हर तारा एक सूर्य, हर धुँधला धब्बा एक आकाशगंगा
रात में दिखने वाला हर तारा सूर्य जैसा ही एक तारा है, बस बहुत दूर। ये सब हमारी आकाशगंगा, मंदाकिनी, के तारे हैं; सूर्य उसके केंद्र से लगभग 26,000 प्रकाश वर्ष दूर, एक छोटी भुजा में है।
मंदाकिनी जैसी अरबों आकाशगंगाएँ हैं। सबसे पास की बड़ी आकाशगंगा एंड्रोमेडा 25 लाख प्रकाश वर्ष दूर है: उसका जो प्रकाश आज हम देखते हैं, वह तब चला था जब पृथ्वी पर मनुष्य के शुरुआती पूर्वज ही थे।
याद रखें
- तारा अपने संलयन से चमकता है; सूर्य भी तारा है (G वर्ग, पीला)।
- तारे का रंग = तापमान: नीले सबसे गर्म, लाल सबसे ठंडे।
- सप्तर्षि के दो तारे ध्रुव तारे की ओर इशारा करते हैं; ध्रुव तारा उत्तर दिशा बताता है।
- मंदाकिनी दंड वाली सर्पिल आकाशगंगा; व्यास 80,000-1,50,000 प्रकाश वर्ष (NCERT)।
- आकाशगंगा के प्रकार: दीर्घवृत्ताकार, सर्पिल, दंड वाली सर्पिल, अनियमित (हबल)।
नोट्सपढ़ने और पढ़ाने के लिए पूरी जानकारी
UPSC प्रीलिम्स और मेन्स (GS-1: ब्रह्मांड; GS-3: विज्ञान-प्रौद्योगिकी, पर्यावरण) के स्तर पर · NCERT कक्षा 6, 8 और 11 से आगे
1परिचय: रात के आकाश से ब्रह्मांड की बनावट तक
अँधेरी रात में नंगी आँख से लगभग 2,000 से 3,000 तारे एक साथ दिखते हैं, और गाँव के साफ़ आकाश में एक धुँधली दूधिया पट्टी भी, जिसे हम आकाशगंगा या मंदाकिनी (Milky Way) कहते हैं। ये सब तारे हमारी अपनी आकाशगंगा के हैं। ब्रह्मांड में ऐसी अरबों आकाशगंगाएँ हैं।
पिछले पेजों की कहानी: बिग बैंग (1.1) → कणों को द्रव्यमान (1.2) → पहले परमाणु और अंधकार युग (1.3)। इस पेज में आगे: पहले तारे और आकाशगंगाएँ कैसे बने, तारे क्या हैं, आकाशगंगाएँ कितने प्रकार की हैं, हमारी मंदाकिनी कैसी है और पूरा ब्रह्मांड बड़े पैमाने पर कैसा दिखता है। तारे के जीवन-चक्र (जन्म से मृत्यु) की पूरी बात पेज 1.6 में है।
ब्रह्मांड की बनावट (छोटे से बड़े)
| स्तर | उदाहरण | आकार (लगभग) |
|---|---|---|
| तारा | सूर्य | व्यास 14 लाख किमी |
| तारा-गुच्छ | कृत्तिका (Pleiades) | कुछ से सैकड़ों प्रकाश वर्ष |
| आकाशगंगा | मंदाकिनी | व्यास लगभग 1 लाख प्रकाश वर्ष |
| आकाशगंगा समूह | स्थानीय समूह | लगभग 1 करोड़ प्रकाश वर्ष |
| आकाशगंगा गुच्छ | विर्गो (कन्या) गुच्छ | लगभग 1.5 करोड़ प्रकाश वर्ष |
| महागुच्छ | लानियाकिया | लगभग 50 करोड़ प्रकाश वर्ष |
| ब्रह्मांडीय जाल | तंतु, गुच्छ, रिक्त स्थान | पूरा दृश्य ब्रह्मांड |
2तारा क्या है
तारा गर्म गैस (मुख्यतः हाइड्रोजन और हीलियम) का विशाल गोला है, जो अपने भीतर होने वाले नाभिकीय संलयन से स्वयं प्रकाश और ऊष्मा देता है।
तारा टिका कैसे रहता है: दो बलों का संतुलन
- गुरुत्व पूरे गोले को भीतर की ओर खींचता है।
- क्रोड में संलयन से बनी गर्मी और दबाव बाहर की ओर धकेलते हैं।
- जब तक दोनों बराबर हैं (द्रवस्थैतिक संतुलन, Hydrostatic equilibrium), तारा स्थिर रहता है। ईंधन ख़त्म होने पर संतुलन टूटता है और तारे का अंत शुरू होता है (पेज 1.6)।
संलयन: तारे का "इंजन"
- क्रोड में लगभग 1.5 करोड़ °C पर 4 हाइड्रोजन नाभिक मिलकर 1 हीलियम नाभिक बनाते हैं (प्रोटॉन-प्रोटॉन श्रृंखला)। बनने वाले हीलियम का द्रव्यमान थोड़ा (लगभग 0.7%) कम होता है; यही द्रव्यमान आइंस्टीन के E = mc² से ऊर्जा बनता है।
- सूर्य हर सेकंड लगभग 60 करोड़ टन हाइड्रोजन को हीलियम में बदलता है और लगभग 40 लाख टन द्रव्यमान ऊर्जा में खोता है।
- सूर्य से भारी तारों में संलयन मुख्यतः CNO चक्र (कार्बन-नाइट्रोजन-ऑक्सीजन की मदद से) से होता है।
- क्रोड में बना प्रकाश बाहर आने में हज़ारों से लाखों वर्ष लगाता है, पर सतह से पृथ्वी तक केवल लगभग 8 मिनट 20 सेकंड।
सूर्य: एक साधारण तारा
| बात | मान (लगभग) |
|---|---|
| प्रकार | G2 V, पीला बौना (मुख्य अनुक्रम) तारा |
| आयु | लगभग 460 करोड़ वर्ष; लगभग आधा जीवन बीता |
| व्यास | लगभग 13.9 लाख किमी (पृथ्वी का लगभग 109 गुना) |
| द्रव्यमान | सौरमंडल का लगभग 99.86% |
| सतह का तापमान | लगभग 5,500 °C (5,772 K) |
| क्रोड का तापमान | लगभग 1.5 करोड़ °C |
| बनावट (भार से) | लगभग 73% हाइड्रोजन, 25% हीलियम, बाकी भारी तत्व |
| पृथ्वी से दूरी | लगभग 15 करोड़ किमी (1 खगोलीय इकाई) |
3तारे, ग्रह और टिमटिमाना
| आधार | तारा | ग्रह |
|---|---|---|
| प्रकाश | अपना (संलयन से) | सूर्य का परावर्तित प्रकाश |
| टिमटिमाना | टिमटिमाते हैं | प्रायः नहीं (स्थिर चमक) |
| आकाश में जगह | एक-दूसरे के सापेक्ष लगभग स्थिर | तारों के बीच धीरे-धीरे खिसकते ("ग्रह" = घूमने वाला) |
| दूरी | प्रकाश वर्षों में | सौरमंडल के भीतर, प्रकाश मिनटों-घंटों में |
| तापमान | हज़ारों से करोड़ों डिग्री | अपेक्षाकृत ठंडे |
तारे क्यों टिमटिमाते हैं
तारा इतना दूर है कि हमें वह बिंदु जैसा दिखता है। उसका प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल की अलग-अलग तापमान और घनत्व वाली परतों से गुज़रते हुए बार-बार मुड़ता (अपवर्तन) है; परतें हिलती रहती हैं, इसलिए आँख तक पहुँचने वाला प्रकाश कभी अधिक, कभी कम होता है। ग्रह पास होने से छोटी चकती जैसे दिखते हैं; चकती के अलग-अलग बिंदुओं का उतार-चढ़ाव आपस में बराबर हो जाता है, इसलिए वे कम टिमटिमाते हैं।
- क्षितिज के पास तारे अधिक टिमटिमाते हैं, क्योंकि प्रकाश अधिक वायुमंडल पार करता है।
- इसी कारण बड़ी दूरबीनें ऊँचे पहाड़ों, सूखे स्थानों या अंतरिक्ष में लगाई जाती हैं (हानले, लद्दाख; मौना की, हवाई; जेम्स वेब, अंतरिक्ष)।
दिन में तारे क्यों नहीं दिखते
तारे दिन में भी आकाश में होते हैं, पर वायुमंडल से बिखरा सूर्य का प्रकाश (नीला आकाश) उनसे कहीं अधिक चमकीला होता है। अंतरिक्ष यात्रियों को, जहाँ वायुमंडल नहीं, सूर्य के रहते भी तारे दिख सकते हैं।
4तारों का रंग, तापमान और वर्गीकरण
- जैसे लोहे की छड़ गर्म करने पर पहले लाल, फिर नारंगी, फिर पीली-सफ़ेद चमकती है, वैसे ही तारे का रंग उसके सतह के तापमान से तय होता है। लाल तारे अपेक्षाकृत ठंडे, नीले तारे सबसे गर्म।
- वीन का नियम: वस्तु जितनी गर्म, उसका सबसे अधिक प्रकाश उतनी छोटी तरंगदैर्घ्य (नीले की ओर) पर।
वर्णक्रमीय वर्ग (हार्वर्ड वर्गीकरण)
| वर्ग | रंग | सतह का तापमान (लगभग, °C) | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| O | नीला | 30,000 से अधिक | ज़ीटा ओरायनिस |
| B | नीला-सफ़ेद | 10,000-30,000 | रिगेल, स्पाइका (चित्रा) |
| A | सफ़ेद | 7,500-10,000 | व्याध (Sirius), अभिजित (Vega) |
| F | पीला-सफ़ेद | 6,000-7,500 | ध्रुव तारा (Polaris) |
| G | पीला | 5,200-6,000 | सूर्य |
| K | नारंगी | 3,700-5,200 | स्वाति (Arcturus) |
| M | लाल | 2,400-3,700 | आर्द्रा (Betelgeuse), ज्येष्ठा (Antares), प्रॉक्सिमा सेंटॉरी |
- यह वर्गीकरण एनी जंप कैनन (हार्वर्ड, लगभग 1901) ने बनाया; इसे तापमान से जोड़ने की सैद्धांतिक व्याख्या भारतीय वैज्ञानिक मेघनाद साहा के आयनन समीकरण (1920) और फिर सेसिलिया पेन (1925) के काम से मिली। पेन ने ही दिखाया कि तारे मुख्यतः हाइड्रोजन-हीलियम से बने हैं।
- ब्रह्मांड में सबसे अधिक संख्या लाल बौने (M) तारों की है (लगभग 75%); ये मंद होने से नंगी आँख से एक भी नहीं दिखता।
- H-R आरेख (हर्ट्ज़स्प्रंग-रसेल): तापमान और चमक का ग्राफ़; अधिकांश तारे एक पट्टी, मुख्य अनुक्रम, पर आते हैं। इसका विस्तार पेज 1.6 में।
5तारों की चमक: कांतिमान और ज्योति
दो अलग बातें
- ज्योति (Luminosity): तारा हर सेकंड कुल कितनी ऊर्जा छोड़ता है; यह तारे का अपना गुण है।
- दिखने वाली चमक: पृथ्वी से कितना चमकीला दिखता है; यह ज्योति और दूरी दोनों पर निर्भर।
- व्युत्क्रम वर्ग नियम: दूरी दोगुनी हो तो चमक चौथाई; दस गुनी हो तो सौवाँ भाग।
कांतिमान (Magnitude) का पैमाना
- लगभग 2,100 वर्ष पहले यूनानी खगोलविद हिप्पार्कस ने सबसे चमकीले तारों को "पहला" और मुश्किल से दिखने वालों को "छठा" कांतिमान दिया। इसलिए अंक जितना कम, तारा उतना चमकीला; बहुत चमकीली वस्तुओं के लिए ऋणात्मक अंक।
- 5 कांतिमान का अंतर = 100 गुना चमक; 1 कांतिमान ≈ 2.512 गुना।
- निरपेक्ष कांतिमान: अगर हर तारा 10 पारसेक (32.6 प्रकाश वर्ष) दूर रखा जाए तो कितना चमकीला दिखेगा; इससे तारों की असली ज्योति की तुलना होती है। सूर्य का निरपेक्ष कांतिमान लगभग +4.8 है, यानी 32.6 प्रकाश वर्ष से वह मुश्किल से दिखता।
| वस्तु | दृश्य कांतिमान (लगभग) |
|---|---|
| सूर्य | −26.7 |
| पूर्णिमा का चंद्रमा | −12.7 |
| शुक्र (अधिकतम) | −4.6 |
| व्याध (रात का सबसे चमकीला तारा) | −1.46 |
| ध्रुव तारा | +2.0 |
| शहर से दिखने की सीमा | लगभग +3 |
| अँधेरे आकाश में नंगी आँख की सीमा | लगभग +6 |
6तारों की दूरी और सबसे पास के तारे
- तारों की दूरी प्रकाश वर्ष (प्रकाश द्वारा एक वर्ष में तय दूरी, लगभग 9.46 लाख करोड़ किमी) और पारसेक (3.26 प्रकाश वर्ष) में नापी जाती है (पेज 1.1)।
- पास के तारों की दूरी लंबन (Parallax) से: पृथ्वी के छह महीने के अंतर वाले दो स्थानों से तारा दूर के तारों के सापेक्ष थोड़ा खिसका दिखता है। यूरोप के गाया (Gaia) उपग्रह ने इसी तरीके से लगभग 2 अरब तारों की स्थिति और गति नापी।
| तारा | दूरी (प्रकाश वर्ष, लगभग) | खास बात |
|---|---|---|
| सूर्य | 8.3 प्रकाश मिनट | हमारा तारा |
| प्रॉक्सिमा सेंटॉरी | 4.24 | सबसे पास का तारा; लाल बौना; इसके चारों ओर ग्रह (प्रॉक्सिमा b) |
| अल्फ़ा सेंटॉरी A और B | 4.37 | दक्षिणी आकाश; नंगी आँख से एक तारे जैसा |
| बर्नार्ड का तारा | 5.96 | आकाश में सबसे तेज़ खिसकने वाला |
| व्याध (Sirius) | 8.6 | रात का सबसे चमकीला तारा |
| ध्रुव तारा | लगभग 430 | उत्तर दिशा का सूचक |
| आर्द्रा (Betelgeuse) | लगभग 550-700 | विशाल लाल महादानव; भविष्य में सुपरनोवा |
जब हम कोई तारा देखते हैं, तो उसका अतीत देखते हैं: ध्रुव तारे का जो प्रकाश आज आँख में आया, वह लगभग 430 वर्ष पहले चला था।
7तारामंडल, नक्षत्र और राशियाँ
तारामंडल (Constellation)
- आकाश में तारों के पहचाने हुए समूह, जिन्हें लोगों ने कल्पना से आकृतियों के नाम दिए। ये तारे आपस में पास हों, यह ज़रूरी नहीं; केवल पृथ्वी से एक दिशा में दिखते हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) ने 1922-1930 में पूरे आकाश को 88 तारामंडलों में बाँटा, जिनकी सीमाएँ तय हैं।
- सप्तर्षि (Ursa Major / बड़ा भालू): सात चमकीले तारे; आगे के दो तारों (सूचक तारे) की सीध में लगभग 5 गुना दूरी पर ध्रुव तारा मिलता है।
- कालपुरुष / मृग (Orion): सर्दियों का सबसे पहचानने लायक तारामंडल; तीन तारों की "कमरपेटी", लाल आर्द्रा (Betelgeuse) और नीला-सफ़ेद रिगेल। इसकी तलवार में ओरायन नीहारिका (M42) है, जहाँ नए तारे बन रहे हैं।
- शर्मिष्ठा (Cassiopeia): "W" या "M" जैसी आकृति; ध्रुव तारे के दूसरी ओर।
ध्रुव तारा
- पृथ्वी के अक्ष की सीध में लगभग उत्तरी खगोलीय ध्रुव के पास (लगभग 0.7° दूर) है, इसलिए रात भर लगभग एक ही जगह दिखता है और बाकी तारे इसके चारों ओर घूमते दिखते हैं। इससे उत्तर दिशा और अक्षांश (पेज 2.1) पता चलता है।
- पृथ्वी के अक्ष की धीमी डगमगाहट (अयन, लगभग 26,000 वर्ष) के कारण ध्रुव तारा बदलता रहता है: लगभग 5,000 वर्ष पहले थुबान था, लगभग 12,000 वर्ष बाद अभिजित (Vega) होगा।
- दक्षिणी गोलार्ध में ऐसा कोई चमकीला ध्रुव तारा नहीं; वहाँ त्रिशंकु (Southern Cross) से दक्षिण दिशा ढूँढी जाती है।
नक्षत्र और राशियाँ (भारतीय परंपरा)
- चंद्रमा लगभग 27.3 दिन में आकाश का चक्कर लगाता है; भारतीय खगोल में इस पथ को 27 नक्षत्रों (जैसे अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी, चित्रा, स्वाति) में बाँटा गया।
- सूर्य का वार्षिक आभासी पथ (क्रांतिवृत्त, Ecliptic) 12 राशियों (मेष से मीन) से गुज़रता है।
- ध्यान दें: खगोल विज्ञान (Astronomy) तारों का वैज्ञानिक अध्ययन है; फलित ज्योतिष (Astrology) में तारों से भविष्य बताने का दावा विज्ञान से प्रमाणित नहीं है।
8पहले तारे और आकाशगंगाएँ कैसे बने
- डार्क मैटर की भूमिका: बिग बैंग के बाद पदार्थ में बहुत छोटे घनत्व-अंतर थे (CMB में दिखते हैं, पेज 1.3)। डार्क मैटर प्रकाश से प्रभावित नहीं होता, इसलिए वह पहले ही गुरुत्व से गुच्छे (प्रभामंडल, Halos) बनाने लगा।
- गैस का गिरना: हाइड्रोजन-हीलियम गैस इन गुच्छों में गिरी, H₂ अणुओं से ठंडी हुई और सिकुड़कर पहले तारे (लगभग 10-20 करोड़ वर्ष पर) बने। ये बहुत भारी (शायद सूर्य से सैकड़ों गुना), बहुत गर्म और कम आयु वाले थे; इनके विस्फोटों ने पहली बार भारी तत्व फैलाए।
- पहली आकाशगंगाएँ: छोटे-छोटे प्रभामंडल और उनकी तारा-भरी गैस आपस में मिलते गए; छोटी आकाशगंगाएँ जुड़कर बड़ी बनीं (पदानुक्रमित विकास, Hierarchical growth)।
- जेम्स वेब दूरबीन की खोजें: बिग बैंग के केवल लगभग 28-30 करोड़ वर्ष बाद की चमकीली आकाशगंगाएँ (जैसे MoM-z14, JADES-GS-z14-0) मिलीं; अनुमान से अधिक चमकीली और पहले बनी आकाशगंगाओं ने वैज्ञानिकों को चौंकाया है। भारतीय वैज्ञानिकों ने JWST के आँकड़ों में "अलकनंदा" नाम की बहुत पुरानी सर्पिल आकाशगंगा पहचानी (2025), जो बताती है कि सुंदर सर्पिल आकार भी बहुत जल्दी बन गए थे।
NCERT का नीहारिका वाला वर्णन (कक्षा 11, अध्याय 2)
आरंभिक ब्रह्मांड में ऊर्जा और पदार्थ का वितरण समान नहीं था। घनत्व के इन अंतरों से गुरुत्वाकर्षण बलों में अंतर आया, जिससे पदार्थ एकत्र हुआ; यही आकाशगंगाओं के विकास का आधार बना। आकाशगंगा का निर्माण हाइड्रोजन गैस से बने विशाल बादल, नीहारिका (Nebula), के संचयन से शुरू हुआ; बढ़ती नीहारिका में गैस के झुंड विकसित हुए, जो सघन होकर तारे बने। NCERT के अनुसार तारों का निर्माण लगभग 500-600 करोड़ वर्ष पहले हुआ माना जाता है (आज के माप पहले तारों को इससे बहुत पहले, लगभग 1350 करोड़ वर्ष पहले बताते हैं)।
9आकाशगंगा क्या है और उसके प्रकार
आकाशगंगा (Galaxy) अरबों तारों, गैस, धूल और डार्क मैटर का गुरुत्व से बँधा विशाल तंत्र है। NCERT: एक आकाशगंगा का विस्तार इतना होता है कि उसे प्रकाश वर्षों में मापा जाता है; उदाहरण, मंदाकिनी का व्यास 80,000 से 1,50,000 प्रकाश वर्ष।
हबल का वर्गीकरण (1926)
| प्रकार | पहचान | तारे और गैस | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| दीर्घवृत्ताकार (E0-E7) | गोल से लंबा अंडाकार; भुजाएँ नहीं; अंक जितना बड़ा, उतना चपटा | पुराने लाल-पीले तारे; नई गैस बहुत कम, नए तारे कम बनते | M87 (केंद्र में ब्लैक होल का पहला चित्र, 2019) |
| लेंसाकार (S0) | चकती और उभार, पर भुजाएँ नहीं | ज़्यादातर पुराने तारे | NGC 5866 |
| सर्पिल (Sa, Sb, Sc) | केंद्रीय उभार और सर्पिल भुजाएँ; a से c तक उभार छोटा, भुजाएँ खुली | भुजाओं में नए नीले तारे, गैस, धूल | एंड्रोमेडा (Sb) |
| दंड वाले सर्पिल (SBa, SBb, SBc) | केंद्र में तारों का "दंड" (Bar), भुजाएँ उसके सिरों से | वही | मंदाकिनी (SBbc) |
| अनियमित (Irr) | कोई निश्चित आकार नहीं | गैस बहुत, तारे बनने की गति तेज़ | बड़ा और छोटा मैगेलानिक बादल |
- एडविन हबल ने 1924 में एंड्रोमेडा में सेफ़िड तारे देखकर सिद्ध किया कि वह मंदाकिनी के बाहर अलग आकाशगंगा है; उससे पहले बहुत-से वैज्ञानिक मानते थे कि पूरा ब्रह्मांड ही मंदाकिनी है (1920 की "महान बहस": शेपली बनाम कर्टिस)।
- बौनी आकाशगंगाएँ संख्या में सबसे अधिक हैं; बड़ी आकाशगंगाओं के चारों ओर इनका झुंड रहता है।
- दो आकाशगंगाओं की टक्कर से दीर्घवृत्ताकार आकाशगंगाएँ बनती मानी जाती हैं; ट्यूनिंग फ़ोर्क का क्रम विकास का क्रम नहीं है।
3D मॉडल का दूसरा दृश्य "प्रकार" खोलिए और किसी भी आकाशगंगा पर टैप कीजिए।
10हमारी मंदाकिनी (आकाशगंगा)
| बात | मान (लगभग) |
|---|---|
| प्रकार | दंड वाली सर्पिल (SBbc) |
| व्यास (तारों की चकती) | लगभग 1 लाख प्रकाश वर्ष (NCERT: 80,000-1,50,000) |
| चकती की मोटाई | लगभग 1,000 प्रकाश वर्ष |
| तारे | लगभग 100 से 400 अरब |
| कुल द्रव्यमान (डार्क मैटर सहित) | सूर्य का लगभग 1 से 1.5 लाख करोड़ गुना |
| आयु | सबसे पुराने तारे लगभग 1300 करोड़ वर्ष |
| केंद्र | Sgr A* ब्लैक होल, सूर्य का लगभग 40 लाख गुना द्रव्यमान |
| सूर्य की दूरी केंद्र से | लगभग 26,000 प्रकाश वर्ष |
| सूर्य की चाल | लगभग 230 किमी/सेकंड |
| एक चक्कर ("आकाशगंगीय वर्ष") | लगभग 23 करोड़ वर्ष |
बनावट
- केंद्रीय उभार और दंड: पुराने पीले-लाल तारों का घना भाग; बीच में Sgr A* ब्लैक होल।
- चकती और सर्पिल भुजाएँ: दो बड़ी भुजाएँ (पर्सियस और स्कूटम-सेंटॉरस), दो छोटी (नॉर्मा, धनु)। भुजाएँ "घनत्व तरंगें" हैं; यहाँ गैस दबकर नए नीले तारे और गुलाबी नीहारिकाएँ बनाती है।
- प्रभामंडल (Halo): चकती के चारों ओर गोलाकार क्षेत्र; पुराने गोलाकार तारा-गुच्छ (लगभग 150) और ज़्यादातर द्रव्यमान वाला अदृश्य डार्क मैटर।
सूर्य कहाँ है
सूर्य दो बड़ी भुजाओं के बीच की छोटी ओरायन भुजा (Orion Spur / स्थानीय भुजा) में है, केंद्र से लगभग आधे रास्ते पर। सूर्य जन्म के बाद से मंदाकिनी के लगभग 20 चक्कर लगा चुका है।
रात के आकाश में दूधिया पट्टी क्यों
हम चकती के भीतर हैं। चकती की दिशा में देखने पर हमें अनगिनत दूर-दूर के तारों की मिली-जुली मंद रोशनी एक पट्टी जैसी दिखती है; बीच-बीच के काले धब्बे धूल के बादल हैं। चकती से हटकर ऊपर-नीचे देखने पर तारे कम दिखते हैं। गैलीलियो ने 1610 में दूरबीन से पहली बार देखा कि यह पट्टी असंख्य तारों से बनी है।
- नाम: हिंदी में "आकाशगंगा" (आकाश की गंगा) या "मंदाकिनी"; अंग्रेज़ी "Milky Way" (दूध का रास्ता), यूनानी "galaxias" से "Galaxy" शब्द बना।
- जुलाई-अगस्त की रातों में धनु (Sagittarius) की दिशा में मंदाकिनी का केंद्र होता है, जहाँ पट्टी सबसे चमकीली दिखती है।
11मंदाकिनी का केंद्र: अत्यधिक भारी ब्लैक होल
- मंदाकिनी के केंद्र में धनु A* (Sagittarius A*, Sgr A*) नाम का अत्यधिक भारी ब्लैक होल है, जिसका द्रव्यमान सूर्य का लगभग 40 लाख गुना है।
- कैसे पता चला: केंद्र के पास के तारों (जैसे S2) को वर्षों तक देखा गया; वे एक अदृश्य, बहुत भारी वस्तु के चारों ओर बहुत तेज़ कक्षाओं में घूमते हैं। इसके लिए रेनहार्ड गेंज़ेल और एंड्रिया गेज़ को 2020 का भौतिकी नोबेल मिला (रोजर पेनरोज़ के साथ, जिन्होंने ब्लैक होल बनने का सिद्धांत दिया)।
- पहला चित्र: इवेंट होराइज़न टेलिस्कोप (दुनिया भर की रेडियो दूरबीनों को जोड़कर पृथ्वी जितनी बड़ी "आभासी" दूरबीन) ने 2019 में M87 आकाशगंगा के ब्लैक होल का और मई 2022 में Sgr A* का चित्र जारी किया: चमकते छल्ले के बीच काली "छाया"।
- लगभग हर बड़ी आकाशगंगा के केंद्र में ऐसा ब्लैक होल माना जाता है। जब यह आस-पास की गैस तेज़ी से निगलता है, तो केंद्र बहुत चमकता है: सक्रिय आकाशगंगा नाभिक (AGN); सबसे चमकीले को क्वासर कहते हैं, जो पूरी आकाशगंगा से हज़ारों गुना चमक सकते हैं।
12आकाशगंगा का घूमना और डार्क मैटर
- सौरमंडल में दूर के ग्रह धीमे चलते हैं (नेपच्यून पृथ्वी से बहुत धीमा), क्योंकि ज़्यादातर द्रव्यमान केंद्र (सूर्य) में है।
- अगर आकाशगंगा का द्रव्यमान केवल दिखने वाले तारों और गैस जितना होता, तो किनारे के तारे भी धीमे घूमते। पर 1970 के दशक में वेरा रूबिन और केंट फ़ोर्ड ने पाया कि किनारे के तारे लगभग उतनी ही तेज़ी से घूमते हैं जितने भीतर वाले (समतल घूर्णन वक्र)।
- निष्कर्ष: आकाशगंगा के चारों ओर बहुत-सा अदृश्य द्रव्यमान है: डार्क मैटर। यह आकाशगंगा के कुल द्रव्यमान का लगभग 85-90% है; पूरे ब्रह्मांड में सामान्य पदार्थ का लगभग 5 गुना।
- दूसरे प्रमाण: आकाशगंगा-गुच्छों में आकाशगंगाओं की तेज़ चाल (फ़्रिट्ज़ ज़्विकी, 1933), गुरुत्वीय लेंसन (भारी वस्तु के पास प्रकाश का मुड़ना), "बुलेट गुच्छ", CMB के माप।
- डार्क मैटर किस कण से बना है, यह अभी पता नहीं; प्रयोगशालाओं और LHC (पेज 1.2) में खोज जारी है। चिली की वेरा सी. रूबिन वेधशाला (पहले चित्र जून 2025) का नाम इन्हीं वैज्ञानिक के सम्मान में है।
13तारा-गुच्छ और नीहारिकाएँ
तारा-गुच्छ (Star clusters)
| प्रकार | पहचान | कहाँ | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| खुले गुच्छ (Open) | सैकड़ों-हज़ारों तारे, ढीले बँधे, नए तारे | चकती और भुजाओं में | कृत्तिका (Pleiades, M45: नंगी आँख से 6-7 तारे), पुष्य नक्षत्र (कर्क) का "बीहाइव" (M44) |
| गोलाकार गुच्छ (Globular) | लाखों तारे, गेंद जैसे घने, बहुत पुराने (1000 करोड़ वर्ष से अधिक) | प्रभामंडल में | ओमेगा सेंटॉरी, M13 (हरक्यूलिस) |
नीहारिका (Nebula)
अंतरतारकीय गैस और धूल के बादल। लैटिन "नेब्युला" = धुँध।
- उत्सर्जन नीहारिका: पास के गर्म तारे गैस को चमका देते हैं; हाइड्रोजन की लाल-गुलाबी चमक (H-अल्फ़ा, पेज 1.3)। उदाहरण: ओरायन नीहारिका (M42), जो लगभग 1,350 प्रकाश वर्ष दूर, नए तारों का "प्रसूति गृह" है।
- परावर्तन नीहारिका: धूल तारों का प्रकाश बिखेरती है; नीली दिखती है।
- काली (अदीप्त) नीहारिका: घनी धूल पीछे का प्रकाश रोकती है; जैसे "घोड़े के सिर" वाली नीहारिका।
- ग्रहीय नीहारिका और सुपरनोवा अवशेष: मरते तारों से निकली गैस (जैसे केकड़ा नीहारिका: 1054 ई. के सुपरनोवा से, पेज 1.6)।
- मेसियर सूची: फ़्रांसीसी खगोलविद चार्ल्स मेसियर (18वीं सदी) ने धूमकेतु से भ्रम न हो, इसलिए 110 धुँधली वस्तुओं की सूची बनाई (M1, M31...); आज भी ये नाम चलते हैं।
14स्थानीय समूह: हमारे पड़ोसी
- मंदाकिनी लगभग 80 से अधिक आकाशगंगाओं के स्थानीय समूह (Local Group) में है, जिसका विस्तार लगभग 1 करोड़ प्रकाश वर्ष है। सबसे बड़े सदस्य: एंड्रोमेडा (M31), फिर मंदाकिनी, फिर त्रिकोण (M33); बाकी ज़्यादातर बौनी आकाशगंगाएँ।
| आकाशगंगा | दूरी (प्रकाश वर्ष, लगभग) | खास बात |
|---|---|---|
| बड़ा मैगेलानिक बादल (LMC) | 1.6 लाख | मंदाकिनी की सबसे बड़ी साथी; दक्षिणी आकाश में नंगी आँख से; 1987 का सुपरनोवा |
| छोटा मैगेलानिक बादल (SMC) | 2 लाख | दक्षिणी आकाश; सेफ़िड तारों की खोज में अहम |
| एंड्रोमेडा (M31) | 25 लाख | लगभग 1 लाख करोड़ तारे; उत्तरी आकाश में नंगी आँख से धुँधला धब्बा; नंगी आँख से दिखने वाली सबसे दूर की वस्तुओं में |
| त्रिकोण (M33) | 27 लाख | छोटी सर्पिल; एंड्रोमेडा की साथी |
- इनके नाम पुर्तगाली नाविक फ़र्डिनेंड मैगेलन के अभियान (1519-22) पर पड़े, जिनके नाविकों ने दक्षिणी गोलार्ध में ये "बादल" देखे (पेज 2.1 में मैगेलन की परिक्रमा)।
- 3D मॉडल के तीसरे दृश्य "पड़ोसी" में किसी भी आकाशगंगा पर टैप करके उसकी जानकारी देखिए।
15मंदाकिनी और एंड्रोमेडा: भविष्य की टक्कर?
- ब्रह्मांड फैल रहा है, फिर भी एंड्रोमेडा लगभग 110 किमी/सेकंड की चाल से हमारी ओर आ रही है, क्योंकि स्थानीय समूह गुरुत्व से बँधा है। इसका स्पेक्ट्रम नीला विचलन (Blueshift) दिखाता है; ऐसी आकाशगंगाएँ गिनी-चुनी हैं।
- पुराना अनुमान (2012, हबल दूरबीन): लगभग 450 करोड़ वर्ष में लगभग निश्चित सीधी टक्कर।
- नया अध्ययन (जून 2025, Nature Astronomy; गाया और हबल के आँकड़े): M33 और बड़े मैगेलानिक बादल के गुरुत्व को भी गिनने पर अगले 1000 करोड़ वर्ष में विलय की संभावना केवल लगभग 50%; 450-500 करोड़ वर्ष में सीधी टक्कर की संभावना लगभग 2%। LMC हमें एंड्रोमेडा से थोड़ा दूर खींचता है, M33 थोड़ा पास।
- टक्कर हुई तो भी: तारों के बीच इतनी ख़ाली जगह है कि दो तारे शायद ही कभी टकराएँगे। आकाशगंगाओं के आकार बिगड़ेंगे, गैस दबकर नए तारे बनाएगी और अंत में एक बड़ी दीर्घवृत्ताकार आकाशगंगा ("मिल्कड्रोमेडा") बनेगी।
- तब तक सूर्य स्वयं बूढ़ा होकर लाल दानव बनने की ओर होगा (पेज 1.6); पृथ्वी के लिए बड़ा ख़तरा आकाशगंगाओं की टक्कर नहीं, सूर्य का बदलना है।
16गुच्छ, महागुच्छ और ब्रह्मांडीय जाल
- आकाशगंगा गुच्छ (Cluster): सैकड़ों से हज़ारों आकाशगंगाएँ; बीच में बहुत गर्म (करोड़ों डिग्री) गैस, जो एक्स-किरणें देती है। हमारे पास का बड़ा गुच्छ विर्गो (कन्या) गुच्छ, लगभग 5.4 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर।
- महागुच्छ (Supercluster): कई गुच्छ और समूह मिलकर। 2014 में पहचाना गया हमारा महागुच्छ लानियाकिया (हवाई भाषा में "अपार स्वर्ग"): लगभग 50 करोड़ प्रकाश वर्ष, लगभग 1 लाख आकाशगंगाएँ। इसकी आकाशगंगाएँ एक भारी क्षेत्र, "महान आकर्षक" (Great Attractor), की ओर बहती दिखती हैं।
- ब्रह्मांडीय जाल (Cosmic Web): सबसे बड़े पैमाने पर आकाशगंगाएँ समान नहीं फैलीं; वे लंबे तंतुओं (Filaments) और दीवारों पर, उनके मिलन बिंदुओं पर गुच्छों में, और बीच में विशाल लगभग ख़ाली रिक्त स्थानों (Voids, जैसे बूटीस रिक्त स्थान, लगभग 33 करोड़ प्रकाश वर्ष) के साथ। यह जाल डार्क मैटर के ढाँचे पर बना है और प्रारंभिक ब्रह्मांड के छोटे घनत्व-अंतरों से बढ़ा।
- आकाशगंगाओं की संख्या: दृश्य ब्रह्मांड में कुछ सौ अरब से लेकर लगभग 2 लाख करोड़ तक के अनुमान दिए गए हैं; नए मापों के साथ ये संख्याएँ बदलती रहती हैं।
- ब्रह्मांडीय सिद्धांत: लगभग 30 करोड़ प्रकाश वर्ष से बड़े पैमाने पर ब्रह्मांड हर जगह और हर दिशा में लगभग एक-सा है।
3D मॉडल का चौथा दृश्य "ब्रह्मांडीय जाल": हर बिंदु एक आकाशगंगा, चमकीले गोले गुच्छ, लंबी कतारें तंतु और बीच की ख़ाली जगह रिक्त स्थान।
17भारत और तारों का अध्ययन
प्राचीन से आधुनिक
- वेदांग ज्योतिष (लगभग 1400-1200 ई.पू. तक के अनुमान, तिथि पर मतभेद) में नक्षत्रों पर आधारित पंचांग; आर्यभट (499 ई., "आर्यभटीय"): पृथ्वी का घूमना, ग्रहणों की वैज्ञानिक व्याख्या; वराहमिहिर, ब्रह्मगुप्त, भास्कराचार्य।
- जंतर मंतर (सवाई जयसिंह द्वितीय, 18वीं सदी): जयपुर, दिल्ली, उज्जैन, वाराणसी, मथुरा में पत्थर की खगोलीय वेधशालाएँ; जयपुर का जंतर मंतर यूनेस्को विश्व धरोहर (2010)।
- कोडाईकनाल सौर वेधशाला (1899): यहीं 1909 में एवरशेड प्रभाव (सूर्य के धब्बों में गैस का बहाव) खोजा गया।
आज की प्रमुख सुविधाएँ
| सुविधा | कहाँ | काम |
|---|---|---|
| एस्ट्रोसैट (2015) | अंतरिक्ष (ISRO) | भारत की पहली बहु-तरंगदैर्घ्य अंतरिक्ष वेधशाला; पराबैंगनी दूरबीन (UVIT) से आकाशगंगाओं और तारों का अध्ययन |
| देवस्थल प्रकाशीय दूरबीन (3.6 मी, 2016) | नैनीताल (ARIES), उत्तराखंड | देश की सबसे बड़ी प्रकाशीय दूरबीनों में |
| भारतीय खगोलीय वेधशाला, हानले | लद्दाख (लगभग 4,500 मी ऊँचाई) | विश्व की सबसे ऊँची वेधशालाओं में; 2022 में हानले डार्क स्काई रिज़र्व |
| GMRT | नारायणगाँव, पुणे के पास | विशाल मीटर-तरंग रेडियो दूरबीन; दूर की आकाशगंगाओं की हाइड्रोजन गैस |
| अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी | — | SKA (रेडियो), TMT (तीस मीटर दूरबीन), LIGO-India |
भूगोल से जोड़: दूरबीन कहाँ लगती है
अच्छी वेधशाला के लिए: ऊँचाई (कम वायुमंडल, कम टिमटिमाहट), सूखी जलवायु (कम बादल, कम नमी), साफ़ और स्थिर हवा, शहरों से दूर (कम प्रकाश प्रदूषण)। इसीलिए हानले (ठंडा मरुस्थल), चिली का अटाकामा मरुस्थल (रूबिन वेधशाला, ALMA) और हवाई के ज्वालामुखी पर्वत मौना की चुने गए।
प्रकाश प्रदूषण
शहरों की रोशनी आकाश को चमका देती है, जिससे तारे छिप जाते हैं; दुनिया की बड़ी आबादी अब मंदाकिनी नहीं देख पाती। यह पक्षियों के प्रवास, कीटों और मनुष्य की नींद (जैविक घड़ी) पर भी असर डालता है। डार्क स्काई रिज़र्व (जैसे हानले) में बाहरी रोशनी नियंत्रित की जाती है; इससे खगोल-पर्यटन (Astro-tourism) भी बढ़ता है।
18महत्त्वपूर्ण शब्दावली (हिंदी-अंग्रेज़ी)
| हिंदी | अंग्रेज़ी | अर्थ |
|---|---|---|
| तारा | Star | संलयन से स्वयं चमकने वाला गैस का गोला |
| नाभिकीय संलयन | Nuclear fusion | हल्के नाभिक मिलकर भारी नाभिक, ऊर्जा निकलना |
| ज्योति | Luminosity | तारे की कुल ऊर्जा प्रति सेकंड |
| कांतिमान | Magnitude | चमक का पैमाना; कम अंक = अधिक चमक |
| तारामंडल | Constellation | तारों का पहचाना हुआ समूह (88) |
| नक्षत्र | Lunar mansion | चंद्रमा के पथ के 27 भाग |
| आकाशगंगा | Galaxy | तारों, गैस, धूल, डार्क मैटर का बँधा तंत्र |
| मंदाकिनी | Milky Way | हमारी आकाशगंगा |
| सर्पिल / दीर्घवृत्ताकार / अनियमित | Spiral / Elliptical / Irregular | आकाशगंगाओं के प्रकार |
| केंद्रीय उभार | Bulge | आकाशगंगा का घना केंद्रीय भाग |
| प्रभामंडल | Halo | चकती के चारों ओर गोलाकार क्षेत्र |
| नीहारिका | Nebula | गैस-धूल का बादल |
| तारा-गुच्छ | Star cluster | एक साथ जन्मे तारों का समूह |
| स्थानीय समूह | Local Group | मंदाकिनी, एंड्रोमेडा आदि का समूह |
| महागुच्छ | Supercluster | गुच्छों का समूह (लानियाकिया) |
| ब्रह्मांडीय जाल | Cosmic web | तंतु, गुच्छ और रिक्त स्थान का ढाँचा |
| डार्क मैटर | Dark matter | गुरुत्व से पहचाना जाने वाला अदृश्य पदार्थ |
| क्वासर | Quasar | ब्लैक होल से चमकता अत्यधिक दीप्त आकाशगंगा केंद्र |
| प्रकाश प्रदूषण | Light pollution | कृत्रिम रोशनी से आकाश का चमकना |
19आम ग़लतफ़हमियाँ और सही बात
| ग़लतफ़हमी | सही बात |
|---|---|
| सूर्य बहुत बड़ा, खास तारा है | सूर्य एक साधारण, मध्यम आकार का (G) तारा है; केवल पास होने से इतना बड़ा-चमकीला दिखता है |
| ध्रुव तारा सबसे चमकीला तारा है | सबसे चमकीला व्याध है; ध्रुव तारा लगभग 48वाँ; वह अपनी जगह के लिए प्रसिद्ध है |
| तारामंडल के तारे आपस में पास हैं | वे केवल एक दिशा में दिखते हैं; दूरियाँ बहुत अलग हो सकती हैं |
| लाल तारे सबसे गर्म | लाल सबसे ठंडे, नीले सबसे गर्म |
| आकाश की दूधिया पट्टी बादल है | वह मंदाकिनी की चकती के अरबों तारों की मिली रोशनी है |
| "आकाशगंगा" केवल हमारी है | हर Galaxy को आकाशगंगा कहते हैं; हमारी का नाम मंदाकिनी (Milky Way) |
| हम मंदाकिनी के केंद्र में हैं | सूर्य केंद्र से लगभग 26,000 प्रकाश वर्ष दूर, एक छोटी भुजा में |
| आकाशगंगाओं की टक्कर में सारे तारे टकराएँगे | तारों के बीच इतनी ख़ाली जगह है कि लगभग कोई तारा नहीं टकराता |
| ब्लैक होल सब कुछ खींच लेता है | दूर से उसका गुरुत्व उतने ही द्रव्यमान के तारे जैसा; केवल बहुत पास जाने पर ख़तरा |
| तारे दिन में "चले जाते" हैं | वे वहीं रहते हैं; सूर्य की चमक में छिप जाते हैं |
20UPSC: प्रीलिम्स के तथ्यUPSC विशेष
- सूर्य: G2 V, लगभग 460 करोड़ वर्ष, सतह लगभग 5,500 °C, क्रोड लगभग 1.5 करोड़ °C; प्रकाश लगभग 8 मिनट 20 सेकंड में।
- वर्ग O B A F G K M (गर्म से ठंडा); लाल बौने सबसे अधिक संख्या में।
- कांतिमान: कम अंक = चमकीला; 5 अंक = 100 गुना। व्याध रात का सबसे चमकीला तारा; प्रॉक्सिमा सेंटॉरी सबसे पास (4.24 प्र.व.)।
- 88 तारामंडल (IAU); 27 नक्षत्र; 12 राशियाँ।
- मंदाकिनी: दंड वाली सर्पिल; व्यास लगभग 1 लाख प्र.व. (NCERT 80,000-1,50,000); सूर्य केंद्र से लगभग 26,000 प्र.व., ओरायन भुजा में; आकाशगंगीय वर्ष लगभग 23 करोड़ वर्ष।
- केंद्र: Sgr A*, लगभग 40 लाख सौर द्रव्यमान; चित्र 2022 (EHT); नोबेल 2020।
- हबल का वर्गीकरण (1926): E, S0, S, SB, Irr।
- स्थानीय समूह: एंड्रोमेडा सबसे बड़ी, 25 लाख प्र.व.; मैगेलानिक बादल साथी।
- लानियाकिया महागुच्छ (2014)।
- वेरा रूबिन: घूर्णन वक्र, डार्क मैटर; रूबिन वेधशाला चिली, पहले चित्र जून 2025।
- हानले डार्क स्काई रिज़र्व (2022, लद्दाख); एस्ट्रोसैट (2015); देवस्थल 3.6 मी (2016)।
कथन वाले प्रश्न (अभ्यास)
तारों के संदर्भ में: (1) तारे का रंग उसकी सतह के तापमान पर निर्भर करता है। (2) लाल तारे नीले तारों से अधिक गर्म होते हैं। (3) ध्रुव तारा रात के आकाश का सबसे चमकीला तारा है। सही कथन?
केवल (1)। लाल ठंडे होते हैं; सबसे चमकीला तारा व्याध है।
मंदाकिनी के बारे में: (1) यह दंड वाली सर्पिल आकाशगंगा है। (2) सौरमंडल इसके केंद्र के पास है। (3) इसके केंद्र में अत्यधिक भारी ब्लैक होल है। सही?
(1) और (3)। सूर्य केंद्र से लगभग 26,000 प्रकाश वर्ष दूर है।
युग्म: (1) कृत्तिका: खुला तारा-गुच्छ (2) एंड्रोमेडा: सर्पिल आकाशगंगा (3) ओरायन नीहारिका: सुपरनोवा अवशेष। सही सुमेलित?
(1) और (2)। ओरायन नीहारिका तारों के जन्म का क्षेत्र है; सुपरनोवा अवशेष का उदाहरण केकड़ा नीहारिका।
21इस विषय से प्रश्न किस तरह आते हैंUPSC विशेष
- तथ्य: सूर्य के आँकड़े, सबसे पास/चमकीला तारा, तारामंडल, मंदाकिनी का आकार और सूर्य की स्थिति।
- अवधारणा: तारे क्यों टिमटिमाते हैं, रंग और तापमान, कांतिमान, डार्क मैटर का प्रमाण।
- ताज़ा घटनाएँ: JWST, गाया, रूबिन वेधशाला, Sgr A* का चित्र, एंड्रोमेडा अध्ययन (2025), भारतीय खोजें (अलकनंदा)।
- भारत: वेधशालाएँ (हानले, देवस्थल, GMRT, कोडाईकनाल), एस्ट्रोसैट, जंतर मंतर, आर्यभट।
- भूगोल और पर्यावरण से जोड़: वेधशालाओं का स्थान-चयन, प्रकाश प्रदूषण, डार्क स्काई रिज़र्व, खगोल-पर्यटन।
- मेन्स: "ब्रह्मांड का बड़े पैमाने का ढाँचा", "भारत की खगोल विज्ञान क्षमता", "प्रकाश प्रदूषण एक पर्यावरणीय समस्या"।
तैयारी का तरीका: पहले NCERT टैब (कक्षा 6, 8, 11); फिर 3D मॉडल के चारों दृश्य; फिर तालिकाएँ (सूर्य, पास के तारे, मंदाकिनी, स्थानीय समूह) याद करें।
22UPSC मेन्स: पूरे आदर्श उत्तरUPSC विशेष
आकाशगंगाएँ क्या हैं? हबल के वर्गीकरण के आधार पर उनके प्रकारों का वर्णन कीजिए और मंदाकिनी की संरचना बताइए। (15 अंक, 250 शब्द)
भूमिका: आकाशगंगा अरबों तारों, गैस, धूल और डार्क मैटर का गुरुत्व से बँधा विशाल तंत्र है। एडविन हबल ने 1924 में सिद्ध किया कि एंड्रोमेडा मंदाकिनी से बाहर अलग आकाशगंगा है, और 1926 में आकार के आधार पर वर्गीकरण दिया।
प्रकार: (1) दीर्घवृत्ताकार (E0-E7): भुजाहीन, पुराने लाल-पीले तारे, नई गैस कम; सबसे बड़ी आकाशगंगाएँ (M87) इसी प्रकार की, प्रायः टक्करों से बनीं। (2) लेंसाकार (S0): चकती और उभार, पर भुजाएँ नहीं। (3) सर्पिल (Sa-Sc): उभार और सर्पिल भुजाएँ; भुजाओं में नए नीले तारे और नीहारिकाएँ; उदाहरण एंड्रोमेडा। (4) दंड वाले सर्पिल (SBa-SBc): केंद्र में तारों का दंड। (5) अनियमित: निश्चित आकार नहीं, गैस बहुत, जैसे मैगेलानिक बादल। संख्या में सबसे अधिक बौनी आकाशगंगाएँ हैं। मंदाकिनी की संरचना: दंड वाली सर्पिल (SBbc); व्यास लगभग 1 लाख प्रकाश वर्ष (NCERT 80,000-1,50,000), चकती लगभग 1,000 प्रकाश वर्ष मोटी; 100-400 अरब तारे। (1) केंद्रीय उभार-दंड और Sgr A* ब्लैक होल (लगभग 40 लाख सौर द्रव्यमान; चित्र 2022)। (2) चकती में भुजाएँ: पर्सियस, स्कूटम-सेंटॉरस, नॉर्मा, धनु; सूर्य छोटी ओरायन भुजा में, केंद्र से लगभग 26,000 प्रकाश वर्ष, लगभग 23 करोड़ वर्ष में एक चक्कर। (3) प्रभामंडल: गोलाकार तारा-गुच्छ और डार्क मैटर, जो घूर्णन वक्र से सिद्ध हुआ। निष्कर्ष: मंदाकिनी स्थानीय समूह, विर्गो महागुच्छ और लानियाकिया का भाग है; आकाशगंगाएँ ही ब्रह्मांडीय जाल की मूल इकाइयाँ हैं। (एक छोटा "ट्यूनिंग फ़ोर्क" आरेख जोड़ें।)
"प्रकाश प्रदूषण" को एक उभरती पर्यावरणीय समस्या के रूप में समझाइए। भारत में "डार्क स्काई रिज़र्व" की पहल का महत्त्व बताइए। (10 अंक, 150 शब्द)
भूमिका: अत्यधिक, ग़लत दिशा में या अनावश्यक कृत्रिम रोशनी से रात का आकाश चमकना प्रकाश प्रदूषण है; उपग्रह मापों के अनुसार दुनिया की बड़ी आबादी अब मंदाकिनी नहीं देख पाती और यह हर वर्ष बढ़ रहा है।
प्रभाव: (1) पारिस्थितिकी: प्रवासी पक्षियों का भटकना, समुद्री कछुओं के बच्चों का समुद्र की जगह रोशनी की ओर जाना, कीटों की संख्या घटना, परागण पर असर। (2) मानव स्वास्थ्य: मेलाटोनिन और जैविक घड़ी में गड़बड़ी, नींद की समस्या। (3) ऊर्जा की बर्बादी और कार्बन उत्सर्जन। (4) खगोल विज्ञान और सांस्कृतिक विरासत: तारे, नक्षत्र और मंदाकिनी देखने की परंपरा का खोना। डार्क स्काई रिज़र्व: 2022 में लद्दाख के हानले में भारत का पहला डार्क स्काई रिज़र्व बना; स्थानीय समुदाय की भागीदारी से बाहरी रोशनी नियंत्रित, वेधशाला की सुरक्षा, और खगोल-पर्यटन से स्थानीय रोज़गार ("एस्ट्रो-एंबेसडर")। निष्कर्ष: नीचे की ओर ढकी, कम तीव्रता वाली, गर्म रंग की LED और ज़रूरत भर रोशनी जैसी नीतियाँ अपनाकर रात के आकाश को "प्राकृतिक संसाधन" की तरह बचाना चाहिए।
डार्क मैटर क्या है? इसके अस्तित्व के प्रमाणों की चर्चा कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)
भूमिका: डार्क मैटर वह पदार्थ है जो प्रकाश नहीं छोड़ता, न सोखता, पर गुरुत्व से अपना असर दिखाता है; यह ब्रह्मांड का लगभग 27% (सामान्य पदार्थ का लगभग 5 गुना) माना जाता है।
प्रमाण: (1) घूर्णन वक्र: वेरा रूबिन और केंट फ़ोर्ड (1970 का दशक) ने पाया कि आकाशगंगाओं के किनारे के तारे अपेक्षा से तेज़ घूमते हैं। (2) आकाशगंगा गुच्छ: फ़्रिट्ज़ ज़्विकी (1933) ने कोमा गुच्छ में आकाशगंगाओं की चाल से "अदृश्य द्रव्यमान" का अनुमान लगाया। (3) गुरुत्वीय लेंसन: भारी गुच्छों के पीछे की आकाशगंगाओं का प्रकाश दिखते द्रव्यमान से अधिक मुड़ता है; "बुलेट गुच्छ" में द्रव्यमान और गर्म गैस अलग-अलग जगह दिखते हैं। (4) CMB और ब्रह्मांडीय जाल: प्रारंभिक ब्रह्मांड के उतार-चढ़ाव और आज का जाल डार्क मैटर के बिना नहीं समझाए जा सकते। निष्कर्ष: डार्क मैटर का कण अब तक प्रयोगों (LHC, भूमिगत डिटेक्टर) में नहीं मिला; यह आधुनिक भौतिकी का बड़ा खुला प्रश्न है। यूक्लिड, रूबिन और भविष्य के मिशन इसके नक्शे बना रहे हैं।
अभ्यास के लिए और प्रश्न (उत्तर का ढाँचा)
तारे क्यों टिमटिमाते हैं, ग्रह क्यों नहीं? इसका खगोलीय वेधशालाओं के स्थान-चयन पर क्या प्रभाव पड़ता है? (150 शब्द)
बिंदु स्रोत बनाम चकती; वायुमंडलीय अपवर्तन; क्षितिज के पास अधिक; ऊँचाई, सूखापन, स्थिर हवा, कम प्रकाश प्रदूषण; हानले, अटाकामा, मौना की; अंतरिक्ष दूरबीनें।
भारत की आधुनिक खगोलीय सुविधाओं का परिचय दीजिए। (150 शब्द)
एस्ट्रोसैट, आदित्य-L1, देवस्थल, हानले, GMRT, कोडाईकनाल, LIGO-India, SKA-TMT भागीदारी; उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ।
23ताज़ा घटनाक्रम (अक्टूबर 2026 तक)UPSC विशेष
| विषय | क्या हुआ | किस बात से जुड़ा |
|---|---|---|
| मंदाकिनी-एंड्रोमेडा (जून 2025) | Nature Astronomy अध्ययन: अगले 1000 करोड़ वर्ष में विलय की लगभग 50% संभावना; 450-500 करोड़ वर्ष में सीधी टक्कर लगभग 2% | स्थानीय समूह |
| वेरा सी. रूबिन वेधशाला | चिली में; 23 जून 2025 को पहले चित्र; 3,200 मेगापिक्सेल का विश्व का सबसे बड़ा डिजिटल कैमरा; 10 वर्ष का LSST सर्वेक्षण, हर 3-4 रात में पूरा दक्षिणी आकाश; लगभग 4,000 करोड़ खगोलीय पिंडों का डेटा | डार्क मैटर, मंदाकिनी का नक्शा |
| गाया (ESA) | जनवरी 2025 में अवलोकन समाप्त, 27 मार्च 2025 को बंद; अगला डेटा (DR4) दिसंबर 2026 में अपेक्षित | तारों की दूरी और गति |
| जेम्स वेब दूरबीन | बिग बैंग के लगभग 28-30 करोड़ वर्ष बाद की आकाशगंगाएँ (MoM-z14 आदि) | पहली आकाशगंगाएँ |
| "अलकनंदा" (2025) | भारतीय खगोलविदों ने JWST आँकड़ों में बहुत पुरानी सुंदर सर्पिल आकाशगंगा पहचानी | आकाशगंगाओं का विकास |
| यूक्लिड (ESA) | 2023 में प्रक्षेपित; 2025 में पहला बड़ा डेटा; डार्क मैटर और डार्क एनर्जी का 3D नक्शा | ब्रह्मांडीय जाल |
| हानले डार्क स्काई रिज़र्व | 2022 से; खगोल-पर्यटन और प्रकाश प्रदूषण नियंत्रण | पर्यावरण, भारत |
यह भाग समय के साथ बदलता है; परीक्षा से पहले ताज़ा स्थिति अवश्य देखें।
24अभ्यास: 50 बहुविकल्पीय प्रश्न (व्याख्या सहित)परीक्षा के प्रश्न
तारे स्वयं प्रकाश क्यों देते हैं? (a) सूर्य का प्रकाश परावर्तित करते हैं (b) क्रोड में नाभिकीय संलयन (c) रासायनिक दहन (d) नाभिकीय विखंडन
(b) संलयन: हाइड्रोजन से हीलियम; दहन (आग) से तारा कुछ हज़ार वर्ष ही चल पाता।
सूर्य के क्रोड का तापमान लगभग: (a) 5,500 °C (b) 1.5 करोड़ °C (c) 100 करोड़ °C (d) 1 लाख °C
(b); सतह लगभग 5,500 °C।
तारा स्थिर कैसे रहता है? (a) चुंबकीय बल से (b) गुरुत्व (भीतर) और गर्मी-दबाव (बाहर) के संतुलन से (c) घूमने से (d) ग्रहों के खिंचाव से
(b) द्रवस्थैतिक संतुलन।
सूर्य किस वर्ण-वर्ग का तारा है? (a) O (b) A (c) G (d) M
(c) G2, पीला बौना।
सबसे गर्म तारों का रंग: (a) लाल (b) पीला (c) नारंगी (d) नीला
(d) नीला (O वर्ग)।
आर्द्रा (Betelgeuse) का रंग और वर्ग: (a) नीला, B (b) लाल, M (c) पीला, G (d) सफ़ेद, A
(b) लाल महादानव, M वर्ग।
संख्या में सबसे अधिक तारे किस प्रकार के हैं? (a) नीले महादानव (b) लाल बौने (c) पीले बौने (d) श्वेत बौने
(b) लाल बौने, लगभग 75%।
रात के आकाश का सबसे चमकीला तारा: (a) ध्रुव तारा (b) व्याध (Sirius) (c) आर्द्रा (d) अभिजित
(b) व्याध, कांतिमान −1.46।
कांतिमान के बारे में सही: (a) अधिक अंक = अधिक चमक (b) कम अंक = अधिक चमक (c) केवल धनात्मक होता है (d) दूरी से नहीं बदलता
(b); सूर्य −26.7।
5 कांतिमान का अंतर चमक में कितने गुना? (a) 5 (b) 10 (c) 100 (d) 1000
(c) 100 गुना।
सूर्य के बाद सबसे पास का तारा: (a) व्याध (b) प्रॉक्सिमा सेंटॉरी (c) बर्नार्ड का तारा (d) ध्रुव तारा
(b) लगभग 4.24 प्रकाश वर्ष।
तारे टिमटिमाते क्यों हैं? (a) उनकी चमक सचमुच बदलती है (b) वायुमंडल में प्रकाश का बार-बार अपवर्तन (c) बादलों से (d) पृथ्वी के घूमने से
(b); ग्रह चकती जैसे दिखने से कम टिमटिमाते हैं।
तारे क्षितिज के पास अधिक क्यों टिमटिमाते हैं? (a) वहाँ तारे बड़े हैं (b) प्रकाश अधिक वायुमंडल पार करता है (c) वहाँ ठंड अधिक (d) वहाँ गुरुत्व कम
(b)।
IAU के अनुसार कुल तारामंडल: (a) 12 (b) 27 (c) 88 (d) 110
(c) 88; 12 राशियाँ, 27 नक्षत्र, 110 मेसियर वस्तुएँ।
ध्रुव तारा खोजने में किस तारामंडल के "सूचक तारे" मदद करते हैं? (a) कालपुरुष (b) सप्तर्षि (c) वृश्चिक (d) त्रिशंकु
(b) सप्तर्षि (Ursa Major)।
ध्रुव तारा सदा एक ही जगह क्यों दिखता है? (a) वह घूमता नहीं (b) वह पृथ्वी के अक्ष की सीध में (उत्तरी खगोलीय ध्रुव के पास) है (c) वह सबसे पास है (d) वह ग्रह है
(b)।
लगभग 12,000 वर्ष बाद ध्रुव तारे के पास कौन-सा तारा होगा? (a) व्याध (b) अभिजित (Vega) (c) आर्द्रा (d) स्वाति
(b) अभिजित, अयन (लगभग 26,000 वर्ष का चक्र) के कारण।
भारतीय परंपरा में चंद्रमा के पथ के भाग: (a) 12 राशियाँ (b) 27 नक्षत्र (c) 88 तारामंडल (d) 7 ग्रह
(b) 27 नक्षत्र।
मंदाकिनी किस प्रकार की आकाशगंगा है? (a) दीर्घवृत्ताकार (b) अनियमित (c) दंड वाली सर्पिल (d) लेंसाकार
(c) SBbc।
NCERT के अनुसार मंदाकिनी का व्यास: (a) 8,000-15,000 प्र.व. (b) 80,000-1,50,000 प्र.व. (c) 8-15 लाख प्र.व. (d) 25 लाख प्र.व.
(b)। 25 लाख प्र.व. एंड्रोमेडा की दूरी है।
सूर्य मंदाकिनी के केंद्र से लगभग कितना दूर है? (a) 2,600 प्र.व. (b) 26,000 प्र.व. (c) 2.6 लाख प्र.व. (d) केंद्र में ही
(b) लगभग 26,000 प्रकाश वर्ष।
"आकाशगंगीय वर्ष" लगभग: (a) 365 दिन (b) 23 करोड़ वर्ष (c) 460 करोड़ वर्ष (d) 26,000 वर्ष
(b); 26,000 वर्ष अयन का चक्र है।
सूर्य मंदाकिनी की किस भुजा में है? (a) पर्सियस (b) ओरायन (स्थानीय) भुजा (c) नॉर्मा (d) केंद्रीय दंड
(b)।
मंदाकिनी के केंद्र के ब्लैक होल का नाम: (a) M87* (b) Sgr A* (c) सिग्नस X-1 (d) TON 618
(b) धनु A*।
Sgr A* का पहला चित्र किसने और कब जारी किया? (a) हबल, 1990 (b) इवेंट होराइज़न टेलिस्कोप, 2022 (c) JWST, 2023 (d) गाया, 2025
(b) मई 2022; M87 का 2019 में।
2020 का भौतिकी नोबेल किस विषय पर? (a) गुरुत्वीय तरंगें (b) मंदाकिनी के केंद्र का अत्यधिक भारी पिंड और ब्लैक होल (c) एक्सोप्लैनेट (d) डार्क एनर्जी
(b) गेंज़ेल, गेज़ और पेनरोज़।
रात के आकाश में दूधिया पट्टी क्या है? (a) बादल (b) मंदाकिनी की चकती के अरबों तारों की मिली रोशनी (c) उल्काओं की पूँछ (d) चंद्रमा का प्रकाश
(b); गैलीलियो ने 1610 में दूरबीन से तारे पहचाने।
हबल का वर्गीकरण किस आधार पर है? (a) आयु (b) आकार (c) दूरी (d) रंग
(b) आकार; यह विकास का क्रम नहीं।
बड़ा और छोटा मैगेलानिक बादल किस प्रकार की आकाशगंगाएँ हैं? (a) दीर्घवृत्ताकार (b) अनियमित (बौनी) (c) बड़ी सर्पिल (d) क्वासर
(b)।
स्थानीय समूह की सबसे बड़ी आकाशगंगा: (a) मंदाकिनी (b) एंड्रोमेडा (c) M33 (d) LMC
(b) एंड्रोमेडा (M31)।
एंड्रोमेडा की दूरी लगभग: (a) 2.5 लाख प्र.व. (b) 25 लाख प्र.व. (c) 2.5 करोड़ प्र.व. (d) 25,000 प्र.व.
(b)।
एंड्रोमेडा के स्पेक्ट्रम में क्या दिखता है? (a) लाल विचलन (b) नीला विचलन, क्योंकि वह पास आ रही है (c) कोई विचलन नहीं (d) केवल एक्स-किरण
(b) लगभग 110 किमी/से. से पास आ रही।
2025 के अध्ययन के अनुसार अगले 1000 करोड़ वर्ष में मंदाकिनी-एंड्रोमेडा विलय की संभावना: (a) 100% (b) लगभग 50% (c) 2% (d) शून्य
(b); 450-500 करोड़ वर्ष में सीधी टक्कर लगभग 2%।
आकाशगंगाओं की टक्कर में: (a) अधिकांश तारे टकराएँगे (b) तारे शायद ही टकराएँगे, क्योंकि बीच में बहुत ख़ाली जगह (c) सब ब्लैक होल बनेंगे (d) पृथ्वी तुरंत नष्ट होगी
(b)।
आकाशगंगा का समतल घूर्णन वक्र किसका प्रमाण है? (a) डार्क एनर्जी (b) डार्क मैटर (c) बिग बैंग (d) स्फीति
(b) डार्क मैटर (वेरा रूबिन)।
आकाशगंगा गुच्छों में "अदृश्य द्रव्यमान" का अनुमान सबसे पहले किसने लगाया (1933)? (a) हबल (b) फ़्रिट्ज़ ज़्विकी (c) आइंस्टीन (d) साहा
(b) ज़्विकी, कोमा गुच्छ में।
कृत्तिका (Pleiades) क्या है? (a) गोलाकार गुच्छ (b) खुला तारा-गुच्छ (c) ग्रह (d) नीहारिका
(b) M45।
गोलाकार तारा-गुच्छ कहाँ मिलते हैं? (a) भुजाओं में (b) प्रभामंडल में (c) केवल केंद्र में (d) सौरमंडल में
(b) प्रभामंडल में; बहुत पुराने।
ओरायन नीहारिका (M42) क्या है? (a) सुपरनोवा अवशेष (b) तारों के जन्म का क्षेत्र (c) आकाशगंगा (d) ब्लैक होल
(b)।
हमारा महागुच्छ: (a) विर्गो (b) लानियाकिया (c) कोमा (d) बूटीस
(b) लानियाकिया (2014); विर्गो उसका भाग, बूटीस रिक्त स्थान है।
ब्रह्मांडीय जाल के घटक: (a) ग्रह, उपग्रह, धूमकेतु (b) तंतु, गुच्छ, रिक्त स्थान (c) केवल तारे (d) केवल ब्लैक होल
(b)।
वेरा सी. रूबिन वेधशाला कहाँ है और पहले चित्र कब? (a) हवाई, 2023 (b) चिली, जून 2025 (c) लद्दाख, 2022 (d) दक्षिण अफ़्रीका, 2024
(b)।
गाया उपग्रह का मुख्य काम: (a) ग्रहों पर उतरना (b) तारों की स्थिति, दूरी और गति का सटीक मापन (c) सूर्य का अध्ययन (d) पृथ्वी का मौसम
(b); 2025 में बंद, DR4 दिसंबर 2026 में अपेक्षित।
भारत का पहला डार्क स्काई रिज़र्व: (a) देवस्थल (b) हानले, लद्दाख (c) कोडाईकनाल (d) माउंट आबू
(b) 2022।
एस्ट्रोसैट कब प्रक्षेपित हुआ? (a) 2008 (b) 2015 (c) 2019 (d) 2023
(b) 2015; 2023 में आदित्य-L1।
देवस्थल 3.6 मीटर दूरबीन कहाँ है? (a) नैनीताल (ARIES) (b) पुणे (c) बेंगलुरु (d) उदयपुर
(a)।
जयपुर का जंतर मंतर किसने बनवाया? (a) अकबर (b) सवाई जयसिंह द्वितीय (c) शेरशाह (d) राणा प्रताप
(b); यूनेस्को विश्व धरोहर 2010।
वेधशाला के लिए सबसे उपयुक्त स्थान: (a) तटीय नम नगर (b) ऊँचा, सूखा, शहरों से दूर स्थान (c) घाटी में बड़ा शहर (d) वर्षा वन
(b)।
NCERT के अनुसार आकाशगंगा का निर्माण किससे शुरू हुआ? (a) ग्रहों के टकराने से (b) हाइड्रोजन गैस के विशाल बादल, नीहारिका, के संचयन से (c) ब्लैक होल से (d) सूर्य से
(b)।
अत्यधिक चमकीले सक्रिय आकाशगंगा केंद्र को कहते हैं: (a) पल्सर (b) क्वासर (c) नोवा (d) धूमकेतु
(b) क्वासर; केंद्रीय ब्लैक होल द्वारा गैस निगलने से।
25एक नज़र मेंयाद रखें
- तारा: संलयन से चमकता गैस-गोला; गुरुत्व और दबाव का संतुलन; सूर्य G2, 460 करोड़ वर्ष, सतह लगभग 5,500 °C, क्रोड लगभग 1.5 करोड़ °C।
- रंग = तापमान: O B A F G K M (नीले गर्म, लाल ठंडे)। कांतिमान: कम अंक = चमकीला; व्याध सबसे चमकीला, प्रॉक्सिमा सबसे पास।
- टिमटिमाना: वायुमंडलीय अपवर्तन; ग्रह कम टिमटिमाते।
- 88 तारामंडल, 27 नक्षत्र, 12 राशियाँ; सप्तर्षि से ध्रुव तारा।
- आकाशगंगा प्रकार (हबल 1926): E, S0, S, SB, Irr।
- मंदाकिनी: SBbc, लगभग 1 लाख प्र.व. (NCERT 80,000-1,50,000), 100-400 अरब तारे; केंद्र Sgr A* (40 लाख सूर्य); सूर्य 26,000 प्र.व. पर, ओरायन भुजा, आकाशगंगीय वर्ष लगभग 23 करोड़ वर्ष।
- डार्क मैटर: समतल घूर्णन वक्र (वेरा रूबिन), गुच्छ (ज़्विकी), लेंसन।
- स्थानीय समूह: एंड्रोमेडा (25 लाख प्र.व., पास आ रही), M33, मैगेलानिक बादल; 2025 अध्ययन: विलय की संभावना लगभग 50%।
- बड़ा ढाँचा: गुच्छ (विर्गो) → महागुच्छ (लानियाकिया) → ब्रह्मांडीय जाल (तंतु, गुच्छ, रिक्त स्थान)।
- भारत: हानले (डार्क स्काई 2022), देवस्थल, GMRT, एस्ट्रोसैट, जंतर मंतर।
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कक्षा 6 (पुरानी) अध्याय 1: पृथ्वी: सौरमंडल में · कक्षा 8 विज्ञान (पुरानी): तारे एवं सौर परिवार · कक्षा 11 भूगोल अध्याय 2
1पिछली कक्षाओं और रोज़ के अनुभव की बुनियादबुनियाद
- दिन में सूर्य, रात में चंद्रमा और तारे दिखते हैं। चंद्रमा का अपना प्रकाश नहीं; वह सूर्य का प्रकाश परावर्तित करता है।
- पृथ्वी अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व घूमती है, इसलिए सूर्य, चंद्रमा और तारे पूर्व में उगते और पश्चिम में डूबते दिखते हैं।
- प्रकाश बहुत तेज़ चलता है: लगभग 3 लाख किमी प्रति सेकंड।
- दिशाएँ: उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम; सूर्योदय से पूर्व दिशा पहचानी जाती है।
2कक्षा 6 (पुरानी किताब), अध्याय 1: पृथ्वी: सौरमंडल में (तारों वाला भाग)
- खगोलीय पिंड (Celestial bodies): सूर्य, चंद्रमा और रात के आकाश में चमकने वाली सारी वस्तुएँ।
- तारे: कुछ खगोलीय पिंड बड़े और गर्म होते हैं; ये गैसों से बने हैं और इनके पास अपनी ऊष्मा तथा प्रकाश है, जिसे वे बहुत बड़ी मात्रा में उत्सर्जित करते हैं। इन्हें तारा कहते हैं। सूर्य भी एक तारा है।
- अनगिनत चमकते तारे सूर्य जैसे ही हैं, पर बहुत दूर होने के कारण छोटे दिखते हैं।
- तारामंडल (Constellations): तारों के विभिन्न समूह, जो पहचानी जाने वाली आकृतियाँ बनाते हैं। जैसे सप्तर्षि (Ursa Major / बिग बीयर), जिसमें सात तारे हैं; यह बड़े तारामंडल का भाग है।
- ध्रुव तारा (Pole Star): प्राचीन काल में लोग रात में दिशा ज्ञात करने के लिए तारों का उपयोग करते थे। उत्तरी तारा उत्तर दिशा बताता है; यह आकाश में सदा एक ही स्थान पर रहता है। सप्तर्षि के आगे के दो तारों की सीध से ध्रुव तारे की स्थिति पता चलती है।
- ग्रह (Planets): कुछ खगोलीय पिंडों में अपना प्रकाश और ऊष्मा नहीं होती; वे तारों के प्रकाश से प्रकाशित होते हैं। "ग्रह" शब्द यूनानी "प्लैनेटाई" से है, जिसका अर्थ है "परिभ्रमक" (घूमने वाले)।
- आकाशगंगा (Milky Way): साफ़ रात में आकाश के एक छोर से दूसरे तक फैली चौड़ी, सफ़ेद पट्टी, लाखों तारों का समूह। हमारा सौरमंडल इसी आकाशगंगा का भाग है। प्राचीन भारत में इसे आकाश में बहती प्रकाश की नदी माना गया, इसलिए "आकाशगंगा" नाम।
- ब्रह्मांड: लाखों ऐसी आकाशगंगाएँ मिलकर ब्रह्मांड बनाती हैं।
3कक्षा 8 विज्ञान (पुरानी किताब): तारे एवं सौर परिवार (तारों वाला भाग)
- तारे पूर्व से पश्चिम चलते दिखते हैं, क्योंकि पृथ्वी पश्चिम से पूर्व घूमती है। ध्रुव तारा लगभग स्थिर रहता है, क्योंकि वह पृथ्वी के अक्ष की सीध में है।
- प्रकाश वर्ष: प्रकाश द्वारा एक वर्ष में चली गई दूरी, लगभग 9.46 × 10¹² किमी। सूर्य से प्रकाश को पृथ्वी तक आने में लगभग 8 मिनट लगते हैं; अगला निकटतम तारा अल्फ़ा सेंटॉरी (उसका सदस्य प्रॉक्सिमा सेंटॉरी) लगभग 4.3 प्रकाश वर्ष दूर है।
- हम तारों का अतीत देखते हैं: जो प्रकाश आज आँख तक पहुँचा, वह वर्षों पहले तारे से चला था।
- मुख्य तारामंडल:
- सप्तर्षि (Ursa Major): गर्मियों में रात के पहले भाग में दिखता है; ध्रुव तारा खोजने में सहायक।
- ओरायन (मृग / कालपुरुष): सर्दियों में देर शाम; तीन तारों की "बेल्ट"; इसके पास व्याध (Sirius), आकाश का सबसे चमकीला तारा।
- कैसियोपिया (शर्मिष्ठा): सर्दियों में उत्तर आकाश में "W" या "M" आकृति।
- दिन के समय तारे इसलिए नहीं दिखते कि सूर्य का तेज़ प्रकाश उन्हें छिपा देता है।
- कृत्रिम उपग्रह और प्राकृतिक उपग्रह का अंतर; खगोलीय दूरियाँ बहुत बड़ी होने से "प्रकाश वर्ष" की इकाई ज़रूरी।
4कक्षा 11 भूगोल, अध्याय 2: तारों का निर्माण
NCERT (भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत, अध्याय 2 "पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास") के अनुसार:
- प्रारंभिक ब्रह्मांड में ऊर्जा और पदार्थ का वितरण समान नहीं था। घनत्व में अंतर से गुरुत्वाकर्षण बलों में भिन्नता आई, जिससे पदार्थ एकत्र हुआ। यही आकाशगंगाओं के विकास का आधार बना।
- एक आकाशगंगा असंख्य तारों का समूह है। आकाशगंगाओं का विस्तार इतना अधिक होता है कि उनकी दूरी हज़ारों प्रकाश वर्षों में मापी जाती है। एक अकेली आकाशगंगा का व्यास 80 हज़ार से 1 लाख 50 हज़ार प्रकाश वर्ष के बीच हो सकता है।
- एक आकाशगंगा के निर्माण की शुरुआत हाइड्रोजन गैस से बने विशाल बादल के संचयन से होती है, जिसे नीहारिका (Nebula) कहा जाता है।
- क्रमशः इस बढ़ती हुई नीहारिका में गैस के झुंड विकसित हुए। ये झुंड बढ़ते-बढ़ते घने गैसीय पिंड बने, जिनसे तारों का निर्माण आरंभ हुआ।
- ऐसा विश्वास किया जाता है कि तारों का निर्माण लगभग 5 से 6 अरब वर्षों पहले हुआ।
अतिरिक्त जानकारी: आज के माप बताते हैं कि पहले तारे बिग बैंग के केवल लगभग 10-20 करोड़ वर्ष बाद, यानी लगभग 1350 करोड़ वर्ष पहले, बन गए थे; तारे तब से लगातार बन रहे हैं। परीक्षा में NCERT का प्रश्न हो तो NCERT का मान लिखें।
5अभ्यास: वस्तुनिष्ठ प्रश्न (उत्तर सहित)परीक्षा के प्रश्न
सूर्य क्या है? (a) ग्रह (b) तारा (c) उपग्रह (d) आकाशगंगा
(b) तारा।
सप्तर्षि तारामंडल में कितने मुख्य तारे हैं? (a) 5 (b) 7 (c) 9 (d) 12
(b) 7।
उत्तर दिशा बताने वाला तारा: (a) व्याध (b) ध्रुव तारा (c) सूर्य (d) शुक्र
(b) ध्रुव तारा।
"ग्रह" शब्द का अर्थ: (a) चमकने वाला (b) परिभ्रमक (घूमने वाला) (c) गर्म (d) बड़ा
(b) परिभ्रमक।
1 प्रकाश वर्ष लगभग: (a) 9.46 × 10¹² किमी (b) 3 लाख किमी (c) 15 करोड़ किमी (d) 365 किमी
(a)।
आकाश का सबसे चमकीला तारा: (a) ध्रुव तारा (b) व्याध (c) आर्द्रा (d) रिगेल
(b) व्याध (Sirius)।
NCERT के अनुसार एक आकाशगंगा का व्यास: (a) 8-15 हज़ार प्र.व. (b) 80 हज़ार से 1.5 लाख प्र.व. (c) 8-15 करोड़ प्र.व. (d) 100 प्र.व.
(b)।
आकाशगंगा बनने की शुरुआत किस बादल से? (a) जल-वाष्प (b) नीहारिका (हाइड्रोजन गैस) (c) धूल के तूफ़ान (d) ओज़ोन
(b) नीहारिका।
NCERT के अनुसार तारों का निर्माण लगभग कब हुआ? (a) 5-6 अरब वर्ष पहले (b) 5-6 हज़ार वर्ष पहले (c) 50 करोड़ वर्ष पहले (d) 13 अरब वर्ष बाद
(a)।
सर्दियों में "तीन तारों की बेल्ट" वाला तारामंडल: (a) सप्तर्षि (b) ओरायन (c) कैसियोपिया (d) वृश्चिक
(b) ओरायन।
सही या ग़लत
- चंद्रमा तारा है। ग़लत (उपग्रह; अपना प्रकाश नहीं)
- हमारा सौरमंडल आकाशगंगा (मंदाकिनी) का भाग है। सही
- ध्रुव तारा रात में अपनी जगह बदलता रहता है। ग़लत (लगभग स्थिर)
- तारे दिन में आकाश से चले जाते हैं। ग़लत (सूर्य के प्रकाश में छिप जाते हैं)
6लघु, दीर्घ, HOTS और गतिविधिपरीक्षा के प्रश्न
तारे और ग्रह में तीन अंतर लिखिए। (3 अंक)
(1) तारे के पास अपना प्रकाश और ऊष्मा है; ग्रह तारे के प्रकाश से चमकते हैं। (2) तारे टिमटिमाते हैं; ग्रह प्रायः नहीं। (3) तारे एक-दूसरे के सापेक्ष स्थिर दिखते हैं; ग्रह तारों के बीच धीरे-धीरे स्थान बदलते हैं।
ध्रुव तारा कैसे खोजेंगे? (3 अंक)
उत्तर दिशा के आकाश में सप्तर्षि (सात तारों का समूह, जैसे बड़ा चम्मच/कलछी) पहचानें। उसके आगे के दो तारों (सूचक तारों) को मिलाने वाली रेखा को उत्तर की ओर लगभग पाँच गुना बढ़ाएँ; वहाँ अकेला मध्यम चमक वाला तारा ध्रुव तारा है। यह उत्तर दिशा बताता है।
आकाशगंगाओं और तारों का निर्माण कैसे हुआ (NCERT)? (5 अंक)
प्रारंभिक ब्रह्मांड में ऊर्जा और पदार्थ समान रूप से नहीं फैले थे। घनत्व के अंतर से गुरुत्व बलों में अंतर आया और पदार्थ इकट्ठा होने लगा; यही आकाशगंगाओं के विकास का आधार बना। आकाशगंगा का निर्माण हाइड्रोजन गैस के विशाल बादल, नीहारिका, के संचयन से शुरू हुआ। बढ़ती नीहारिका में गैस के झुंड बने, जो बढ़ते-बढ़ते घने गैसीय पिंड बने और उनसे तारों का निर्माण आरंभ हुआ। NCERT के अनुसार तारों का निर्माण लगभग 5-6 अरब वर्ष पहले हुआ। एक आकाशगंगा का व्यास 80,000 से 1,50,000 प्रकाश वर्ष तक हो सकता है; हमारा सौरमंडल मंदाकिनी नाम की आकाशगंगा का भाग है।
HOTS (उच्च स्तरीय सोच)
अगर पृथ्वी पर वायुमंडल न होता, तो क्या तारे टिमटिमाते? दिन में क्या दिखता?
तारे नहीं टिमटिमाते, क्योंकि टिमटिमाना वायुमंडल में अपवर्तन से होता है। आकाश दिन में भी काला दिखता (प्रकाश बिखेरने वाली हवा नहीं), और सूर्य के रहते भी तारे दिखते, जैसे चंद्रमा से दिखते हैं।
शहर में रहने वाले बच्चे आकाशगंगा की पट्टी क्यों नहीं देख पाते?
शहर की रोशनी (प्रकाश प्रदूषण) से आकाश चमकीला हो जाता है और मंद तारे छिप जाते हैं; धूल-धुआँ भी प्रकाश रोकते हैं। गाँव या पहाड़ के अँधेरे, साफ़ आकाश में पट्टी दिखती है।
गतिविधि
किसी साफ़ रात में घर की छत से उत्तर दिशा में सप्तर्षि और ध्रुव तारा खोजें। एक घंटे के अंतर पर दो बार सप्तर्षि की स्थिति का चित्र बनाएँ और देखें कि वह ध्रुव तारे के चारों ओर कैसे घूमता है।
7याद रखेंयाद रखें
- तारा: अपनी ऊष्मा और प्रकाश वाला गैसीय पिंड; सूर्य भी तारा है।
- तारामंडल: तारों के समूह (सप्तर्षि, ओरायन, कैसियोपिया); ध्रुव तारा उत्तर दिशा बताता है और लगभग स्थिर है।
- ग्रह = परिभ्रमक; अपना प्रकाश नहीं।
- प्रकाश वर्ष ≈ 9.46 × 10¹² किमी; निकटतम तारा (अल्फ़ा/प्रॉक्सिमा सेंटॉरी) लगभग 4.3 प्रकाश वर्ष।
- आकाशगंगा (मंदाकिनी): लाखों-अरबों तारों का समूह; सौरमंडल इसका भाग; व्यास 80,000-1,50,000 प्रकाश वर्ष (NCERT)।
- नीहारिका (हाइड्रोजन गैस का बादल) से आकाशगंगा और तारे बने; NCERT: तारे लगभग 5-6 अरब वर्ष पहले।
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