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पहले परमाणु: नाभिक से प्रकाश तक

बिग बैंग के 3 मिनट में पहले नाभिक, और लगभग 3-4 लाख वर्ष में पहले परमाणु कैसे बने? गर्म कण-सूप से हाइड्रोजन-हीलियम, इलेक्ट्रॉन का पकड़ा जाना, ब्रह्मांड का पारदर्शी होना और प्रकाश के "बारकोड", चार दृश्यों में, 3D में।

1.3GEOGRAPHY · फेज 13D मॉडलNCERT कक्षा 9 · 11
दृश्य 1 / 4नाभिक
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3 मिनट में नाभिक, लाखों वर्ष बाद परमाणु

बिग बैंग के पहले मिनटों में केवल परमाणुओं के नाभिक बने (हाइड्रोजन, हीलियम, थोड़ा लिथियम)। पूरे परमाणु तभी बने जब ब्रह्मांड इतना ठंडा हुआ कि नाभिक इलेक्ट्रॉन पकड़ सकें: NCERT के अनुसार लगभग 3 लाख वर्ष बाद, 4500 K पर (नए माप: लगभग 3.8 लाख वर्ष, लगभग 3000 K)।

परमाणु बनते ही ब्रह्मांड पारदर्शी हो गया। उस समय छूटा प्रकाश आज भी हर दिशा से 2.7 K के सूक्ष्मतरंग विकिरण (CMB) के रूप में आता है: यह ब्रह्मांड की सबसे पुरानी दिखने वाली तस्वीर है।

याद रखें

  • पहले 3 मिनट में पहले नाभिक; 3 लाख वर्ष, 4500 K पर परमाणवीय पदार्थ (NCERT)।
  • बिग बैंग से बने: 75% हाइड्रोजन, 25% हीलियम (भार से), थोड़ा लिथियम।
  • भारी तत्व (कार्बन, ऑक्सीजन, लोहा) बाद में तारों में बने।
  • परमाणु बने तो ब्रह्मांड पारदर्शी हुआ; वही प्रकाश आज CMB (2.7 K)।
  • मेघनाद साहा का आयनन समीकरण (1920) बताता है कि किस तापमान पर परमाणु आयनित रहते हैं।

नोट्सपढ़ने और पढ़ाने के लिए पूरी जानकारी

UPSC प्रीलिम्स और मेन्स (GS-1: ब्रह्मांड और पृथ्वी की उत्पत्ति; GS-3: विज्ञान) के स्तर पर · NCERT कक्षा 11 अध्याय 2 से आगे

1परिचय: पहले परमाणु की कहानी

पहले सेकंड से पहले तारों तक: नाभिक, परमाणु, CMB और अंधकार युग

बिग बैंग (पेज 1.1) के तुरंत बाद ब्रह्मांड में परमाणु नहीं थे; केवल बहुत गर्म ऊर्जा और मूल कणों का "सूप" था। बिग बैंग के लगभग 10⁻¹² सेकंड बाद कणों को हिग्स क्षेत्र से द्रव्यमान मिला (पेज 1.2)। उसके बाद परमाणु दो बड़े चरणों में बने:

  1. पहले नाभिक (पहले 3 से 20 मिनट): प्रोटॉन और न्यूट्रॉन जुड़कर हाइड्रोजन, हीलियम और थोड़े लिथियम के नाभिक बने। इसे बिग बैंग नाभिकीय संश्लेषण (Big Bang Nucleosynthesis, BBN) कहते हैं।
  2. पहले पूरे परमाणु (लगभग 3.8 लाख वर्ष): ब्रह्मांड इतना ठंडा हुआ कि नाभिकों ने इलेक्ट्रॉन पकड़ लिए। इसे पुनर्संयोजन (Recombination) कहते हैं। इसी समय प्रकाश पहली बार आज़ाद होकर सीधा चलने लगा; वही प्रकाश आज CMB के रूप में हर दिशा से आता है।

NCERT और आज के माप

बातNCERT कक्षा 11, अध्याय 2आज के वैज्ञानिक माप
पहले नाभिकबिग बैंग के पहले 3 मिनट मेंलगभग 3 से 20 मिनट के बीच
पहले परमाणुलगभग 3 लाख वर्ष बादलगभग 3.8 लाख वर्ष बाद
उस समय तापमान4500 Kलगभग 3000 K (पुनर्संयोजन लगभग 4000 K से शुरू होकर 3000 K के आसपास पूरा)

परीक्षा में NCERT का प्रश्न हो तो NCERT के मान (3 लाख वर्ष, 4500 K) लिखें; UPSC या विस्तृत उत्तर में आज के मान भी जोड़ें।

भूगोल के लिए यह क्यों ज़रूरी

  • पृथ्वी, समुद्र, वायुमंडल और हमारे शरीर का हाइड्रोजन इन्हीं पहले मिनटों में बना था। पानी (H₂O) का हर हाइड्रोजन परमाणु लगभग 1380 करोड़ वर्ष पुराना है।
  • पृथ्वी की उत्पत्ति (NCERT कक्षा 11, अध्याय 2) का पहला भाग यही है; UPSC में यह GS-1 (भौतिक भूगोल) और GS-3 (विज्ञान) दोनों से जुड़ता है।

2परमाणु क्या है: मूल बातें

परमाणु के मॉडल: थॉमसन, रदरफ़ोर्ड, बोर और क्वांटम "बादल"

परमाणु किसी तत्व का सबसे छोटा कण है, जो उस तत्व के रासायनिक गुण रखता है। इसके दो भाग हैं:

  • नाभिक (Nucleus): केंद्र में; प्रोटॉन (धनावेश) और न्यूट्रॉन (आवेश-रहित); परमाणु का लगभग सारा (99.9% से अधिक) द्रव्यमान यहीं।
  • इलेक्ट्रॉन (Electron): नाभिक के चारों ओर, ऋणावेश; उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या = प्रोटॉनों की संख्या।
शब्दचिह्नअर्थउदाहरण (हीलियम-4)
परमाणु संख्याZप्रोटॉनों की संख्या; यही तत्व तय करती है2
द्रव्यमान संख्याAप्रोटॉन + न्यूट्रॉन4
न्यूट्रॉन संख्याNA − Z2

आकार और खालीपन

  • परमाणु का व्यास लगभग 10⁻¹⁰ मीटर (0.1 नैनोमीटर), नाभिक का लगभग 10⁻¹⁴ से 10⁻¹⁵ मीटर।
  • अगर परमाणु एक क्रिकेट स्टेडियम जितना हो, तो नाभिक बीच में रखा एक मटर का दाना; बाकी लगभग सब खाली जगह।
  • हाइड्रोजन सबसे सरल परमाणु है: 1 प्रोटॉन और 1 इलेक्ट्रॉन; इसके नाभिक में न्यूट्रॉन नहीं होता (सामान्य हाइड्रोजन में)।

इलेक्ट्रॉन कहाँ रहते हैं

  • बोर मॉडल (1913): इलेक्ट्रॉन केवल निश्चित ऊर्जा स्तरों (कोशों) K, L, M... में घूमते हैं; एक कोश से दूसरे में "छलाँग" लगाते समय निश्चित ऊर्जा का प्रकाश लेते या छोड़ते हैं।
  • क्वांटम मॉडल (1926, श्रोडिंगर आदि): इलेक्ट्रॉन की ठीक जगह नहीं बताई जा सकती; केवल यह कि कहाँ मिलने की संभावना कितनी है। इसे "इलेक्ट्रॉन बादल" या कक्षक (Orbital) कहते हैं।
  • 3D मॉडल के "बनावट" दृश्य में "इलेक्ट्रॉन बादल" बटन से दोनों रूप देखिए।

3परमाणु के विचार का इतिहास

समयकौनविचार या खोज
प्राचीन काल (तिथि पर मतभेद)महर्षि कणाद (भारत, वैशेषिक दर्शन)पदार्थ के अविभाज्य सूक्ष्म कण "परमाणु"
लगभग 400 ई.पू.डेमोक्रिटस (यूनान)"एटमॉस" (जिसे काटा न जा सके)
1808जॉन डाल्टनपरमाणु सिद्धांत: हर तत्व के परमाणु एक-से, यौगिक निश्चित अनुपात में
1859-60किरचॉफ़ और बुनसेनहर तत्व का अपना स्पेक्ट्रम: तत्व पहचानने का तरीका
1868जानसेन (भारत के गुंटूर से सूर्यग्रहण देखकर) और लॉकयरसूर्य के स्पेक्ट्रम में नई पीली रेखा: हीलियम (यूनानी "हीलियोस" = सूर्य); पृथ्वी पर 1895 में मिली
1897जे. जे. थॉमसनइलेक्ट्रॉन
1911रदरफ़ोर्डनाभिक
1913नील्स बोरऊर्जा स्तर; हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की व्याख्या
1920मेघनाद साहा (भारत)साहा आयनन समीकरण: किस तापमान पर कितने परमाणु आयनित; तारों के स्पेक्ट्रम की व्याख्या
1932जेम्स चैडविकन्यूट्रॉन
1948गैमो, एल्फ़र (और नाम के लिए बेथे)"αβγ पेपर": बिग बैंग में हल्के तत्व बनने का सिद्धांत
1948एल्फ़र और हरमनबिग बैंग से बचा विकिरण आज लगभग 5 K का होना चाहिए
1965पेंज़ियास और विल्सनवही विकिरण, CMB, मिला (1978 का नोबेल)

4पहला सेकंड: कणों का सूप और न्यूट्रॉन-प्रोटॉन अनुपात

न्यूट्रॉन:प्रोटॉन 1:1 से 1:6 और फिर 1:7; इसी से 25% हीलियम
  • पहले सेकंड से पहले तापमान 1000 करोड़ K (10¹⁰ K) से भी अधिक था। प्रोटॉन, न्यूट्रॉन, इलेक्ट्रॉन, पॉज़िट्रॉन, न्यूट्रिनो और फ़ोटॉन लगातार टकराते और एक-दूसरे में बदलते रहते थे (दुर्बल बल से: प्रोटॉन ↔ न्यूट्रॉन)।
  • बहुत गर्मी में न्यूट्रॉन और प्रोटॉन लगभग बराबर थे। न्यूट्रॉन थोड़ा भारी है, इसलिए जैसे-जैसे ब्रह्मांड ठंडा हुआ, प्रोटॉन बनना आसान और न्यूट्रॉन बनना कठिन हुआ।
  • लगभग 1 सेकंड पर ये बदलाव रुक गए ("न्यूट्रिनो अलग हो गए"); तब अनुपात लगभग 1 न्यूट्रॉन : 6 प्रोटॉन पर जम गया।
  • अकेला न्यूट्रॉन टिकता नहीं; उसका औसत जीवन लगभग 15 मिनट (लगभग 880 सेकंड) है। नाभिक बनने तक (लगभग 3 मिनट) कुछ न्यूट्रॉन टूटकर प्रोटॉन बन गए और अनुपात लगभग 1 : 7 रह गया।

25% हीलियम का सीधा हिसाब

  1. 16 कण लें: 2 न्यूट्रॉन और 14 प्रोटॉन (1 : 7)।
  2. लगभग सारे न्यूट्रॉन हीलियम-4 में चले गए: 2 न्यूट्रॉन + 2 प्रोटॉन = 1 हीलियम-4 नाभिक (भार 4)।
  3. बचे 12 प्रोटॉन अकेले रहे = 12 हाइड्रोजन नाभिक।
  4. हीलियम का भार-हिस्सा = 4 ÷ 16 = 25%; हाइड्रोजन = 75%।

यह सरल हिसाब तारों और गैस-बादलों में नापी गई मात्रा से मेल खाता है; यह बिग बैंग का बहुत मज़बूत प्रमाण है।

5बिग बैंग नाभिकीय संश्लेषण: पहले 3 से 20 मिनट

नाभिक बनने की अभिक्रियाएँ: p, n से D, T, ³He, ⁴He और थोड़ा ⁷Li

पहला कदम: ड्यूटेरियम

प्रोटॉन + न्यूट्रॉन → ड्यूटेरियम (भारी हाइड्रोजन का नाभिक, D) + फ़ोटॉन (γ)। यही हर भारी नाभिक का पहला पत्थर है।

"ड्यूटेरियम की अड़चन" (Deuterium Bottleneck)

  • ड्यूटेरियम का बंधन कमज़ोर है (लगभग 2.2 MeV)। जब तक ब्रह्मांड लगभग 100 करोड़ K (10⁹ K) से गर्म था, ऊर्जावान फ़ोटॉन बनते ही ड्यूटेरियम को तोड़ देते थे।
  • फ़ोटॉनों की संख्या प्रोटॉन-न्यूट्रॉन से लगभग 160 करोड़ गुना अधिक थी, इसलिए "थोड़े" ऊर्जावान फ़ोटॉन भी बहुत थे। इसी कारण ड्यूटेरियम लगभग 3 मिनट बाद ही टिक सका।
  • उसके बाद कुछ ही मिनटों में लगभग सारे बचे न्यूट्रॉन हीलियम-4 में चले गए।

मुख्य अभिक्रियाएँ (सरल रूप)

  1. p + n → D + γ
  2. D + p → ³He + γ; D + D → ³He + n या T (ट्रिटियम) + p
  3. ³He + D → ⁴He + p; T + D → ⁴He + n
  4. बहुत थोड़ा: ⁴He + T → ⁷Li; ⁴He + ³He → ⁷Be (जो बाद में ⁷Li बन जाता है)

भारी तत्व क्यों नहीं बने

  • द्रव्यमान संख्या 5 और 8 वाला कोई स्थिर नाभिक नहीं है; हीलियम-4 के बाद सीढ़ी का अगला पायदान ही नहीं था।
  • ब्रह्मांड तेज़ी से फैलकर ठंडा और विरल हो रहा था; लगभग 20 मिनट बाद टकराव इतने कम रह गए कि नाभिक बनना रुक गया।
  • कार्बन, ऑक्सीजन, लोहा आदि करोड़ों वर्ष बाद तारों के भीतर बने (पेज 1.6 "तारे का जीवन")।

सिद्धांत के जनक

जॉर्ज गैमो और उनके छात्र राल्फ़ एल्फ़र ने 1948 में यह सिद्धांत दिया। गैमो ने मज़ाक में हांस बेथे का नाम भी जोड़ दिया ताकि लेखक "एल्फ़र, बेथे, गैमो" यानी α, β, γ लगें ("αβγ पेपर")।

6प्रारंभिक मात्राएँ: बिग बैंग की "रसीद"

हाइड्रोजन की तुलना में हीलियम, ड्यूटेरियम, हीलियम-3 और लिथियम कितने
तत्व / समस्थानिकबिग बैंग से (लगभग)कैसे नापते हैं
हाइड्रोजन (H)भार से लगभग 75%तारों और गैस के स्पेक्ट्रम
हीलियम-4भार से लगभग 24-25%बहुत कम भारी तत्वों वाली आकाशगंगाओं के गैस-बादल
ड्यूटेरियम (D)हर 1 लाख हाइड्रोजन पर लगभग 2.5दूर के क्वासरों के प्रकाश में गैस-बादलों की अवशोषण रेखाएँ
हीलियम-3हर 1 लाख हाइड्रोजन पर लगभग 1हमारी मंदाकिनी के गैस-बादल
लिथियम-7हर 10 अरब हाइड्रोजन पर लगभग 5 (अनुमान)बहुत पुराने तारों के स्पेक्ट्रम

यह इतना महत्त्वपूर्ण क्यों

  • ड्यूटेरियम "बेरोमीटर" है: ब्रह्मांड में सामान्य पदार्थ (बेरियॉन) जितना अधिक होता, उतना ज़्यादा ड्यूटेरियम हीलियम में बदल जाता। आज की ड्यूटेरियम मात्रा बताती है कि सामान्य पदार्थ ब्रह्मांड का केवल लगभग 5% है। यही मान CMB से अलग तरीके से भी निकलता है; दो स्वतंत्र तरीकों का मेल बिग बैंग का बड़ा प्रमाण है।
  • ड्यूटेरियम तारों में बनता नहीं, केवल नष्ट होता है; इसलिए आज जितना भी ड्यूटेरियम है (समुद्र के पानी में भी), लगभग सारा बिग बैंग से है।
  • स्थिर अवस्था सिद्धांत (पेज 1.1) 25% हीलियम की व्याख्या नहीं कर सका।

खुला प्रश्न: "लिथियम समस्या"

सिद्धांत जितना लिथियम-7 बताता है, बहुत पुराने तारों में उसका केवल लगभग एक-तिहाई मिलता है। संभव कारण: तारों के भीतर लिथियम का नष्ट होना, नाभिकीय अभिक्रियाओं के मापों में त्रुटि, या कोई "नई भौतिकी"। प्रयोगशाला प्रयोग और नए गणना-पत्र (2025-26 तक) अभी इसे पूरी तरह हल नहीं कर पाए हैं।

7समस्थानिक, समभारिक और नाभिक की स्थिरता

प्रोटियम, ड्यूटेरियम, ट्रिटियम, हीलियम-3 और हीलियम-4
  • समस्थानिक (Isotopes): एक ही तत्व (Z वही) पर न्यूट्रॉन अलग, इसलिए A अलग। रासायनिक गुण लगभग वही, भौतिक गुण (द्रव्यमान, स्थिरता) अलग।
  • समभारिक (Isobars): A वही, Z अलग; जैसे कैल्शियम-40 और आर्गन-40।

हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक

नामबनावटखास बात
प्रोटियम (¹H)1 प्रोटॉनसामान्य हाइड्रोजन, लगभग 99.98%
ड्यूटेरियम (²H या D)1 प्रोटॉन + 1 न्यूट्रॉनस्थिर; भारी पानी (D₂O) नाभिकीय रिएक्टरों में मंदक; बिग बैंग से बना
ट्रिटियम (³H या T)1 प्रोटॉन + 2 न्यूट्रॉनरेडियोधर्मी, अर्ध-आयु लगभग 12.3 वर्ष; संलयन ईंधन (ITER)

हीलियम इतना स्थिर क्यों

हीलियम-4 का नाभिक (2 प्रोटॉन + 2 न्यूट्रॉन) बहुत कसकर बँधा है; यही अल्फ़ा कण है। इसी स्थिरता से बिग बैंग में न्यूट्रॉन लगभग पूरी तरह हीलियम-4 में "फँस" गए।

भूगोल से जोड़: पृथ्वी पर हीलियम कहाँ से

पृथ्वी के बनने के समय का हीलियम हल्का होने से अंतरिक्ष में उड़ गया। आज खदानों और प्राकृतिक गैस के कुओं से निकलने वाला हीलियम चट्टानों में यूरेनियम-थोरियम के रेडियोधर्मी अल्फ़ा क्षय से करोड़ों वर्षों में बना है। यह सीमित संसाधन है; MRI, अंतरिक्ष रॉकेट और अतिचालक चुंबकों (जैसे LHC) में इसकी ज़रूरत होती है।

8पुनर्संयोजन: पहले पूरे परमाणु और पारदर्शी ब्रह्मांड

पहले: मुक्त इलेक्ट्रॉनों से प्रकाश बार-बार बिखरता; बाद में: उदासीन परमाणु, प्रकाश सीधा

3.8 लाख वर्ष तक: चमकता कोहरा

  • नाभिक बन चुके थे, पर तापमान हज़ारों डिग्री था। कोई नाभिक इलेक्ट्रॉन पकड़ता, तो कोई ऊर्जावान फ़ोटॉन उसे तुरंत छुड़ा देता। इस आवेशित गैस को प्लाज़्मा कहते हैं (जैसे सूर्य की बाहरी परत)।
  • मुक्त इलेक्ट्रॉन फ़ोटॉनों को लगातार बिखेरते थे (थॉमसन प्रकीर्णन), इसलिए प्रकाश किसी भी दिशा में दूर तक नहीं जा पाता था। ब्रह्मांड अपारदर्शी था, जैसे घना कोहरा या बादल के भीतर।

फिर क्या हुआ

  • ब्रह्मांड फैलते हुए ठंडा होता गया। लगभग 3000 K पर (बिग बैंग के लगभग 3.8 लाख वर्ष बाद) फ़ोटॉनों में इतनी ऊर्जा नहीं रही कि वे हाइड्रोजन से इलेक्ट्रॉन छुड़ा सकें। नाभिकों ने इलेक्ट्रॉन पकड़ लिए और पहले उदासीन हाइड्रोजन और हीलियम परमाणु बने। (हीलियम ने हाइड्रोजन से पहले, अधिक तापमान पर इलेक्ट्रॉन पकड़े।)
  • मुक्त इलेक्ट्रॉन लगभग ख़त्म हुए, इसलिए प्रकाश अब बिना रुके सीधा चलने लगा: ब्रह्मांड पारदर्शी हो गया। इसे विकिरण का अलग होना (Decoupling) कहते हैं।
  • यह अंतिम बिखराव जहाँ से हुआ, उसे "अंतिम प्रकीर्णन की सतह" (Surface of Last Scattering) कहते हैं; हम CMB के रूप में वही "सतह" देखते हैं, जैसे बादल की सतह दिखती है पर उसके भीतर नहीं।

नाम में उलझन

"पुनर्संयोजन" (Re-combination) का अर्थ है "फिर से जुड़ना", जबकि इलेक्ट्रॉन और नाभिक पहली बार जुड़े थे। नाम ऐतिहासिक है, प्रयोगशाला की भाषा से आया।

3000 K ही क्यों, जबकि हाइड्रोजन को आयनित करने के लिए 13.6 eV (लगभग 1.6 लाख K के बराबर) चाहिए?

क्योंकि फ़ोटॉन प्रोटॉनों से लगभग 160 करोड़ गुना अधिक थे। औसत फ़ोटॉन कमज़ोर हो जाने के बाद भी, उनके बीच के थोड़े-से बहुत ऊर्जावान फ़ोटॉन इतने अधिक थे कि वे परमाणुओं को बार-बार तोड़ते रहे। तापमान 3000 K तक गिरने पर ही ऐसे फ़ोटॉन पर्याप्त कम हुए। किस तापमान पर कितने परमाणु आयनित रहते हैं, इसका सूत्र भारतीय वैज्ञानिक मेघनाद साहा (1920) का साहा समीकरण है।

3D मॉडल का "पहले परमाणु" दृश्य देखिए: पहले चमकता कोहरा और टेढ़े-मेढ़े रास्ते वाला प्रकाश; इलेक्ट्रॉन पकड़े जाते ही कोहरा छँटता है और प्रकाश सीधा निकल जाता है।

9CMB: परमाणुओं के जन्म की तस्वीर

ब्रह्मांड के फैलने के साथ विकिरण का ठंडा होना: 3000 K से आज 2.725 K
  • पुनर्संयोजन के समय छूटा प्रकाश लगभग 3000 K का, लाल-नारंगी चमक जैसा था। तब से ब्रह्मांड लगभग 1100 गुना फैल चुका है (लाल विचलन z ≈ 1100), इसलिए उस प्रकाश की तरंगें 1100 गुना लंबी होकर सूक्ष्मतरंगों (Microwaves) में बदल गईं और तापमान घटकर 2.725 K (लगभग −270 °C) रह गया।
  • सूत्र: विकिरण का तापमान = 2.725 × (1 + z) K। जैसे z = 1100 पर लगभग 3000 K।
  • खोज: 1965 में पेंज़ियास और विल्सन (बेल लैब्स, अमेरिका) को अपने एंटीना में हर दिशा से आने वाला हल्का "शोर" मिला; यही CMB था (1978 का नोबेल)।
  • बड़े मिशन: COBE (1989; 2006 नोबेल: माथर, स्मूट), WMAP (2001), प्लैंक (2009; यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी)। ज़मीन से ACT (चिली) और SPT (दक्षिणी ध्रुव)।
  • CMB के लगभग एक लाख में एक भाग के तापमान-अंतर बताते हैं कि उस समय पदार्थ कहाँ थोड़ा अधिक घना था; वही आगे चलकर आकाशगंगाओं के बीज बने (पेज 1.4)।
  • पुराने एनालॉग टीवी की "झिलमिल" (Static) का लगभग 1% हिस्सा CMB से आता था।

10अंधकार युग, पहले अणु और पहले तारे

पहला अणु HeH⁺, फिर H₂; गैस के ठंडा होने से पहले तारे

अंधकार युग (Dark Ages)

पुनर्संयोजन के बाद लगभग 10 से 20 करोड़ वर्ष तक ब्रह्मांड में कोई तारा नहीं था; केवल ठंडी होती उदासीन हाइड्रोजन-हीलियम गैस और डार्क मैटर। CMB का प्रकाश धीरे-धीरे लाल होकर अदृश्य (अवरक्त) हो गया, इसलिए इसे "अंधकार युग" कहते हैं।

पहले अणु

  • ब्रह्मांड का पहला अणु हीलियम हाइड्राइड आयन HeH⁺ माना जाता है (हीलियम परमाणु + प्रोटॉन)। अंतरिक्ष में इसे पहली बार 2019 में नासा-जर्मनी की उड़ती वेधशाला SOFIA ने NGC 7027 नामक ग्रहीय नीहारिका में पकड़ा।
  • फिर हाइड्रोजन अणु (H₂) बने। H₂ गैस की ऊष्मा को विकिरण के रूप में बाहर फेंककर उसे ठंडा करता है; ठंडी गैस ही गुरुत्व से सिकुड़कर पहले तारे (लगभग 10-20 करोड़ वर्ष पर) बना सकी (पेज 1.4)।
  • पहले तारे (वैज्ञानिक इन्हें "पॉपुलेशन III" कहते हैं) केवल हाइड्रोजन-हीलियम से बने, बहुत भारी और बहुत चमकीले थे; अभी तक कोई सीधे नहीं दिखा।

पुनः आयनीकरण (Reionization)

पहले तारों और आकाशगंगाओं के तीव्र पराबैंगनी प्रकाश ने आस-पास की हाइड्रोजन को फिर से आयनित कर दिया। यह काम लगभग 100 करोड़ वर्ष तक पूरा हुआ। आज आकाशगंगाओं के बीच की ज़्यादातर गैस आयनित है। जेम्स वेब दूरबीन इसी युग की आकाशगंगाएँ देख रही है।

21 सेंटीमीटर रेखा: अंधकार युग को "सुनना"

उदासीन हाइड्रोजन 21 सेमी तरंगदैर्घ्य की रेडियो तरंग देता है। इससे अंधकार युग और पहले तारों का समय नापने की कोशिश हो रही है। भारत के रमन अनुसंधान संस्थान (RRI), बेंगलुरु के SARAS 3 प्रयोग ने 2022 में बताया कि अमेरिकी EDGES प्रयोग का दावा किया गया संकेत उन्हें नहीं मिला। भारत का GMRT (पुणे के पास) भी इस खोज में लगा है, और भारत SKA रेडियो दूरबीन परियोजना का सदस्य है।

11प्रकाश और परमाणु: स्पेक्ट्रम

हाइड्रोजन के ऊर्जा स्तर: लाइमन (पराबैंगनी), बामर (दृश्य), पाशन (अवरक्त) श्रेणियाँ

इलेक्ट्रॉन की छलाँग और प्रकाश का रंग

  • हाइड्रोजन में n-वें स्तर की ऊर्जा = −13.6 ÷ n² eV। ऊँचे स्तर से नीचे आने पर इलेक्ट्रॉन ऊर्जा के अंतर जितना एक फ़ोटॉन छोड़ता है; ऊर्जा जितनी अधिक, तरंगदैर्घ्य उतनी छोटी (नीला-बैंगनी)।
  • n = 2 पर उतरने वाली छलाँगें बामर श्रेणी हैं, जो दृश्य प्रकाश में हैं:
छलाँगनामतरंगदैर्घ्यरंग
3 → 2H-अल्फ़ा656.3 nmलाल
4 → 2H-बीटा486.1 nmनीला-हरा
5 → 2H-गामा434.0 nmनीला
6 → 2H-डेल्टा410.2 nmबैंगनी
  • n = 1 पर उतरना लाइमन श्रेणी (पराबैंगनी), n = 3 पर पाशन श्रेणी (अवरक्त)।
सतत, उत्सर्जन और अवशोषण स्पेक्ट्रम

स्पेक्ट्रम के तीन प्रकार (किरचॉफ़ के नियम)

  1. सतत: गर्म घना पदार्थ (बल्ब का तंतु, तारे का भीतरी भाग) सारे रंग देता है।
  2. उत्सर्जन: गर्म विरल गैस केवल अपनी कुछ चमकीली रेखाएँ देती है (जैसे सोडियम लैंप का पीला, नीयन का लाल)।
  3. अवशोषण: गर्म स्रोत के आगे ठंडी गैस हो, तो सतत स्पेक्ट्रम में उसी गैस की जगह पर काली रेखाएँ (सूर्य की फ्रॉनहोफ़र रेखाएँ)।

इससे क्या पता चलता है

  • हर तत्व की रेखाएँ उसकी "उँगलियों के निशान" हैं; इन्हीं से तारों की बनावट, तापमान, गति (डॉप्लर, लाल विचलन) और प्रारंभिक ब्रह्मांड में हाइड्रोजन-हीलियम-ड्यूटेरियम की मात्रा नापी गई।
  • हीलियम की खोज भारत से जुड़ी: 18 अगस्त 1868 के पूर्ण सूर्यग्रहण को फ़्रांसीसी खगोलविद जानसेन ने आंध्र प्रदेश के गुंटूर से देखा और सूर्य के स्पेक्ट्रम में एक नई पीली रेखा पाई; लॉकयर ने इसे नया तत्व बताया: हीलियम।

3D मॉडल का "स्पेक्ट्रम" दृश्य: इलेक्ट्रॉन n = 3, 4, 5, 6 से n = 2 पर कूदता है, रंगीन फ़ोटॉन निकलता है और स्पेक्ट्रम पट्टी पर उसकी रेखा जलती है।

12हम यह सब कैसे जानते हैं: प्रमाण

प्रमाणक्या दिखाता हैकिसने / कब
लगभग 25% हीलियम, हर जगहपहले मिनटों में नाभिकीय संश्लेषण1960 के दशक से; आज बहुत सटीक
ड्यूटेरियम और ³He की छोटी मात्रासामान्य पदार्थ लगभग 5%क्वासर अवशोषण रेखाएँ, 1990 के दशक से
CMB, 2.725 K, हर दिशा सेपारदर्शी होने के समय का प्रकाशपेंज़ियास-विल्सन 1965; COBE, WMAP, प्लैंक
CMB का पूर्ण "कृष्णिका" (Black body) वक्रकभी ब्रह्मांड गर्म और संतुलन में थाCOBE (1990)
CMB के छोटे अंतरपदार्थ का वितरण, आयु, बनावटWMAP, प्लैंक, ACT, SPT
पुराने तारों में बहुत कम भारी तत्वभारी तत्व बाद में तारों में बनेतारकीय स्पेक्ट्रम
दूर के बादलों में 2.7 K से अधिक CMB तापमानपहले ब्रह्मांड अधिक गर्म था (T ∝ 1 + z)अणुओं की रेखाओं से माप

दो अलग रास्ते (BBN से ड्यूटेरियम और CMB के अंतर) एक ही उत्तर देते हैं कि सामान्य पदार्थ लगभग 5% है। विज्ञान में ऐसा स्वतंत्र मेल ही किसी सिद्धांत को मज़बूत बनाता है।

13भूगोल से जोड़: पृथ्वी के तत्व कहाँ से आए

तत्वकहाँ बनापृथ्वी पर
हाइड्रोजनबिग बैंग (पहले मिनट)पानी, जीव, हाइड्रोकार्बन; स्वतंत्र गैस के रूप में बहुत कम
हीलियमबिग बैंग + तारेवायुमंडल में बहुत कम; चट्टानों के रेडियोधर्मी क्षय से
लिथियमथोड़ा बिग बैंग, बाकी ब्रह्मांडीय किरणें व तारेबैटरियों का धातु; भारत में जम्मू-कश्मीर (रियासी) में भंडार की खोज (2023)
कार्बन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजनतारों के भीतर संलयनजीवन और वायुमंडल
सिलिकॉन से लोहा तकभारी तारों मेंपृथ्वी की पर्पटी और क्रोड
सोना, यूरेनियम आदिसुपरनोवा, न्यूट्रॉन तारों की टक्करखनिज संसाधन
  • पृथ्वी का गुरुत्व हल्की गैसों (हाइड्रोजन, हीलियम) को पकड़कर नहीं रख पाया; इसलिए ब्रह्मांड में सबसे अधिक हाइड्रोजन होते हुए भी पृथ्वी की पर्पटी में ऑक्सीजन (लगभग 46%) और सिलिकॉन (लगभग 28%) सबसे अधिक हैं।
  • बृहस्पति और शनि जैसे विशाल ग्रह, जिनका गुरुत्व बहुत अधिक है, आज भी मुख्य रूप से हाइड्रोजन-हीलियम से बने हैं, लगभग प्रारंभिक ब्रह्मांड जैसी बनावट (पेज 1.9)।
  • "हम तारों की धूल हैं": हमारे शरीर का हाइड्रोजन बिग बैंग से, और कार्बन, ऑक्सीजन, कैल्शियम, लोहा तारों से आए हैं।

14भारत का योगदान

  • मेघनाद साहा (1893-1956): 1920 में साहा आयनन समीकरण दिया, जो बताता है कि किसी गैस में तापमान और दबाव के अनुसार कितने परमाणु आयनित होंगे। इससे तारों के स्पेक्ट्रम का वर्गीकरण (तापमान के अनुसार) समझ में आया; प्रारंभिक ब्रह्मांड के पुनर्संयोजन की गणना भी इसी सिद्धांत पर आधारित है। कोलकाता का साहा नाभिकीय भौतिकी संस्थान इनके नाम पर है; ये संसद सदस्य भी रहे और नदी घाटी योजनाओं (दामोदर घाटी) के पक्ष में भी लिखा।
  • गुंटूर, 1868: हीलियम की खोज वाला सूर्यग्रहण भारत से देखा गया।
  • सत्येंद्रनाथ बोस: प्रकाश के कणों (फ़ोटॉन) की गिनती का तरीका; CMB का "कृष्णिका" वक्र इन्हीं की सांख्यिकी से निकलता है (पेज 1.2)।
  • सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर: तारों की संरचना और "चंद्रशेखर सीमा" (1983 का नोबेल), पेज 1.6।
  • आज: RRI बेंगलुरु का SARAS प्रयोग, GMRT (पुणे के पास), IUCAA पुणे, SKA में भागीदारी; आदित्य-L1 (2023) के स्पेक्ट्रोग्राफ़ सूर्य की परतों में तत्वों और आयनों की रेखाएँ नापते हैं।

15महत्त्वपूर्ण शब्दावली (हिंदी-अंग्रेज़ी)

हिंदीअंग्रेज़ीअर्थ
नाभिकीय संश्लेषणNucleosynthesisहल्के नाभिकों से भारी नाभिक बनना
बिग बैंग नाभिकीय संश्लेषणBig Bang Nucleosynthesis (BBN)पहले 3-20 मिनट में H, He, Li के नाभिक बनना
ड्यूटेरियमDeuterium (D)भारी हाइड्रोजन: 1 प्रोटॉन + 1 न्यूट्रॉन
पुनर्संयोजनRecombinationनाभिकों का इलेक्ट्रॉन पकड़कर उदासीन परमाणु बनना
विकिरण का अलग होनाDecouplingप्रकाश का पदार्थ से आज़ाद होकर सीधा चलना
अंतिम प्रकीर्णन की सतहSurface of last scatteringजहाँ से CMB का प्रकाश आख़िरी बार बिखरा
प्लाज़्माPlasmaआयनित गैस: मुक्त इलेक्ट्रॉन और नाभिक
आयननIonisationपरमाणु से इलेक्ट्रॉन का निकलना
समस्थानिकIsotopeZ वही, A अलग
समभारिकIsobarA वही, Z अलग
स्पेक्ट्रमSpectrumप्रकाश का रंगों/तरंगदैर्घ्यों में बँटा रूप
उत्सर्जन / अवशोषण रेखाEmission / Absorption lineचमकीली / काली रेखा
अंधकार युगDark Agesपुनर्संयोजन से पहले तारों तक का समय
पुनः आयनीकरणReionisationपहले तारों के प्रकाश से गैस का फिर आयनित होना
कृष्णिका विकिरणBlack-body radiationकेवल तापमान से तय होने वाला विकिरण

16आम ग़लतफ़हमियाँ और सही बात

ग़लतफ़हमीसही बात
बिग बैंग में सारे तत्व बनेकेवल हाइड्रोजन, हीलियम और बहुत थोड़ा लिथियम (और उनके समस्थानिक); बाकी तारों में
पहले 3 मिनट में पूरे परमाणु बने3 मिनट में केवल नाभिक; पूरे परमाणु लगभग 3-4 लाख वर्ष बाद
पुनर्संयोजन में इलेक्ट्रॉन "फिर से" जुड़ेपहली बार जुड़े; नाम ऐतिहासिक है
CMB बिग बैंग के "धमाके" का प्रकाश हैयह बिग बैंग के लगभग 3.8 लाख वर्ष बाद, पारदर्शी होने के समय का प्रकाश है
ब्रह्मांड में ऑक्सीजन-सिलिकॉन सबसे अधिक हैंब्रह्मांड में हाइड्रोजन (लगभग 75%) और हीलियम (लगभग 25%); ऑक्सीजन-सिलिकॉन पृथ्वी की पर्पटी में अधिक
हीलियम केवल गुब्बारों की गैस हैयह सीमित संसाधन है; MRI, रॉकेट और अतिचालक चुंबकों के लिए ज़रूरी
परमाणु ठोस गेंद हैपरमाणु लगभग पूरा खाली है; नाभिक बहुत छोटा
इलेक्ट्रॉन ग्रहों जैसी साफ़ कक्षाओं में घूमते हैंयह बोर का सरल मॉडल है; असल में संभावना वाला "बादल"

17UPSC: प्रीलिम्स के तथ्यUPSC विशेष

  • BBN: पहले लगभग 3-20 मिनट; परिणाम: भार से लगभग 75% H, 25% He, थोड़ा D, ³He, ⁷Li।
  • न्यूट्रॉन:प्रोटॉन ≈ 1:7 (नाभिक बनते समय); मुक्त न्यूट्रॉन का औसत जीवन लगभग 15 मिनट।
  • ड्यूटेरियम की अड़चन: लगभग 10⁹ K तक; फ़ोटॉन प्रति बेरियॉन लगभग 160 करोड़।
  • पुनर्संयोजन: लगभग 3.8 लाख वर्ष, लगभग 3000 K (NCERT: 3 लाख वर्ष, 4500 K); CMB आज 2.725 K, z ≈ 1100।
  • गैमो-एल्फ़र (1948) "αβγ पेपर"; पेंज़ियास-विल्सन (1965, नोबेल 1978); COBE के लिए 2006 नोबेल।
  • हीलियम: 1868 सूर्यग्रहण (गुंटूर), जानसेन-लॉकयर; पृथ्वी पर 1895 (रैमज़े)।
  • मेघनाद साहा: आयनन समीकरण (1920)। SARAS: RRI बेंगलुरु। GMRT: पुणे के पास (नारायणगाँव)।
  • पहला अणु HeH⁺; अंतरिक्ष में 2019 (SOFIA, NGC 7027)।
  • बामर श्रेणी दृश्य; लाइमन पराबैंगनी; पाशन अवरक्त; Hα = 656.3 nm (लाल)।
  • भारी पानी = D₂O; ट्रिटियम रेडियोधर्मी (अर्ध-आयु लगभग 12.3 वर्ष)।

कथन वाले प्रश्न (अभ्यास)

बिग बैंग नाभिकीय संश्लेषण के संदर्भ में: (1) इसमें कार्बन और ऑक्सीजन बड़ी मात्रा में बने। (2) इसमें लगभग 25% (भार से) हीलियम बना। (3) ड्यूटेरियम की मात्रा से सामान्य पदार्थ का घनत्व नापा जाता है। सही कथन?

(2) और (3)। कार्बन-ऑक्सीजन तारों में बने; 5 और 8 भार वाले स्थिर नाभिक न होने से BBN लिथियम पर रुक गया।

CMB के बारे में: (1) यह पुनर्संयोजन के समय छूटा प्रकाश है। (2) इसका तापमान आज लगभग 2.7 K है। (3) यह मुख्यतः पराबैंगनी तरंगों में है। सही?

(1) और (2)। आज यह सूक्ष्मतरंगों (माइक्रोवेव) में है।

युग्म: (1) लाइमन श्रेणी: पराबैंगनी (2) बामर श्रेणी: दृश्य (3) पाशन श्रेणी: एक्स-किरण। सही सुमेलित?

(1) और (2)। पाशन अवरक्त में है।

18इस विषय से प्रश्न किस तरह आते हैंUPSC विशेष

  • क्रम और समय: पहले नाभिक, फिर परमाणु, फिर तारे; NCERT के मान (3 मिनट, 3 लाख वर्ष, 4500 K)।
  • कथन वाले प्रश्न: BBN में कौन-से तत्व बने, CMB क्या है, पुनर्संयोजन, समस्थानिक।
  • विज्ञान से जोड़: स्पेक्ट्रम और तारों की पहचान, भारी पानी, हीलियम की कमी, लिथियम संसाधन।
  • भारतीय वैज्ञानिक: मेघनाद साहा, बोस, चंद्रशेखर; गुंटूर 1868; SARAS, GMRT, SKA।
  • ताज़ा मिशन: JWST, SPHEREx, ACT/प्लैंक के परिणाम।
  • मेन्स GS-1: "ब्रह्मांड की उत्पत्ति के प्रमाण", "पृथ्वी के रासायनिक संघटन का ब्रह्मांडीय आधार"।

तैयारी का तरीका: 3D मॉडल के पहले दो दृश्य देखकर "नाभिक बनाम परमाणु" का अंतर पक्का करें; फिर प्रमाण वाली तालिका और NCERT बनाम आज के मानों की तालिका याद करें।

19UPSC मेन्स: पूरे आदर्श उत्तरUPSC विशेष

बिग बैंग नाभिकीय संश्लेषण क्या है? इसे बिग बैंग सिद्धांत का मज़बूत प्रमाण क्यों माना जाता है? (10 अंक, 150 शब्द)

भूमिका: बिग बैंग के लगभग 3 से 20 मिनट के बीच, जब तापमान लगभग 100 करोड़ K तक गिरा, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन जुड़कर हल्के नाभिक बने। इसे बिग बैंग नाभिकीय संश्लेषण (BBN) कहते हैं; सिद्धांत गैमो और एल्फ़र (1948) का है।

प्रक्रिया: 1 सेकंड पर न्यूट्रॉन:प्रोटॉन लगभग 1:6 पर जमा, न्यूट्रॉन क्षय से 1:7; "ड्यूटेरियम की अड़चन" टूटने पर लगभग सारे न्यूट्रॉन हीलियम-4 में; 5 और 8 भार के स्थिर नाभिक न होने तथा तेज़ फैलाव से प्रक्रिया लिथियम पर रुकी। प्रमाण क्यों: (1) सिद्धांत लगभग 25% हीलियम बताता है और वही हर जगह, बहुत पुरानी आकाशगंगाओं में भी, मिलता है; तारे इतना हीलियम नहीं बना सकते थे। (2) ड्यूटेरियम, जो तारों में केवल नष्ट होता है, सही मात्रा में मिलता है। (3) इन मात्राओं से निकला सामान्य पदार्थ का घनत्व (लगभग 5%) CMB से निकले मान से मेल खाता है। (4) स्थिर अवस्था सिद्धांत यह नहीं समझा सका। निष्कर्ष: "लिथियम समस्या" जैसे छोटे प्रश्नों के बावजूद BBN बिग बैंग के तीन सबसे बड़े प्रमाणों (फैलाव, CMB, हल्के तत्वों की मात्रा) में से एक है।

"पुनर्संयोजन" की घटना और ब्रह्मांडीय सूक्ष्मतरंग पृष्ठभूमि विकिरण (CMB) का संबंध स्पष्ट कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

भूमिका: बिग बैंग के बाद लगभग 3.8 लाख वर्ष तक ब्रह्मांड नाभिकों, मुक्त इलेक्ट्रॉनों और फ़ोटॉनों का गर्म प्लाज़्मा था। NCERT के अनुसार लगभग 3 लाख वर्ष पर, 4500 K तापमान में परमाणु बने; आज के माप लगभग 3.8 लाख वर्ष और लगभग 3000 K बताते हैं।

पुनर्संयोजन: फैलने से ठंडा होने पर फ़ोटॉनों में इतनी ऊर्जा नहीं रही कि इलेक्ट्रॉन छुड़ा सकें; नाभिकों ने इलेक्ट्रॉन पकड़कर उदासीन हाइड्रोजन-हीलियम परमाणु बनाए। फ़ोटॉनों की बहुत अधिक संख्या के कारण यह 13.6 eV के हिसाब से अपेक्षित तापमान से बहुत नीचे, लगभग 3000 K पर हुआ; यह गणना मेघनाद साहा के आयनन समीकरण पर आधारित है। CMB से संबंध: (1) मुक्त इलेक्ट्रॉन घटते ही प्रकाश का बिखरना रुका और ब्रह्मांड पारदर्शी हुआ; उस समय छूटा प्रकाश तब से बिना रुके चल रहा है। (2) ब्रह्मांड लगभग 1100 गुना फैला, इसलिए यह प्रकाश लंबी तरंगों (सूक्ष्मतरंग) में बदलकर 2.725 K का हो गया; तापमान = 2.725 × (1 + z)। (3) CMB असल में "अंतिम प्रकीर्णन की सतह" की तस्वीर है, ब्रह्मांड की सबसे पुरानी दिखाई देने वाली तस्वीर। (4) इसके एक लाख में एक भाग के अंतर उस समय के घनत्व-अंतर दिखाते हैं, जो आगे आकाशगंगाओं के बीज बने। महत्त्व: CMB की खोज (पेंज़ियास-विल्सन, 1965) ने स्थिर अवस्था सिद्धांत को कमज़ोर किया; COBE, WMAP, प्लैंक और ACT (2025) के मापों से ब्रह्मांड की आयु (लगभग 1380 करोड़ वर्ष), बनावट (5% सामान्य पदार्थ, लगभग 27% डार्क मैटर, लगभग 68% डार्क एनर्जी) और ज्यामिति निकली। निष्कर्ष: पुनर्संयोजन वह क्षण है जब पहले परमाणु बने और ब्रह्मांड "दिखाई देने" लगा; CMB उसी क्षण का संदेश है जो आज भी हर दिशा से आता है।

आधुनिक खगोल भौतिकी में भारतीय वैज्ञानिकों के योगदान की चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

भूमिका: औपनिवेशिक काल की कठिन परिस्थितियों में भी भारतीय वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांड को समझने की बुनियादी खोजें कीं; आज भारत बड़ी अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाओं में भागीदार है।

मुख्य योगदान: (1) मेघनाद साहा (1920): आयनन समीकरण; तारों के स्पेक्ट्रम को तापमान से जोड़ा; खगोल भौतिकी की नींव में शामिल; प्रारंभिक ब्रह्मांड के पुनर्संयोजन की गणना भी इसी पर। (2) सत्येंद्रनाथ बोस (1924): फ़ोटॉनों की सांख्यिकी; कृष्णिका विकिरण (CMB) और "बोसॉन"। (3) सी. वी. रमन (1928): प्रकाश का प्रकीर्णन (रमन प्रभाव; नोबेल 1930), स्पेक्ट्रमिकी का नया औज़ार। (4) सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर: श्वेत वामन तारों की द्रव्यमान-सीमा (नोबेल 1983); नासा की "चंद्रा" एक्स-किरण दूरबीन इनके नाम पर। (5) जयंत नार्लीकर: हॉयल-नार्लीकर गुरुत्व सिद्धांत, IUCAA की स्थापना, विज्ञान लोकप्रियकरण। (6) गोविंद स्वरूप: ऊटी रेडियो दूरबीन और GMRT। आज की भागीदारी: GMRT, SARAS (RRI), LIGO-India, SKA, TMT, आदित्य-L1, एस्ट्रोसैट; CERN का सहयोगी सदस्य। चुनौतियाँ: अनुसंधान पर कम खर्च, बड़ी परियोजनाओं में देरी, प्रतिभा-पलायन। निष्कर्ष: साहा और बोस जैसी परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए दीर्घकालीन अनुसंधान निवेश और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग ज़रूरी है।

अभ्यास के लिए और प्रश्न (उत्तर का ढाँचा)

ब्रह्मांड में हाइड्रोजन सबसे अधिक है, फिर भी पृथ्वी की पर्पटी में ऑक्सीजन और सिलिकॉन सबसे अधिक क्यों हैं? (150 शब्द)

BBN से 75% H; भारी तत्व तारों से; सौर नीहारिका में भीतरी भाग गर्म, हल्की गैसें उड़ गईं; पृथ्वी का कम गुरुत्व; चट्टानी ग्रह बनाम गैसीय दानव; पर्पटी के आठ प्रमुख तत्व।

स्पेक्ट्रमिकी ने ब्रह्मांड को समझने में कैसे मदद की? (150 शब्द)

किरचॉफ़-बुनसेन; फ्रॉनहोफ़र रेखाएँ; हीलियम की खोज (गुंटूर 1868); साहा समीकरण; लाल विचलन और हबल; प्रारंभिक तत्वों की मात्रा; आज JWST, SPHEREx।

20ताज़ा घटनाक्रम (अक्टूबर 2026 तक)UPSC विशेष

विषयक्या हुआकिस बात से जुड़ा
ACT DR6 (मार्च 2025)चिली की अटाकामा कॉस्मोलॉजी टेलिस्कोप के अंतिम CMB परिणाम; मानक ब्रह्मांड मॉडल की पुष्टि; पुनर्संयोजन में बदलाव या नए कणों का कोई ठोस प्रमाण नहींCMB, पुनर्संयोजन
SPHEREx (नासा)मार्च 2025 में प्रक्षेपित; 102 अवरक्त तरंगदैर्घ्यों में पूरे आकाश का नक्शा; पहला पूरा नक्शा दिसंबर 2025 तक; स्फीति (Inflation) और ब्रह्मांड में अणुओं के वितरण का अध्ययनस्पेक्ट्रमिकी, प्रारंभिक ब्रह्मांड
DESI (मार्च 2025)डार्क एनर्जी के समय के साथ बदलने के संकेत (पेज 1.1)ब्रह्मांड का विस्तार
जेम्स वेब दूरबीनz ≈ 14 तक की आकाशगंगाएँ: बिग बैंग के लगभग 28-30 करोड़ वर्ष बाद; पुनः आयनीकरण युग का अध्ययनअंधकार युग का अंत
लिथियम समस्या2025-26 के नए अध्ययन (जैसे बेरिलियम-7 की अभिक्रिया दरों की पुनर्गणना) भी अंतर को पूरी तरह नहीं मिटा सकेBBN
भारत में लिथियम2023 में जम्मू-कश्मीर के रियासी में लिथियम भंडार की खोज की घोषणा; महत्त्वपूर्ण खनिज मिशनसंसाधन भूगोल

यह भाग समय के साथ बदलता है; परीक्षा से पहले ताज़ा स्थिति अवश्य देखें।

21अभ्यास: 50 बहुविकल्पीय प्रश्न (व्याख्या सहित)परीक्षा के प्रश्न

बिग बैंग नाभिकीय संश्लेषण (BBN) मुख्य रूप से कब हुआ? (a) पहले 10⁻¹² सेकंड (b) लगभग 3 से 20 मिनट (c) 3.8 लाख वर्ष (d) 10 करोड़ वर्ष

(b)। 10⁻¹² सेकंड पर कणों को द्रव्यमान मिला, 3.8 लाख वर्ष पर परमाणु बने, 10-20 करोड़ वर्ष पर तारे।

NCERT के अनुसार पहले परमाणु कब बने? (a) 3 मिनट (b) 3 लाख वर्ष (c) 30 करोड़ वर्ष (d) 460 करोड़ वर्ष

(b) लगभग 3 लाख वर्ष, 4500 K पर। 3 मिनट पर केवल नाभिक बने।

BBN में कौन-सा तत्व बड़ी मात्रा में नहीं बना? (a) हाइड्रोजन (b) हीलियम (c) कार्बन (d) ड्यूटेरियम

(c) कार्बन तारों में बना।

BBN के बाद भार से हीलियम का हिस्सा लगभग: (a) 1% (b) 10% (c) 25% (d) 75%

(c) 25%; हाइड्रोजन लगभग 75%।

नाभिक बनते समय न्यूट्रॉन:प्रोटॉन अनुपात लगभग: (a) 1:1 (b) 1:7 (c) 7:1 (d) 1:100

(b) 1:7। बहुत गर्मी में 1:1 था, 1 सेकंड पर लगभग 1:6।

मुक्त न्यूट्रॉन का औसत जीवन लगभग: (a) 1 सेकंड (b) 15 मिनट (c) 12.3 वर्ष (d) अनंत

(b) लगभग 15 मिनट (880 सेकंड); 12.3 वर्ष ट्रिटियम की अर्ध-आयु है।

"ड्यूटेरियम की अड़चन" का कारण: (a) न्यूट्रॉन की कमी (b) ऊर्जावान फ़ोटॉन ड्यूटेरियम को तोड़ देते थे (c) गुरुत्व (d) डार्क एनर्जी

(b)। लगभग 10⁹ K से ठंडा होने पर ही ड्यूटेरियम टिका।

BBN लिथियम से आगे क्यों नहीं बढ़ा? (a) 5 और 8 भार वाले स्थिर नाभिक नहीं; फैलाव से तेज़ ठंडक (b) हिग्स क्षेत्र बंद हुआ (c) प्रोटॉन ख़त्म हो गए (d) प्रकाश बहुत धीमा था

(a)।

"αβγ पेपर" (1948) किस विषय पर था? (a) CMB की खोज (b) बिग बैंग में हल्के तत्व बनना (c) हिग्स बोसॉन (d) प्लेट विवर्तनिकी

(b) एल्फ़र, बेथे, गैमो।

ड्यूटेरियम के नाभिक में: (a) 1 प्रोटॉन (b) 1 प्रोटॉन + 1 न्यूट्रॉन (c) 1 प्रोटॉन + 2 न्यूट्रॉन (d) 2 प्रोटॉन

(b)। (c) ट्रिटियम है।

भारी पानी का सूत्र: (a) H₂O₂ (b) D₂O (c) T₂O (d) HDO₂

(b) D₂O; नाभिकीय रिएक्टरों में मंदक।

ड्यूटेरियम की मात्रा से क्या नापा जाता है? (a) सामान्य पदार्थ (बेरियॉन) का घनत्व (b) डार्क एनर्जी (c) पृथ्वी की आयु (d) सूर्य का तापमान

(a), लगभग 5%।

"लिथियम समस्या" क्या है? (a) पृथ्वी पर लिथियम ख़त्म हो रहा (b) पुराने तारों में अनुमान से लगभग तीन गुना कम लिथियम (c) लिथियम का बिग बैंग में न बनना (d) बैटरियों का फटना

(b) BBN का एक खुला प्रश्न।

नवीन मापों के अनुसार पुनर्संयोजन का तापमान लगभग: (a) 300 K (b) 3000 K (c) 30,000 K (d) 3 करोड़ K

(b) लगभग 3000 K (NCERT: 4500 K)।

पुनर्संयोजन में क्या हुआ? (a) नाभिक बने (b) नाभिकों ने इलेक्ट्रॉन पकड़कर उदासीन परमाणु बनाए (c) तारे बने (d) कणों को द्रव्यमान मिला

(b)।

पुनर्संयोजन से पहले ब्रह्मांड अपारदर्शी क्यों था? (a) धूल के कारण (b) मुक्त इलेक्ट्रॉन प्रकाश को बिखेरते थे (c) प्रकाश था ही नहीं (d) डार्क मैटर के कारण

(b) थॉमसन प्रकीर्णन; जैसे घने कोहरे में।

CMB किस घटना का प्रकाश है? (a) बिग बैंग का धमाका (b) ब्रह्मांड के पारदर्शी होने के समय का प्रकाश (c) पहले तारों का प्रकाश (d) सुपरनोवा

(b) अंतिम प्रकीर्णन की सतह।

CMB का आज का तापमान: (a) 0 K (b) 2.725 K (c) 27 K (d) 273 K

(b) 2.725 K।

पुनर्संयोजन से आज तक ब्रह्मांड लगभग कितना गुना फैला? (a) 10 (b) 110 (c) 1100 (d) 11 लाख

(c) लगभग 1100 गुना (z ≈ 1100)।

z = 9 पर CMB का तापमान लगभग: (a) 2.7 K (b) 27 K (c) 270 K (d) 3000 K

(b) 2.725 × (1 + 9) ≈ 27 K।

CMB किस प्रकार की तरंगों में है? (a) पराबैंगनी (b) एक्स-किरण (c) सूक्ष्मतरंग (माइक्रोवेव) (d) गामा

(c) सूक्ष्मतरंग।

CMB की खोज किसने की? (a) हबल (b) पेंज़ियास और विल्सन (c) गैमो (d) साहा

(b) 1965 (नोबेल 1978)।

COBE के लिए 2006 का नोबेल: (a) माथर और स्मूट (b) हिग्स और एंगलर्ट (c) पर्लमटर और श्मिट (d) पेंज़ियास और विल्सन

(a)। (c) को 2011 में डार्क एनर्जी के लिए।

पुनर्संयोजन और पहले तारों के बीच के समय को कहते हैं: (a) स्फीति युग (b) अंधकार युग (c) हिम युग (d) स्वर्ण युग

(b) अंधकार युग।

ब्रह्मांड का पहला अणु माना जाता है: (a) H₂O (b) CO₂ (c) HeH⁺ (d) NH₃

(c) हीलियम हाइड्राइड आयन; अंतरिक्ष में 2019 में SOFIA ने पकड़ा।

प्रारंभिक गैस को ठंडा करके पहले तारे बनाने में मुख्य भूमिका: (a) H₂ अणु (b) धूल (c) लोहा (d) ओज़ोन

(a) हाइड्रोजन अणु।

पहले तारों के प्रकाश से गैस का फिर आयनित होना: (a) पुनर्संयोजन (b) पुनः आयनीकरण (c) संलयन (d) विखंडन

(b) पुनः आयनीकरण।

उदासीन हाइड्रोजन से आने वाली प्रसिद्ध रेडियो रेखा: (a) 21 सेमी (b) 21 मीटर (c) 656 nm (d) 2.7 मिमी

(a) 21 सेमी; 656 nm H-अल्फ़ा है।

SARAS प्रयोग किस संस्था का है? (a) ISRO (b) RRI बेंगलुरु (c) BARC (d) IMD

(b) रमन अनुसंधान संस्थान।

हाइड्रोजन में n-वें स्तर की ऊर्जा: (a) −13.6 × n eV (b) −13.6 ÷ n² eV (c) 13.6 × n² eV (d) −1 ÷ n eV

(b)।

बामर श्रेणी में इलेक्ट्रॉन किस स्तर पर उतरता है? (a) n = 1 (b) n = 2 (c) n = 3 (d) n = 4

(b) n = 2; दृश्य प्रकाश।

लाइमन श्रेणी किस क्षेत्र में है? (a) पराबैंगनी (b) दृश्य (c) अवरक्त (d) रेडियो

(a)।

H-अल्फ़ा रेखा का रंग और तरंगदैर्घ्य: (a) बैंगनी, 410 nm (b) लाल, 656.3 nm (c) हरा, 500 nm (d) नीला, 486 nm

(b)।

सूर्य के स्पेक्ट्रम की काली रेखाएँ कहलाती हैं: (a) बामर रेखाएँ (b) फ्रॉनहोफ़र रेखाएँ (c) हबल रेखाएँ (d) रमन रेखाएँ

(b) अवशोषण रेखाएँ।

गर्म विरल गैस कैसा स्पेक्ट्रम देती है? (a) सतत (b) उत्सर्जन रेखाएँ (c) अवशोषण रेखाएँ (d) कोई नहीं

(b)।

हीलियम की खोज वाला 1868 का सूर्यग्रहण कहाँ से देखा गया? (a) गुंटूर (b) ग्रीनविच (c) काहिरा (d) शंघाई

(a) गुंटूर (आंध्र प्रदेश), जानसेन द्वारा।

आयनन समीकरण किसने दिया? (a) सी. वी. रमन (b) मेघनाद साहा (c) होमी भाभा (d) विक्रम साराभाई

(b) 1920।

पृथ्वी पर मिलने वाला ज़्यादातर हीलियम कैसे बना? (a) बिग बैंग से सीधे (b) चट्टानों में यूरेनियम-थोरियम के अल्फ़ा क्षय से (c) ज्वालामुखी के रसायन से (d) समुद्री जीवों से

(b)। आदिम हीलियम हल्का होने से अंतरिक्ष में उड़ गया।

पृथ्वी की पर्पटी में सबसे अधिक तत्व: (a) हाइड्रोजन (b) ऑक्सीजन (c) लोहा (d) हीलियम

(b) ऑक्सीजन (लगभग 46%), फिर सिलिकॉन।

समस्थानिकों में क्या समान होता है? (a) द्रव्यमान संख्या (b) परमाणु संख्या (c) न्यूट्रॉन संख्या (d) कुछ नहीं

(b) परमाणु संख्या (प्रोटॉन)।

कैल्शियम-40 और आर्गन-40 हैं: (a) समस्थानिक (b) समभारिक (c) समावयवी (d) अपरूप

(b) समभारिक: A समान।

ट्रिटियम के बारे में सही: (a) स्थिर है (b) रेडियोधर्मी, अर्ध-आयु लगभग 12.3 वर्ष (c) हीलियम का समस्थानिक (d) बिग बैंग में सबसे अधिक बना

(b)।

अल्फ़ा कण किसका नाभिक है? (a) हाइड्रोजन (b) हीलियम-4 (c) लिथियम (d) कार्बन

(b) 2 प्रोटॉन + 2 न्यूट्रॉन।

क्वांटम मॉडल में इलेक्ट्रॉन को कैसे दिखाते हैं? (a) निश्चित वृत्ताकार कक्षा (b) संभावना का "बादल" (कक्षक) (c) नाभिक के भीतर (d) स्थिर बिंदु

(b)।

परमाणु का लगभग सारा द्रव्यमान कहाँ है? (a) इलेक्ट्रॉनों में (b) नाभिक में (c) खाली जगह में (d) बराबर बँटा

(b) नाभिक में (99.9% से अधिक)।

CMB का "कृष्णिका" वक्र किसकी सांख्यिकी से जुड़ा है? (a) बोस (फ़ोटॉनों की सांख्यिकी) (b) डार्विन (c) केप्लर (d) मेंडल

(a) सत्येंद्रनाथ बोस।

ACT DR6 (2025) परिणाम किससे संबंधित हैं? (a) गुरुत्वीय तरंगें (b) CMB (c) सूर्य के धब्बे (d) ज्वालामुखी

(b) CMB; मानक मॉडल की पुष्टि।

SPHEREx मिशन किस एजेंसी का है और कब प्रक्षेपित हुआ? (a) ISRO, 2023 (b) नासा, मार्च 2025 (c) ESA, 2009 (d) JAXA, 2020

(b) नासा, मार्च 2025; पूरे आकाश का अवरक्त स्पेक्ट्रमी नक्शा।

फ़ोटॉनों और बेरियॉनों (प्रोटॉन-न्यूट्रॉन) का अनुपात लगभग: (a) 1 : 1 (b) 1000 : 1 (c) 160 करोड़ : 1 (d) 1 : 160 करोड़

(c); इसीलिए ड्यूटेरियम देर से टिका और पुनर्संयोजन 3000 K पर हुआ।

बृहस्पति और शनि की बनावट प्रारंभिक ब्रह्मांड जैसी क्यों है? (a) वे सबसे पुराने हैं (b) उनका भारी गुरुत्व हाइड्रोजन-हीलियम को पकड़े रखता है (c) वे सूर्य से बने (d) वे ठंडे हैं इसलिए

(b)।

22एक नज़र मेंयाद रखें

  • क्रम: 10⁻¹² सेकंड: द्रव्यमान (पेज 1.2) → 1 सेकंड: n:p ≈ 1:6 → 3-20 मिनट: पहले नाभिक (BBN) → लगभग 3.8 लाख वर्ष, लगभग 3000 K: पहले परमाणु (NCERT: 3 लाख वर्ष, 4500 K) → अंधकार युग → 10-20 करोड़ वर्ष: पहले तारे → पुनः आयनीकरण।
  • BBN का परिणाम: 75% H, 25% He (भार से), थोड़ा D, ³He, ⁷Li; भारी तत्व तारों में।
  • 25% का हिसाब: n:p = 1:7 → 16 में से 4 भाग हीलियम।
  • ड्यूटेरियम की अड़चन (लगभग 10⁹ K तक); फ़ोटॉन प्रति बेरियॉन लगभग 160 करोड़।
  • पुनर्संयोजन → प्रकाश मुक्त → CMB, आज 2.725 K, z ≈ 1100; खोज पेंज़ियास-विल्सन 1965।
  • पहला अणु HeH⁺ (अंतरिक्ष में 2019); फिर H₂ ने गैस ठंडी की।
  • हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम: लाइमन (UV), बामर (दृश्य, Hα 656.3 nm लाल), पाशन (IR); ऊर्जा −13.6/n² eV।
  • भारत: मेघनाद साहा (आयनन समीकरण, 1920), गुंटूर 1868 (हीलियम), बोस, SARAS, GMRT।
  • पृथ्वी पर्पटी: ऑक्सीजन, सिलिकॉन अधिक; ब्रह्मांड: हाइड्रोजन, हीलियम अधिक।

© Pankaj Bediya · TGT Geography · geoland.in

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