आकाशगंगाएँ नहीं भागतीं, अंतरिक्ष फैलता है
दूर की लगभग हर आकाशगंगा हमसे दूर जा रही है, और जो जितनी दूर है वह उतनी तेज़: v = H₀ × d (हबल-लेमैत्र नियम)। इसका अर्थ यह नहीं कि हम केंद्र में हैं; किसी भी आकाशगंगा से यही दिखता है, क्योंकि अंतरिक्ष स्वयं हर जगह फैल रहा है।
1998 में पता चला कि यह फैलाव तेज़ हो रहा है। इसका कारण एक अनजानी डार्क एनर्जी मानी जाती है, जो ब्रह्मांड का लगभग 68% है। ब्रह्मांड का भविष्य इसी के स्वभाव पर टिका है।
याद रखें
- बिग बैंग = विस्तरित ब्रह्मांड परिकल्पना (NCERT); प्रमाण: एडविन हबल।
- v = H₀ × d: दूरी दोगुनी तो दूर जाने की चाल दोगुनी; कोई केंद्र नहीं।
- प्रमाण: लाल विचलन; 1 + z = तब से ब्रह्मांड कितने गुना फैला।
- आकाशगंगाओं के बीच की दूरी बढ़ती है, उनका आकार नहीं; सौरमंडल नहीं फैलता।
- 1998: फैलाव तेज़; कारण डार्क एनर्जी (लगभग 68%)।
नोट्सपढ़ने और पढ़ाने के लिए पूरी जानकारी
UPSC प्रीलिम्स और मेन्स (GS-1: ब्रह्मांड की उत्पत्ति; GS-3: विज्ञान-प्रौद्योगिकी) के स्तर पर · NCERT कक्षा 11 अध्याय 2 से आगे
1परिचय: "ब्रह्मांड फैल रहा है" का अर्थ
1920 के दशक तक ज़्यादातर वैज्ञानिक, स्वयं आइंस्टीन भी, मानते थे कि ब्रह्मांड स्थिर है: न बढ़ता, न घटता। फिर दूर की आकाशगंगाओं के प्रकाश में एक अजीब बात दिखी: लगभग सबकी रेखाएँ लाल की ओर खिसकी थीं, यानी वे हमसे दूर जा रही थीं; और जो जितनी दूर, वह उतनी तेज़।
इसका अर्थ: ब्रह्मांड फैल रहा है। आकाशगंगाएँ अंतरिक्ष में किसी केंद्र से भाग नहीं रहीं; अंतरिक्ष स्वयं फैल रहा है और आकाशगंगाओं के बीच की दूरियाँ बढ़ रही हैं। अगर फ़िल्म को उलटा चलाएँ, तो सब कुछ पीछे एक बहुत गर्म, घने आरंभ पर पहुँचता है: यही बिग बैंग (पेज 1.1) का मूल विचार है। NCERT कक्षा 11 इसे विस्तरित ब्रह्मांड परिकल्पना (Expanding Universe Hypothesis) कहती है।
इस पेज में: फैलाव का सही अर्थ, हबल-लेमैत्र नियम, लाल विचलन, ब्रह्मांड नापने की दूरी की सीढ़ी, 1998 की त्वरित फैलाव की खोज, डार्क एनर्जी, आज की सबसे बड़ी बहस हबल तनाव, और ब्रह्मांड का भविष्य।
2खोज का इतिहास
| वर्ष | वैज्ञानिक | योगदान |
|---|---|---|
| 1912 | वेस्टो स्लाइफ़र | सर्पिल "नीहारिकाओं" (असल में आकाशगंगाओं) के स्पेक्ट्रम में बड़े लाल विचलन नापे |
| 1912 | हेनरीएटा लेविट | सेफ़िड तारों का आवर्तकाल-चमक संबंध: दूरी नापने की कुंजी |
| 1917 | अल्बर्ट आइंस्टीन | सामान्य आपेक्षिकता से ब्रह्मांड का मॉडल; स्थिर रखने के लिए ब्रह्मांडीय स्थिरांक (Λ) जोड़ा |
| 1922 | अलेक्ज़ेंडर फ़्रीडमैन | आइंस्टीन के समीकरणों से फैलते या सिकुड़ते ब्रह्मांड के हल |
| 1924 | एडविन हबल | एंड्रोमेडा में सेफ़िड: यह मंदाकिनी से बाहर अलग आकाशगंगा है |
| 1927 | जॉर्ज लेमैत्र (बेल्जियम के पादरी-वैज्ञानिक) | फैलते ब्रह्मांड का सिद्धांत और दूरी-चाल संबंध; बाद में "आदिम परमाणु" का विचार |
| 1929 | एडविन हबल | आँकड़ों से दिखाया: दूर जाने की चाल ∝ दूरी |
| 1931 | आइंस्टीन | फैलाव मान लिया; Λ को बाद में "सबसे बड़ी भूल" कहा, ऐसा प्रचलित किस्सा है |
| 1948-49 | गैमो (बिग बैंग); हॉयल, बॉन्डी, गोल्ड (स्थिर अवस्था) | दो प्रतिद्वंद्वी सिद्धांत (पेज 1.1, 1.7) |
| 1965 | पेंज़ियास और विल्सन | CMB: बिग बैंग की पुष्टि |
| 1998 | पर्लमटर; श्मिट और रीस की टीमें | फैलाव तेज़ हो रहा है: डार्क एनर्जी (2011 नोबेल) |
| 2018 | अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) | नाम सुझाया: हबल-लेमैत्र नियम |
| 2025 | DESI | डार्क एनर्जी के समय के साथ बदलने के संकेत |
3फैलाव का सही अर्थ: केंद्र नहीं, अंतरिक्ष फैलता है
किशमिश वाली रोटी का उदाहरण
आटे में बराबर दूरी पर किशमिश हैं। सेंकने पर आटा एक घंटे में दोगुना फूलता है। किशमिश A से देखें: 1 सेमी दूर वाली B अब 2 सेमी पर (चाल 1 सेमी/घंटा), 2 सेमी दूर वाली C अब 4 सेमी पर (चाल 2 सेमी/घंटा)। दूरी दोगुनी, चाल दोगुनी। यही हबल का नियम है। और किसी भी किशमिश से देखें, यही दिखेगा; इसलिए फैलाव का कोई केंद्र नहीं है।
- NCERT का गुब्बारा उदाहरण भी यही बताता है: फूलते गुब्बारे पर बने बिंदु एक-दूसरे से दूर होते जाते हैं। (गुब्बारे की सतह ही "अंतरिक्ष" है; गुब्बारे का भीतरी केंद्र उदाहरण का हिस्सा नहीं।)
क्या सब कुछ फैल रहा है?
नहीं। जो चीज़ें गुरुत्व या दूसरे बलों से कसकर बँधी हैं, वे नहीं फैलतीं:
- परमाणु, हमारा शरीर, पृथ्वी, सौरमंडल (पृथ्वी-सूर्य की दूरी फैलाव से नहीं बढ़ती),
- मंदाकिनी, और यहाँ तक कि स्थानीय समूह (इसीलिए एंड्रोमेडा पास आ रही है, पेज 1.4)।
फैलाव केवल बहुत बड़े पैमाने पर, आकाशगंगा-गुच्छों के बीच के अंतरिक्ष में दिखता है। जैसे किशमिशें खुद नहीं फूलतीं, केवल आटा फूलता है।
ब्रह्मांडीय सिद्धांत (Cosmological Principle)
बहुत बड़े पैमाने पर ब्रह्मांड हर जगह एक-सा (समांगी) और हर दिशा में एक-सा (समदैशिक) है। इसलिए किसी भी आकाशगंगा का प्रेक्षक वही नियम पाएगा; हम किसी विशेष जगह पर नहीं हैं।
3D मॉडल के पहले दृश्य में "दूसरी आकाशगंगा से देखें" दबाइए: वहाँ से भी सब आकाशगंगाएँ उसी नियम से दूर जाती दिखती हैं।
4हबल-लेमैत्र नियम: सूत्र और हल किए उदाहरण
v = H₀ × d
- v = आकाशगंगा के दूर जाने की चाल (किमी/सेकंड), d = दूरी (मेगापारसेक, Mpc)।
- H₀ (हबल स्थिरांक) = आज का फैलाव-दर; लगभग 67 से 73 किमी/सेकंड प्रति मेगापारसेक (इस अंतर की बहस आगे "हबल तनाव" में)।
- 1 मेगापारसेक (Mpc) = 10 लाख पारसेक ≈ 32.6 लाख प्रकाश वर्ष।
- हबल के मूल 1929 के आँकड़ों में H₀ लगभग 500 निकला था, क्योंकि उस समय दूरियाँ ग़लत (कम) नापी गई थीं।
हल किए उदाहरण (H₀ = 70 मानें)
100 Mpc दूर की आकाशगंगा किस चाल से दूर जा रही है?
v = 70 × 100 = 7,000 किमी/सेकंड।
एक आकाशगंगा 14,000 किमी/से. से दूर जा रही है। दूरी?
d = v ÷ H₀ = 14,000 ÷ 70 = 200 Mpc ≈ 65 करोड़ प्रकाश वर्ष।
पास की कम दूरी पर, लाल विचलन z = 0.01 हो तो चाल?
छोटे z के लिए v ≈ c × z = 3,00,000 × 0.01 = 3,000 किमी/सेकंड; दूरी ≈ 3,000 ÷ 70 ≈ 43 Mpc।
हबल समय: आयु का मोटा अनुमान
अगर फैलाव की दर सदा एक-सी रही होती, तो सब कुछ एक साथ होने का समय = 1 ÷ H₀। H₀ = 70 पर यह लगभग 1400 करोड़ वर्ष निकलता है, जो ब्रह्मांड की आयु (लगभग 1380 करोड़ वर्ष) के बहुत पास है। (असल में फैलाव पहले धीमा हुआ, फिर तेज़; दोनों प्रभाव लगभग बराबर हो जाते हैं।)
5लाल विचलन: खिंचता प्रकाश
लाल विचलन (Redshift, z) = प्रकाश की तरंगदैर्घ्य का बढ़ जाना, जिससे स्पेक्ट्रम की रेखाएँ लाल (लंबी तरंग) की ओर खिसकती हैं। z = (देखी गई तरंगदैर्घ्य − मूल तरंगदैर्घ्य) ÷ मूल तरंगदैर्घ्य
प्रयोगशाला में हाइड्रोजन की 656.3 nm की रेखा, किसी आकाशगंगा में 721.9 nm पर मिली। z?
(721.9 − 656.3) ÷ 656.3 = 65.6 ÷ 656.3 ≈ 0.10।
सबसे सरल नियम: 1 + z
1 + z = प्रकाश के निकलने के समय से आज तक ब्रह्मांड कितने गुना फैला।
- z = 1: प्रकाश चलते समय से अब तक दूरियाँ 2 गुनी हो गईं।
- CMB का z ≈ 1100: तब से ब्रह्मांड लगभग 1100 गुना फैला (पेज 1.3)।
- इसीलिए z का अर्थ "चाल" से अधिक "कितना पुराना प्रकाश" है।
z > 1 का मतलब "प्रकाश से तेज़" नहीं
छोटे z के लिए v ≈ c z ठीक है। बड़े z पर यह सूत्र नहीं चलता; z = 3 का अर्थ यह नहीं कि आकाशगंगा प्रकाश से तीन गुना तेज़ भाग रही है। वहाँ "दूरी" और "चाल" की परिभाषा भी सावधानी से करनी पड़ती है।
नीला विचलन (Blueshift)
पास आती वस्तु का प्रकाश नीले की ओर खिसकता है। एंड्रोमेडा (लगभग 110 किमी/से. से पास आ रही) और मंदाकिनी के भीतर हमारी ओर आते कुछ तारे नीला विचलन दिखाते हैं।
3D मॉडल का दूसरा दृश्य: दूर की आकाशगंगा से निकला नीला प्रकाश, फैलते अंतरिक्ष में चलते-चलते लंबी तरंग (लाल) बनकर पहुँचता है। नीचे की दो पट्टियों में हाइड्रोजन की रेखाएँ खिसकती दिखती हैं; "z बदलें" से अलग-अलग दूरी की आकाशगंगाएँ देखिए।
6ब्रह्मांड नापने की सीढ़ी
कोई एक तरीका पूरे ब्रह्मांड की दूरी नहीं नाप सकता, इसलिए "सीढ़ी" बनाई गई: हर सीढ़ी अपने से नीचे वाली से जाँची (कैलिब्रेट) जाती है।
| सीढ़ी | तरीका | कहाँ तक (लगभग) |
|---|---|---|
| 1. रडार, लेज़र | संकेत भेजकर लौटने का समय (चंद्रमा पर अपोलो के परावर्तक) | सौरमंडल; इसी से 1 खगोलीय इकाई (लगभग 15 करोड़ किमी) |
| 2. लंबन (Parallax) | छह महीने के अंतर पर तारे का खिसकना; गाया उपग्रह | हज़ारों प्रकाश वर्ष |
| 3. मानक मोमबत्तियाँ: सेफ़िड, TRGB, JAGB | ज्ञात असली चमक वाले तारे; दिखती चमक से दूरी | लगभग 10 करोड़ प्रकाश वर्ष तक |
| 4. Ia सुपरनोवा | लगभग एक-सी असली चमक वाले विस्फोट | अरबों प्रकाश वर्ष |
| 5. लाल विचलन, BAO, CMB | हबल नियम; प्रारंभिक ब्रह्मांड की ध्वनि-तरंगों का "मानक पैमाना" | पूरा दृश्य ब्रह्मांड |
मानक मोमबत्ती (Standard Candle)
जिस वस्तु की असली चमक हमें पता हो, उसकी दिखने वाली चमक नापकर दूरी निकाली जा सकती है, क्योंकि चमक दूरी के वर्ग के अनुपात में घटती है (दूरी दोगुनी तो चमक चौथाई)। जैसे रात में सड़क की एक जैसी बत्तियाँ: जो जितनी धुँधली, उतनी दूर।
- सेफ़िड तारे फूलते-सिकुड़ते हैं और उनकी चमक कुछ दिनों के निश्चित आवर्तकाल में बदलती है। हेनरीएटा लेविट (1912) ने पाया कि जिसका आवर्तकाल लंबा, वह असल में अधिक चमकीला। आवर्तकाल नापो, असली चमक पता करो, दूरी निकालो।
- TRGB (लाल दानवों की चोटी): पुराने लाल दानव तारों की अधिकतम चमक लगभग एक-सी होती है; JAGB एक अन्य प्रकार के कार्बन-समृद्ध तारे। JWST इनसे नई, अलग जाँच कर रही है।
मानक पैमाना (Standard Ruler): BAO
प्रारंभिक ब्रह्मांड के गर्म प्लाज़्मा में ध्वनि-तरंगें चलती थीं (पेज 1.3); पुनर्संयोजन पर वे "जम" गईं। इससे आकाशगंगाओं के वितरण में लगभग 50 करोड़ प्रकाश वर्ष का एक पसंदीदा अंतर छप गया: बेरियॉन ध्वनिक दोलन (BAO)। अलग-अलग समय पर इस "पैमाने" को नापकर फैलाव का इतिहास पता चलता है; DESI यही करता है।
71998: फैलाव तेज़ हो रहा है
- Ia सुपरनोवा: एक श्वेत वामन तारा साथी तारे से गैस खींचता है; भार लगभग 1.4 सूर्य (भारतीय वैज्ञानिक सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर की सीमा) के पास पहुँचते ही वह फट जाता है। हर बार लगभग एक-सी असली चमक, और पूरी आकाशगंगा से भी अधिक चमकीला; इसलिए अरबों प्रकाश वर्ष दूर से भी "मानक मोमबत्ती"।
- वैज्ञानिक उम्मीद कर रहे थे कि गुरुत्व के कारण फैलाव धीमा हो रहा होगा। पर 1998 में दो टीमों (सॉल पर्लमटर; ब्रायन श्मिट और एडम रीस) ने पाया कि दूर के सुपरनोवा अपेक्षा से धुँधले, यानी अधिक दूर हैं: फैलाव तेज़ (त्वरित) हो रहा है। 2011 का भौतिकी नोबेल इसी खोज के लिए मिला।
- फैलाव का इतिहास: पहले लगभग 900 करोड़ वर्ष पदार्थ के गुरुत्व से फैलाव धीमा होता गया; लगभग 500-600 करोड़ वर्ष पहले से डार्क एनर्जी हावी हुई और फैलाव तेज़ होने लगा। (रोचक संयोग: लगभग यही सौरमंडल के जन्म का समय है, पेज 1.8।)
8डार्क एनर्जी: फैलाव को तेज़ करने वाली अज्ञात "ऊर्जा"
- फैलाव को तेज़ करने वाले कारण को डार्क एनर्जी कहते हैं। यह ब्रह्मांड की कुल ऊर्जा-घनत्व का लगभग 68% है, फिर भी हम नहीं जानते कि यह क्या है।
- सबसे सरल व्याख्या: ब्रह्मांडीय स्थिरांक (Λ)। आइंस्टीन का वही स्थिरांक, जिसे उन्होंने 1917 में स्थिर ब्रह्मांड के लिए जोड़ा और बाद में हटा दिया था। इसे "ख़ाली अंतरिक्ष की ऊर्जा" (निर्वात ऊर्जा) माना जाता है: जैसे-जैसे अंतरिक्ष बढ़ता है, उतनी ही ऊर्जा प्रति घन मीटर बनी रहती है, इसलिए फैलाव के साथ उसका कुल प्रभाव बढ़ता है।
- मानक मॉडल (ΛCDM): Λ (डार्क एनर्जी) + CDM (ठंडा डार्क मैटर) + सामान्य पदार्थ। आज तक के ज़्यादातर आँकड़े इसी से मेल खाते हैं।
- क्वांटम भौतिकी की समस्या: सिद्धांत से निकाली गई निर्वात ऊर्जा, नापे गए मान से लगभग 10¹²⁰ गुना अधिक आती है: इसे भौतिकी का सबसे बड़ा "ग़लत अनुमान" कहा जाता है।
- DESI (2025) का संकेत: 1.4 करोड़ से अधिक आकाशगंगाओं और क्वासरों के नक्शे (DR2, मार्च 2025) से संकेत मिले कि डार्क एनर्जी समय के साथ कमज़ोर हो रही हो सकती है; CMB और सुपरनोवा आँकड़ों के साथ यह पसंद लगभग 2.8 से 4.2 सिग्मा तक है। पक्की "खोज" के लिए 5 सिग्मा चाहिए, इसलिए अभी यह संकेत भर है।
9हबल तनाव: ब्रह्मांड की फैलाव-दर पर सबसे बड़ी बहस
H₀ नापने के दो बड़े रास्ते हैं, और वे अलग उत्तर देते हैं:
| रास्ता | कैसे | H₀ (किमी/से./Mpc, लगभग) |
|---|---|---|
| प्रारंभिक ब्रह्मांड से | CMB (प्लैंक) + मानक मॉडल से आज का मान "आगे गिनना"; DESI BAO भी | 67.4 (प्लैंक), लगभग 68.5 (DESI + CMB) |
| पास के ब्रह्मांड से सीधे | सेफ़िड + Ia सुपरनोवा (SH0ES, एडम रीस) | लगभग 73.0 |
| पास से, दूसरे तरीके | JWST से TRGB (CCHP, वेंडी फ़्रीडमैन, 2025) | लगभग 70.4 |
| पास से, स्वतंत्र तरीके | गुरुत्वीय लेंस वाले क्वासर (TDCOSMO, 2025); सतह-चमक उतार-चढ़ाव (SBF, JWST) | लगभग 72-74 |
- दोनों बड़े समूहों का अंतर कुछ दावों के अनुसार 5-6 सिग्मा तक है; इसे हबल तनाव कहते हैं।
- संभावित कारण: (1) किसी माप में छिपी व्यवस्थित ग़लती (जैसे सेफ़िड के पास धूल या भीड़ वाले तारे); (2) नई भौतिकी: जैसे प्रारंभिक ब्रह्मांड में कुछ समय के लिए अतिरिक्त "प्रारंभिक डार्क एनर्जी", नए कण, या बदलती डार्क एनर्जी।
- स्थिति (2026 तक): हल नहीं हुआ। फ़्रीडमैन की टीम का कहना है कि JWST के मापों से अंतर घटता है; रीस और दूसरी टीमें कहती हैं कि तनाव बना हुआ है। मार्च 2026 तक भी इस पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में बहस जारी है।
UPSC दृष्टि: यह उदाहरण है कि विज्ञान कैसे आगे बढ़ता है: अलग-अलग तरीकों के मेल न खाने से या तो ग़लती पकड़ी जाती है, या नई खोज होती है।
10दृश्य ब्रह्मांड, क्षितिज और "प्रकाश से तेज़" फैलाव
- दृश्य ब्रह्मांड (Observable Universe): वह भाग जहाँ से प्रकाश को बिग बैंग के बाद से हम तक पहुँचने का समय मिला।
- ब्रह्मांड की आयु लगभग 1380 करोड़ वर्ष है, फिर भी दृश्य ब्रह्मांड की त्रिज्या लगभग 4650 करोड़ प्रकाश वर्ष है। कारण: प्रकाश के चलते रहने के दौरान अंतरिक्ष फैलता रहा; जिस पिंड का प्रकाश आज पहुँचा, वह स्वयं अब बहुत दूर निकल गया है।
- पूरा ब्रह्मांड दृश्य ब्रह्मांड से बहुत बड़ा, शायद अनंत भी हो सकता है; हम केवल अपने "क्षितिज" के भीतर देख सकते हैं, जैसे समुद्र में जहाज़ से क्षितिज तक।
- हबल गोला: लगभग 1400 करोड़ प्रकाश वर्ष से आगे की आकाशगंगाएँ हमसे प्रकाश से तेज़ दूर जा रही हैं। यह आपेक्षिकता के विरुद्ध नहीं, क्योंकि कोई वस्तु अंतरिक्ष में प्रकाश से तेज़ नहीं चल रही; अंतरिक्ष स्वयं फैल रहा है।
- भविष्य: त्वरित फैलाव के कारण दूर की आकाशगंगाएँ धीरे-धीरे हमारे क्षितिज से बाहर निकलती जाएँगी। सैकड़ों अरब वर्ष बाद, स्थानीय समूह (मिलकर बनी एक आकाशगंगा) के बाहर आकाश लगभग ख़ाली दिखेगा।
11ओल्बर्स का विरोधाभास: रात अँधेरी क्यों?
- 19वीं सदी में हाइनरिख ओल्बर्स (और उनसे पहले केप्लर आदि) ने पूछा: अगर ब्रह्मांड अनंत, सदा से स्थिर और तारों से बराबर भरा हो, तो हर दिशा में देखने पर कहीं-न-कहीं कोई तारा होगा; तब रात का आकाश सूर्य की सतह जितना चमकीला होना चाहिए।
- उत्तर: (1) ब्रह्मांड की आयु सीमित है (लगभग 1380 करोड़ वर्ष); बहुत दूर के तारों का प्रकाश अभी पहुँचा ही नहीं। (2) तारों की भी आयु सीमित है। (3) फैलाव दूर के प्रकाश को लाल और कमज़ोर कर देता है; बिग बैंग की चमक (CMB) भी खिंचकर सूक्ष्मतरंग बन गई, जो आँख को नहीं दिखती।
- इस तरह "रात अँधेरी है" जैसा साधारण अनुभव भी बताता है कि ब्रह्मांड अनादि और स्थिर नहीं है। (रोचक: कवि-लेखक एडगर एलन पो ने 1848 में "सीमित आयु" वाला उत्तर लगभग सही सुझाया था।)
12ब्रह्मांड का आकार और ज्यामिति
आइंस्टीन के सिद्धांत में पदार्थ-ऊर्जा का कुल घनत्व अंतरिक्ष की ज्यामिति तय करता है। तुलना के लिए एक "क्रांतिक घनत्व" (Critical density) माना जाता है: आज लगभग हर घन मीटर में 5-6 हाइड्रोजन परमाणुओं जितना।
| घनत्व | ज्यामिति | उदाहरण (2D) | त्रिभुज के कोणों का योग |
|---|---|---|---|
| क्रांतिक से अधिक | बंद (Closed) | गोले की सतह | 180° से अधिक |
| ठीक क्रांतिक | सपाट (Flat) | मेज़ की सतह | ठीक 180° |
| क्रांतिक से कम | खुली (Open) | घोड़े की काठी | 180° से कम |
- CMB के धब्बों के आकार से प्लैंक ने पाया कि ब्रह्मांड लगभग पूरी तरह सपाट है (लगभग 0.5% की सीमा में)। यही स्फीति सिद्धांत (पेज 1.1) की भविष्यवाणी थी।
- डार्क एनर्जी होने पर ज्यामिति अकेले भविष्य तय नहीं करती; भविष्य डार्क एनर्जी के स्वभाव पर निर्भर है।
13ब्रह्मांड का भविष्य
| संभावना | क्या होगा | कब |
|---|---|---|
| बिग फ़्रीज़ / ऊष्मा मृत्यु (आज के मानक मॉडल के अनुसार) | फैलाव सदा तेज़; तारे बनना धीरे-धीरे बंद; तारे बुझेंगे, ब्लैक होल भी अंत में वाष्पित (हॉकिंग विकिरण); ठंडा, अँधेरा, लगभग ख़ाली ब्रह्मांड | खरबों-खरबों वर्ष |
| धीमा पड़ता फैलाव (DESI 2025 के संकेत सही हों तो) | डार्क एनर्जी कमज़ोर होती जाए; फैलाव कम तेज़; कुछ मॉडलों में भविष्य में सिकुड़ना भी संभव | अनिश्चित |
| बिग क्रंच | फैलाव रुककर उलट जाए; सब कुछ फिर एक गर्म बिंदु में | डार्क एनर्जी बदलकर आकर्षक बने तो, अरबों वर्ष बाद |
| बिग रिप | डार्क एनर्जी लगातार बढ़े; आकाशगंगाएँ, तारे, ग्रह, अंत में परमाणु तक फट जाएँ | आज के आँकड़े इसे कम संभावित बताते हैं |
| बिग बाउंस (परिकल्पना) | सिकुड़ने के बाद फिर नया फैलाव, चक्र | केवल सैद्धांतिक |
- ये सब बहुत दूर के भविष्य की बातें हैं। सूर्य लगभग 500 करोड़ वर्ष बाद लाल दानव बनेगा (पेज 1.6); पृथ्वी के लिए यही सबसे "पास" का बड़ा बदलाव है।
3D मॉडल का चौथा दृश्य: बिग बैंग से आज तक की एक ही रेखा, फिर आगे चार रास्ते। किसी भी रेखा पर टैप करके उसकी जानकारी देखिए।
14नई दूरबीनें और सर्वेक्षण
| मिशन / सर्वेक्षण | कहाँ / किसका | फैलाव से जुड़ा काम |
|---|---|---|
| DESI (डार्क एनर्जी स्पेक्ट्रोस्कोपिक इंस्ट्रूमेंट) | अमेरिका, किट पीक; एक साथ 5,000 आकाशगंगाओं के स्पेक्ट्रम | BAO से फैलाव का इतिहास; 2024 और 2025 के परिणाम |
| जेम्स वेब दूरबीन (2021) | नासा-ESA-कनाडा | सेफ़िड, TRGB, JAGB से H₀; बहुत पुरानी आकाशगंगाएँ |
| यूक्लिड (2023) | यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी | अरबों आकाशगंगाओं का 3D नक्शा, डार्क मैटर-एनर्जी |
| वेरा सी. रूबिन वेधशाला (पहले चित्र जून 2025) | चिली | 10 वर्ष का LSST: लाखों सुपरनोवा, कमज़ोर लेंसन |
| SPHEREx (मार्च 2025) | नासा | पूरे आकाश का अवरक्त स्पेक्ट्रमी नक्शा; स्फीति के संकेत |
| नैन्सी ग्रेस रोमन दूरबीन | नासा; 30 अगस्त 2026 को फ़ाल्कन हेवी से प्रक्षेपित, L2 बिंदु की ओर | हबल से कम-से-कम 100 गुना चौड़ा दृश्य-क्षेत्र; अरबों आकाशगंगाएँ, सुपरनोवा, डार्क एनर्जी |
| SKA | दक्षिण अफ़्रीका और ऑस्ट्रेलिया; भारत भी सदस्य | 21 सेमी हाइड्रोजन से ब्रह्मांड का नक्शा |
15भारत और ब्रह्मांड विज्ञान
- अमल कुमार रायचौधुरी (1955): रायचौधुरी समीकरण, जो बताता है कि गुरुत्व से पदार्थ के "प्रवाह" कैसे सिकुड़ते हैं। यह आगे हॉकिंग-पेनरोज़ के विलक्षणता प्रमेयों (Singularity theorems) का आधार बना, यानी बिग बैंग और ब्लैक होल के केंद्र की गणितीय समझ।
- जयंत विष्णु नार्लीकर (1938-2025): फ्रेड हॉयल के साथ हॉयल-नार्लीकर गुरुत्व सिद्धांत; स्थिर अवस्था और बाद में "अर्ध-स्थिर अवस्था" ब्रह्मांड के प्रवक्ता; पुणे में IUCAA के संस्थापक निदेशक; विज्ञान को मराठी-हिंदी में लोकप्रिय बनाया। मई 2025 में उनका निधन हुआ।
- सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर: चंद्रशेखर सीमा (लगभग 1.4 सौर द्रव्यमान), जिस पर Ia सुपरनोवा "मानक मोमबत्ती" बनते हैं।
- मेघनाद साहा, सत्येंद्रनाथ बोस: स्पेक्ट्रम और विकिरण की नींव (पेज 1.2, 1.3)।
- आज: RRI बेंगलुरु (SARAS), IUCAA, TIFR, NCRA (GMRT), IIA बेंगलुरु; भारतीय वैज्ञानिक DESI जैसे अंतर्राष्ट्रीय सहयोगों, SKA और LIGO-India में; देवस्थल दूरबीन से सुपरनोवा अध्ययन।
16महत्त्वपूर्ण शब्दावली (हिंदी-अंग्रेज़ी)
| हिंदी | अंग्रेज़ी | अर्थ |
|---|---|---|
| विस्तरित ब्रह्मांड परिकल्पना | Expanding Universe Hypothesis | ब्रह्मांड फैल रहा है |
| हबल-लेमैत्र नियम | Hubble-Lemaître law | v = H₀ × d |
| हबल स्थिरांक | Hubble constant (H₀) | आज की फैलाव-दर |
| लाल विचलन / नीला विचलन | Redshift / Blueshift | तरंगदैर्घ्य का बढ़ना / घटना |
| मेगापारसेक | Megaparsec (Mpc) | लगभग 32.6 लाख प्रकाश वर्ष |
| मानक मोमबत्ती | Standard candle | ज्ञात असली चमक वाली वस्तु |
| मानक पैमाना | Standard ruler | ज्ञात असली आकार (BAO) |
| सेफ़िड | Cepheid variable | आवर्तकाल से चमक बताने वाला तारा |
| त्वरित फैलाव | Accelerating expansion | फैलाव का तेज़ होते जाना |
| डार्क एनर्जी | Dark energy | फैलाव को तेज़ करने वाला अज्ञात घटक |
| ब्रह्मांडीय स्थिरांक | Cosmological constant (Λ) | निर्वात की ऊर्जा का सबसे सरल रूप |
| दृश्य ब्रह्मांड | Observable universe | जहाँ से प्रकाश हम तक पहुँच सका |
| क्रांतिक घनत्व | Critical density | सपाट ब्रह्मांड के लिए आवश्यक घनत्व |
| हबल तनाव | Hubble tension | H₀ के दो तरह के मापों का अंतर |
17आम ग़लतफ़हमियाँ और सही बात
| ग़लतफ़हमी | सही बात |
|---|---|
| बिग बैंग एक जगह हुआ धमाका था, और हम उससे दूर भाग रहे हैं | पूरा अंतरिक्ष फैल रहा है; कोई केंद्र नहीं |
| सौरमंडल और पृथ्वी भी फैल रहे हैं | बँधे तंत्र (परमाणु से स्थानीय समूह तक) नहीं फैलते |
| आकाशगंगाएँ प्रकाश से तेज़ नहीं भाग सकतीं | दूर की आकाशगंगाएँ प्रकाश से तेज़ दूर जाती हैं, क्योंकि अंतरिक्ष स्वयं फैलता है |
| दृश्य ब्रह्मांड की त्रिज्या 1380 करोड़ प्रकाश वर्ष है | लगभग 4650 करोड़ प्रकाश वर्ष, फैलाव के कारण |
| लाल विचलन केवल डॉप्लर प्रभाव है | दूर की आकाशगंगाओं में मुख्य कारण अंतरिक्ष का फैलना (ब्रह्मांडीय लाल विचलन) |
| गुरुत्व फैलाव को धीमा कर रहा है | लगभग 500-600 करोड़ वर्ष से डार्क एनर्जी के कारण फैलाव तेज़ हो रहा है |
| डार्क एनर्जी और डार्क मैटर एक ही हैं | डार्क मैटर गुरुत्व से जोड़ता है; डार्क एनर्जी फैलाव तेज़ करती है |
| हबल ने अकेले फैलाव खोजा | स्लाइफ़र, लेविट, फ़्रीडमैन और लेमैत्र का बड़ा योगदान; नियम अब हबल-लेमैत्र नियम |
18UPSC: प्रीलिम्स के तथ्यUPSC विशेष
- हबल-लेमैत्र नियम: v = H₀ d; लेमैत्र 1927, हबल 1929; IAU 2018।
- H₀ ≈ 67-73 किमी/से./Mpc; 1 Mpc ≈ 32.6 लाख प्र.व.; 1/H₀ ≈ 1400 करोड़ वर्ष।
- z = (λदेखा − λमूल)/λमूल; 1 + z = तब से फैलाव का गुणक; CMB z ≈ 1100।
- मानक मोमबत्तियाँ: सेफ़िड (लेविट 1912), Ia सुपरनोवा (चंद्रशेखर सीमा लगभग 1.4 सौर द्रव्यमान)।
- त्वरित फैलाव: 1998; नोबेल 2011 (पर्लमटर, श्मिट, रीस)।
- संघटन: डार्क एनर्जी लगभग 68%, डार्क मैटर 27%, सामान्य पदार्थ 5%।
- हबल तनाव: CMB से लगभग 67.4 बनाम सेफ़िड-सुपरनोवा से लगभग 73।
- DESI DR2 (मार्च 2025): बदलती डार्क एनर्जी का संकेत (2.8-4.2σ), 1.4 करोड़ से अधिक आकाशगंगाएँ-क्वासर।
- दृश्य ब्रह्मांड त्रिज्या लगभग 4650 करोड़ प्र.व.; ब्रह्मांड लगभग सपाट (प्लैंक)।
- भारत: रायचौधुरी समीकरण (1955), नार्लीकर (हॉयल-नार्लीकर; IUCAA), चंद्रशेखर सीमा।
कथन वाले प्रश्न (अभ्यास)
ब्रह्मांड के फैलाव के संदर्भ में: (1) फैलाव का केंद्र पृथ्वी के पास है। (2) सौरमंडल के ग्रहों की दूरियाँ भी फैलाव से बढ़ रही हैं। (3) दूर की आकाशगंगाएँ अधिक तेज़ी से दूर जाती हैं। सही कथन?
केवल (3)। फैलाव का कोई केंद्र नहीं; बँधे तंत्र नहीं फैलते।
(1) 1998 में पाया गया कि फैलाव धीमा हो रहा है। (2) इस खोज में Ia सुपरनोवा का उपयोग हुआ। (3) फैलाव तेज़ करने वाले कारण को डार्क मैटर कहते हैं। सही?
केवल (2)। फैलाव तेज़ हो रहा है; कारण का नाम डार्क एनर्जी है।
"हबल तनाव" किससे संबंधित है? (1) हबल अंतरिक्ष दूरबीन की यांत्रिक ख़राबी (2) ब्रह्मांड की फैलाव-दर के अलग-अलग मापों का अंतर (3) हबल और लेमैत्र का विवाद
(2)।
19इस विषय से प्रश्न किस तरह आते हैंUPSC विशेष
- अवधारणा: फैलाव का अर्थ, केंद्र का न होना, लाल विचलन, हबल नियम; NCERT का गुब्बारा उदाहरण।
- गणना: v = H₀ d, z निकालना (प्रीलिम्स में कभी-कभी, राज्य परीक्षाओं में अधिक)।
- ताज़ा घटनाएँ: DESI 2025, हबल तनाव, JWST, यूक्लिड, रूबिन, SPHEREx, रोमन दूरबीन (अगस्त 2026); नोबेल (2011)।
- भारतीय वैज्ञानिक: चंद्रशेखर, रायचौधुरी, नार्लीकर (निधन 2025)।
- मेन्स: "विस्तरित ब्रह्मांड परिकल्पना और उसके प्रमाण", "डार्क एनर्जी और ब्रह्मांड का भविष्य", "विज्ञान में असहमति का महत्त्व (हबल तनाव)"।
- भूगोल GS-1 से जोड़: ब्रह्मांड और पृथ्वी की उत्पत्ति वाले प्रश्नों में भूमिका के रूप में।
तैयारी का तरीका: 3D मॉडल के पहले दो दृश्य देखकर "फैलता अंतरिक्ष" और "लाल विचलन" पक्का करें; फिर इतिहास वाली तालिका और हबल तनाव की तालिका।
20UPSC मेन्स: पूरे आदर्श उत्तरUPSC विशेष
"विस्तरित ब्रह्मांड परिकल्पना" से आप क्या समझते हैं? इसके पक्ष में प्रमाण दीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)
भूमिका: यह परिकल्पना कहती है कि ब्रह्मांड स्थिर नहीं, लगातार फैल रहा है: आकाशगंगाओं के बीच का अंतरिक्ष बढ़ रहा है। फ़्रीडमैन (1922) और लेमैत्र (1927) ने सिद्धांत दिया, एडविन हबल (1929) ने आँकड़ों से दिखाया; NCERT के अनुसार यही बिग बैंग सिद्धांत का आधार है।
प्रमाण: (1) लाल विचलन: लगभग सभी दूर की आकाशगंगाओं की स्पेक्ट्रम रेखाएँ लाल की ओर खिसकी हैं। (2) हबल-लेमैत्र नियम: दूर जाने की चाल दूरी के अनुपात में (v = H₀ d), जो एक-से फैलाव का ही परिणाम है; केंद्र नहीं। (3) CMB (1965): फैलाव से ठंडा हुआ आरंभिक विकिरण, आज 2.7 K। (4) हल्के तत्वों की मात्रा (25% हीलियम)। (5) ओल्बर्स विरोधाभास का हल और दूर की आकाशगंगाओं का युवा दिखना। निष्कर्ष: 1998 में पता चला कि फैलाव तेज़ भी हो रहा है (डार्क एनर्जी)। NCERT का गुब्बारा उदाहरण इसे समझाता है, पर याद रहे कि बँधे तंत्र (सौरमंडल, आकाशगंगाएँ) नहीं फैलते।
डार्क एनर्जी क्या है? इसकी खोज कैसे हुई और ब्रह्मांड के भविष्य पर इसका क्या प्रभाव है? (15 अंक, 250 शब्द)
भूमिका: डार्क एनर्जी वह अज्ञात घटक है जो ब्रह्मांड के फैलाव को तेज़ कर रहा है; यह कुल ऊर्जा-घनत्व का लगभग 68% है।
खोज: (1) 1998 में दो टीमों (पर्लमटर; श्मिट-रीस) ने Ia सुपरनोवा, जिनकी असली चमक चंद्रशेखर सीमा के कारण लगभग एक-सी होती है, को "मानक मोमबत्ती" बनाकर नापा। (2) दूर के सुपरनोवा अपेक्षा से धुँधले, यानी अधिक दूर निकले: फैलाव धीमा नहीं, तेज़ हो रहा था (2011 नोबेल)। (3) CMB (प्लैंक) और BAO (SDSS, DESI) ने स्वतंत्र रूप से पुष्टि की; पता चला कि लगभग 500-600 करोड़ वर्ष पहले से फैलाव तेज़ हुआ। स्वभाव: सबसे सरल व्याख्या आइंस्टीन का ब्रह्मांडीय स्थिरांक (Λ), यानी निर्वात की ऊर्जा; पर सैद्धांतिक अनुमान इससे 10¹²⁰ गुना अलग है। DESI (मार्च 2025) के संकेत बताते हैं कि यह समय के साथ कमज़ोर हो सकती है (2.8-4.2σ); पुष्टि बाकी। भविष्य पर प्रभाव: (1) स्थिर Λ: फैलाव सदा तेज़, "बिग फ़्रीज़"; दूर की आकाशगंगाएँ क्षितिज से ओझल; तारे बनना बंद। (2) बढ़ती डार्क एनर्जी: "बिग रिप"। (3) कमज़ोर होती या उलटती: धीमा फैलाव या "बिग क्रंच"। निष्कर्ष: डार्क एनर्जी आधुनिक विज्ञान का सबसे बड़ा खुला प्रश्न है; DESI, यूक्लिड, रूबिन और रोमन जैसे सर्वेक्षण (रोमन दूरबीन, अगस्त 2026 में प्रक्षेपित) इसका उत्तर खोज रहे हैं।
"हबल तनाव" क्या है? यह विज्ञान की कार्यप्रणाली के बारे में क्या बताता है? (10 अंक, 150 शब्द)
भूमिका: ब्रह्मांड की आज की फैलाव-दर (हबल स्थिरांक, H₀) के दो तरह के माप मेल नहीं खाते: प्रारंभिक ब्रह्मांड (CMB, प्लैंक) से मानक मॉडल द्वारा लगभग 67.4, और पास के ब्रह्मांड (सेफ़िड + Ia सुपरनोवा, SH0ES) से लगभग 73 किमी/से./Mpc; अंतर कुछ विश्लेषणों में 5σ से अधिक।
स्थिति: JWST के TRGB माप (फ़्रीडमैन, 2025) लगभग 70 बताते हैं, जबकि लेंस वाले क्वासर और SBF लगभग 72-74; बहस 2026 तक जारी। संभावित व्याख्याएँ: व्यवस्थित त्रुटियाँ, या नई भौतिकी (प्रारंभिक डार्क एनर्जी, नए कण, बदलती डार्क एनर्जी)। विज्ञान के बारे में सीख: (1) स्वतंत्र तरीकों से जाँच विज्ञान की ताक़त है। (2) असहमति को छिपाया नहीं, सार्वजनिक बहस से सुलझाया जाता है। (3) कई बड़ी खोजें (जैसे नेपच्यून, न्यूट्रिनो द्रव्यमान) ऐसे ही "मेल न खाने" से निकलीं। निष्कर्ष: हबल तनाव या तो मापों को बेहतर बनाएगा, या ब्रह्मांड के मानक मॉडल में बदलाव लाएगा; दोनों ही स्थितियों में ज्ञान आगे बढ़ेगा।
अभ्यास के लिए और प्रश्न (उत्तर का ढाँचा)
"ब्रह्मांड नापने की सीढ़ी" को समझाइए। (150 शब्द)
रडार, लंबन (गाया), सेफ़िड-TRGB, Ia सुपरनोवा, लाल विचलन-BAO; हर सीढ़ी से अगली का अंशांकन; त्रुटि का ऊपर तक जाना; हबल तनाव से संबंध।
ओल्बर्स का विरोधाभास क्या है? आधुनिक ब्रह्मांड विज्ञान इसे कैसे हल करता है? (150 शब्द)
अनंत, स्थिर, अनादि ब्रह्मांड में चमकता आकाश; सीमित आयु, तारों का सीमित जीवन, फैलाव से लाल विचलन; CMB।
21ताज़ा घटनाक्रम (अक्टूबर 2026 तक)UPSC विशेष
| विषय | क्या हुआ | किस बात से जुड़ा |
|---|---|---|
| DESI DR2 (18 मार्च 2025) | 1.4 करोड़ से अधिक आकाशगंगाओं-क्वासरों से BAO; बदलती डार्क एनर्जी को CMB के साथ 3.1σ और सुपरनोवा जोड़कर 2.8-4.2σ पसंद | डार्क एनर्जी |
| हबल तनाव (2025-26) | CCHP (फ़्रीडमैन, JWST, TRGB) लगभग 70.4; SBF (JWST) लगभग 73.8; TDCOSMO लगभग 72.1; बहस मार्च 2026 तक जारी | H₀ |
| ACT DR6 (मार्च 2025) | CMB के अंतिम परिणाम मानक मॉडल के अनुरूप; H₀ बढ़ाने वाले मॉडल पसंद नहीं (पेज 1.3) | प्रारंभिक ब्रह्मांड |
| SPHEREx (मार्च 2025) | पूरे आकाश का पहला अवरक्त स्पेक्ट्रमी नक्शा (दिसंबर 2025 तक) | स्फीति, 3D नक्शा |
| रूबिन वेधशाला (जून 2025) | LSST सर्वेक्षण शुरू; लाखों सुपरनोवा अपेक्षित | Ia सुपरनोवा, डार्क एनर्जी |
| नैन्सी ग्रेस रोमन दूरबीन | 30 अगस्त 2026 को प्रक्षेपित; सूर्य-पृथ्वी L2 बिंदु (लगभग 15 लाख किमी) की ओर; डार्क एनर्जी और ब्रह्मांड का भविष्य | डार्क एनर्जी, सुपरनोवा |
| जयंत नार्लीकर | 20 मई 2025 को पुणे में निधन; हॉयल-नार्लीकर सिद्धांत, IUCAA | भारत |
यह भाग समय के साथ बदलता है; परीक्षा से पहले ताज़ा स्थिति अवश्य देखें।
22अभ्यास: 50 बहुविकल्पीय प्रश्न (व्याख्या सहित)परीक्षा के प्रश्न
NCERT के अनुसार "विस्तरित ब्रह्मांड परिकल्पना" के प्रमाण 1920 में किसने दिए? (a) आइंस्टीन (b) एडविन हबल (c) गैमो (d) हॉयल
(b) हबल; आज इसे हबल-लेमैत्र नियम कहते हैं।
फैलते ब्रह्मांड का सिद्धांत 1927 में किसने दिया? (a) जॉर्ज लेमैत्र (b) न्यूटन (c) केप्लर (d) कोपरनिकस
(a) लेमैत्र (फ़्रीडमैन ने 1922 में गणितीय हल दिए थे)।
हबल-लेमैत्र नियम: (a) v = H₀ / d (b) v = H₀ × d (c) d = H₀ × v (d) v = c × d
(b)।
H₀ की इकाई: (a) किमी/से. (b) किमी/से. प्रति मेगापारसेक (c) प्रकाश वर्ष (d) केल्विन
(b)।
1 मेगापारसेक लगभग: (a) 3.26 प्र.व. (b) 32.6 लाख प्र.व. (c) 1 अरब प्र.व. (d) 15 करोड़ किमी
(b)।
H₀ = 70 हो तो 200 Mpc दूर की आकाशगंगा की चाल: (a) 1,400 किमी/से. (b) 14,000 किमी/से. (c) 140 किमी/से. (d) 2.85 किमी/से.
(b) 70 × 200।
1/H₀ (हबल समय) लगभग: (a) 14 लाख वर्ष (b) 1400 करोड़ वर्ष (c) 460 करोड़ वर्ष (d) 1 वर्ष
(b), ब्रह्मांड की आयु के पास।
फैलाव का केंद्र कहाँ है? (a) पृथ्वी (b) मंदाकिनी का केंद्र (c) कोई केंद्र नहीं (d) एंड्रोमेडा
(c)।
कौन-सा फैलाव से नहीं बढ़ता? (a) आकाशगंगा-गुच्छों के बीच की दूरी (b) पृथ्वी-सूर्य की दूरी (c) दूर की आकाशगंगाओं की दूरी (d) CMB की तरंगदैर्घ्य
(b); बँधे तंत्र नहीं फैलते।
एंड्रोमेडा का स्पेक्ट्रम क्या दिखाता है? (a) लाल विचलन (b) नीला विचलन (c) कोई रेखा नहीं (d) केवल एक्स-किरण
(b); स्थानीय समूह बँधा है, वह पास आ रही है।
656.3 nm की रेखा 721.9 nm पर मिली; z लगभग: (a) 0.01 (b) 0.1 (c) 1 (d) 10
(b) 65.6/656.3।
z = 1 का अर्थ: (a) आकाशगंगा प्रकाश की चाल से भाग रही (b) प्रकाश चलने के समय से अब तक दूरियाँ दोगुनी हुईं (c) आकाशगंगा 1 Mpc दूर (d) प्रकाश 1 वर्ष पुराना
(b) 1 + z = 2।
CMB का लाल विचलन लगभग: (a) 1 (b) 14 (c) 1100 (d) 0.1
(c)।
z ≈ 14 वाली आकाशगंगा का प्रकाश लगभग कब चला? (a) 14 करोड़ वर्ष पहले (b) लगभग 1350 करोड़ वर्ष पहले (c) 14 लाख वर्ष पहले (d) कल
(b), बिग बैंग के लगभग 28-30 करोड़ वर्ष बाद।
दूर की आकाशगंगाओं में लाल विचलन का मुख्य कारण: (a) गुरुत्व (b) अंतरिक्ष का फैलना (c) धूल (d) तापमान
(b) ब्रह्मांडीय लाल विचलन।
"मानक मोमबत्ती" किसे कहते हैं? (a) ज्ञात असली चमक वाली वस्तु (b) सबसे चमकीला तारा (c) सूर्य (d) मोमबत्ती तारामंडल
(a)।
सेफ़िड तारों का आवर्तकाल-चमक संबंध किसने खोजा? (a) हबल (b) हेनरीएटा लेविट (c) वेरा रूबिन (d) एनी कैनन
(b) 1912।
हबल ने एंड्रोमेडा की दूरी किससे नापी? (a) रडार (b) सेफ़िड तारे (c) सुपरनोवा (d) लंबन
(b) 1924।
Ia सुपरनोवा किसके फटने से? (a) बहुत भारी तारे का केंद्र ढहना (b) श्वेत वामन का लगभग 1.4 सौर द्रव्यमान पार करना (c) दो ग्रहों की टक्कर (d) ब्लैक होल
(b) चंद्रशेखर सीमा।
चंद्रशेखर सीमा लगभग: (a) 0.4 सौर द्रव्यमान (b) 1.4 सौर द्रव्यमान (c) 14 सौर द्रव्यमान (d) 140 सौर द्रव्यमान
(b)।
1998 की खोज: (a) फैलाव धीमा हो रहा है (b) फैलाव तेज़ हो रहा है (c) ब्रह्मांड सिकुड़ रहा है (d) ब्रह्मांड स्थिर है
(b)।
त्वरित फैलाव के लिए 2011 का नोबेल: (a) पर्लमटर, श्मिट, रीस (b) पेंज़ियास, विल्सन (c) माथर, स्मूट (d) हिग्स, एंगलर्ट
(a)।
फैलाव लगभग कब से तेज़ होने लगा? (a) बिग बैंग के तुरंत बाद (b) लगभग 500-600 करोड़ वर्ष पहले (c) पिछले 100 वर्षों में (d) 3 लाख वर्ष पर
(b)।
ब्रह्मांड में डार्क एनर्जी का हिस्सा लगभग: (a) 5% (b) 27% (c) 68% (d) 100%
(c)।
डार्क एनर्जी की सबसे सरल व्याख्या: (a) ब्लैक होल (b) ब्रह्मांडीय स्थिरांक (निर्वात ऊर्जा) (c) न्यूट्रिनो (d) CMB
(b) आइंस्टीन का Λ।
आइंस्टीन ने ब्रह्मांडीय स्थिरांक मूल रूप से क्यों जोड़ा था (1917)? (a) फैलाव समझाने (b) ब्रह्मांड को स्थिर रखने (c) ब्लैक होल के लिए (d) प्रकाश की चाल के लिए
(b)।
"ΛCDM" में CDM का अर्थ: (a) ठंडा डार्क मैटर (b) ब्रह्मांडीय डार्क मोड (c) केंद्रीय घनत्व मान (d) CMB डेटा मॉडल
(a) Cold Dark Matter।
DESI किस तरीके से फैलाव का इतिहास नापता है? (a) BAO (मानक पैमाना) (b) रडार (c) लंबन (d) गुरुत्वीय तरंगें
(a)।
DESI DR2 (2025) का मुख्य संकेत: (a) डार्क मैटर नहीं है (b) डार्क एनर्जी समय के साथ बदल (कमज़ोर हो) सकती है (c) ब्रह्मांड सिकुड़ रहा है (d) H₀ = 100
(b), 2.8-4.2σ, अभी पुष्टि नहीं।
BAO का "पैमाना" लगभग: (a) 50 करोड़ प्र.व. (b) 50 प्र.व. (c) 5 अरब किमी (d) 1 Mpc
(a) (लगभग 150 Mpc)।
हबल तनाव में CMB (प्लैंक) से H₀ लगभग: (a) 50 (b) 67.4 (c) 73 (d) 100
(b); सेफ़िड-सुपरनोवा से लगभग 73।
SH0ES टीम के प्रमुख: (a) वेंडी फ़्रीडमैन (b) एडम रीस (c) सॉल पर्लमटर (d) जिम पीबल्स
(b); फ़्रीडमैन CCHP की प्रमुख।
JWST से TRGB द्वारा CCHP (2025) का H₀ लगभग: (a) 60 (b) 70.4 (c) 80 (d) 67.4
(b)।
हबल तनाव की संभावित "नई भौतिकी" व्याख्या: (a) प्रारंभिक डार्क एनर्जी (b) पृथ्वी का घूमना (c) सौर ज्वाला (d) ओज़ोन छिद्र
(a)।
दृश्य ब्रह्मांड की त्रिज्या लगभग: (a) 1380 करोड़ प्र.व. (b) 4650 करोड़ प्र.व. (c) 1 लाख प्र.व. (d) अनंत
(b), फैलाव के कारण आयु से अधिक।
हबल गोले से बाहर की आकाशगंगाएँ: (a) स्थिर हैं (b) प्रकाश से तेज़ दूर जाती हैं, क्योंकि अंतरिक्ष फैल रहा है (c) पास आ रही हैं (d) दिखती ही नहीं
(b); आपेक्षिकता नहीं टूटती।
ओल्बर्स का विरोधाभास किस प्रश्न से जुड़ा है? (a) आकाश नीला क्यों (b) रात का आकाश अँधेरा क्यों (c) चंद्रमा की कलाएँ (d) ज्वार-भाटा
(b)।
ओल्बर्स विरोधाभास का मुख्य उत्तर: (a) तारे बहुत कम हैं (b) ब्रह्मांड की आयु सीमित है और फैलाव प्रकाश को लाल करता है (c) धूल सब प्रकाश सोख लेती है (d) पृथ्वी घूमती है
(b)।
प्लैंक के अनुसार ब्रह्मांड की ज्यामिति: (a) बंद (b) खुली (c) लगभग सपाट (d) बेलनाकार
(c)।
सपाट ब्रह्मांड में त्रिभुज के कोणों का योग: (a) 180° (b) 180° से अधिक (c) 180° से कम (d) 360°
(a)।
क्रांतिक घनत्व लगभग: (a) हर घन मीटर में 5-6 हाइड्रोजन परमाणु (b) पानी जितना (c) हवा जितना (d) लोहे जितना
(a)।
आज के मानक मॉडल के अनुसार ब्रह्मांड का अंत: (a) बिग क्रंच (b) बिग फ़्रीज़ (ऊष्मा मृत्यु) (c) बिग रिप (d) अगले वर्ष
(b)।
"बिग रिप" में: (a) ब्रह्मांड सिकुड़ता है (b) बढ़ती डार्क एनर्जी से सब कुछ, परमाणु तक, फट जाता है (c) नया बिग बैंग (d) कुछ नहीं बदलता
(b)।
रायचौधुरी समीकरण (1955) किससे संबंधित है? (a) गुरुत्व में पदार्थ-प्रवाह का सिकुड़ना; विलक्षणता प्रमेयों का आधार (b) मानसून (c) भूकंप (d) परमाणु ऊर्जा
(a)।
पुणे में IUCAA के संस्थापक निदेशक: (a) होमी भाभा (b) जयंत नार्लीकर (c) विक्रम साराभाई (d) सी. वी. रमन
(b)।
हॉयल-नार्लीकर सिद्धांत किस विषय का है? (a) गुरुत्व (b) विद्युत (c) जैव विकास (d) महाद्वीपीय विस्थापन
(a)।
फैलाव को "हबल-लेमैत्र नियम" नाम देने का सुझाव किसने कब दिया? (a) नासा, 1990 (b) IAU, 2018 (c) ISRO, 2020 (d) CERN, 2012
(b)।
लाल विचलन सबसे पहले बड़े पैमाने पर किसने नापे (1912 से)? (a) वेस्टो स्लाइफ़र (b) गैलीलियो (c) हर्शेल (d) मेसियर
(a)।
फैलाव को उलटा चलाने पर ब्रह्मांड कहाँ पहुँचता है? (a) एक गर्म, घने आरंभ (बिग बैंग) पर (b) अनंत स्थिर अवस्था पर (c) सौरमंडल पर (d) मंदाकिनी के केंद्र पर
(a)।
NCERT में फैलाव समझाने के लिए किसका उदाहरण है? (a) फूलता गुब्बारा (b) पानी का घड़ा (c) चलती रेल (d) घड़ी का लोलक
(a)।
23एक नज़र मेंयाद रखें
- फैलाव: अंतरिक्ष स्वयं फैलता है; कोई केंद्र नहीं; बँधे तंत्र (सौरमंडल, आकाशगंगा, स्थानीय समूह) नहीं फैलते।
- हबल-लेमैत्र नियम: v = H₀ d; H₀ ≈ 67-73 किमी/से./Mpc; 1/H₀ ≈ 1400 करोड़ वर्ष। लेमैत्र 1927, हबल 1929, नाम IAU 2018।
- लाल विचलन: z = Δλ/λ; 1 + z = तब से फैलाव; CMB z ≈ 1100।
- दूरी की सीढ़ी: रडार → लंबन → सेफ़िड/TRGB (लेविट 1912) → Ia सुपरनोवा (चंद्रशेखर सीमा) → लाल विचलन/BAO।
- 1998: फैलाव तेज़ (2011 नोबेल); डार्क एनर्जी लगभग 68%; सबसे सरल रूप Λ; DESI 2025: बदलने के संकेत।
- हबल तनाव: लगभग 67.4 (CMB) बनाम लगभग 73 (सेफ़िड-सुपरनोवा); 2026 तक अनसुलझा।
- दृश्य ब्रह्मांड: त्रिज्या लगभग 4650 करोड़ प्र.व.; ज्यामिति लगभग सपाट।
- भविष्य: मानक मॉडल: बिग फ़्रीज़; दूसरी संभावनाएँ: क्रंच, रिप।
- भारत: चंद्रशेखर, रायचौधुरी (1955), नार्लीकर (IUCAA; निधन 2025)।
© Pankaj Bediya · TGT Geography · geoland.in
कक्षा 11 · भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत · अध्याय 2: पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास (विस्तरित ब्रह्मांड) · बुनियाद: कक्षा 9-10 विज्ञान
1कक्षा 9-10 की बुनियादबुनियाद
- चाल = दूरी ÷ समय (कक्षा 9, गति): जितनी अधिक चाल, उतने ही समय में उतनी अधिक दूरी।
- तरंग (कक्षा 9, ध्वनि): तरंगदैर्घ्य (λ, दो शिखरों की दूरी), आवृत्ति (एक सेकंड में कंपन), चाल = आवृत्ति × तरंगदैर्घ्य। लंबी तरंगदैर्घ्य = कम आवृत्ति।
- प्रकाश का विक्षेपण (कक्षा 10): प्रिज़्म से सफ़ेद प्रकाश सात रंगों (VIBGYOR / बैंजानीहपीनाला) में बँटता है; लाल की तरंगदैर्घ्य सबसे लंबी, बैंगनी की सबसे छोटी।
- प्रकाश की चाल लगभग 3 लाख किमी/सेकंड; प्रकाश वर्ष दूरी की इकाई है।
- रोज़ का अनुभव: पास आती गाड़ी का भोंपू तीखा (ऊँची आवृत्ति), दूर जाती का भारी (नीची आवृत्ति) सुनाई देता है; इसे डॉप्लर प्रभाव कहते हैं।
2कक्षा 11 भूगोल, अध्याय 2: विस्तरित ब्रह्मांड और बिग बैंग
NCERT (भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत, अध्याय 2 "पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास") के अनुसार:
- ब्रह्मांड की उत्पत्ति से संबंधित सबसे मान्य सिद्धांत बिग बैंग सिद्धांत है, जिसे विस्तरित ब्रह्मांड परिकल्पना (Expanding Universe Hypothesis) भी कहा जाता है।
- 1920 ई. में एडविन हबल ने प्रमाण दिए कि ब्रह्मांड का विस्तार हो रहा है। समय बीतने के साथ आकाशगंगाएँ एक-दूसरे से दूर हो रही हैं।
- गुब्बारे का उदाहरण: अगर एक गुब्बारे पर कुछ बिंदु लगाएँ, जो आकाशगंगाएँ मानी जाएँ, और गुब्बारे को फुलाएँ, तो गुब्बारे पर लगे बिंदु गुब्बारे के फैलने के साथ एक-दूसरे से दूर जाते दिखेंगे।
- NCERT यह भी स्पष्ट करती है कि यह उदाहरण पूरी तरह सही नहीं, क्योंकि वैज्ञानिक मानते हैं कि आकाशगंगाओं के बीच की दूरी बढ़ रही है, आकाशगंगाओं का आकार नहीं (गुब्बारे पर बने बिंदु भी फैलते हैं, आकाशगंगाएँ नहीं)।
- विस्तार के लिए एक दूसरा विचार स्थिर अवस्था संकल्पना (Steady State Concept) हॉयल ने दिया, जिसके अनुसार ब्रह्मांड किसी भी समय एक-सा रहा है; पर ब्रह्मांड के विस्तार से संबंधित अधिक प्रमाणों के मिलने पर वैज्ञानिक समुदाय अब विस्तरित ब्रह्मांड के पक्ष में है।
इस पेज से अतिरिक्त समझ
- आज इस नियम को हबल-लेमैत्र नियम कहते हैं (हबल ने मुख्य आँकड़े 1929 में प्रकाशित किए; लेमैत्र ने 1927 में सिद्धांत दिया)।
- दूर जाने का प्रमाण लाल विचलन है: दूर की आकाशगंगाओं के प्रकाश की रेखाएँ स्पेक्ट्रम में लाल की ओर खिसकी मिलती हैं।
3सरल भाषा में: आकाशगंगाएँ दूर क्यों जा रही हैं
- अंतरिक्ष फैल रहा है: आकाशगंगाएँ खुद नहीं भाग रहीं; उनके बीच का "अंतरिक्ष" बढ़ रहा है, जैसे फूलते आटे में किशमिशें दूर होती हैं।
- दूर वाली तेज़: जो आकाशगंगा जितनी दूर है, वह उतनी तेज़ दूर जाती दिखती है (दोगुनी दूरी, दोगुनी चाल)।
- कैसे पता चला: जैसे दूर जाती गाड़ी का भोंपू भारी सुनाई देता है, वैसे ही दूर जाती आकाशगंगा का प्रकाश लाल की ओर खिसका दिखता है (लाल विचलन); लाल रंग की तरंग सबसे लंबी होती है।
- फ़िल्म उलटी चलाएँ: अगर आज सब दूर जा रहे हैं, तो पहले सब पास-पास रहे होंगे; बहुत पहले सब कुछ एक बहुत गर्म, घने बिंदु में था: बिग बैंग (लगभग 1370 करोड़ वर्ष पहले, NCERT)।
- हमारा सौरमंडल नहीं फैलता: सूर्य और ग्रह गुरुत्व से बँधे हैं; फैलाव केवल आकाशगंगाओं के बड़े समूहों के बीच दिखता है।
- नई खोज (1998): फैलाव धीरे-धीरे तेज़ हो रहा है; इसका कारण एक अनजानी "डार्क एनर्जी" मानी जाती है।
4अभ्यास: वस्तुनिष्ठ प्रश्न (उत्तर सहित)परीक्षा के प्रश्न
बिग बैंग सिद्धांत का दूसरा नाम (NCERT): (a) स्थिर अवस्था सिद्धांत (b) विस्तरित ब्रह्मांड परिकल्पना (c) नीहारिका परिकल्पना (d) ग्रहाणु परिकल्पना
(b)।
NCERT के अनुसार ब्रह्मांड के विस्तार के प्रमाण किसने दिए? (a) न्यूटन (b) एडविन हबल (c) लाप्लास (d) कांट
(b) 1920।
स्थिर अवस्था संकल्पना किसने दी? (a) हबल (b) हॉयल (c) गैमो (d) लेमैत्र
(b) हॉयल।
NCERT में ब्रह्मांड के फैलाव को किस उदाहरण से समझाया गया है? (a) गुब्बारा (b) रेल (c) घड़ी (d) पहिया
(a) गुब्बारा।
फैलाव में क्या बढ़ रहा है? (a) आकाशगंगाओं का आकार (b) आकाशगंगाओं के बीच की दूरी (c) तारों का आकार (d) पृथ्वी का आकार
(b)।
सफ़ेद प्रकाश के स्पेक्ट्रम में सबसे लंबी तरंगदैर्घ्य: (a) बैंगनी (b) नीला (c) हरा (d) लाल
(d) लाल।
दूर जाती आकाशगंगा के प्रकाश की रेखाएँ किस ओर खिसकती हैं? (a) बैंगनी (b) लाल (c) कहीं नहीं (d) हरे
(b) लाल (लाल विचलन)।
पास आती गाड़ी का भोंपू तीखा क्यों सुनाई देता है? (a) ध्वनि तेज़ होती है (b) डॉप्लर प्रभाव से आवृत्ति बढ़ती है (c) हवा गर्म होती है (d) गाड़ी बड़ी होती है
(b)।
सही या ग़लत
- ब्रह्मांड स्थिर है और उसका आकार नहीं बदलता। ग़लत
- जो आकाशगंगा अधिक दूर है, वह अधिक तेज़ी से दूर जाती है। सही
- पृथ्वी और सूर्य की दूरी फैलाव के कारण बढ़ रही है। ग़लत (बँधा तंत्र)
- फैलाव का केंद्र हमारी मंदाकिनी है। ग़लत (कोई केंद्र नहीं)
5लघु, दीर्घ और HOTS प्रश्नपरीक्षा के प्रश्न
विस्तरित ब्रह्मांड परिकल्पना क्या है? (3 अंक)
यह वह सिद्धांत है जिसके अनुसार ब्रह्मांड लगातार फैल रहा है और आकाशगंगाएँ एक-दूसरे से दूर जा रही हैं। 1920 में एडविन हबल ने इसके प्रमाण दिए। इसे बिग बैंग सिद्धांत भी कहते हैं, क्योंकि फैलाव को पीछे की ओर ले जाने पर सब कुछ एक बहुत छोटे, गर्म, घने बिंदु से शुरू हुआ लगता है।
गुब्बारे के उदाहरण से ब्रह्मांड का फैलाव समझाइए। इस उदाहरण की कमी क्या है? (5 अंक)
एक गुब्बारे पर कुछ बिंदु बनाइए; इन्हें आकाशगंगाएँ मानिए। गुब्बारा फुलाने पर हर बिंदु बाकी सब बिंदुओं से दूर जाता दिखता है; पास वाले धीरे, दूर वाले तेज़। किसी भी बिंदु से देखें, यही दिखेगा, इसलिए फैलाव का कोई एक केंद्र नहीं है। कमी: गुब्बारा फूलने पर उस पर बने बिंदु भी बड़े हो जाते हैं, पर असल में आकाशगंगाओं का आकार नहीं बढ़ता, केवल उनके बीच की दूरी बढ़ती है। (बेहतर उदाहरण: किशमिश वाली फूलती रोटी, जिसमें किशमिशें बड़ी नहीं होतीं।)
स्थिर अवस्था संकल्पना और विस्तरित ब्रह्मांड परिकल्पना में अंतर लिखिए। (3 अंक)
स्थिर अवस्था (हॉयल) के अनुसार ब्रह्मांड सदा से एक-सा है; फैलने पर नया पदार्थ बनता रहता है, इसलिए घनत्व नहीं बदलता और कोई आरंभ नहीं। विस्तरित ब्रह्मांड (बिग बैंग) के अनुसार ब्रह्मांड का एक आरंभ था, वह फैलकर ठंडा और विरल होता गया। CMB और हल्के तत्वों जैसे प्रमाण बिग बैंग के पक्ष में हैं।
HOTS (उच्च स्तरीय सोच)
अगर सब आकाशगंगाएँ हमसे दूर जा रही हैं, तो क्या हम ब्रह्मांड के केंद्र में हैं?
नहीं। फैलाव हर जगह एक-सा है, इसलिए किसी भी आकाशगंगा का प्रेक्षक यही देखेगा कि बाकी सब उससे दूर जा रही हैं। (जैसे फूलती रोटी में हर किशमिश से बाकी किशमिशें दूर जाती दिखती हैं।)
सबसे दूर की आकाशगंगाएँ हमें "बच्चों" जैसी (नई, छोटी) क्यों दिखती हैं?
उनका प्रकाश अरबों वर्ष पहले चला था, इसलिए हम उन्हें उनके बचपन में देखते हैं। दूर देखना = अतीत में देखना।
6याद रखेंयाद रखें
- बिग बैंग = विस्तरित ब्रह्मांड परिकल्पना (NCERT); प्रमाण: एडविन हबल, 1920 (आँकड़े 1929 में)।
- आकाशगंगाएँ एक-दूसरे से दूर जा रही हैं; दूरी बढ़ती है, आकाशगंगाओं का आकार नहीं।
- गुब्बारे का उदाहरण (और उसकी कमी)।
- स्थिर अवस्था संकल्पना: हॉयल; आज विस्तरित ब्रह्मांड अधिक मान्य।
- प्रमाण: लाल विचलन (दूर जाती आकाशगंगा का प्रकाश लाल की ओर खिसकता है)।
- 1998: फैलाव तेज़ हो रहा है (डार्क एनर्जी)।
© Pankaj Bediya · TGT Geography · geoland.in
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