण पहले से बहुत छोटा है; सिलिकॉन केवल एक दिन में जल जाता है।
लोहा: तारे की "मौत का तत्व"
- लोहे (Fe-56) का नाभिक लगभग सबसे अधिक स्थिर (प्रति कण सबसे अधिक बंधन ऊर्जा के पास) है।
- लोहे तक के तत्वों को जोड़ने पर ऊर्जा निकलती है, पर लोहे से भारी तत्व बनाने में ऊर्जा लगती है।
- इसलिए लोहे का क्रोड तारे को गर्मी नहीं दे सकता। जैसे ही क्रोड का लोहा लगभग 1.4 सौर द्रव्यमान (चंद्रशेखर सीमा) पार करता है, सहारा टूट जाता है।
क्रोड-पतन (Core Collapse): एक सेकंड से भी कम
- पृथ्वी जितना बड़ा लोहे का क्रोड एक सेकंड से भी कम में ढहकर लगभग 20 किमी का रह जाता है; बाहरी किनारा प्रकाश की चाल के लगभग चौथाई वेग से गिरता है।
- भीतर इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन दबकर न्यूट्रॉन और न्यूट्रिनो बन जाते हैं।
- क्रोड नाभिक जितना घना होकर अचानक "कठोर" हो जाता है; गिरती परतें उससे टकराकर उछलती हैं (Bounce), और एक भीषण आघात-तरंग बाहर चलती है।
- उसी समय असंख्य न्यूट्रिनो की बौछार निकलती है, जो विस्फोट की लगभग 99% ऊर्जा ले जाती है और आघात-तरंग को फिर से धक्का देकर तारे को उड़ा देती है।
- नतीजा: सुपरनोवा; बचता है न्यूट्रॉन तारा, या भारी क्रोड हो तो ब्लैक होल।
(3D मॉडल का दृश्य 4 देखें: "क्रोड ढहाइए" बटन।)
11सुपरनोवा: ब्रह्मांड के सबसे भीषण विस्फोट
सुपरनोवा एक तारे का विस्फोट है जो कुछ हफ़्तों तक पूरी आकाशगंगा (अरबों तारों) जितना चमक सकता है। कुछ सेकंडों में यह उतनी ऊर्जा छोड़ता है जितनी सूर्य अपने पूरे 1,000 करोड़ वर्ष के जीवन में।
दो मुख्य प्रकार
| Ia (थर्मोन्यूक्लियर) | II और Ib/Ic (क्रोड-पतन) | |
|---|---|---|
| किसका | श्वेत वामन, जो द्वितारा तंत्र में साथी से पदार्थ खींचता है (या दो श्वेत वामन टकराते हैं) | 8 सौर द्रव्यमान से भारी एकल तारा |
| कारण | 1.4 सौर द्रव्यमान के पास कार्बन का बेकाबू संलयन | लोहे के क्रोड का ढहना |
| क्या बचता है | कुछ नहीं, पूरा तारा बिखर जाता है | न्यूट्रॉन तारा या ब्लैक होल |
| स्पेक्ट्रम में हाइड्रोजन | नहीं | II में हाँ (Ib/Ic में बाहरी परतें पहले ही उड़ चुकी) |
| विशेष | लगभग एक-सी चमक: मानक मोमबत्ती; 1998 की डार्क एनर्जी की खोज इन्हीं से | न्यूट्रिनो की बौछार; ऑक्सीजन, सिलिकॉन आदि का मुख्य स्रोत |
| तत्व | लोहा-निकल का बड़ा स्रोत | ऑक्सीजन से लोहे तक, और कुछ भारी तत्व |
सुपरनोवा क्यों ज़रूरी हैं
- तत्वों का वितरण: तारे के भीतर बने तत्व अंतरिक्ष में बिखरते हैं; उन्हीं से अगली पीढ़ी के तारे और ग्रह बनते हैं। पृथ्वी उन्हीं से बनी।
- नए तारों को जन्म: इनकी आघात-तरंगें पास के गैस बादलों को दबाकर तारे बनाना शुरू कर सकती हैं। माना जाता है कि सौरमंडल के बनने में भी किसी पास के सुपरनोवा की भूमिका रही (उल्कापिंडों में अल्पायु रेडियोधर्मी तत्वों के अवशेष इसका संकेत हैं)।
- ब्रह्मांडीय किरणें: सुपरनोवा अवशेष कणों को बहुत ऊर्जा देकर ब्रह्मांडीय किरणें बनाते हैं।
- दूरी नापना: Ia सुपरनोवा (पेज 1.5)।
कितनी बार?
मंदाकिनी जैसी आकाशगंगा में औसतन हर सदी में लगभग 1-3 सुपरनोवा। पर धूल के कारण अधिकतर हमें दिखते नहीं। मंदाकिनी में नंगी आँख से आख़िरी 1604 (केप्लर) में देखा गया; उसके बाद का एक अवशेष (कैसियोपिया A, लगभग 1680) उस समय दिखा नहीं, बाद में रेडियो से मिला।
क्या पास का सुपरनोवा पृथ्वी के लिए ख़तरा है?
लगभग 50 प्रकाश वर्ष के भीतर का सुपरनोवा ओज़ोन परत को भारी नुकसान पहुँचा सकता है। ऐसा कोई तारा अभी इतने पास नहीं; आर्द्रा लगभग 550-700 प्रकाश वर्ष दूर है, इसलिए सुरक्षित। (समुद्र तल की चट्टानों में मिला लोहा-60 बताता है कि लगभग 20-30 लाख वर्ष पहले पृथ्वी से कुछ सौ प्रकाश वर्ष दूर सुपरनोवा हुए थे।)
नोवा और सुपरनोवा में अंतर
| नोवा (Nova) | सुपरनोवा (Supernova) |
|---|---|
| श्वेत वामन की सतह पर जमा हाइड्रोजन का विस्फोट | पूरे तारे का विस्फोट |
| तारा बचा रहता है; बार-बार हो सकता है (पुनरावर्ती नोवा) | तारा नष्ट; अवशेष बचता है या कुछ नहीं |
| हज़ारों गुना चमक | अरबों गुना चमक |
| उदाहरण: T कोरोनी बोरियालिस | उदाहरण: SN 1987A, केकड़ा (1054) |
"नोवा" का अर्थ लैटिन में "नया" है: पुराने लोगों को लगा कि आकाश में नया तारा जन्मा, जबकि असल में एक पुराना, मंद तारा अचानक चमक उठा था।
12इतिहास के प्रसिद्ध सुपरनोवा
| वर्ष | नाम | विशेष बात |
|---|---|---|
| 185 ई. | SN 185 | चीनी अभिलेखों में दर्ज सबसे पुराना सुपरनोवा |
| 1006 | SN 1006 | इतिहास का सबसे चमकीला दर्ज तारकीय विस्फोट; चीन, अरब, यूरोप में दर्ज |
| 1054 | SN 1054 | चीनी खगोलविदों ने दर्ज किया; लगभग 23 दिन तक दिन में भी दिखा; आज वहाँ केकड़ा नीहारिका (M1) और उसके बीच केकड़ा पल्सर |
| 1572 | टाइको का सुपरनोवा | सिद्ध किया कि "अपरिवर्तनीय" आकाश भी बदलता है |
| 1604 | केप्लर का सुपरनोवा | मंदाकिनी में नंगी आँख से आख़िरी |
| 1987 | SN 1987A | बड़े मैगेलानिक बादल में, लगभग 1.68 लाख प्रकाश वर्ष दूर; लगभग 400 वर्षों में नंगी आँख से दिखा पहला सुपरनोवा; जापान (कामिओकांडे) और अमेरिका के भूमिगत संसूचकों ने प्रकाश से पहले पहुँचे लगभग दो दर्जन न्यूट्रिनो पकड़े (2002 का नोबेल कोशिबा को, अन्य कारणों के साथ) |
| 2023 | SN 2023ixf | पिनव्हील आकाशगंगा (M101) में, लगभग 2 करोड़ प्रकाश वर्ष; एक दशक का सबसे पास का क्रोड-पतन सुपरनोवा |
केकड़ा नीहारिका: एक प्रयोगशाला
- 1054 के विस्फोट का फैलता बादल, लगभग 6,500 प्रकाश वर्ष दूर, वृषभ (Taurus) तारामंडल में।
- बीच में केकड़ा पल्सर सेकंड में लगभग 30 बार घूमता है और पूरी नीहारिका को ऊर्जा देता है।
- यह खगोल विज्ञान का सबसे अधिक अध्ययन किया गया पिंड माना जाता है।
13न्यूट्रॉन तारे, पल्सर और मैग्नेटार
न्यूट्रॉन तारा
- सुपरनोवा के बाद बचा क्रोड: 1.4 से 2-3 सौर द्रव्यमान, पर व्यास केवल लगभग 20 किमी (एक बड़े शहर जितना)।
- लगभग पूरा न्यूट्रॉनों का बना; घनत्व परमाणु के नाभिक जितना। एक चम्मच का भार करोड़ों टन।
- सतह पर गुरुत्व पृथ्वी से लगभग 1 खरब (10¹¹) गुना।
- ढहते समय घूर्णन और चुंबकत्व दोनों बेहद बढ़ जाते हैं (जैसे स्केटर बाँहें समेटे): सेकंड में कई बार घूमना और खरबों गुना चुंबकीय क्षेत्र।
पल्सर (Pulsar): ब्रह्मांड का "प्रकाश-स्तंभ"
- घूमते न्यूट्रॉन तारे के चुंबकीय ध्रुवों से रेडियो (और कभी प्रकाश, एक्स-रे) की दो किरणें निकलती हैं।
- चुंबकीय अक्ष और घूर्णन अक्ष अलग हों, तो किरणें प्रकाश-स्तंभ (Lighthouse) की तरह घूमती हैं; जब किरण पृथ्वी से गुज़रती है, हमें एक "धड़कन" (स्पंद) मिलती है।
- खोज: 1967, कैंब्रिज की शोध-छात्रा जॉसलिन बेल बर्नेल ने रेडियो आँकड़ों में हर 1.34 सेकंड का संकेत देखा। पहले मज़ाक में इसे "LGM-1" (Little Green Men) कहा गया!
- 1974 का नोबेल उनके निर्देशक एंटनी ह्यूइश (और मार्टिन राइल) को मिला; बेल बर्नेल को न मिलना विज्ञान के इतिहास का एक चर्चित विवाद है। 2018 में उन्हें ब्रेकथ्रू पुरस्कार मिला, जिसकी पूरी राशि उन्होंने छात्रवृत्तियों में दान कर दी।
- सबसे तेज़ पल्सर सेकंड में 700 से अधिक बार घूमता है (मिलीसेकंड पल्सर)।
- उपयोग: पल्सरों की धड़कन परमाणु घड़ियों जितनी सटीक है। 1974 में खोजे गए एक द्वि-पल्सर (हल्स-टेलर) से गुरुत्वीय तरंगों का पहला अप्रत्यक्ष प्रमाण मिला (1993 नोबेल)। आज कई पल्सरों का समय मिलाकर नैनोहर्ट्ज़ गुरुत्वीय तरंगें खोजी जा रही हैं (पल्सर टाइमिंग ऐरे); 2023 में भारत के InPTA (पुणे के GMRT से) सहित विश्व की टीमों ने इसके साक्ष्य घोषित किए।
- नासा के पायनियर और वॉयेजर यानों पर लगी पट्टिकाओं में पृथ्वी का पता 14 पल्सरों की दिशा से बताया गया है।
मैग्नेटार (Magnetar)
- बहुत तेज़ चुंबकीय क्षेत्र वाला न्यूट्रॉन तारा: पृथ्वी के क्षेत्र से लगभग हज़ार खरब (10¹⁵) गुना।
- इसकी सतह पर "तारा-भूकंप" (Starquake) से गामा किरणों की बौछार।
- 2020 में एक मैग्नेटार (SGR 1935+2154) से तीव्र रेडियो विस्फोट (Fast Radio Burst, FRB) पहली बार मंदाकिनी में पकड़ा गया, जिससे FRB का एक स्रोत पता चला।
14ब्लैक होल: जहाँ से प्रकाश भी नहीं लौटता
अगर ढहते क्रोड का द्रव्यमान लगभग 2-3 सौर द्रव्यमान (TOV सीमा) से अधिक हो, तो न्यूट्रॉन भी उसे नहीं रोक पाते और वह ढहता ही जाता है: ब्लैक होल (कृष्ण विवर) बनता है। आमतौर पर लगभग 20-25 सौर द्रव्यमान से भारी तारे ऐसे अंत की ओर जाते हैं (सीमाएँ पक्की नहीं; तारे की रचना और घूर्णन पर भी निर्भर)।
मूल बातें
- ब्लैक होल अंतरिक्ष का वह भाग है जहाँ गुरुत्व इतना तीव्र है कि पलायन वेग प्रकाश की चाल से भी अधिक हो जाता है; इसलिए वहाँ से प्रकाश भी बाहर नहीं निकल सकता।
- घटना-क्षितिज (Event Horizon): "वापसी न हो सकने की" सीमा। इसकी त्रिज्या श्वार्ज़शिल्ड त्रिज्या है: Rₛ = 2GM / c², यानी प्रति सौर द्रव्यमान लगभग 3 किमी। (अगर सूर्य को दबाकर ब्लैक होल बनाया जाए तो 3 किमी; पृथ्वी को दबाएँ तो केवल लगभग 9 मिमी, एक कंचे जितनी!)
- विलक्षणता (Singularity): सिद्धांत में केंद्र, जहाँ घनत्व अनंत; यहाँ आज के भौतिकी नियम काम नहीं करते।
- ब्लैक होल "सब कुछ खींचने वाला वैक्यूम क्लीनर" नहीं: दूर से उसका गुरुत्व उतने ही द्रव्यमान के तारे जैसा ही है। अगर सूर्य अचानक उतने ही द्रव्यमान का ब्लैक होल बन जाए, तो पृथ्वी उसी कक्षा में घूमती रहेगी (बस अँधेरा और ठंड हो जाएगी)।
दिखता नहीं, तो पता कैसे चलता है?
- साथी तारे पर असर: कोई तारा किसी अदृश्य भारी पिंड के चारों ओर घूमे (जैसे सिग्नस X-1, पहला पक्का ब्लैक होल; गाया BH3, 2024, लगभग 33 सौर द्रव्यमान, लगभग 1,900 प्रकाश वर्ष दूर)।
- अभिवृद्धि चकती (Accretion Disk): गिरती गैस घूमती, घिसती और करोड़ों डिग्री तक गर्म होकर एक्स-रे में चमकती है (भारत का एस्ट्रोसैट और XPoSat यही देखते हैं)।
- गुरुत्वीय तरंगें: दो ब्लैक होल की टक्कर से अंतरिक्ष-समय में लहरें (LIGO, GW150914, 2015; 2017 का नोबेल)।
- छाया का चित्र: इवेंट होराइज़न टेलीस्कोप ने 2019 में M87 आकाशगंगा के केंद्र के ब्लैक होल (लगभग 650 करोड़ सौर द्रव्यमान) और 2022 में हमारी आकाशगंगा के केंद्र के Sgr A* (लगभग 40 लाख सौर द्रव्यमान) की "छाया" दिखाई।
- तारों की कक्षाएँ: मंदाकिनी के केंद्र के पास तारे तेज़ी से एक अदृश्य बिंदु के चारों ओर घूमते हैं (2020 का नोबेल: गेंज़ेल, गेज़; और ब्लैक होल के सिद्धांत के लिए पेनरोज़)।
ब्लैक होल के प्रकार
| प्रकार | द्रव्यमान | कैसे बनते |
|---|---|---|
| तारकीय (Stellar) | लगभग 3 से 100 सौर द्रव्यमान | भारी तारे के क्रोड-पतन से; टकराकर बड़े |
| मध्यम (Intermediate) | सैकड़ों से लाखों | अभी कम ज्ञात; कुछ उम्मीदवार |
| अतिविशाल (Supermassive) | लाखों से अरबों | लगभग हर बड़ी आकाशगंगा के केंद्र में (पेज 1.4) |
हॉकिंग विकिरण
स्टीफ़न हॉकिंग (1974) के अनुसार क्वांटम प्रभाव से ब्लैक होल बहुत धीरे-धीरे विकिरण छोड़कर वाष्पित होते हैं; तारकीय ब्लैक होल के लिए इसमें ब्रह्मांड की आयु से भी असंख्य गुना समय लगेगा।
भारतीय योगदान
- चंद्रशेखर की सीमा ने यह विचार दिया कि तारे अनंत तक ढह सकते हैं।
- ए. के. रायचौधुरी (रायचौधुरी समीकरण, 1955) ने विलक्षणता प्रमेयों की नींव रखी।
- सी. वी. विश्वेश्वर ने 1970 में ब्लैक होल की "गूँज" (रिंगडाउन) पर अग्रणी काम किया, जो आज गुरुत्वीय तरंगों में दिखती है।
- LIGO-India (महाराष्ट्र के हिंगोली ज़िले में) को 2023 में स्वीकृति मिली।
15तत्व कहाँ से आए: "हम तारों की धूल हैं"
तारकीय नाभिकीय संश्लेषण (Stellar Nucleosynthesis) वह प्रक्रिया है जिससे तारों में हल्के तत्वों से भारी तत्व बनते हैं। इसका पूरा सिद्धांत 1957 में B²FH (मार्गरेट और जेफ़्री बर्बिज, विलियम फ़ाउलर, फ़्रेड हॉयल) ने दिया।
कौन-सा तत्व कहाँ बना
| स्रोत | तत्व |
|---|---|
| बिग बैंग (पहले 3 मिनट, पेज 1.3) | हाइड्रोजन, हीलियम, थोड़ा लीथियम |
| सामान्य तारों का मुख्य जीवन | हाइड्रोजन → हीलियम |
| मरते हल्के तारे (लाल दानव, AGB) | कार्बन, नाइट्रोजन; धीमी "s-प्रक्रिया" से स्ट्रॉन्शियम, बेरियम, सीसा जैसे कुछ भारी तत्व |
| फटते भारी तारे (क्रोड-पतन सुपरनोवा) | ऑक्सीजन, नियॉन, मैग्नीशियम, सिलिकॉन, सल्फ़र, कैल्शियम आदि |
| Ia सुपरनोवा (श्वेत वामन) | लोहा, निकल का बड़ा भाग |
| न्यूट्रॉन तारों की टक्कर (किलोनोवा) | तीव्र "r-प्रक्रिया" से सोना, प्लैटिनम, यूरेनियम, आयोडीन आदि |
| ब्रह्मांडीय किरणें | लीथियम, बेरिलियम, बोरॉन (भारी नाभिकों के टूटने से) |
हीलियम से कार्बन: "हॉयल की भविष्यवाणी"
हीलियम के तीन नाभिक मिलकर कार्बन बनाते हैं (त्रि-अल्फ़ा प्रक्रिया)। 1953 में फ़्रेड हॉयल ने तर्क दिया कि यह तभी इतनी मात्रा में हो सकता है जब कार्बन के नाभिक की एक ख़ास ऊर्जा-अवस्था हो; प्रयोगशाला में वह अवस्था ठीक वहीं मिली। यानी हमारा अस्तित्व ही कार्बन बनने का प्रमाण है।
GW170817: सोना बनते देखा
- 17 अगस्त 2017 को LIGO-Virgo ने लगभग 13 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर (NGC 4993 आकाशगंगा) दो न्यूट्रॉन तारों की टक्कर की गुरुत्वीय तरंगें पकड़ीं।
- लगभग 2 सेकंड बाद गामा-किरण विस्फोट, फिर दुनिया की लगभग 70 दूरबीनों (भारत के एस्ट्रोसैट और GMRT सहित) ने वहाँ एक किलोनोवा देखा।
- उसके स्पेक्ट्रम ने दिखाया कि वहाँ कई पृथ्वी जितने द्रव्यमान का सोना-प्लैटिनम बना।
- यह "बहु-संदेशवाहक खगोल विज्ञान" (Multi-messenger Astronomy) की बड़ी शुरुआत थी: एक ही घटना गुरुत्वीय तरंग और प्रकाश दोनों से।
भूगोल से संबंध
- पृथ्वी का लोहे-निकल का क्रोड, पर्पटी का सिलिकॉन-ऑक्सीजन-एल्युमिनियम (SIAL), यूरेनियम-थोरियम (जिनके क्षय की गर्मी आज भी पृथ्वी के भीतर को गर्म रखती और प्लेट विवर्तनिकी चलाती है): सब पिछली पीढ़ियों के तारों से आए।
- सौरमंडल पहली पीढ़ी का नहीं है; वह कई पीढ़ियों के तारों के "मलबे" से बना, इसीलिए यहाँ भारी तत्व हैं।
- हमारा शरीर: साँस की ऑक्सीजन और हड्डियों का कैल्शियम फटते भारी तारों से, रक्त का लोहा मुख्यतः श्वेत वामन विस्फोटों से, कार्बन-नाइट्रोजन मरते छोटे तारों से, और शरीर की लगभग सारी हाइड्रोजन (पानी में) सीधे बिग बैंग से। कार्ल सेगन का प्रसिद्ध कथन: "हम तारों की धूल से बने हैं" (We are made of star-stuff)।
16आर्द्रा (Betelgeuse) और T कोरोनी बोरियालिस: आज के "सितारे"
आर्द्रा (Betelgeuse)
- कालपुरुष (ओरायन) तारामंडल का लाल कंधा; रात के सबसे चमकीले तारों में; भारतीय नक्षत्र आर्द्रा।
- लाल महादानव, लगभग 15-20 सौर द्रव्यमान; व्यास सूर्य का लगभग 700-1,000 गुना; दूरी लगभग 550-700 प्रकाश वर्ष; आयु लगभग 1 करोड़ वर्ष।
- "महान मंदता" (Great Dimming), 2019-20: इसकी चमक अचानक काफ़ी घट गई; लोगों ने सोचा सुपरनोवा पास है। हबल के अध्ययन ने दिखाया कि तारे ने अपनी सतह से एक बड़ा गैस-पिंड उछाला, जो ठंडा होकर धूल का बादल बना और कुछ समय तारे को ढक गया।
- जुलाई 2025: हवाई की जेमिनी नॉर्थ दूरबीन पर लगे नासा के 'अलोपेके' स्पेकल कैमरे से इसके पास एक साथी तारा पहली बार देखा गया, जिसे "सिवरहा" (Siwarha) नाम दिया गया; यह लंबे समय से अनुमानित था और इसकी चमक के लगभग 6 वर्ष के चक्र को समझाता है।
- भविष्य: अगले लगभग 1 लाख वर्ष में कभी सुपरनोवा बनेगा; तब कुछ हफ़्ते दिन में भी दिखेगा और रात में आधे चंद्रमा जितना चमकेगा। दूरी अधिक होने से पृथ्वी के लिए सुरक्षित।
T कोरोनी बोरियालिस ("ब्लेज़ स्टार")
- उत्तरी किरीट (Corona Borealis) तारामंडल में, लगभग 3,000 प्रकाश वर्ष दूर।
- एक श्वेत वामन और एक लाल दानव का जोड़ा; श्वेत वामन साथी से हाइड्रोजन खींचता है, जो सतह पर जमा होकर लगभग 80 वर्ष में एक बार फट पड़ती है: पुनरावर्ती नोवा (Recurrent Nova)।
- पिछले विस्फोट: 1866 और 1946। 1946 से ठीक पहले जैसी "पूर्व-मंदता" 2023 में दिखी, इसलिए 2024 से विस्फोट की प्रतीक्षा है।
- विस्फोट पर चमक लगभग कांतिमान 2 (ध्रुव तारे जितनी) हो जाएगी; कुछ दिनों तक नंगी आँख से दिखेगा, फिर मंद।
- अगस्त 2026 तक यह विस्फोट नहीं हुआ था; यह कभी भी हो सकता है। परीक्षा से पहले ताज़ा स्थिति देखें।
- यह नोवा है, सुपरनोवा नहीं: तारा नष्ट नहीं होगा।
17भारत और तारों का अध्ययन
वैज्ञानिक
| वैज्ञानिक | योगदान |
|---|---|
| मेघनाद साहा (1893-1956) | साहा आयनन समीकरण (1920): तारों के स्पेक्ट्रम को तापमान से जोड़ा, तारकीय वर्गीकरण की भौतिक व्याख्या; कोलकाता में साहा नाभिकीय भौतिकी संस्थान |
| सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर (1910-1995) | चंद्रशेखर सीमा (1930); तारों की संरचना और ब्लैक होल पर ग्रंथ; 1983 नोबेल |
| वेणु बप्पू (1927-1982) | विल्सन-बप्पू प्रभाव (1957): तारों के स्पेक्ट्रम की एक रेखा की चौड़ाई से उनकी चमक और दूरी; कवलूर (तमिलनाडु) की वेणु बप्पू वेधशाला |
| गोविंद स्वरूप (1929-2020) | ऊटी रेडियो टेलीस्कोप और GMRT के निर्माता; रेडियो खगोल विज्ञान |
| ए. के. रायचौधुरी, सी. वी. विश्वेश्वर | ब्लैक होल और गुरुत्व का सिद्धांत |
वेधशालाएँ और मिशन
| नाम | कहाँ / कब | तारों से संबंधित उपयोग |
|---|---|---|
| GMRT (विशाल मीटर-तरंग रेडियो दूरबीन) | खोडद, पुणे के पास (NCRA-TIFR) | पल्सर खोजना, InPTA गुरुत्वीय तरंग खोज |
| एस्ट्रोसैट | 2015, भारत की पहली बहु-तरंगदैर्घ्य अंतरिक्ष वेधशाला | श्वेत वामन, न्यूट्रॉन तारे, ब्लैक होल के एक्स-रे; UVIT से पराबैंगनी |
| XPoSat | 1 जनवरी 2024 | भारत का पहला एक्स-रे ध्रुवणमापी उपग्रह: पल्सर, ब्लैक होल, मैग्नेटार |
| देवस्थल 3.6 मी. दूरबीन | नैनीताल (ARIES), 2016 | भारत की सबसे बड़ी प्रकाशीय दूरबीन; तारा गुच्छ, सुपरनोवा |
| ILMT (अंतर्राष्ट्रीय तरल दर्पण दूरबीन) | देवस्थल, 2022 | आकाश की पट्टी को रोज़ देखकर सुपरनोवा जैसे बदलते पिंड |
| हिमालयन चंद्र दूरबीन | हानले, लद्दाख | चंद्रशेखर के नाम पर; ऊँचाई और शुष्क हवा का लाभ |
| आदित्य-L1 | 2023, L1 पर जनवरी 2024 से | हमारे तारे, सूर्य का अध्ययन |
| LIGO-India | हिंगोली, महाराष्ट्र (स्वीकृति 2023) | न्यूट्रॉन तारों और ब्लैक होल की टक्कर की गुरुत्वीय तरंगें |
परंपरा
भारतीय पंचांग के 27 नक्षत्र तारों और तारा-समूहों पर आधारित हैं: आर्द्रा (Betelgeuse), रोहिणी (Aldebaran), ज्येष्ठा (Antares), चित्रा (Spica), स्वाती (Arcturus) आदि। कृत्तिका (Pleiades) एक युवा तारा गुच्छ है। (ये सांस्कृतिक नाम हैं; वैज्ञानिक समझ ऊपर दी गई है।)
18महत्त्वपूर्ण शब्दावली (हिंदी-अंग्रेज़ी)
| हिंदी | अंग्रेज़ी | अर्थ |
|---|---|---|
| नीहारिका | Nebula | गैस-धूल का बादल; तारों का जन्मस्थान |
| आदि-तारा | Protostar | संलयन शुरू होने से पहले का गर्म, सिकुड़ता गोला |
| नाभिकीय संलयन | Nuclear Fusion | हल्के नाभिकों का जुड़कर भारी बनना, ऊर्जा निकलना |
| द्रवस्थैतिक संतुलन | Hydrostatic Equilibrium | गुरुत्व और दाब का संतुलन |
| मुख्य अनुक्रम | Main Sequence | हाइड्रोजन जलाने की लंबी स्थिर अवस्था |
| ज्योति | Luminosity | तारे की कुल असली चमक (ऊर्जा प्रति सेकंड) |
| भूरा बौना | Brown Dwarf | 0.08 सौर द्रव्यमान से कम, "असफल तारा" |
| लाल बौना | Red Dwarf | छोटा, ठंडा, सबसे आम, सबसे लंबी आयु वाला तारा |
| लाल दानव / महादानव | Red Giant / Supergiant | फूला हुआ बूढ़ा तारा |
| ग्रहीय नीहारिका | Planetary Nebula | हल्के तारे की उड़ी बाहरी परतें (ग्रहों से संबंध नहीं) |
| श्वेत वामन | White Dwarf | हल्के तारे का पृथ्वी जितना अवशेष |
| अपभ्रष्टता दाब | Degeneracy Pressure | इलेक्ट्रॉन/न्यूट्रॉन का क्वांटम दाब |
| चंद्रशेखर सीमा | Chandrasekhar Limit | श्वेत वामन की अधिकतम सीमा, लगभग 1.4 सौर द्रव्यमान |
| क्रोड-पतन | Core Collapse | लोहे के क्रोड का अचानक ढहना |
| अधिनव तारा / सुपरनोवा | Supernova | तारे का भीषण विस्फोट |
| नवतारा / नोवा | Nova | श्वेत वामन की सतह पर विस्फोट; तारा बचता है |
| न्यूट्रॉन तारा | Neutron Star | न्यूट्रॉनों का लगभग 20 किमी का अवशेष |
| स्पंदक / पल्सर | Pulsar | घूमता, किरण छोड़ता न्यूट्रॉन तारा |
| कृष्ण विवर | Black Hole | जहाँ से प्रकाश भी न निकले |
| घटना-क्षितिज | Event Horizon | ब्लैक होल की "वापसी न होने की" सीमा |
| अभिवृद्धि चकती | Accretion Disk | ब्लैक होल या तारे के चारों ओर गिरती गैस की चकती |
| किलोनोवा | Kilonova | न्यूट्रॉन तारों की टक्कर की चमक |
| तारकीय नाभिकीय संश्लेषण | Stellar Nucleosynthesis | तारों में तत्व बनना |
| सौर द्रव्यमान | Solar Mass (M☉) | सूर्य का द्रव्यमान, लगभग 2 × 10³⁰ किग्रा |
19आम ग़लतफ़हमियाँ और सही बात
| ग़लतफ़हमी | सही बात |
|---|---|
| तारे हमेशा से हैं और हमेशा रहेंगे | तारे जन्मते और मरते हैं; आज भी नए तारे बन रहे हैं |
| सूर्य एक दिन फटेगा (सुपरनोवा) | सूर्य बहुत हल्का है; वह लाल दानव बनकर श्वेत वामन बनेगा |
| सूर्य एक दिन ब्लैक होल बनेगा | नहीं; ब्लैक होल के लिए लगभग 20 गुना से भारी तारा चाहिए |
| लाल तारे सबसे गर्म | लाल सबसे ठंडे, नीले सबसे गर्म |
| भारी तारा अधिक ईंधन के कारण अधिक जीता है | उलटा: भारी तारा ईंधन बहुत तेज़ जलाता है और जल्दी मरता है |
| ग्रहीय नीहारिका से ग्रह बनते हैं | नाम पुरानी भूल से; यह मरते तारे की उड़ी परतें हैं |
| तारे "जलते" हैं, जैसे आग | रासायनिक जलना नहीं, नाभिकीय संलयन है |
| ब्लैक होल सब कुछ खींच लेता है | दूर से उसका गुरुत्व उतने ही द्रव्यमान के तारे जैसा |
| ब्लैक होल अंतरिक्ष में "छेद" है जो कहीं और ले जाता है | यह अत्यधिक घना द्रव्यमान है; "सुरंग" (वर्महोल) केवल कल्पना/सिद्धांत |
| चंद्रशेखर सीमा पूरे तारे के द्रव्यमान की है | यह श्वेत वामन या क्रोड के द्रव्यमान की सीमा है |
| नोवा और सुपरनोवा एक ही | नोवा में तारा बचता है, सुपरनोवा में पूरा तारा फटता है |
| जो तारा आज दिखता है वह आज वैसा ही है | हम उसका पुराना प्रकाश देखते हैं; आर्द्रा का प्रकाश सैकड़ों वर्ष पुराना है |
| लोहा तारे का सबसे अच्छा ईंधन | लोहे के संलयन से ऊर्जा मिलती नहीं; इसलिए लोहे से तारे का अंत |
20UPSC: प्रीलिम्स के तथ्यUPSC विशेष
- तारे का भाग्य मुख्यतः उसके जन्म के द्रव्यमान से तय होता है।
- तारे की ऊर्जा का स्रोत: नाभिकीय संलयन (H → He); व्याख्या हान्स बेथे (1938-39)।
- संलयन शुरू होने का तापमान: लगभग 1 करोड़ °C; सूर्य का क्रोड लगभग 1.5 करोड़ °C।
- तारा बनने की न्यूनतम सीमा: लगभग 0.08 सौर द्रव्यमान; इससे कम: भूरा बौना।
- सबसे आम तारे: लाल बौने; सबसे पास का तारा प्रॉक्सिमा सेंटॉरी लाल बौना।
- तारे का रंग सतह के तापमान से; क्रम O B A F G K M (नीला सबसे गर्म); सूर्य G2।
- H-R आरेख: तापमान बनाम ज्योति; 90% तारे मुख्य अनुक्रम पर।
- चंद्रशेखर सीमा: लगभग 1.4 सौर द्रव्यमान, श्वेत वामन के लिए; 1983 नोबेल।
- न्यूट्रॉन तारे की सीमा: लगभग 2-3 सौर द्रव्यमान (TOV सीमा)।
- लगभग 8 सौर द्रव्यमान से कम: श्वेत वामन; 8-20: न्यूट्रॉन तारा; लगभग 20-25 से अधिक: ब्लैक होल (लगभग सीमाएँ)।
- लोहा: सबसे स्थिर नाभिकों में; इसके बनते ही भारी तारे का क्रोड ढहता है।
- Ia सुपरनोवा: श्वेत वामन, कुछ नहीं बचता, हाइड्रोजन नहीं, मानक मोमबत्ती। II: भारी तारे का क्रोड-पतन, हाइड्रोजन रेखाएँ।
- पल्सर: घूमता न्यूट्रॉन तारा; खोज 1967, जॉसलिन बेल बर्नेल।
- केकड़ा नीहारिका: 1054 का सुपरनोवा (चीनी अभिलेख)।
- SN 1987A: बड़े मैगेलानिक बादल में; पहली बार सुपरनोवा के न्यूट्रिनो।
- GW170817 (2017): न्यूट्रॉन तारों की टक्कर, किलोनोवा, सोना-प्लैटिनम; बहु-संदेशवाहक खगोल विज्ञान।
- श्वार्ज़शिल्ड त्रिज्या ≈ 3 किमी प्रति सौर द्रव्यमान।
- EHT: M87* (2019), Sgr A* (2022)।
- भारत: साहा (आयनन समीकरण 1920), चंद्रशेखर, वेणु बप्पू (विल्सन-बप्पू प्रभाव), GMRT, एस्ट्रोसैट (2015), XPoSat (2024), LIGO-India (हिंगोली)।
- आर्द्रा का साथी सिवरहा (2025); T CrB पुनरावर्ती नोवा (1866, 1946)।
21इस विषय से प्रश्न किस तरह आते हैंUPSC विशेष
| प्रश्न का प्रकार | उदाहरण | तैयारी कैसे करें |
|---|---|---|
| कथन वाले प्रश्न (प्रीलिम्स) | "1. सूर्य अंत में ब्लैक होल बनेगा। 2. श्वेत वामन की सीमा 1.4 सौर द्रव्यमान है। कौन-सा सही?" | अंत और द्रव्यमान की तालिका पक्की करें |
| जोड़ी मिलाइए | पल्सर – बेल बर्नेल; सीमा – चंद्रशेखर; आयनन समीकरण – साहा | व्यक्ति-खोज की तालिका |
| ख़बरों से जुड़े | "हाल में चर्चा में रहा 'T CrB' क्या है?"; "'किलोनोवा' शब्द किससे संबंधित?" | ताज़ा घटनाक्रम वाला भाग |
| भारतीय मिशन | "XPoSat का उद्देश्य?", "एस्ट्रोसैट के उपकरण", "LIGO-India कहाँ?" | भारत वाली तालिका |
| अवधारणा (मेन्स GS-3) | "गुरुत्वीय तरंग खगोल विज्ञान क्या है? भारत के लिए LIGO-India का महत्त्व।" | परिभाषा + भारत + लाभ |
| भूगोल से जोड़कर (GS-1) | "पृथ्वी पर तत्वों की उत्पत्ति तारों से कैसे जुड़ी है?" | नाभिकीय संश्लेषण + पृथ्वी की परतें |
| कक्षा 11 NCERT | "तारों का निर्माण कैसे हुआ?" (आकाशगंगा, नीहारिका) | NCERT टैब |
कथन वाले प्रश्न (अभ्यास)
प्रश्न: निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- तारा जितना भारी होता है, उसकी आयु उतनी ही लंबी होती है।
- नीले तारों की सतह का तापमान लाल तारों से अधिक होता है।
- Ia सुपरनोवा के बाद न्यूट्रॉन तारा बचता है।
कौन-सा/से सही है/हैं? (a) केवल 1 (b) केवल 2 (c) 1 और 3 (d) 2 और 3 उत्तर: (b)। 1 ग़लत (भारी तारा जल्दी मरता है); 3 ग़लत (Ia में कुछ नहीं बचता; न्यूट्रॉन तारा क्रोड-पतन से)।
प्रश्न: "किलोनोवा" शब्द किससे संबंधित है? (a) दो न्यूट्रॉन तारों की टक्कर (b) सौर ज्वाला (c) धूमकेतु का टूटना (d) ग्रहों का संरेखण उत्तर: (a)। GW170817 में पहली बार गुरुत्वीय तरंगों के साथ देखा गया।
22UPSC मेन्स: पूरे आदर्श उत्तरUPSC विशेष
प्रश्न 1: "तारे का द्रव्यमान उसके जीवन और अंत को तय करता है।" तारकीय विकास के चरणों के साथ स्पष्ट कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)
भूमिका: तारा गुरुत्व और नाभिकीय संलयन से बने दाब के संतुलन पर टिका गैस का गोला है। उसका जन्म-द्रव्यमान तय करता है कि यह संतुलन कितने समय चलेगा और अंत में कैसे टूटेगा।
साझा आरंभ: सभी तारे आणविक बादलों (नीहारिकाओं) के गुरुत्वीय पतन (जींस अस्थिरता) से जन्म लेते हैं: आदि-तारा, चकती, T-टॉरी अवस्था, और लगभग 1 करोड़ °C पर हाइड्रोजन संलयन शुरू होते ही मुख्य अनुक्रम।
द्रव्यमान का प्रभाव:
- आयु: ज्योति लगभग द्रव्यमान की तीसरी-चौथी घात से बढ़ती है, इसलिए भारी तारा जल्दी मरता है: लाल बौना खरबों वर्ष, सूर्य लगभग 1,000 करोड़ वर्ष, 20 सौर द्रव्यमान का तारा लगभग 1 करोड़ वर्ष।
- रंग-तापमान: भारी तारे नीले-गर्म (O, B), हल्के लाल-ठंडे (M)।
- अंत:
- 0.08 से कम: भूरा बौना (तारा बनता ही नहीं)।
- लगभग 8 सौर द्रव्यमान तक: लाल दानव → ग्रहीय नीहारिका → श्वेत वामन (चंद्रशेखर सीमा 1.4 से कम); उदाहरण: सूर्य।
- 8 से लगभग 20-25: लाल महादानव, प्याज़ जैसी संलयन परतें, लोहे का क्रोड, क्रोड-पतन, सुपरनोवा (II) → न्यूट्रॉन तारा / पल्सर।
- इससे भारी: क्रोड TOV सीमा (2-3 सौर द्रव्यमान) से अधिक → ब्लैक होल।
- तत्वों में योगदान: हल्के तारे कार्बन-नाइट्रोजन, भारी तारे ऑक्सीजन से लोहे तक, न्यूट्रॉन तारों की टक्कर सोना-प्लैटिनम।
निष्कर्ष: द्रव्यमान तारे की "कुंडली" है। चंद्रशेखर जैसे भारतीय वैज्ञानिकों की खोजों ने इस समझ को आधार दिया, और इसी चक्र से पृथ्वी व जीवन के तत्व बने।
प्रश्न 2: सुपरनोवा क्या है? इसके प्रकार बताते हुए ब्रह्मांड और पृथ्वी के लिए इसका महत्त्व समझाइए। (250 शब्द, 15 अंक)
भूमिका: सुपरनोवा तारे का वह विस्फोट है जो कुछ सप्ताह पूरी आकाशगंगा जितना चमक सकता है।
प्रकार:
- Ia (थर्मोन्यूक्लियर): द्वितारा तंत्र में श्वेत वामन साथी से पदार्थ लेकर लगभग 1.4 सौर द्रव्यमान पर बेकाबू कार्बन संलयन से फटता है; कुछ नहीं बचता; स्पेक्ट्रम में हाइड्रोजन नहीं।
- II, Ib, Ic (क्रोड-पतन): 8 सौर द्रव्यमान से भारी तारे का लोहे का क्रोड सेकंड से भी कम में ढहता है; उछाल और न्यूट्रिनो से आघात-तरंग; न्यूट्रॉन तारा या ब्लैक होल बचता है।
महत्त्व:
- तत्वों का निर्माण और वितरण: ऑक्सीजन, सिलिकॉन, कैल्शियम, लोहा आदि अंतरिक्ष में बिखरकर अगली पीढ़ी के तारों-ग्रहों में जाते हैं; पृथ्वी की पर्पटी और क्रोड इन्हीं से।
- तारा निर्माण को प्रेरणा: आघात-तरंगें गैस बादल दबाती हैं; सौरमंडल के बनने में भी भूमिका मानी जाती है।
- ब्रह्मांड विज्ञान: Ia "मानक मोमबत्ती"; 1998 में त्वरित फैलाव और डार्क एनर्जी की खोज (2011 नोबेल)।
- भौतिकी की प्रयोगशाला: SN 1987A के न्यूट्रिनो; न्यूट्रॉन तारे, ब्लैक होल का जन्म; ब्रह्मांडीय किरणें।
- पृथ्वी पर प्रभाव: 50 प्रकाश वर्ष के भीतर होने पर ओज़ोन परत को हानि; समुद्र तल के लोहा-60 से लाखों वर्ष पहले के पास के सुपरनोवा के प्रमाण।
उदाहरण: SN 1054 (केकड़ा नीहारिका), केप्लर 1604, SN 1987A; भविष्य में आर्द्रा।
निष्कर्ष: सुपरनोवा विनाश भी है और सृजन भी; इसके बिना न चट्टानी ग्रह होते, न जीवन।
प्रश्न 3: न्यूट्रॉन तारे और ब्लैक होल का अध्ययन आधुनिक विज्ञान के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है? इस क्षेत्र में भारत के योगदान की चर्चा कीजिए। (150 शब्द, 10 अंक)
परिचय: ये भारी तारों के अवशेष हैं, जहाँ पदार्थ, गुरुत्व और चुंबकत्व अपनी चरम दशा में होते हैं।
महत्त्व:
- चरम भौतिकी: नाभिक जितना घनत्व, खरबों गुना चुंबकत्व; आपेक्षिकता की कसौटी।
- गुरुत्वीय तरंगें: ब्लैक होल-न्यूट्रॉन तारों की टक्कर (GW150914, GW170817); बहु-संदेशवाहक खगोल विज्ञान।
- तत्वों की उत्पत्ति: किलोनोवा में सोना-प्लैटिनम।
- सटीक घड़ियाँ: पल्सर टाइमिंग ऐरे से नैनोहर्ट्ज़ तरंगें; भविष्य में अंतरिक्ष नेविगेशन।
- तीव्र रेडियो विस्फोट (मैग्नेटार) जैसे नए रहस्य।
भारत: चंद्रशेखर सीमा; रायचौधुरी समीकरण; GMRT और InPTA; एस्ट्रोसैट; XPoSat (2024, एक्स-रे ध्रुवणमिति); LIGO-India (हिंगोली); IUCAA और RRI जैसे संस्थान।
निष्कर्ष: यह क्षेत्र मूल विज्ञान, प्रौद्योगिकी (संवेदक, डेटा विज्ञान) और वैश्विक सहयोग में भारत की भूमिका बढ़ाता है।
अभ्यास के लिए और प्रश्न (उत्तर का ढाँचा)
- H-R आरेख क्या है? इससे तारों के विकास की कौन-सी जानकारी मिलती है? (अक्ष, चार क्षेत्र, द्रव्यमान-आयु, गुच्छ की आयु, सूर्य की यात्रा)
- "हम तारों की धूल हैं" कथन की वैज्ञानिक व्याख्या कीजिए। (बिग बैंग, छोटे तारे, सुपरनोवा, किलोनोवा, पृथ्वी व शरीर के तत्व)
- LIGO-India परियोजना का महत्त्व। (गुरुत्वीय तरंगें, स्रोत की दिशा, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, रोज़गार)
23ताज़ा घटनाक्रम (अक्टूबर 2026 तक)UPSC विशेष
| विषय | क्या हुआ | क्यों महत्त्वपूर्ण |
|---|---|---|
| आर्द्रा का साथी "सिवरहा" | जुलाई 2025: जेमिनी नॉर्थ (हवाई) पर नासा के 'अलोपेके' स्पेकल कैमरे से पहली बार देखा गया | आर्द्रा की चमक के लगभग 6 वर्ष के चक्र की व्याख्या; लंबे समय से अनुमानित साथी की पुष्टि |
| T कोरोनी बोरियालिस | 2024 से प्रतीक्षित पुनरावर्ती नोवा; अगस्त 2026 तक विस्फोट नहीं हुआ था | 80 वर्ष में एक बार नंगी आँख से दिखने वाली घटना; पिछली 1866, 1946 |
| SN 1987A में न्यूट्रॉन तारा | फ़रवरी 2024: JWST ने अवशेष के बीच आयनित आर्गन की चमक देखी | 37 वर्ष से छिपे न्यूट्रॉन तारे का सबसे ठोस संकेत |
| गाया BH3 | अप्रैल 2024: मंदाकिनी का अब तक का सबसे भारी ज्ञात तारकीय ब्लैक होल (लगभग 33 सौर द्रव्यमान), लगभग 1,900 प्रकाश वर्ष | गाया उपग्रह के आँकड़ों से; पुराने, धातु-कम तारों से भारी ब्लैक होल बनने का संकेत |
| WOH G64 का निकट चित्र | नवंबर 2024: ESO की VLTI से मंदाकिनी से बाहर (बड़े मैगेलानिक बादल) के किसी तारे का पहला निकट चित्र | मरते लाल महादानव के चारों ओर धूल का खोल |
| गुरुत्वीय तरंगें | 2025: GW250114 (अब तक का सबसे "साफ़" संकेत; हॉकिंग के क्षेत्रफल प्रमेय की पुष्टि) और GW231123 (सबसे भारी ज्ञात टक्कर) घोषित | ब्लैक होल भौतिकी की कड़ी जाँच |
| XPoSat | 1 जनवरी 2024 से कक्षा में | भारत का पहला एक्स-रे ध्रुवणमापी उपग्रह: पल्सर, ब्लैक होल |
| LIGO-India | 2023 में स्वीकृत; हिंगोली (महाराष्ट्र) में निर्माण कार्य | LIGO डिज़ाइन का तीसरा संसूचक; स्रोत की दिशा बेहतर |
| रूबिन वेधशाला | पहले चित्र 23 जून 2025; LSST सर्वेक्षण | हर वर्ष लाखों सुपरनोवा और बदलते तारे पकड़ने की क्षमता |
| गाया DR4 | दिसंबर 2026 में अपेक्षित (उपग्रह 27 मार्च 2025 को बंद) | करोड़ों तारों के सटीक आँकड़े; द्वितारे, ब्लैक होल साथी |
यह भाग समय के साथ बदलता है; परीक्षा से पहले ताज़ा स्थिति अवश्य देखें।
24अभ्यास: 50 बहुविकल्पीय प्रश्न (व्याख्या सहित)परीक्षा के प्रश्न
तारे का अंत मुख्य रूप से किससे तय होता है? (a) रंग (b) जन्म के समय का द्रव्यमान (c) पृथ्वी से दूरी (d) आयु
(b) द्रव्यमान ही आयु, रंग और अंत तय करता है।
तारे की ऊर्जा का स्रोत है: (a) रासायनिक दहन (b) नाभिकीय विखंडन (c) नाभिकीय संलयन (d) ज्वालामुखी
(c) हाइड्रोजन से हीलियम बनना (हान्स बेथे)।
तारे का जन्म किससे होता है? (a) धूमकेतु (b) नीहारिका (गैस-धूल का बादल) (c) ग्रह (d) ब्लैक होल
(b) नीहारिका के गुरुत्वीय पतन से।
हाइड्रोजन संलयन लगभग किस तापमान पर शुरू होता है? (a) 1,000 °C (b) 1 लाख °C (c) 1 करोड़ °C (d) 100 करोड़ °C
(c)।
0.08 सौर द्रव्यमान से कम का पिंड कहलाता है: (a) श्वेत वामन (b) भूरा बौना (c) लाल दानव (d) पल्सर
(b) "असफल तारा"; हाइड्रोजन नहीं जलती।
तारे जीवन का अधिकांश समय किस अवस्था में बिताते हैं? (a) लाल दानव (b) मुख्य अनुक्रम (c) आदि-तारा (d) श्वेत वामन
(b) लगभग 90%।
सबसे गर्म तारों का रंग: (a) लाल (b) पीला (c) नारंगी (d) नीला
(d) O-वर्ग के नीले तारे।
सूर्य किस वर्णक्रमीय वर्ग का तारा है? (a) O (b) A (c) G (d) M
(c) G2, पीला बौना।
तारों का सही क्रम (गर्म से ठंडा): (a) OBAFGKM (b) MKGFABO (c) ABOFGKM (d) GKMOBAF
(a)।
तारों के स्पेक्ट्रम को तापमान से जोड़ने वाला "आयनन समीकरण" किसने दिया? (a) सी. वी. रमन (b) मेघनाद साहा (c) होमी भाभा (d) जे. सी. बोस
(b) 1920।
H-R आरेख में किनके बीच संबंध दिखाया जाता है? (a) दूरी और आयु (b) सतह तापमान और ज्योति (c) द्रव्यमान और दूरी (d) रंग और दूरी
(b)।
H-R आरेख में श्वेत वामन कहाँ होते हैं? (a) ऊपर दाएँ (b) ऊपर बाएँ (c) नीचे बाएँ (d) नीचे दाएँ
(c) गर्म पर मंद, क्योंकि बहुत छोटे।
लाल दानव ठंडे होकर भी चमकीले क्यों? (a) पास होते हैं (b) बहुत बड़े होते हैं (c) नीले होते हैं (d) परावर्तन से
(b) बड़ा सतह क्षेत्र।
भारी तारा कम क्यों जीता है? (a) ईंधन कम (b) ईंधन बहुत तेज़ जलाता है (c) ठंडा होता है (d) घूमता नहीं
(b) ज्योति लगभग द्रव्यमान की तीसरी-चौथी घात।
मंदाकिनी के सबसे आम तारे: (a) नीले महादानव (b) लाल बौने (c) सूर्य जैसे (d) श्वेत वामन
(b) लगभग तीन-चौथाई।
सबसे पास का तारा प्रॉक्सिमा सेंटॉरी है: (a) लाल बौना (b) नीला दानव (c) श्वेत वामन (d) पल्सर
(a) 4.24 प्रकाश वर्ष।
सूर्य की वर्तमान आयु लगभग: (a) 46 करोड़ वर्ष (b) 460 करोड़ वर्ष (c) 1,380 करोड़ वर्ष (d) 4,600 करोड़ वर्ष
(b)।
सूर्य का अंतिम रूप होगा: (a) ब्लैक होल (b) न्यूट्रॉन तारा (c) श्वेत वामन (d) सुपरनोवा
(c) ग्रहीय नीहारिका के बाद।
लाल दानव बनने पर सूर्य किन ग्रहों को निगल लेगा? (a) बुध, शुक्र (b) मंगल, बृहस्पति (c) केवल पृथ्वी (d) शनि
(a) पृथ्वी के बारे में बहस है।
"ग्रहीय नीहारिका" नाम क्यों पड़ा? (a) इनसे ग्रह बनते हैं (b) पुरानी दूरबीन में ये ग्रहों जैसी दिखीं (c) ग्रहों के पास होती हैं (d) ग्रहों के टूटने से
(b) विलियम हर्शेल ने नाम दिया।
श्वेत वामन को ढहने से कौन रोकता है? (a) संलयन (b) इलेक्ट्रॉन अपभ्रष्टता दाब (c) चुंबकत्व (d) घूर्णन
(b)।
चंद्रशेखर सीमा लगभग है: (a) 0.08 सौर द्रव्यमान (b) 1.4 सौर द्रव्यमान (c) 8 सौर द्रव्यमान (d) 20 सौर द्रव्यमान
(b) श्वेत वामन के लिए।
चंद्रशेखर को नोबेल पुरस्कार कब मिला? (a) 1930 (b) 1957 (c) 1983 (d) 2002
(c) फ़ाउलर के साथ।
नासा की कौन-सी एक्स-रे वेधशाला चंद्रशेखर के नाम पर है? (a) हबल (b) चंद्रा (c) स्पिट्ज़र (d) केप्लर
(b) 1999।
भारी तारे के क्रोड में किस तत्व के बनते ही संलयन से ऊर्जा मिलना बंद हो जाती है? (a) कार्बन (b) ऑक्सीजन (c) लोहा (d) सोना
(c) सबसे स्थिर नाभिकों में।
भारी तारे की प्याज़ जैसी परतों में सबसे छोटा चरण किसका है? (a) हाइड्रोजन (b) हीलियम (c) कार्बन (d) सिलिकॉन
(d) लगभग 1 दिन।
क्रोड-पतन सुपरनोवा की लगभग 99% ऊर्जा कौन ले जाता है? (a) प्रकाश (b) न्यूट्रिनो (c) ध्वनि (d) चुंबकत्व
(b)।
Ia सुपरनोवा किसका विस्फोट है? (a) लाल महादानव (b) श्वेत वामन (द्वितारा तंत्र में) (c) न्यूट्रॉन तारा (d) भूरा बौना
(b) लगभग 1.4 सौर द्रव्यमान पर।
Ia सुपरनोवा का उपयोग किसमें होता है? (a) मौसम पूर्वानुमान (b) ब्रह्मांडीय दूरियाँ नापने (मानक मोमबत्ती) (c) GPS (d) भूकंप
(b) 1998 डार्क एनर्जी की खोज।
II प्रकार के सुपरनोवा के बाद क्या बचता है? (a) कुछ नहीं (b) न्यूट्रॉन तारा या ब्लैक होल (c) श्वेत वामन (d) ग्रह
(b)।
नोवा और सुपरनोवा में मुख्य अंतर: (a) नोवा में तारा बचता है (b) नोवा अधिक चमकीला (c) सुपरनोवा बार-बार होता है (d) कोई अंतर नहीं
(a) नोवा श्वेत वामन की सतह पर विस्फोट।
केकड़ा नीहारिका किस वर्ष के सुपरनोवा का अवशेष है? (a) 185 (b) 1006 (c) 1054 (d) 1604
(c) चीनी अभिलेखों में दर्ज।
मंदाकिनी में नंगी आँख से देखा गया आख़िरी सुपरनोवा: (a) 1054 (b) 1572 (c) 1604 (केप्लर) (d) 1987
(c)।
SN 1987A किसमें हुआ? (a) एंड्रोमेडा (b) बड़ा मैगेलानिक बादल (c) ओरायन नीहारिका (d) सौरमंडल
(b) लगभग 1.68 लाख प्रकाश वर्ष।
पहला पल्सर किसने खोजा (1967)? (a) जॉसलिन बेल बर्नेल (b) वेरा रुबिन (c) हेनरीएटा लेविट (d) सेसिलिया पेन
(a)।
पल्सर वास्तव में है: (a) धड़कता लाल दानव (b) घूमता न्यूट्रॉन तारा (c) ब्लैक होल (d) धूमकेतु
(b) प्रकाश-स्तंभ जैसी किरणें।
न्यूट्रॉन तारे का व्यास लगभग: (a) 20 किमी (b) 12,700 किमी (c) 14 लाख किमी (d) 1 प्रकाश वर्ष
(a)।
बहुत तेज़ चुंबकीय क्षेत्र वाला न्यूट्रॉन तारा: (a) क्वासर (b) मैग्नेटार (c) ब्लेज़ार (d) सेफ़िड
(b)।
ब्लैक होल की "वापसी न हो सकने की" सीमा: (a) विलक्षणता (b) घटना-क्षितिज (c) अभिवृद्धि चकती (d) प्रकाशमंडल
(b)।
सूर्य जितने द्रव्यमान के ब्लैक होल की श्वार्ज़शिल्ड त्रिज्या लगभग: (a) 3 मिमी (b) 3 किमी (c) 3,000 किमी (d) 3 लाख किमी
(b)।
अगर सूर्य अचानक उतने ही द्रव्यमान का ब्लैक होल बन जाए, तो पृथ्वी: (a) खिंचकर उसमें गिरेगी (b) उसी कक्षा में घूमती रहेगी (c) सौरमंडल से बाहर (d) चंद्रमा से टकराएगी
(b) दूर से गुरुत्व वही; पर प्रकाश-गर्मी नहीं मिलेगी।
ब्लैक होल की पहली "छाया" (2019) किसकी थी? (a) Sgr A* (b) M87* (c) सिग्नस X-1 (d) गाया BH3
(b) इवेंट होराइज़न टेलीस्कोप।
GW170817 किस घटना से जुड़ा है? (a) दो ब्लैक होल की टक्कर (b) दो न्यूट्रॉन तारों की टक्कर (किलोनोवा) (c) सौर ज्वाला (d) धूमकेतु
(b) सोना-प्लैटिनम बनते देखे।
सोना और प्लैटिनम मुख्यतः कहाँ बने माने जाते हैं? (a) बिग बैंग (b) सूर्य जैसे तारों के क्रोड (c) न्यूट्रॉन तारों की टक्कर (r-प्रक्रिया) (d) पृथ्वी का क्रोड
(c)।
शरीर की हाइड्रोजन कहाँ से आई? (a) सुपरनोवा (b) बिग बैंग (c) श्वेत वामन (d) सूर्य
(b)।
तारों में तत्व बनने का पूरा सिद्धांत (1957) किसने दिया? (a) B²FH: बर्बिज, बर्बिज, फ़ाउलर, हॉयल (b) हबल (c) गैमो (d) आइंस्टीन
(a)।
आर्द्रा (Betelgeuse) किस तारामंडल में है? (a) वृषभ (b) कालपुरुष (ओरायन) (c) सप्तर्षि (d) वृश्चिक
(b) लाल महादानव।
आर्द्रा के साथी तारे "सिवरहा" को पहली बार (2025) किस दूरबीन से देखा गया? (a) हबल (b) जेमिनी नॉर्थ (c) GMRT (d) चंद्रा
(b) नासा के स्पेकल कैमरे से।
T कोरोनी बोरियालिस है: (a) एक पुनरावर्ती नोवा (b) ब्लैक होल (c) सुपरनोवा अवशेष (d) धूमकेतु
(a) पिछले विस्फोट 1866, 1946।
भारत का पहला एक्स-रे ध्रुवणमापी उपग्रह: (a) एस्ट्रोसैट (b) XPoSat (c) आदित्य-L1 (d) चंद्रयान-3
(b) 1 जनवरी 2024।
25एक नज़र मेंयाद रखें
- जन्म: नीहारिका → ढहना (जींस) → आदि-तारा + चकती → T-टॉरी → 1 करोड़ °C पर संलयन → मुख्य अनुक्रम।
- नियम: द्रव्यमान ही भाग्य; भारी तारा गर्म, नीला, चमकीला और कम आयु।
- वर्ग: O B A F G K M (नीला गर्म, लाल ठंडा); सूर्य G2।
- H-R आरेख: तापमान बनाम ज्योति; मुख्य अनुक्रम, दानव, महादानव, श्वेत वामन।
- 8 सौर द्रव्यमान से कम: लाल दानव → ग्रहीय नीहारिका → श्वेत वामन (1.4 सीमा, चंद्रशेखर)। सूर्य यही बनेगा।
- 8 से भारी: महादानव → प्याज़ परतें → लोहे का क्रोड → क्रोड-पतन → सुपरनोवा → न्यूट्रॉन तारा (2-3 तक) या ब्लैक होल।
- पल्सर: घूमता न्यूट्रॉन तारा, बेल बर्नेल 1967। ब्लैक होल: घटना-क्षितिज, 3 किमी प्रति सौर द्रव्यमान।
- तत्व: H-He बिग बैंग; C-N छोटे तारे; O-Si-Ca सुपरनोवा; Fe-Ni Ia; सोना किलोनोवा (GW170817)।
- ख़बरों में: सिवरहा (2025), T CrB (प्रतीक्षा), SN 1987A न्यूट्रॉन तारा (2024), XPoSat, LIGO-India।
© Pankaj Bediya · TGT Geography · Geoland.in
कक्षा 6 अध्याय 1 · कक्षा 8 विज्ञान (पुरानी) अध्याय 17: तारे एवं सौर परिवार · कक्षा 11 भौतिक भूगोल अध्याय 2: तारों का निर्माण
1कक्षा 6-8 की बुनियादबुनियाद
- खगोलीय पिंड (कक्षा 6 भूगोल, अध्याय 1 "सौरमंडल में पृथ्वी"): सूर्य, चंद्रमा, तारे और ग्रह। जिन पिंडों के पास अपनी ऊष्मा और प्रकाश होता है, वे तारे कहलाते हैं; सूर्य भी एक तारा है।
- ग्रहों के पास अपना प्रकाश नहीं होता; वे तारों के प्रकाश से चमकते हैं।
- तारामंडल: तारों के विभिन्न समूहों से बनी आकृतियाँ, जैसे सप्तर्षि (बिग बीयर) और कालपुरुष (ओरायन)।
- ध्रुव तारा उत्तर दिशा बताता है; यह आकाश में लगभग एक ही स्थान पर दिखता है।
- दिन में तारे इसलिए नहीं दिखते क्योंकि सूर्य का तेज़ प्रकाश उन्हें ढक देता है।
- तारे टिमटिमाते दिखते हैं क्योंकि उनका प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल की हिलती परतों से गुज़रता है।
- आकाशगंगा (मंदाकिनी): करोड़ों तारों, बादलों और गैसों की प्रणाली; रात में आकाश के आर-पार "दूधिया पट्टी" (पेज 1.4)।
- प्रकाश वर्ष: प्रकाश द्वारा एक वर्ष में तय दूरी; सूर्य के बाद सबसे पास का तारा (प्रॉक्सिमा) लगभग 4.2 प्रकाश वर्ष दूर।
2कक्षा 8 (पुरानी विज्ञान पुस्तक): तारे एवं सौर परिवार
पुरानी कक्षा 8 विज्ञान (अध्याय 17 "तारे एवं सौर परिवार") की मुख्य बातें:
- सूर्य हमारे सबसे निकट का तारा है; पृथ्वी से लगभग 15 करोड़ किमी दूर। सूर्य के बाद निकटतम तारा ऐल्फ़ा सेंटॉरी (लगभग 4.3 प्रकाश वर्ष)।
- तारे दिन में भी आकाश में होते हैं, पर सूर्य की चमक के कारण नहीं दिखते।
- तारे पूर्व से पश्चिम की ओर चलते दिखते हैं, क्योंकि पृथ्वी पश्चिम से पूर्व घूमती है; ध्रुव तारा पृथ्वी के अक्ष की सीध में होने से स्थिर दिखता है।
- तारे बहुत दूर हैं, इसलिए उनकी दूरी प्रकाश वर्ष में मापी जाती है।
- तारामंडल: सप्तर्षि (7 प्रमुख तारे), कालपुरुष (7-8 प्रमुख तारे; बीच के तीन तारे "पेटी"), कैसियोपिया (W या M जैसी आकृति)।
- सप्तर्षि से ध्रुव तारा खोजना: सप्तर्षि के आगे के दो तारों को मिलाने वाली रेखा को लगभग पाँच गुना आगे बढ़ाएँ।
- कालपुरुष के पास व्याध (Sirius) रात के आकाश का सबसे चमकीला तारा है।
इस पेज से अतिरिक्त समझ
- सूर्य G2 वर्ग का पीला तारा है, बड़े तारों की तुलना में मध्यम आकार का; यह लगभग 460 करोड़ वर्ष पुराना है।
- कालपुरुष का लाल तारा आर्द्रा (Betelgeuse) एक बूढ़ा लाल महादानव है और नीला तारा राइजेल एक गर्म नीला महादानव: एक ही तारामंडल में तारों के अलग-अलग रूप।
- कालपुरुष की "तलवार" में धुँधला धब्बा ओरायन नीहारिका है, जहाँ आज भी तारे जन्म ले रहे हैं।
3कक्षा 11 भूगोल, अध्याय 2: तारों का निर्माण
NCERT (भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत, अध्याय 2 "पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास") के अनुसार:
- प्रारंभिक ब्रह्मांड में ऊर्जा व पदार्थ का वितरण समान नहीं था। घनत्व में आरंभिक भिन्नता से गुरुत्वाकर्षण बलों में भिन्नता आई, जिसके परिणामस्वरूप पदार्थ का एकत्रण हुआ। यही एकत्रण आकाशगंगाओं के विकास का आधार बना।
- एक आकाशगंगा असंख्य तारों का समूह है। आकाशगंगाओं का विस्तार इतना अधिक होता है कि उनकी दूरी हज़ारों प्रकाश वर्षों में मापी जाती है। एक अकेली आकाशगंगा का व्यास 80 हज़ार से 1 लाख 50 हज़ार प्रकाश वर्ष के बीच हो सकता है।
- एक आकाशगंगा के निर्माण की शुरुआत हाइड्रोजन गैस से बने विशाल बादल के संचयन से होती है, जिसे नीहारिका (Nebula) कहा गया।
- क्रमशः इस बढ़ती हुई नीहारिका में गैस के झुंड विकसित हुए। ये झुंड बढ़ते-बढ़ते घने गैसीय पिंड बने, जिनसे तारों का निर्माण आरंभ हुआ।
- ऐसा विश्वास किया जाता है कि तारों का निर्माण लगभग 5 से 6 अरब वर्षों पहले हुआ।
- प्रकाश वर्ष समय का नहीं, दूरी का माप है; प्रकाश की गति लगभग 3 लाख किमी प्रति सेकंड है, और एक वर्ष में प्रकाश लगभग 9.461 × 10¹² किमी चलता है। सूर्य से पृथ्वी की औसत दूरी लगभग 14 करोड़ 96 लाख किमी, यानी प्रकाश के हिसाब से केवल लगभग 8.3 मिनट।
इस पेज से अतिरिक्त समझ (NCERT की बात को आगे बढ़ाते हुए)
- "5-6 अरब वर्ष पहले" को सूर्य जैसे तारों और हमारे सौरमंडल के संदर्भ में समझें। आज की समझ के अनुसार पहले तारे बिग बैंग के लगभग 10-20 करोड़ वर्ष बाद (यानी लगभग 1,350 करोड़ वर्ष पहले) बनने लगे थे, और तारे आज भी बन रहे हैं (जैसे ओरायन नीहारिका में)। सूर्य लगभग 460 करोड़ वर्ष पहले बना।
- नीहारिका के झुंड क्यों सिकुड़ते हैं: अपने ही गुरुत्व से; सिकुड़ने से गर्म होते हैं और क्रोड लगभग 1 करोड़ °C पहुँचने पर नाभिकीय संलयन शुरू होता है: तारा "जन्म" लेता है।
- यही प्रक्रिया आगे सौरमंडल (पेज 1.8) बनाती है: तारे के चारों ओर बची गैस-धूल की चकती से ग्रह।
4सरल भाषा में: तारे का पूरा जीवन
- जन्म: नीहारिका (गैस-धूल का बादल) → अपने भार से सिकुड़ना → गर्म होना → संलयन → तारा।
- जवानी: मुख्य अनुक्रम; हाइड्रोजन से हीलियम; सूर्य अभी यहीं है।
- बुढ़ापा: ईंधन ख़त्म होने पर फूलकर लाल दानव।
- अंत (हल्का तारा, जैसे सूर्य): बाहरी परतें उड़ जाती हैं (ग्रहीय नीहारिका) और बचता है श्वेत वामन।
- अंत (भारी तारा): सुपरनोवा विस्फोट; बचता है न्यूट्रॉन तारा या ब्लैक होल।
- याद रखें: भारी तारा कम जीता है; सूर्य कभी ब्लैक होल नहीं बनेगा; हम तारों में बने तत्वों से बने हैं।
5अभ्यास: वस्तुनिष्ठ प्रश्न (उत्तर सहित)परीक्षा के प्रश्न
- जिन खगोलीय पिंडों के पास अपना प्रकाश और ऊष्मा होती है, वे कहलाते हैं: (a) ग्रह (b) उपग्रह (c) तारे (d) धूमकेतु
उत्तर: (c) तारे (कक्षा 6)।
- NCERT के अनुसार तारों का निर्माण लगभग कब हुआ? (a) 50 करोड़ वर्ष पहले (b) 5-6 अरब वर्ष पहले (c) 13.7 अरब वर्ष पहले (d) 10 लाख वर्ष पहले
उत्तर: (b) (कक्षा 11)।
- आकाशगंगा के निर्माण की शुरुआत हाइड्रोजन गैस के विशाल बादल से होती है, जिसे कहते हैं: (a) नीहारिका (b) तारामंडल (c) उल्का (d) क्षुद्रग्रह
उत्तर: (a) नीहारिका।
- प्रकाश वर्ष किसकी इकाई है? (a) समय (b) दूरी (c) प्रकाश की तीव्रता (d) द्रव्यमान
उत्तर: (b) दूरी।
- सूर्य के बाद पृथ्वी के सबसे निकट का तारा: (a) ध्रुव तारा (b) व्याध (c) ऐल्फ़ा सेंटॉरी (प्रॉक्सिमा) (d) आर्द्रा
उत्तर: (c)।
- ध्रुव तारा स्थिर क्यों दिखता है? (a) वह घूमता नहीं (b) पृथ्वी के घूर्णन अक्ष की सीध में है (c) बहुत पास है (d) सबसे चमकीला है
उत्तर: (b)।
- सूर्य अंत में बनेगा: (a) ब्लैक होल (b) श्वेत वामन (c) न्यूट्रॉन तारा (d) सुपरनोवा
उत्तर: (b)।
- सबसे गर्म तारों का रंग: (a) लाल (b) पीला (c) नीला (d) नारंगी
उत्तर: (c)।
सही या ग़लत
- ग्रह अपने प्रकाश से चमकते हैं। ग़लत (तारों का प्रकाश लौटाते हैं)।
- भारी तारा हल्के तारे से अधिक समय जीता है। ग़लत।
- तारे आज भी बन रहे हैं। सही (ओरायन नीहारिका)।
- श्वेत वामन की अधिकतम सीमा लगभग 1.4 सौर द्रव्यमान है। सही (चंद्रशेखर)।
- नोवा में पूरा तारा नष्ट हो जाता है। ग़लत (सुपरनोवा में)।
6लघु, दीर्घ और HOTS प्रश्नपरीक्षा के प्रश्न
लघु उत्तरीय (2-3 अंक)
- नीहारिका क्या है? तारों के निर्माण में इसकी भूमिका बताइए। (गैस-धूल का बादल; गुरुत्व से झुंड; घने पिंड; संलयन)
- तारा और ग्रह में दो अंतर लिखिए। (अपना प्रकाश/ऊष्मा; संलयन; ग्रह तारे की परिक्रमा करते हैं)
- प्रकाश वर्ष क्या है? सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक कितने समय में आता है? (दूरी की इकाई; लगभग 8.3 मिनट)
- श्वेत वामन क्या है? (हल्के तारे का पृथ्वी जितना घना अवशेष; संलयन नहीं)
दीर्घ उत्तरीय (5 अंक)
- NCERT के अनुसार तारों और आकाशगंगाओं के निर्माण की प्रक्रिया समझाइए। (असमान घनत्व → गुरुत्व में भिन्नता → पदार्थ का एकत्रण → नीहारिका → गैस के झुंड → घने पिंड → तारे; 5-6 अरब वर्ष; प्रकाश वर्ष)
- तारे के जीवन-चक्र का वर्णन कीजिए; हल्के और भारी तारों के अंत में अंतर स्पष्ट कीजिए। (जन्म, मुख्य अनुक्रम, लाल दानव; श्वेत वामन बनाम सुपरनोवा, न्यूट्रॉन तारा, ब्लैक होल; चित्र)
HOTS (उच्च स्तरीय सोच)
- "भारी तारे के पास ईंधन अधिक है, फिर भी वह जल्दी मरता है।" कैसे? (उत्तर संकेत: भारी तारे का गुरुत्व अधिक, क्रोड अधिक गर्म, संलयन बहुत तेज़; ट्रक और कार की टंकी का उदाहरण)
- अगर हम आज आर्द्रा को फटते देखें, तो क्या वह आज ही फटा? (उत्तर संकेत: नहीं; प्रकाश को सैकड़ों वर्ष लगे; हम अतीत देखते हैं)
- पृथ्वी के क्रोड का लोहा और हमारे रक्त का लोहा कहाँ से आया होगा? (उत्तर संकेत: पुराने तारों और सुपरनोवा में बना; सौरमंडल उसी मलबे से बना)
- अगर तारे कभी न मरते, तो क्या पृथ्वी जैसे ग्रह बन पाते? (उत्तर संकेत: नहीं; भारी तत्व तारों के मरने पर ही बिखरते हैं; केवल हाइड्रोजन-हीलियम के ब्रह्मांड में चट्टानें, जल, जीवन संभव नहीं)
7याद रखेंयाद रखें
- तारे = अपना प्रकाश और ऊष्मा वाले पिंड; सूर्य भी एक तारा (कक्षा 6)।
- NCERT कक्षा 11: नीहारिका → गैस के झुंड → तारे; तारों का निर्माण लगभग 5-6 अरब वर्ष पहले।
- प्रकाश वर्ष = दूरी; सूर्य का प्रकाश लगभग 8.3 मिनट में।
- सूर्य के बाद निकटतम तारा: प्रॉक्सिमा / ऐल्फ़ा सेंटॉरी; रात का सबसे चमकीला तारा: व्याध।
- तारे का भाग्य = द्रव्यमान; सूर्य → श्वेत वामन; भारी तारा → सुपरनोवा → न्यूट्रॉन तारा या ब्लैक होल।
© Pankaj Bediya · TGT Geography · Geoland.in
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