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ग्लोब से नक्शा: अक्षांश और देशांतर

गोल पृथ्वी सपाट नक्शे पर कैसे आती है? 3D ग्लोब घुमाइए, उसे खोलकर नक्शा बनते देखिए, और किसी भी जगह पर टैप करके उसका अक्षांश, देशांतर, स्थानीय समय और ताप कटिबंध जानिए।

2.1GEOGRAPHY · फेज 23D मॉडलNCERT कक्षा 6 · 9 · 11

ग्लोब पर कहीं भी टैप कीजिए: उस जगह का अक्षांश-देशांतर दिखेगा।

नोट्सपढ़ने और पढ़ाने के लिए पूरी जानकारी

UPSC प्रीलिम्स और मेन्स (सामान्य अध्ययन-1) के स्तर पर · पृथ्वी का आकार, अक्षांश-देशांतर, समय, मानचित्र प्रक्षेप और भारत की स्थिति; विधिक माप विज्ञान (भारतीय मानक समय) नियम 2026 (PIB, अगस्त 2026); NavIC पर लोकसभा उत्तर (जुलाई 2026); डाक विभाग DIGIPIN (2025); अफ़्रीकी संघ, Correct The Map (अगस्त 2025)

1पृथ्वी का आकार: विचारों का इतिहास और प्रमाण

इतिहास

समयकौनविचार / काम
बहुत पुराने समयअनेक सभ्यताएँपृथ्वी चपटी तश्तरी जैसी है
लगभग 6वीं सदी ई.पू.पाइथागोरस (यूनान)पृथ्वी गोल है (गोला सबसे "पूर्ण" आकार है, इस विचार से)
लगभग 4थी सदी ई.पू.अरस्तू (यूनान)प्रमाण दिया: चंद्रग्रहण में पृथ्वी की छाया हमेशा गोल; उत्तर-दक्षिण जाने पर नए तारे दिखते हैं
लगभग 240 ई.पू.एराटोस्थनीज़ (मिस्र, अलेक्ज़ेंड्रिया)छाया के कोण से पृथ्वी की परिधि लगभग सही नापी
5वीं सदीआर्यभट (भारत)पृथ्वी गोल है और अपनी धुरी पर घूमती है
1519-1522मैगेलन का अभियानसमुद्र से पृथ्वी की पहली पूरी परिक्रमा
1735-1744फ्रांसीसी अभियाननापकर सिद्ध किया कि पृथ्वी ध्रुवों पर चपटी है
1972अपोलो-17अंतरिक्ष से पूरी पृथ्वी का प्रसिद्ध चित्र ("ब्लू मार्बल")

एराटोस्थनीज़ ने परिधि कैसे नापी (हल किया उदाहरण)

  • 21 जून की दोपहर स्येन (आज का असवान) में सूर्य ठीक सिर के ऊपर था; कुएँ के तल तक धूप पहुँचती थी (स्येन कर्क रेखा के पास है)।
  • उसी समय उत्तर में अलेक्ज़ेंड्रिया में एक खंभे की छाया का कोण 7.2° था।
  • 7.2° पूरे वृत्त (360°) का 1/50 भाग है। दोनों शहरों की दूरी लगभग 5,000 स्टेडिया थी।
  • इसलिए परिधि = 5,000 × 50 = 2,50,000 स्टेडिया, यानी आज के हिसाब से लगभग 40,000 किमी के आसपास, जो आश्चर्यजनक रूप से सही है।

पृथ्वी के गोल होने के प्रमाण

  1. दूर से आते जहाज़ का पहले मस्तूल, फिर पूरा जहाज़ दिखना।
  2. चंद्रग्रहण में पृथ्वी की गोल छाया।
  3. ऊँचाई पर चढ़ने से क्षितिज दूर तक दिखना।
  4. एक ही दिशा में लगातार चलकर वापस वहीं पहुँचना (परिक्रमा)।
  5. अलग-अलग देशांतरों पर सूर्योदय का अलग-अलग समय।
  6. उत्तर से दक्षिण जाने पर ध्रुव तारे की ऊँचाई का घटना।
  7. उपग्रहों और अंतरिक्ष यात्रियों के चित्र।

भारत के प्राचीन विद्वान

  • आर्यभट (476 ई. में जन्म, ग्रंथ "आर्यभटीय"): पृथ्वी गोल है और अपनी धुरी पर घूमती है; तारों का पूर्व से पश्चिम चलना पृथ्वी के घूमने का परिणाम है, जैसे चलती नाव से किनारे के पेड़ उलटी ओर जाते दिखते हैं।
  • ब्रह्मगुप्त (7वीं सदी) और भास्कराचार्य द्वितीय (12वीं सदी, "सिद्धांत शिरोमणि"): पृथ्वी की परिधि के अनुमान दिए; भास्कर ने गुरुत्व जैसे आकर्षण की बात कही: पृथ्वी चीज़ों को अपनी ओर खींचती है।
  • भारतीय ज्योतिष में उज्जैन को शून्य याम्योत्तर मानकर गणना होती थी (देशांतर वाले भाग में विस्तार)।
एराटोस्थनीज़ का प्रयोग: समानांतर किरणें, स्येन का कुआँ और अलेक्ज़ेंड्रिया के खंभे की छाया

2पृथ्वी का वास्तविक आकार और माप

गोलाभ: भूमध्य रेखा पर उभार, ध्रुवों पर चपटापन (अंतर बढ़ाकर दिखाया गया)

पृथ्वी गोलाकार है, पर पूरी तरह गेंद जैसी नहीं। यह ध्रुवों पर थोड़ी चपटी और भूमध्य रेखा पर थोड़ी उभरी हुई है।

  • लघ्वक्ष गोलाभ (Oblate Spheroid): ऐसा गोला जो ध्रुवों पर चपटा और भूमध्य रेखा पर उभरा हो। गणित और नक्शों में पृथ्वी को यही आकार माना जाता है।
  • भू-आभ (Geoid): "पृथ्वी जैसा आकार"। समुद्र तल को महाद्वीपों के नीचे तक बढ़ाकर जो असली, थोड़ा ऊबड़-खाबड़ आकार बनता है। पृथ्वी के अलग-अलग भागों में गुरुत्व थोड़ा अलग होने से यह आकार पूरा चिकना नहीं है।
मापमान
भूमध्यरेखीय त्रिज्यालगभग 6,378 किमी
ध्रुवीय त्रिज्यालगभग 6,357 किमी
अंतरलगभग 21 किमी
औसत त्रिज्यालगभग 6,371 किमी
भूमध्य रेखा पर परिधिलगभग 40,075 किमी
ध्रुवों से होकर परिधिलगभग 40,008 किमी
कुल सतही क्षेत्रफललगभग 51 करोड़ वर्ग किमी
जल / स्थललगभग 71% जल, 29% स्थल

चपटेपन का कारण: पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है। भूमध्य रेखा पर घूमने की चाल सबसे अधिक (लगभग 1,670 किमी/घंटा) है, इसलिए वहाँ बाहर की ओर खिंचाव (अपकेंद्री बल) सबसे अधिक होता है और पृथ्वी थोड़ी फूल गई।

रोचक तथ्य: पृथ्वी के केंद्र से सबसे दूर का बिंदु माउंट एवरेस्ट की चोटी नहीं, बल्कि भूमध्य रेखा के पास इक्वाडोर का चिम्बोराज़ो पर्वत है, क्योंकि वहाँ पृथ्वी फूली हुई है। समुद्र तल से सबसे ऊँचा फिर भी एवरेस्ट ही है।

जियोइड क्यों ज़रूरी है: ऊँचाई कैसे नापी जाती है

  • पहाड़ों की ऊँचाई माध्य समुद्र तल (MSL) से नापी जाती है, और माध्य समुद्र तल असल में जियोइड ही है।
  • GPS या NavIC पहले एक चिकने गणितीय गोलाभ (जैसे WGS-84) से ऊँचाई देते हैं। उसमें जियोइड का अंतर (भारत में कहीं लगभग −100 मीटर तक) जोड़-घटाकर समुद्र तल से असली ऊँचाई मिलती है।
  • माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई: नेपाल और चीन ने 2020 में मिलकर नया मान घोषित किया: 8,848.86 मीटर। भारतीय सर्वेक्षण विभाग का पुराना मान (1955) 8,848 मीटर था।
  • गुरुत्व भी बदलता है: भूमध्य रेखा पर लगभग 9.78 मी/से², ध्रुवों पर लगभग 9.83 मी/से²। ध्रुव केंद्र के ज़्यादा पास हैं और वहाँ घूर्णन का अपकेंद्री बल नहीं होता, इसलिए वहाँ वस्तु थोड़ी भारी होती है।

दो "सबसे ऊँचे" बिंदु

आधारबिंदुकारण
समुद्र तल से सबसे ऊँचामाउंट एवरेस्ट (8,848.86 मी)समुद्र तल से नापा
पृथ्वी के केंद्र से सबसे दूरचिम्बोराज़ो, इक्वाडोर (6,263 मी)भूमध्य रेखा के पास है, जहाँ पृथ्वी उभरी है

3पृथ्वी की गतियाँ (इस विषय के लिए ज़रूरी)

गतिक्यासमयपरिणाम
घूर्णन (Rotation)अपनी धुरी पर पश्चिम से पूर्व घूमनालगभग 24 घंटे (तारों के सापेक्ष 23 घंटे 56 मिनट 4 सेकंड)दिन-रात; अलग देशांतरों पर अलग समय
परिक्रमण (Revolution)सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्ताकार कक्षा में घूमनालगभग 365¼ दिनझुकाव के साथ मिलकर ऋतुएँ; हर चौथे वर्ष लीप वर्ष
  • पृथ्वी की धुरी अपनी कक्षा के तल पर बने लंब से 23½° झुकी है, यानी कक्षा के तल से 66½° का कोण बनाती है।
  • धुरी हमेशा एक ही दिशा (लगभग ध्रुव तारे की ओर) झुकी रहती है।
  • इसी झुकाव से कर्क-मकर रेखाएँ (23½°) और ध्रुव वृत्त (66½°) तय होते हैं।
  • प्रदीप्ति वृत्त (Circle of Illumination): पृथ्वी पर दिन और रात वाले भागों को बाँटने वाली रेखा।

ऋतुओं और दिन की लंबाई की पूरी बात फेज 3 के पेजों (3.3, 3.4, 3.6) में है।

घूर्णन की चाल अक्षांश के साथ बदलती है

स्थानघूर्णन की चाल (लगभग)
भूमध्य रेखा1,670 किमी/घंटा
30° अक्षांश1,446 किमी/घंटा
60° अक्षांश837 किमी/घंटा
ध्रुव0 (केवल अपनी जगह घूमना)

चाल = (उस अक्षांश की रेखा की लंबाई) ÷ 24 घंटे। हम यह चाल महसूस नहीं करते, क्योंकि वायुमंडल समेत सब कुछ साथ घूमता है। परिक्रमा की चाल इससे बहुत अधिक है: लगभग 29.8 किमी/सेकंड (लगभग 1,07,000 किमी/घंटा)।

नक्षत्र दिवस और सौर दिवस

  • नक्षत्र दिवस (Sidereal day): किसी दूर के तारे के सापेक्ष एक पूरा चक्कर: 23 घंटे 56 मिनट 4 सेकंड।
  • सौर दिवस (Solar day): सूर्य के एक दोपहर से अगले दोपहर तक: औसतन 24 घंटे।
  • अंतर लगभग 4 मिनट इसलिए, कि एक दिन में पृथ्वी अपनी कक्षा में लगभग 1° आगे बढ़ जाती है; सूर्य को फिर से सिर पर लाने के लिए उसे लगभग 1° और घूमना पड़ता है (1° = 4 मिनट)।
अक्ष का झुकाव: लंब से 23½° और कक्षा तल से 66½°

4ग्लोब: पृथ्वी का छोटा मॉडल

ग्लोब पृथ्वी का छोटा, सही अनुपात वाला गोलाकार मॉडल है।

  • ग्लोब में एक सुई तिरछी लगी होती है; यह पृथ्वी की धुरी (अक्ष) दिखाती है। सुई का झुकाव पृथ्वी के असली झुकाव जैसा होता है।
  • धुरी के ऊपरी सिरे को उत्तरी ध्रुव और निचले सिरे को दक्षिणी ध्रुव कहते हैं।
  • ग्लोब को उसकी धुरी पर घुमाकर दिन-रात और देशों के समय को समझा जा सकता है।
  • असली पृथ्वी में कोई सुई नहीं है; धुरी एक काल्पनिक रेखा है।
आधारग्लोबमानचित्र
आकारगोल, पृथ्वी जैसासपाट
सटीकताआकार, क्षेत्रफल, दूरी, दिशा सब सहीकुछ-न-कुछ विकृति ज़रूर
एक नज़र मेंआधी पृथ्वी ही दिखती हैपूरी पृथ्वी एक साथ
ले जानाभारी, जेब में नहींमोड़कर कहीं भी
विस्तारछोटे स्थान, गलियाँ नहीं दिखा सकताकिसी शहर या गाँव का भी बड़ा नक्शा बन सकता है
उपयोगपूरी पृथ्वी की समझ, समय, दिन-रातयात्रा, प्रशासन, विस्तृत अध्ययन

5बृहत् वृत्त और लघु वृत्त

भूमध्य रेखा, याम्योत्तरों का जोड़ा और तिरछा वृत्त बृहत् वृत्त हैं; बाकी अक्षांश रेखाएँ लघु वृत्त
  • बृहत् वृत्त (Great Circle): ग्लोब पर खींचा गया वह वृत्त, जिसका केंद्र पृथ्वी का केंद्र हो। यह ग्लोब को दो बराबर भागों में बाँटता है।

उदाहरण: भूमध्य रेखा; आमने-सामने के दो याम्योत्तर मिलकर (जैसे 0° और 180°); प्रदीप्ति वृत्त।

  • लघु वृत्त (Small Circle): जिसका केंद्र पृथ्वी का केंद्र न हो। उदाहरण: भूमध्य रेखा को छोड़कर सभी अक्षांश रेखाएँ।
  • बृहत् वृत्त मार्ग: ग्लोब पर दो जगहों के बीच की सबसे छोटी दूरी उन दोनों से गुज़रने वाले बृहत् वृत्त पर होती है। इसलिए लंबी दूरी की उड़ानें और जहाज़ यही रास्ता अपनाते हैं; जैसे दिल्ली से अमेरिका की कई उड़ानें उत्तरी ध्रुव के पास से जाती हैं।

ध्यान दें: सभी अक्षांश रेखाओं में केवल भूमध्य रेखा ही बृहत् वृत्त है। सभी याम्योत्तर (अर्धवृत्त) बृहत् वृत्त के आधे भाग हैं।

बृहत् वृत्त मार्ग बनाम रंब रेखा (UPSC के लिए)

आधारबृहत् वृत्त मार्ग (Orthodrome)रंब रेखा (Rhumb line / Loxodrome)
दूरीसबसे छोटीलंबी
दिशा (कंपास)लगातार बदलती रहती हैपूरे रास्ते एक-सी
किस नक्शे पर सीधीनोमोनिक प्रक्षेपमर्केटर प्रक्षेप
उपयोगलंबी उड़ानें, समुद्री यात्रा की योजनापुराने जहाज़ों का आसान दिशा-पालन
  • नाविक पहले नोमोनिक नक्शे पर बृहत् वृत्त मार्ग की सीधी रेखा खींचते हैं, फिर उसे मर्केटर नक्शे पर छोटे-छोटे सीधे टुकड़ों में उतारकर चलते हैं।
  • एक ही अक्षांश पर दो शहर (जैसे 60° उ. पर दो जगहें): सबसे छोटा रास्ता उस अक्षांश रेखा पर नहीं, बल्कि ध्रुव की ओर झुका हुआ बृहत् वृत्त है। इसी कारण दिल्ली से उत्तरी अमेरिका की उड़ानें आर्कटिक के ऊपर से जाती हैं।
  • अपवाद: दोनों जगहें भूमध्य रेखा पर हों, तो भूमध्य रेखा ही बृहत् वृत्त है।

6अक्षांश (Latitude): पूरी बात

अक्षांश: पृथ्वी के केंद्र पर भूमध्य रेखा और स्थान के बीच बना कोण

अक्षांश किसी स्थान की भूमध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण की कोणीय दूरी है, जो पृथ्वी के केंद्र से नापी जाती है।

उदाहरण: अगर पृथ्वी के केंद्र से एक रेखा भूमध्य रेखा तक और दूसरी नई दिल्ली तक खींचें, तो दोनों के बीच लगभग 28°37' का कोण बनेगा; यही दिल्ली का अक्षांश है।

लिखने का तरीका

  • 1 अंश (1°) = 60 कला (60'), 1 कला (1') = 60 विकला (60'')।
  • उत्तर में उ. (N) और दक्षिण में द. (S) लिखते हैं, जैसे 23°21' उ.।
  • दशमलव में: 23°30' = 23.5°; 28°37' = 28 + 37/60 ≈ 28.62°।

अक्षांश रेखाओं (समानांतरों) की विशेषताएँ

  1. एक ही अक्षांश वाले सभी स्थानों को जोड़ने वाली रेखा अक्षांश रेखा या समानांतर (Parallel) है।
  2. सभी अक्षांश रेखाएँ पूर्ण वृत्त हैं और पूर्व-पश्चिम दिशा में खिंची हैं।
  3. ये एक-दूसरे के समानांतर हैं और कभी नहीं मिलतीं।
  4. भूमध्य रेखा सबसे बड़ी (बृहत् वृत्त) है; ध्रुवों की ओर वृत्त छोटे होते जाते हैं; ध्रुव केवल बिंदु हैं।
  5. 1° के अंतर पर उत्तर में 89, दक्षिण में 89 और भूमध्य रेखा मिलाकर 179 अक्षांश रेखाएँ। (ध्रुवों को भी गिनें तो 181 "अक्षांश"।)
  6. दो पास-पास की अक्षांश रेखाओं (1°) की दूरी लगभग 111 किमी है। चपटेपन के कारण यह भूमध्य रेखा पर लगभग 110.6 किमी और ध्रुवों पर लगभग 111.7 किमी है।
  7. किसी अक्षांश रेखा की लंबाई = भूमध्य रेखा की लंबाई × cos(अक्षांश)।
  8. अक्षांश से किसी जगह की जलवायु और तापमान का अनुमान मिलता है।

अक्षांश रेखा की लंबाई और 1° देशांतर की दूरी

अक्षांशरेखा की लंबाईउस अक्षांश पर 1° देशांतर की दूरी
0°40,075 किमी111.3 किमी
15°38,709 किमी107.5 किमी
23½°36,751 किमी102.1 किमी
30°34,706 किमी96.4 किमी
45°28,337 किमी78.7 किमी
60°20,038 किमी55.7 किमी
66½°15,980 किमी44.4 किमी
75°10,372 किमी28.8 किमी
90°0 किमी0.0 किमी

60° अक्षांश की रेखा भूमध्य रेखा की ठीक आधी है, क्योंकि cos 60° = ½।

भू-केंद्रीय और भूगणितीय अक्षांश (केवल UPSC के लिए अतिरिक्त)

पृथ्वी पूरा गोला नहीं है, इसलिए अक्षांश दो तरह से परिभाषित होता है:

  • भू-केंद्रीय (Geocentric): पृथ्वी के केंद्र से नापा गया कोण (स्कूल वाली परिभाषा)।
  • भूगणितीय (Geodetic): उस स्थान पर गोलाभ की सतह के लंब (ऊर्ध्वाधर रेखा) और भूमध्य रेखा के तल के बीच का कोण। नक्शे और GPS यही अक्षांश बताते हैं।
  • दोनों में अधिकतम अंतर 45° अक्षांश के पास, केवल लगभग 0.19° (लगभग 11.5 कला) होता है; भूमध्य रेखा और ध्रुवों पर अंतर शून्य।

7अक्षांश कैसे पता करें

ध्रुव तारे की ऊँचाई (क्षितिज से कोण) उस स्थान के अक्षांश के बराबर

1. ध्रुव तारे से (उत्तरी गोलार्ध में, रात में)

ध्रुव तारा क्षितिज से जितने अंश ऊपर दिखता है, वही उस स्थान का अक्षांश है।

  • भूमध्य रेखा पर ध्रुव तारा क्षितिज पर (0°) दिखता है।
  • उत्तरी ध्रुव पर ठीक सिर के ऊपर (90°)।
  • राँची (लगभग 23°) में ध्रुव तारा क्षितिज से लगभग 23° ऊपर दिखेगा।
  • दक्षिणी गोलार्ध में ध्रुव तारा नहीं दिखता; वहाँ दक्षिणी क्रॉस (Crux) तारामंडल की मदद ली जाती है।

2. दोपहर के सूर्य से

21 मार्च या 23 सितंबर (विषुव) को सूर्य भूमध्य रेखा पर सीधा चमकता है। उस दिन दोपहर में: अक्षांश = 90° − सूर्य की ऊँचाई (क्षितिज से कोण)

21 मार्च की दोपहर किसी स्कूल में सूर्य क्षितिज से 67° ऊपर था। स्कूल का अक्षांश?

90° − 67° = 23° (उत्तर)। (बाकी दिनों में सूर्य की उस दिन की स्थिति, यानी क्रांति, जोड़ी या घटाई जाती है; यह प्रयोग पेज 2.16 "छाया से अक्षांश नापो" में है।)

3. आज: GPS

मोबाइल फ़ोन का GPS उपग्रहों से आने वाले संकेतों के समय से अक्षांश, देशांतर और ऊँचाई तुरंत बता देता है। भारत का अपना क्षेत्रीय उपग्रह नेविगेशन तंत्र NavIC (IRNSS) है।

दोपहर के सूर्य की ऊँचाई: किसी भी दिन का सूत्र

दोपहर में सूर्य की ऊँचाई = 90° − |अक्षांश − सूर्य की क्रांति|

क्रांति (Declination) = उस दिन सूर्य जिस अक्षांश पर सिर के ठीक ऊपर है: 21 मार्च 0°, 21 जून 23½° उ., 23 सितंबर 0°, 22 दिसंबर 23½° द. (उत्तर को धनात्मक, दक्षिण को ऋणात्मक लें।)

21 जून को 40° उ. पर दोपहर के सूर्य की ऊँचाई?

90 − (40 − 23.5) = 73.5°।

22 दिसंबर को नई दिल्ली (28.6° उ.) में दोपहर के सूर्य की ऊँचाई?

90 − (28.6 − (−23.5)) = 90 − 52.1 = 37.9°। इसीलिए सर्दियों में दोपहर की छाया लंबी होती है।

21 जून को राँची (लगभग 23.35° उ.) में?

90 − 0.15 ≈ 89.85°, यानी सूर्य लगभग ठीक सिर के ऊपर; छाया लगभग ग़ायब।

21 जून को आर्कटिक वृत्त (66.5° उ.) पर आधी रात को सूर्य कहाँ होगा?

ठीक क्षितिज पर; पूरे दिन-रात सूर्य नहीं डूबता ("मध्यरात्रि का सूर्य")।

ध्रुव तारा ठीक ध्रुव पर नहीं: वह खगोलीय उत्तरी ध्रुव से लगभग 0.7° दूर है, इसलिए यह विधि लगभग 1° तक सही उत्तर देती है। पृथ्वी के अक्ष की धीमी "डगमगाहट" (अयन, लगभग 26,000 वर्ष का चक्र) से लगभग 12,000 वर्ष बाद अभिजित (Vega) ध्रुव तारे के पास होगा।

8महत्त्वपूर्ण अक्षांश रेखाएँ

रेखाअक्षांशखास बात
भूमध्य रेखा (विषुवत् वृत्त)0°पृथ्वी को उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में बाँटती है; सबसे लंबी अक्षांश रेखा; 21 मार्च और 23 सितंबर को दोपहर का सूर्य यहाँ सिर पर; यहाँ साल भर दिन-रात लगभग बराबर
कर्क रेखा (Tropic of Cancer)23½° उ. (23°26')21 जून को दोपहर का सूर्य यहाँ सिर के ठीक ऊपर; सूर्य की सीधी किरणें इससे उत्तर नहीं जातीं; भारत के बीच से गुज़रती है
मकर रेखा (Tropic of Capricorn)23½° द.22 दिसंबर को दोपहर का सूर्य यहाँ सिर के ठीक ऊपर; सूर्य की सीधी किरणें इससे दक्षिण नहीं जातीं
आर्कटिक वृत्त (उत्तर ध्रुव वृत्त)66½° उ. (66°34')इसके उत्तर में गर्मियों में कम-से-कम एक दिन सूर्य नहीं डूबता ("मध्यरात्रि का सूर्य") और सर्दियों में कम-से-कम एक दिन नहीं उगता
अंटार्कटिक वृत्त (दक्षिण ध्रुव वृत्त)66½° द.दक्षिणी गोलार्ध में वही स्थिति
उत्तरी / दक्षिणी ध्रुव90° उ. / 90° द.लगभग छह महीने दिन और छह महीने रात
  • 23½° ही क्यों? धुरी का झुकाव 23½° है, इसलिए सूर्य की सीधी किरणें साल भर में 23½° उ. और 23½° द. के बीच ही आगे-पीछे होती हैं। ध्रुव वृत्त 90° − 23½° = 66½° पर हैं।
  • नाम क्यों: 21 जून के आसपास सूर्य आकाश में कर्क (Cancer) राशि-तारामंडल की दिशा में और 22 दिसंबर के आसपास मकर (Capricorn) की दिशा में दिखता था (प्राचीन काल में), इसलिए ये नाम पड़े।
  • "ट्रॉपिक" शब्द यूनानी "ट्रोपोस" (मुड़ना) से है: यहाँ पहुँचकर सूर्य की सीधी किरणें वापस मुड़ जाती हैं।

कर्क रेखा खिसकती है

अक्ष का झुकाव स्थिर नहीं; अभी यह लगभग 23.44° है और हर वर्ष लगभग 0.47 विकला घट रहा है। इसलिए कर्क और मकर रेखाएँ हर वर्ष लगभग 14-15 मीटर भूमध्य रेखा की ओर खिसक रही हैं, और ध्रुव वृत्त ध्रुवों की ओर। सड़कों पर लगे "कर्क रेखा" के पत्थर इसलिए असली रेखा से कुछ दूर हो सकते हैं। झुकाव लगभग 41,000 वर्ष में 22.1° से 24.5° के बीच आता-जाता है (मिलनकोविच चक्र, फेज 3)।

21 जून और 22 दिसंबर का अर्थ

  • कर्क संक्रांति (21 जून): उत्तरी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन; आर्कटिक वृत्त के उत्तर में 24 घंटे उजाला; अंटार्कटिक वृत्त के दक्षिण में 24 घंटे अँधेरा।
  • मकर संक्रांति (22 दिसंबर): उलटी स्थिति। (त्योहार "मकर संक्रांति" 14-15 जनवरी को पड़ता है; अयन के कारण त्योहार की तिथि अब खगोलीय संक्रांति से लगभग 3 सप्ताह आगे खिसक चुकी है।)
  • विषुव (21 मार्च, 23 सितंबर): पूरी पृथ्वी पर दिन-रात लगभग बराबर; प्रदीप्ति वृत्त दोनों ध्रुवों से गुज़रता है।
साल भर सूर्य की क्रांति: 21 मार्च, 21 जून, 23 सितंबर और 22 दिसंबर

9ताप कटिबंध (Heat Zones)

पाँच ताप कटिबंध; भूमध्य रेखा पर सीधी और ध्रुवों की ओर तिरछी किरणें
कटिबंधकहाँ से कहाँसूर्यतापमानपृथ्वी की सतह का लगभग भाग
उष्ण कटिबंध (Torrid)कर्क रेखा से मकर रेखा तकसाल में कभी-न-कभी (दो बार) दोपहर का सूर्य सिर के ठीक ऊपरसबसे गर्मलगभग 40%
उत्तरी शीतोष्ण कटिबंधकर्क रेखा से आर्कटिक वृत्त तककभी सिर के ठीक ऊपर नहींमध्यम, ऋतुओं में बड़ा अंतरदोनों शीतोष्ण मिलाकर लगभग 52%
दक्षिणी शीतोष्ण कटिबंधमकर रेखा से अंटार्कटिक वृत्त तककभी सिर के ठीक ऊपर नहींमध्यम(ऊपर शामिल)
उत्तरी शीत कटिबंध (Frigid)आर्कटिक वृत्त से उत्तरी ध्रुव तकक्षितिज से ज़्यादा ऊपर नहीं; लंबे दिन-रातबहुत ठंडादोनों शीत मिलाकर लगभग 8%
दक्षिणी शीत कटिबंधअंटार्कटिक वृत्त से दक्षिणी ध्रुव तकवहीबहुत ठंडा(ऊपर शामिल)

उष्ण कटिबंध सबसे गर्म क्यों? वहाँ सूर्य की किरणें लगभग सीधी (लंबवत्) पड़ती हैं। सीधी किरण कम जगह पर फैलती है और वायुमंडल की कम मोटाई पार करती है, इसलिए एक जगह पर ज़्यादा गर्मी देती है। ध्रुवों की ओर किरणें तिरछी होती जाती हैं, बड़ी जगह पर फैलती हैं और ज़्यादा वायुमंडल पार करती हैं, इसलिए कम गर्मी देती हैं। (प्रयोग: टॉर्च सीधी और तिरछी करके देखें, पेज 2.21।)

उष्ण कटिबंध का भाग sin 23½° ≈ 0.40 यानी लगभग 40% होता है; इसीलिए यह सबसे बड़ा एकल कटिबंध है।

ताप कटिबंध और असली जलवायु में अंतर

ताप कटिबंध केवल सूर्य की स्थिति (खगोलीय आधार) से बने हैं। असली तापमान और जलवायु पर और भी कारक असर डालते हैं:

  • ऊँचाई: क्विटो (इक्वाडोर) भूमध्य रेखा के पास है, पर लगभग 2,850 मीटर ऊँचाई के कारण साल भर सुहावना; हर 1,000 मीटर पर तापमान लगभग 6.5° से. घटता है।
  • महासागरीय धाराएँ: लंदन (51½° उ.) गर्म उत्तरी अटलांटिक प्रवाह के कारण उसी अक्षांश के लैब्राडोर (कनाडा) से बहुत कम ठंडा।
  • स्थल और जल का बँटवारा, पर्वतों की दिशा, हवाएँ: हिमालय भारत को मध्य एशिया की ठंडी हवाओं से बचाता है।
  • सबसे गर्म स्थान भूमध्य रेखा पर नहीं: भूमध्य रेखा पर बादल और वर्षा अधिक होती है; सबसे ऊँचे तापमान लगभग 20°-30° अक्षांश के साफ़ आसमान वाले मरुस्थलों (सहारा, थार, अरब) में मिलते हैं।
  • इसीलिए आगे जलवायु के वर्गीकरण (जैसे कोपेन) में केवल अक्षांश नहीं, तापमान और वर्षा के आँकड़े लिए जाते हैं (फेज 6)।

10देशांतर (Longitude): पूरी बात

उत्तरी ध्रुव के ऊपर से: प्रधान याम्योत्तर से 60° पूर्व का कोण

देशांतर किसी स्थान की प्रधान याम्योत्तर (0°) से पूर्व या पश्चिम की कोणीय दूरी है, जो पृथ्वी के केंद्र से भूमध्य रेखा के तल में नापी जाती है।

देशांतर रेखाओं (याम्योत्तरों) की विशेषताएँ

  1. उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक खिंची अर्धवृत्ताकार रेखाएँ; एक ही देशांतर वाले स्थानों को जोड़ती हैं।
  2. "याम्योत्तर" (Meridian) का अर्थ है "मध्याह्न रेखा": एक याम्योत्तर पर स्थित सभी स्थानों पर दोपहर (और हर समय) एक साथ होता है।
  3. सभी याम्योत्तर बराबर लंबे हैं (लगभग 20,000 किमी)।
  4. सब याम्योत्तर दोनों ध्रुवों पर मिल जाते हैं, इसलिए ये समानांतर नहीं हैं।
  5. याम्योत्तरों के बीच की दूरी भूमध्य रेखा पर सबसे अधिक (1° ≈ 111.3 किमी) और ध्रुवों पर शून्य।
  6. 1° के अंतर पर कुल 360 देशांतर रेखाएँ (0° से 180° पूर्व और 180° पश्चिम; 0° और 180° दोनों एक-एक ही हैं)।
  7. आमने-सामने के दो याम्योत्तर मिलकर एक बृहत् वृत्त बनाते हैं।
  8. देशांतर से किसी स्थान के समय का पता चलता है।

प्रधान याम्योत्तर का इतिहास

  • 1884 से पहले कई देश अपना-अपना शून्य याम्योत्तर मानते थे: पेरिस, कैडिज़, फ़ेरो द्वीप, और भारत में उज्जैन।
  • 1884 में वॉशिंगटन (अमेरिका) में हुए अंतर्राष्ट्रीय याम्योत्तर सम्मेलन में ग्रीनविच (लंदन) की शाही वेधशाला से गुज़रने वाले याम्योत्तर को 0° माना गया। तब तक दुनिया के ज़्यादातर समुद्री चार्ट ग्रीनविच पर आधारित थे। (फ़्रांस ने मतदान में भाग नहीं लिया और कई वर्षों तक पेरिस याम्योत्तर ही चलाता रहा।)
  • उज्जैन की मध्य रेखा: भारतीय ज्योतिष-गणना में सदियों तक उज्जैन से गुज़रने वाली रेखा को शून्य याम्योत्तर माना जाता था; कर्क रेखा भी उज्जैन के पास से गुज़रती है। कक्षा 6 की नई NCERT किताब यह बताती है। (पेज 2.8)

देशांतर कैसे पता करें

  • किसी जगह के स्थानीय दोपहर (सूर्य सबसे ऊँचा) के समय, ग्रीनविच की घड़ी देखें। अंतर (मिनट) ÷ 4 = देशांतर (अंश)।
  • समुद्र में यह कठिन था, क्योंकि जहाज़ पर सही घड़ी नहीं चलती थी। ब्रिटेन ने 1714 में "देशांतर अधिनियम" बनाकर इनाम रखा। जॉन हैरिसन ने 1761 तक समुद्र में भी सही चलने वाली घड़ी (समुद्री क्रोनोमीटर, H4) बनाई। इसके बाद जहाज़ अपना देशांतर ठीक जानने लगे।

11ग्रिड, निर्देशांक और प्रति-ध्रुवीय बिंदु

अक्षांश और देशांतर रेखाएँ मिलकर ग्लोब पर एक जाल बनाती हैं, जिसे ग्रिड या ग्रैटिक्यूल (Graticule) कहते हैं। किसी स्थान के अक्षांश और देशांतर को मिलाकर उसके भौगोलिक निर्देशांक (Coordinates) कहते हैं। पहले अक्षांश, फिर देशांतर लिखा जाता है।

स्थानअक्षांशदेशांतर
नई दिल्ली28°37' उ.77°13' पू.
राँची23°21' उ.85°19' पू.
मुंबई19°05' उ.72°53' पू.
कोलकाता22°34' उ.88°22' पू.
चेन्नई13°05' उ.80°16' पू.
कन्याकुमारी8°05' उ.77°33' पू.
श्रीनगर34°05' उ.74°48' पू.
ग्रीनविच (लंदन)51°29' उ.0°
न्यूयॉर्क40°43' उ.74°00' प.
सिडनी33°52' द.151°13' पू.

प्रति-ध्रुवीय बिंदु (Antipode)

किसी जगह से पृथ्वी के केंद्र से होकर ठीक उलटी ओर का बिंदु। नियम: अक्षांश वही अंक, पर उ. की जगह द. (या उलटा); देशांतर = 180° − देशांतर, और पू. की जगह प. (या उलटा)।

नई दिल्ली (28°37' उ., 77°13' पू.) का प्रति-ध्रुवीय बिंदु?

28°37' द., 180° − 77°13' = 102°47' प., जो दक्षिण प्रशांत महासागर में है।

दूरी का मोटा हिसाब

  • एक ही याम्योत्तर पर दो जगहों की दूरी ≈ अक्षांश का अंतर × 111 किमी। जैसे कन्याकुमारी (8°) से श्रीनगर (34°): 26 × 111 ≈ 2,900 किमी (सीधी रेखा में, लगभग)।
  • एक ही अक्षांश पर दूरी ≈ देशांतर का अंतर × 111.3 × cos(अक्षांश) किमी।

दशमलव अंश और डिजिटल पते

  • मोबाइल नक्शों में निर्देशांक दशमलव में लिखे जाते हैं, जैसे नई दिल्ली: 28.6139, 77.2090 (पहला अक्षांश, दूसरा देशांतर; दक्षिण और पश्चिम के लिए ऋण चिह्न, जैसे न्यूयॉर्क 40.71, −74.01)।
  • बदलने का तरीका: 23°21' = 23 + 21/60 = 23.35°।
  • शुद्धता: दशमलव के बाद 4 अंक (0.0001°) लगभग 11 मीटर, 5 अंक लगभग 1.1 मीटर।
  • DIGIPIN (2025): डाक विभाग ने IIT हैदराबाद और NRSC-ISRO के साथ मिलकर अक्षांश-देशांतर के ग्रिड पर आधारित 10 अक्षरों का डिजिटल पता बनाया है। यह पूरे भारत को लगभग 4 मीटर × 4 मीटर के खानों में बाँटता है, ताकि बिना ठीक पते वाले गाँव-जंगल में भी डाक, आपात सेवा और डिलीवरी सही जगह पहुँचे। यह पुराने 6 अंकों वाले PIN कोड की जगह नहीं, उसके साथ चलता है।
अक्षांश-देशांतर का ग्रिड: नई दिल्ली और उसका प्रति-ध्रुवीय बिंदु

12गोलार्ध

गोलार्धकिस रेखा से बँटाइसमें
उत्तरी गोलार्धभूमध्य रेखा के उत्तरपूरा भारत, यूरोप, उत्तरी अमेरिका, अधिकांश एशिया-अफ़्रीका
दक्षिणी गोलार्धभूमध्य रेखा के दक्षिणऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका, अधिकांश दक्षिण अमेरिका
पूर्वी गोलार्ध0° से 180° पू.पूरा भारत, एशिया, अधिकांश अफ़्रीका-यूरोप, ऑस्ट्रेलिया
पश्चिमी गोलार्ध0° से 180° प.उत्तर और दक्षिण अमेरिका
  • भारत पूरी तरह उत्तरी और पूर्वी गोलार्ध में है।
  • उत्तरी गोलार्ध में स्थल अधिक है, इसलिए उसे स्थल गोलार्ध और दक्षिणी को जल गोलार्ध भी कहते हैं। (सटीक "स्थल गोलार्ध" वह आधा भाग है जिसमें सबसे अधिक स्थल आता है; इसका केंद्र पश्चिमी फ़्रांस के पास है।)

13देशांतर और समय: नियम और हल किए उदाहरण

360° = 24 घंटे: हर 15° पर 1 घंटा, पूर्व में समय आगे

पृथ्वी 24 घंटे में 360° घूमती है:

घूमनासमय
360°24 घंटे
15°1 घंटा
1°4 मिनट
1' (कला)4 सेकंड

नियम

  1. पृथ्वी पश्चिम से पूर्व घूमती है, इसलिए पूर्व के स्थानों पर सूर्य पहले उगता है।
  2. किसी स्थान से पूर्व जाने पर समय आगे (जोड़ें), पश्चिम जाने पर समय पीछे (घटाएँ)।
  3. देशांतर का अंतर: दोनों स्थान एक ही गोलार्ध (दोनों पू. या दोनों प.) में हों तो घटाएँ; अलग गोलार्धों में हों तो जोड़ें।
  4. समय का अंतर = देशांतर का अंतर × 4 मिनट।

हल किए उदाहरण

ग्रीनविच में दोपहर 12 बजे हैं। नई दिल्ली (77°12' पू.) का स्थानीय समय?

77°12' = 77.2°; 77.2 × 4 = 308.8 मिनट = 5 घंटे 8 मिनट 48 सेकंड; पूर्व है, इसलिए आगे: शाम 5:08:48।

जब ग्रीनविच में सुबह 8 बजे हों, तब 90° पू. पर?

90 × 4 = 360 मिनट = 6 घंटे आगे: दोपहर 2 बजे।

जब ग्रीनविच में दोपहर 12 बजे हों, तब 45° प. पर?

45 × 4 = 180 मिनट = 3 घंटे पीछे: सुबह 9 बजे।

A (30° पू.) पर दोपहर 12 बजे हैं। B (60° प.) पर क्या समय होगा?

अलग गोलार्ध, इसलिए अंतर = 30 + 60 = 90°; 90 × 4 = 360 मिनट = 6 घंटे; B पश्चिम में है: सुबह 6 बजे।

दो स्थानों के स्थानीय समय में 2 घंटे 20 मिनट का अंतर है। देशांतर का अंतर?

140 मिनट ÷ 4 = 35°।

गुजरात (68°7' पू.) और अरुणाचल प्रदेश (97°25' पू.) के स्थानीय समय में अंतर?

देशांतर का अंतर 29°18' = 29.3°; 29.3 × 4 ≈ 117 मिनट ≈ 1 घंटा 57 मिनट (लगभग 2 घंटे)।

और हल किए उदाहरण (तारीख़ बदलने वाले)

ग्रीनविच में सोमवार रात 10 बजे हैं। 90° पू. पर समय और दिन?

90 × 4 = 6 घंटे आगे: रात 10 + 6 = मंगलवार सुबह 4 बजे।

ग्रीनविच में बुधवार सुबह 3 बजे हैं। 75° प. पर?

75 × 4 = 5 घंटे पीछे: मंगलवार रात 10 बजे।

एक जहाज़ पर स्थानीय दोपहर (12 बजे) है और उसकी ग्रीनविच घड़ी सुबह 8 बजे बता रही है। जहाज़ का देशांतर?

जहाज़ का समय 4 घंटे आगे है, यानी वह पूर्व में है: 4 × 15 = 60° पू.।

जब IST सुबह 9 बजे हो, तब द्वारका (लगभग 69° पू.) का स्थानीय समय?

82.5 − 69 = 13.5°; 13.5 × 4 = 54 मिनट पीछे: सुबह 8:06।

एक स्थान पर स्थानीय समय ग्रीनविच से 3 घंटे 20 मिनट पीछे है। देशांतर?

200 मिनट ÷ 4 = 50° प.।

याद रखने की ट्रिक: "पूरब पहले, पश्चिम पीछे": पूर्व में सूर्य पहले उगता है, इसलिए वहाँ घड़ी आगे।

14स्थानीय समय, मानक समय और विश्व के समय क्षेत्र

  • स्थानीय समय (Local Time): जब किसी स्थान पर सूर्य आकाश में सबसे ऊँचा हो, वहाँ दोपहर के 12 बजे। हर देशांतर पर स्थानीय समय अलग होता है।
  • मानक समय (Standard Time): पूरे देश (या क्षेत्र) के लिए एक चुने हुए मानक याम्योत्तर का स्थानीय समय, ताकि रेल, दफ़्तर, स्कूल, बैंक एक ही घड़ी से चलें। रेलों के फैलाव ने 19वीं सदी में मानक समय को ज़रूरी बना दिया।
  • GMT और UTC: ग्रीनविच माध्य समय (GMT) पुराना आधार है; आज दुनिया समन्वित सार्वत्रिक समय (UTC) को आधार मानती है, जो परमाणु घड़ियों से रखा जाता है। आम तौर पर दोनों लगभग एक ही हैं।
  • समय क्षेत्र (Time Zones): 360° ÷ 15° = सिद्धांत में 24 समय क्षेत्र, हर क्षेत्र 1 घंटे का। पर देशों की सीमाओं और सुविधा के कारण असल में लगभग 38 अलग-अलग समय-अंतर चलते हैं।
देश / स्थानमानक समय
भारतUTC + 5:30 (आधे घंटे का अंतर)
नेपालUTC + 5:45 (पौने छह घंटे)
श्रीलंकाUTC + 5:30
पाकिस्तानUTC + 5:00
बांग्लादेशUTC + 6:00
चीनपूरे देश में एक ही, UTC + 8, जबकि उसका विस्तार लगभग 60° देशांतर है
रूस11 समय क्षेत्र (सबसे अधिक वाले देशों में)
संयुक्त राज्य अमेरिकामुख्य भूमि पर 4, अलास्का और हवाई मिलाकर 6
  • ग्रीष्मकालीन समय (Daylight Saving Time): यूरोप-अमेरिका के कई देश गर्मियों में घड़ी एक घंटा आगे कर देते हैं, ताकि शाम का उजाला ज़्यादा काम आए। भारत में यह व्यवस्था नहीं है।

परमाणु घड़ी, UTC और लीप सेकंड

  • 1967 से 1 सेकंड की परिभाषा सीज़ियम-133 परमाणु के कंपन से तय है, पृथ्वी के घूमने से नहीं।
  • पृथ्वी का घूमना थोड़ा अनियमित है (ज्वार, भूकंप, हिम पिघलना असर डालते हैं)। इसलिए परमाणु समय और पृथ्वी के समय को साथ रखने के लिए 1972 से अब तक 27 लीप सेकंड जोड़े गए (आख़िरी 31 दिसंबर 2016 को)।
  • माप-तौल के महासम्मेलन (CGPM) ने 2022 में तय किया कि 2035 तक लीप सेकंड बंद किए जाएँगे, क्योंकि इनसे कंप्यूटर, बैंकिंग और संचार तंत्र में गड़बड़ी होती है।

15भारतीय मानक समय (IST)

  • भारत का मानक याम्योत्तर 82½° पू. (82°30' पू.) है, जो उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर के पास से गुज़रता है।
  • 82½ × 4 = 330 मिनट = 5 घंटे 30 मिनट। इसलिए IST = GMT/UTC + 5:30।
  • 82½° ही क्यों? भारत का देशांतरीय विस्तार 68°7' से 97°25' पू. है; 82½° लगभग इसके बीच में है, और यह 7½° का गुणज है (82½ = 11 × 7½), जिससे समय GMT से ठीक आधे घंटे के गुणज (5:30) में आता है।
  • यह याम्योत्तर पाँच राज्यों से गुज़रता है: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश।
  • इतिहास: अंग्रेज़ी शासन में अलग-अलग "बंबई समय" और "कलकत्ता समय" चलते थे। 1906 में भारतीय मानक समय लागू हुआ; कलकत्ता समय 1948 तक और बंबई समय 1955 तक कुछ जगह चलता रहा।
  • भारत का आधिकारिक समय CSIR-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (NPL), नई दिल्ली परमाणु घड़ियों से रखती है।
  • दो समय क्षेत्र की बहस: पूर्वोत्तर में सूर्य लगभग 2 घंटे पहले उगता और डूबता है, इसलिए वहाँ अलग समय क्षेत्र की माँग उठती रही है। असम के चाय बागानों में अंग्रेज़ों के समय से घड़ी एक घंटा आगे रखने की परंपरा ("चाय बागान समय" / "बागान टाइम") रही है।

नया कानून: विधिक माप विज्ञान (भारतीय मानक समय) नियम, 2026

  • उपभोक्ता मामले विभाग ने विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009 के अंतर्गत ये नियम अगस्त 2026 में अधिसूचित किए (मसौदा जनवरी 2025 में आया था)। नारा: "एक राष्ट्र, एक समय"।
  • मुख्य बात: कानूनी, प्रशासनिक, व्यापारिक और सरकारी कामों के लिए IST ही एकमात्र अनिवार्य समय संदर्भ होगा। बैंकिंग और डिजिटल भुगतान, शेयर बाज़ार, दूरसंचार, बिजली ग्रिड, रेल-हवाई यातायात और आपात सेवाओं की घड़ियाँ IST से मिलानी होंगी।
  • कौन रखता है: CSIR-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (NPL), नई दिल्ली, सीज़ियम और रूबिडियम परमाणु घड़ियों से; यह फ़्रांस स्थित अंतर्राष्ट्रीय माप-तौल ब्यूरो (BIPM) से मिलाया जाता है। देश भर में समय क्षेत्रीय संदर्भ मानक प्रयोगशालाओं (RRSL) से पहुँचाया जाता है।
  • NavIC की भूमिका: विदेशी उपग्रह तंत्र (GPS) पर निर्भरता घटाने के लिए समय-संकेत NavIC और देशी व्यवस्था से देना।
  • पालन का समय: राजपत्र में छपने के 180 दिन बाद लागू, ताकि संस्थाएँ अपने तंत्र बदल सकें।
  • क्यों ज़रूरी: साइबर सुरक्षा (समय-मुहर से लेन-देन का प्रमाण), दूरसंचार और बिजली ग्रिड को माइक्रोसेकंड तक मेल, और न्यायालयों में डिजिटल रिकॉर्ड का एक ही आधार।
भारत का अक्षांश-देशांतर विस्तार (NCERT मान) और 82½° पू. भारतीय मानक याम्योत्तर

16अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा (IDL)

  • यह मोटे तौर पर 180° याम्योत्तर के साथ प्रशांत महासागर से गुज़रती है।
  • कारण: ग्रीनविच से पूर्व जाते हुए 180° पर समय 12 घंटे आगे और पश्चिम जाते हुए 12 घंटे पीछे होता है। यानी 180° के दोनों ओर समय एक-सा, पर तारीख़ में एक दिन का अंतर होता है।
  • नियम: तिथि रेखा को पश्चिम से पूर्व (जैसे जापान से अमेरिका की ओर) पार करें तो एक दिन घटाएँ (एक ही तारीख़ दोबारा आती है)। पूर्व से पश्चिम (अमेरिका से जापान की ओर) पार करें तो एक दिन जोड़ें।
  • टेढ़ी-मेढ़ी क्यों: ताकि कोई देश या द्वीप-समूह दो तारीख़ों में न बँटे। यह रूस के चुकोटका और अमेरिका के अलास्का (बेरिंग जलसंधि), अल्यूशियन द्वीपों, फ़िजी, टोंगा और किरिबाती के पास मुड़ती है।
  • किरिबाती (1995): पूरे देश को एक ही तारीख़ में लाने के लिए रेखा पूर्व की ओर खिसकाई गई; इसकी लाइन द्वीप (UTC + 14) दुनिया में सबसे पहले नया दिन देखते हैं।
  • समोआ (2011): ऑस्ट्रेलिया-न्यूज़ीलैंड के साथ एक ही दिन में रहने के लिए तिथि रेखा का पक्ष बदला; उसके कैलेंडर से 30 दिसंबर 2011 का दिन छूट गया।
  • इतिहास में: 1522 में मैगेलन के अभियान के बचे नाविक लौटे तो उनकी डायरी में एक दिन कम था। जूल्स वर्न के उपन्यास "अस्सी दिन में दुनिया की सैर" में नायक इसी कारण शर्त जीतता है।

तिथि रेखा के आर-पार के उदाहरण

  • हर दिन लगभग 2 घंटे (UTC के 10:00 से 12:00 बजे तक) पृथ्वी पर एक साथ तीन तारीख़ें चलती हैं। जैसे UTC के अनुसार मंगलवार सुबह 10:30 बजे, किरिबाती के लाइन द्वीपों (UTC + 14) पर बुधवार रात 00:30 और बेकर द्वीप (UTC − 12) पर सोमवार रात 10:30 होते हैं। (UTC + 14 और UTC − 12 के बीच कुल 26 घंटे का अंतर है।)
  • डायोमीड द्वीप: बेरिंग जलसंधि में बिग डायोमीड (रूस) और लिटिल डायोमीड (अमेरिका) केवल लगभग 4 किमी दूर हैं, पर उनकी घड़ियों की तारीख़ में लगभग एक दिन का अंतर है ("कल का द्वीप" और "आज का द्वीप")।
  • तिथि रेखा किसी अंतर्राष्ट्रीय संधि से तय नहीं; हर देश अपनी ओर का समय खुद चुनता है, रेखा उसी से बनती है।
तिथि रेखा 180° के पास मुड़ती है; पार करने पर दिन जोड़ने और घटाने का नियम

17उपग्रह नेविगेशन: GPS और भारत का NavIC

उपग्रह से स्थान कैसे पता चलता है

  • हर नेविगेशन उपग्रह में बहुत सटीक परमाणु घड़ी होती है। वह लगातार बताता है: "मैं कहाँ हूँ और अभी कितना समय है।"
  • आपका फ़ोन संकेत आने में लगा समय नापता है। समय × प्रकाश की चाल = उपग्रह से दूरी।
  • तीन उपग्रहों की दूरियों से स्थान (अक्षांश, देशांतर, ऊँचाई) निकलता है (त्रिपार्श्वीयन, Trilateration); चौथा उपग्रह फ़ोन की घड़ी की ग़लती ठीक करने के लिए चाहिए। इसलिए सही स्थान के लिए कम-से-कम 4 उपग्रह ज़रूरी हैं।
  • घड़ी में एक माइक्रोसेकंड की ग़लती = लगभग 300 मीटर की ग़लती। इसीलिए नेविगेशन तंत्र असल में "समय" के तंत्र हैं।

विश्व के उपग्रह नेविगेशन तंत्र

तंत्रदेशप्रकार
GPSअमेरिकावैश्विक
GLONASSरूसवैश्विक
Galileoयूरोपीय संघवैश्विक
BeiDouचीनवैश्विक
NavIC (IRNSS)भारतक्षेत्रीय
QZSSजापानक्षेत्रीय

NavIC (Navigation with Indian Constellation)

  • ISRO का क्षेत्रीय तंत्र; पूरा भारत और उसकी सीमा से लगभग 1,500 किमी आगे तक का क्षेत्र।
  • योजना 7 उपग्रहों की: 3 भूस्थिर (GEO) और 4 भू-तुल्यकाली झुकी कक्षा (GSO) में। दो सेवाएँ: आम लोगों के लिए मानक स्थिति सेवा (SPS) और सेना-सरकार के लिए कूटबद्ध प्रतिबंधित सेवा (RS)।
  • पहले उपग्रह L5 और S बैंड पर थे; नई NVS श्रृंखला में L1 बैंड भी है, जो आम मोबाइल फ़ोनों में आसानी से चलता है, और देशी परमाणु घड़ी है।
  • उपयोग: मछुआरों को समुद्री सीमा और तूफ़ान की चेतावनी, वाहन ट्रैकिंग, रेल, आपदा प्रबंधन, सर्वेक्षण, और समय-संकेत (बैंक, बिजली ग्रिड, नया IST नियम)।

स्थिति (अक्टूबर 2026 तक की जानकारी)

  • पहली पीढ़ी के कई उपग्रहों की परमाणु घड़ियाँ ख़राब हुईं; IRNSS-1H (2017) कक्षा में नहीं पहुँच सका।
  • NVS-01 (29 मई 2023) सफल रहा। NVS-02 (29 जनवरी 2025, GSLV-F15, श्रीहरिकोटा से 100वाँ प्रक्षेपण) एक वाल्व न खुलने से अपनी तय कक्षा में नहीं पहुँच सका।
  • जुलाई 2026 में सरकार ने संसद में बताया कि केवल 3 उपग्रह (IRNSS-1B, IRNSS-1I, NVS-01) काम कर रहे हैं। अकेले NavIC से स्थान बताने के लिए कम-से-कम 4 चाहिए, इसलिए स्वतंत्र स्थिति सेवा रुकी है, पर समय-सेवा चल रही है। फ़ोन NavIC को GPS आदि के साथ मिलाकर उपयोग करते हैं।
  • NVS-03 का प्रक्षेपण 2026 के अंत के लिए तय है; NVS-04 और NVS-05 बन रहे हैं। (परीक्षा से पहले ताज़ा स्थिति अवश्य देख लें।)

UPSC दृष्टि: सामरिक स्वायत्तता (1999 करगिल के समय GPS डेटा न मिलना एक प्रेरणा माना जाता है), अंतरिक्ष में भारत की क्षमता, और समय-संप्रभुता ("Time sovereignty") से जुड़े प्रश्न बनते हैं।

18मानचित्र और उसके घटक

मानचित्र (Map) पृथ्वी की पूरी सतह या उसके किसी भाग का समतल सतह पर, एक निश्चित पैमाने पर बना चित्र है। मानचित्र बनाने की कला-विज्ञान को मानचित्रकला (Cartography) कहते हैं।

मानचित्र के प्रकार

प्रकारक्या दिखाता है
भौतिक (उच्चावच) मानचित्रपर्वत, पठार, मैदान, नदियाँ, महासागर
राजनीतिक मानचित्रदेश, राज्य, ज़िले, शहर और उनकी सीमाएँ
थीमैटिक (विषयक) मानचित्रकिसी एक विषय का वितरण: वर्षा, वन, उद्योग, जनसंख्या

मानचित्र के घटक

  1. शीर्षक: मानचित्र किस बारे में है।
  2. पैमाना (Scale): मानचित्र की दूरी और ज़मीन की असली दूरी का अनुपात। तीन तरह से लिखते हैं: कथन ("1 सेमी = 10 किमी"), निरूपक भिन्न (RF, जैसे 1 : 10,00,000), और रैखिक पैमाना (रेखा पर दूरी)।
  • बड़े पैमाने के मानचित्र (जैसे 1 : 10,000) छोटा क्षेत्र, ज़्यादा विस्तार: गाँव, शहर।
  • छोटे पैमाने के मानचित्र (जैसे 1 : 1,00,00,000) बड़ा क्षेत्र, कम विस्तार: देश, विश्व।
  1. दिशा: उत्तर दिशा का तीर (N); आम तौर पर ऊपर उत्तर होता है।
  2. प्रतीक और संकेत (Legend / Key): रंग और चिह्न किस चीज़ के लिए हैं; रूढ़ चिह्न (Conventional Signs) अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तय होते हैं।
  3. ग्रिड: अक्षांश-देशांतर या निर्देशांक रेखाएँ, जिनसे स्थान ढूँढा जाता है।

भारत में आधिकारिक मानचित्र भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India, 1767, देहरादून मुख्यालय) बनाता है। मानचित्र पढ़ने का पूरा अभ्यास फेज 10 के पेजों में है।

मापनी के हल किए उदाहरण

"1 सेमी = 5 किमी" को प्रदर्शक भिन्न में बदलिए।

5 किमी = 5 × 1,00,000 सेमी = 5,00,000 सेमी; इसलिए 1 : 5,00,000।

1 : 50,000 के नक्शे पर दो गाँवों के बीच 6.4 सेमी है। असली दूरी?

6.4 × 50,000 = 3,20,000 सेमी = 3.2 किमी।

1 : 2,50,000 का नक्शा बड़ी मापनी का है या 1 : 50,000 का?

1 : 50,000 बड़ी मापनी का है (भिन्न 1/50,000 बड़ा है), इसमें विवरण अधिक दिखेगा।

भारत में मानचित्र: संस्थाएँ और नीति

  • भारतीय सर्वेक्षण विभाग (1767, मुख्यालय देहरादून): स्थलाकृतिक मानचित्र (Toposheets), मुख्य मापनी 1 : 50,000 और 1 : 2,50,000।
  • राष्ट्रीय मानचित्र नीति, 2005: दो श्रृंखलाएँ: रक्षा के लिए रक्षा श्रृंखला मानचित्र (DSM) और जनता के लिए खुली श्रृंखला मानचित्र (OSM)।
  • भू-स्थानिक दिशानिर्देश (फ़रवरी 2021) और राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति, 2022: भारतीय कंपनियों के लिए मानचित्र डेटा बनाना-बाँटना आसान किया गया।
  • थीमैटिक मानचित्र संस्थाएँ: NATMO (कोलकाता), भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI), राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC, हैदराबाद)।
मापनी लिखने के तीन तरीके; बड़ी और छोटी मापनी

19मानचित्र प्रक्षेप (Map Projection)

सतह के आधार पर प्रक्षेप: बेलनाकार, शंक्वाकार और खमध्य

गोल सतह को बिना खींचे या फाड़े सपाट नहीं किया जा सकता। संतरे का छिलका सपाट कीजिए, वह फटेगा या खिंचेगा। इसलिए हर मानचित्र में आकार, क्षेत्रफल, दूरी या दिशा में से कुछ-न-कुछ ग़लत होता है। ग्लोब की अक्षांश-देशांतर रेखाओं को समतल पर व्यवस्थित ढंग से उतारने की विधि को मानचित्र प्रक्षेप कहते हैं।

वर्गीकरण 1: किस सतह पर उतारा

प्रकारकैसेकहाँ सबसे सही
बेलनाकार (Cylindrical)ग्लोब के चारों ओर काग़ज़ का बेलनभूमध्य रेखा के पास
शंक्वाकार (Conical)ग्लोब पर काग़ज़ की टोपी (शंकु)मध्य अक्षांश (जैसे भारत, अमेरिका, यूरोप)
खमध्य / शिरोबिंदु (Zenithal / Azimuthal)ग्लोब के एक बिंदु को छूता सपाट काग़ज़ध्रुवीय क्षेत्र या किसी एक केंद्र के चारों ओर

वर्गीकरण 2: कौन-सा गुण सही रखा

गुणनामउदाहरण
क्षेत्रफल सहीसमक्षेत्र (Equal-area / Homolographic)गॉल-पीटर्स, मॉलवाइड
आकार (छोटे भागों का) और दिशा सहीशुद्ध आकृतिक (Conformal / Orthomorphic)मर्केटर, लैम्बर्ट शंक्वाकार
केंद्र से दूरी सहीसमदूरस्थ (Equidistant)समदूरस्थ खमध्य
केंद्र से दिशा सहीदिगंशीय (Azimuthal)ध्रुवीय खमध्य

वर्गीकरण 3: प्रकाश का स्रोत कहाँ (खमध्य प्रक्षेपों में)

  • नोमोनिक (Gnomonic): प्रकाश ग्लोब के केंद्र पर; सभी बृहत् वृत्त सीधी रेखाएँ बनते हैं, इसलिए हवाई-समुद्री सबसे छोटे मार्ग खोजने में उपयोगी।
  • त्रिविम (Stereographic): प्रकाश सामने वाले ध्रुव पर।
  • लंबकोणीय (Orthographic): प्रकाश अनंत दूरी पर; अंतरिक्ष से दिखती पृथ्वी जैसा।

प्रमुख प्रक्षेप

प्रक्षेपविशेषताउपयोग / कमी
मर्केटर (1569, गेरार्डस मर्केटर)बेलनाकार, शुद्ध आकृतिक; स्थिर दिशा वाली रेखाएँ (Rhumb lines / लॉक्सोड्रोम) सीधीसमुद्री यात्रा; ऊँचे अक्षांशों पर क्षेत्रफल बहुत बढ़ा (ग्रीनलैंड अफ़्रीका जितना दिखता है, जबकि अफ़्रीका लगभग 14 गुना बड़ा है); ध्रुव दिखाए नहीं जा सकते
समदूरस्थ बेलनाकार (Equirectangular / Plate Carrée)अक्षांश-देशांतर रेखाएँ सीधी, बराबर दूरी पर, एक-दूसरे पर लंबसरल, कंप्यूटर नक्शों का आधार; ध्रुव पूरी चौड़ाई की रेखा बन जाते हैं (इस पेज का नक्शा)
गॉल-पीटर्ससमक्षेत्र बेलनाकारदेशों का सही क्षेत्रफल; आकार लंबे-खिंचे
मॉलवाइडअंडाकार, समक्षेत्रविश्व में वितरण (जनसंख्या, वर्षा) के मानचित्र
रॉबिन्सनसमझौता प्रक्षेप, कोई गुण पूरा सही नहीं पर सब कम ग़लतसामान्य विश्व मानचित्र
लैम्बर्ट शंक्वाकारशुद्ध आकृतिक, शंक्वाकारमध्य अक्षांश के देश, हवाई चार्ट
ध्रुवीय खमध्यकेंद्र (ध्रुव) से दिशा और दूरी सहीध्रुवीय क्षेत्र

ऊपर के 3D मॉडल में ग्लोब को धीरे-धीरे खोलिए: ध्रुव के पास की ज़मीन (ग्रीनलैंड, अंटार्कटिका) चौड़ी होती जाती है। यही प्रक्षेप की विकृति है।

विकृति को नापना: टिसॉट सूचक (Tissot's Indicatrix)

ग्लोब पर हर जगह बराबर आकार के छोटे गोले बनाइए और फिर उन्हें नक्शे पर उतारिए। नक्शे पर वे जैसे बनते हैं, उससे विकृति दिखती है:

  • गोले गोले ही रहें पर बड़े-छोटे हो जाएँ: आकृति सही, क्षेत्रफल ग़लत (जैसे मर्केटर)।
  • गोले अंडाकार हो जाएँ पर क्षेत्रफल बराबर रहे: क्षेत्रफल सही, आकृति ग़लत (जैसे गॉल-पीटर्स)।
  • मर्केटर पर किसी अक्षांश पर लंबाई sec(अक्षांश) गुना और क्षेत्रफल sec²(अक्षांश) गुना बढ़ता है: 30° पर क्षेत्रफल लगभग 1.33 गुना, 60° पर 4 गुना, 75° पर लगभग 15 गुना।

प्रक्षेप कैसे चुनें

उद्देश्यउपयुक्त प्रक्षेप
उष्ण कटिबंधीय देश (भूमध्य रेखा के पास)बेलनाकार
मध्य अक्षांश, पूर्व-पश्चिम फैले देश (भारत, अमेरिका)शंक्वाकार (लैम्बर्ट)
ध्रुवीय प्रदेशध्रुवीय खमध्य
विश्व में वितरण (जनसंख्या, वर्षा)समक्षेत्र (मॉलवाइड, इक्वल अर्थ)
समुद्री दिशा-पालनमर्केटर
सबसे छोटा हवाई मार्ग खोजनानोमोनिक

ताज़ा बहस: "नक्शा ठीक करो" (Correct The Map)

  • अगस्त 2025 में अफ़्रीकी संघ ने "Correct The Map" अभियान का समर्थन किया। उसका कहना है कि मर्केटर नक्शा अफ़्रीका को बहुत छोटा दिखाता है, जिससे लोगों की सोच पर असर पड़ता है।
  • अभियान स्कूलों और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से इक्वल अर्थ (Equal Earth, 2018) जैसे समक्षेत्र प्रक्षेप अपनाने की माँग करता है।
  • ध्यान दें: वेब के नक्शे (वेब मर्केटर) पास से देखने के लिए आकृति सही रखते हैं, इसलिए चलते हैं; पर पूरी दुनिया की तुलना के लिए समक्षेत्र प्रक्षेप बेहतर है।
मर्केटर पर बराबर आकार के गोले ध्रुवों की ओर बड़े दिखते हैं; ग्रीनलैंड और अफ़्रीका की असली तुलना

20भारत की स्थिति: अक्षांश-देशांतर में

बातमान
अक्षांशीय विस्तार (मुख्य भूमि)8°4' उ. से 37°6' उ.
देशांतरीय विस्तार68°7' पू. से 97°25' पू.
अक्षांश और देशांतर का विस्तारदोनों लगभग 30°
उत्तर-दक्षिण लंबाईलगभग 3,214 किमी
पूर्व-पश्चिम चौड़ाईलगभग 2,933 किमी
क्षेत्रफल32.8 लाख वर्ग किमी (विश्व का 2.4%), विश्व में सातवाँ
स्थलीय सीमालगभग 15,200 किमी
तटरेखा7,516.6 किमी (अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप सहित)

भारत के छोर

दिशास्थान
सबसे उत्तरीइंदिरा कोल (सियाचिन क्षेत्र, लद्दाख)
सबसे दक्षिणीइंदिरा पॉइंट, ग्रेट निकोबार (लगभग 6°45' उ.)
मुख्य भूमि का दक्षिणी सिराकन्याकुमारी (केप कोमोरिन, 8°4' उ.)
सबसे पश्चिमीगुहार मोती, कच्छ (गुजरात)
सबसे पूर्वीकिबिथू, अरुणाचल प्रदेश

कर्क रेखा

  • भारत को लगभग दो बराबर भागों में बाँटती है और 8 राज्यों से गुज़रती है: गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मिज़ोरम। झारखंड में यह राँची के पास से गुज़रती है।
  • कर्क रेखा के दक्षिण का भाग उष्ण कटिबंध में और उत्तर का भाग उपोष्ण/शीतोष्ण कटिबंध में है। फिर भी हिमालय मध्य एशिया की ठंडी हवाओं को रोकता है, इसलिए लगभग पूरे भारत की जलवायु उष्ण मानसूनी है।

दिन-रात की लंबाई

कन्याकुमारी भूमध्य रेखा के पास है, इसलिए वहाँ साल भर दिन-रात की लंबाई में बहुत कम अंतर होता है। कश्मीर उससे लगभग 26° उत्तर में है, इसलिए वहाँ गर्मियों में दिन बहुत लंबे और सर्दियों में बहुत छोटे होते हैं।

अक्षांशीय विस्तार के प्रभाव

प्रभावउदाहरण
दिन की लंबाई में अंतरकन्याकुमारी (8° उ.) में साल भर का अंतर लगभग 1 घंटा; श्रीनगर (34° उ.) में जून में लगभग 14½ घंटे का और दिसंबर में लगभग 10 घंटे का दिन
सूर्य का सिर पर आनाकर्क रेखा के दक्षिण के सब स्थानों पर साल में दो बार; उत्तर में कभी नहीं
तापांतरतटीय और दक्षिणी भागों में कम, उत्तरी मैदानों में बहुत अधिक
वनस्पति और फ़सलेंदक्षिण में उष्णकटिबंधीय, हिमालय में शीतोष्ण और अल्पाइन

देशांतरीय विस्तार के प्रभाव

  • अरुणाचल और गुजरात के सूर्योदय में लगभग 2 घंटे का अंतर; इसीलिए मानक समय की ज़रूरत।
  • पूर्वोत्तर में सर्दियों में शाम 4:30 के आसपास अँधेरा; दिन के उजाले का कम उपयोग।

हिंद महासागर में केंद्रीय स्थिति

  • भारत पूर्वी और पश्चिमी गोलार्ध के व्यापार मार्गों के बीच, हिंद महासागर के शीर्ष पर है; स्वेज़ नहर (1869) के बाद यूरोप से दूरी लगभग 7,000 किमी घटी।
  • भारत ही ऐसा देश है, जिसके नाम पर किसी महासागर का नाम है: हिंद महासागर।
  • दक्षिण में भारत की लंबी तटरेखा और द्वीप (अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप) इसे समुद्री शक्ति बनाते हैं।

21महत्त्वपूर्ण शब्दावली (हिंदी-अंग्रेज़ी)

हिंदीअंग्रेज़ीअर्थ
लघ्वक्ष गोलाभOblate Spheroidध्रुवों पर चपटा गोला
भू-आभGeoidपृथ्वी का वास्तविक आकार
धुरी / अक्षAxisवह काल्पनिक रेखा जिस पर पृथ्वी घूमती है
भूमध्य रेखा / विषुवत् वृत्तEquator0° अक्षांश
अक्षांश / समानांतरLatitude / Parallelभूमध्य रेखा से उत्तर-दक्षिण की कोणीय दूरी / उसकी रेखा
देशांतर / याम्योत्तरLongitude / Meridianप्रधान याम्योत्तर से पूर्व-पश्चिम की कोणीय दूरी / उसकी रेखा
प्रधान याम्योत्तरPrime Meridian0° देशांतर, ग्रीनविच
ग्रिड / ग्रैटिक्यूलGraticuleअक्षांश-देशांतर का जाल
बृहत् वृत्त / लघु वृत्तGreat / Small Circleकेंद्र पृथ्वी के केंद्र पर / नहीं
ताप कटिबंधHeat Zonesउष्ण, शीतोष्ण, शीत
स्थानीय समय / मानक समयLocal / Standard Timeसूर्य के अनुसार / देश के मानक याम्योत्तर के अनुसार
अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखाInternational Date Lineलगभग 180° याम्योत्तर
मानचित्र प्रक्षेपMap Projectionग्लोब की रेखाओं को समतल पर उतारने की विधि
प्रति-ध्रुवीय बिंदुAntipodeपृथ्वी के ठीक उलटी ओर का बिंदु
क्रांतिDeclinationउस दिन सूर्य जिस अक्षांश पर सिर के ऊपर हो
संक्रांति / विषुवSolstice / Equinox21 जून, 22 दिसंबर / 21 मार्च, 23 सितंबर
रंब रेखाRhumb lineस्थिर दिशा वाला मार्ग
प्रदर्शक भिन्नRepresentative Fraction (RF)मापनी को भिन्न में लिखना
लीप सेकंडLeap secondपरमाणु समय और पृथ्वी के घूमने को मिलाने के लिए जोड़ा गया सेकंड

22आम ग़लतफ़हमियाँ और सही बात

ग़लतफ़हमीसही बात
अक्षांश किलोमीटर में दूरी हैअक्षांश कोण है (अंश में); दूरी उससे निकाली जाती है
सब अक्षांश रेखाएँ बराबर लंबी हैंध्रुवों की ओर छोटी; सब देशांतर रेखाएँ बराबर हैं
देशांतर रेखाएँ समानांतर हैंनहीं, ध्रुवों पर मिलती हैं; समानांतर तो अक्षांश रेखाएँ हैं
भूमध्य रेखा पृथ्वी का सबसे गर्म भाग हैसबसे ऊँचे तापमान उपोष्ण मरुस्थलों (20°-30°) में मिलते हैं
कर्क रेखा पर सूर्य हर दिन सिर के ऊपर रहता हैकेवल 21 जून को
ग्रीनलैंड अफ़्रीका जितना बड़ा हैयह मर्केटर का भ्रम है; अफ़्रीका लगभग 14 गुना बड़ा है
तिथि रेखा ठीक 180° पर सीधी हैद्वीप-देशों के कारण कई जगह मुड़ी है
IST मिर्ज़ापुर शहर से गुज़रता है82½° पू. याम्योत्तर मिर्ज़ापुर के पास से गुज़रता है
ध्रुव तारा सबसे चमकीला तारा हैनहीं; सबसे चमकीला व्याध (Sirius) है; ध्रुव तारा अपनी जगह न बदलने के लिए प्रसिद्ध है
पृथ्वी बिल्कुल गेंद जैसी हैध्रुवों पर चपटी, भूमध्य रेखा पर उभरी (जियोइड)

23UPSC: प्रीलिम्स के तथ्यUPSC विशेष

  • पृथ्वी: लघ्वक्ष गोलाभ / भू-आभ; त्रिज्याओं में लगभग 21 किमी का अंतर; केंद्र से सबसे दूर बिंदु चिम्बोराज़ो।
  • 1° अक्षांश ≈ 111 किमी (ध्रुवों पर थोड़ा अधिक); 1° देशांतर = 111.3 × cos(अक्षांश) किमी, ध्रुवों पर शून्य।
  • सब याम्योत्तर बराबर लंबे और बृहत् वृत्त के आधे; अक्षांश रेखाओं में केवल भूमध्य रेखा बृहत् वृत्त।
  • 179 अक्षांश रेखाएँ, 360 देशांतर रेखाएँ (1° के अंतर पर)।
  • 15° = 1 घंटा; 1° = 4 मिनट; 1' = 4 सेकंड; पूर्व में समय आगे।
  • IST: 82°30' पू., मिर्ज़ापुर; GMT + 5:30; 5 राज्य; NPL नई दिल्ली रखता है।
  • कर्क रेखा 8 राज्य; राँची के पास; उज्जैन के पास।
  • नेपाल UTC + 5:45; चीन का एक ही समय क्षेत्र; रूस के 11।
  • प्रधान याम्योत्तर: 1884, वॉशिंगटन सम्मेलन।
  • तिथि रेखा: पश्चिम से पूर्व पार करें तो एक दिन घटाएँ।
  • मर्केटर: शुद्ध आकृतिक, दिशा सही, रंब रेखाएँ सीधी, क्षेत्रफल ग़लत; नोमोनिक: बृहत् वृत्त सीधी रेखाएँ।
  • भारत के छोर: इंदिरा कोल, इंदिरा पॉइंट, गुहार मोती, किबिथू।

कथन वाले प्रश्न (अभ्यास)

विचार कीजिए: (1) सभी अक्षांश रेखाएँ बृहत् वृत्त हैं। (2) सभी देशांतर रेखाओं की लंबाई बराबर है। (3) दो देशांतरों के बीच की दूरी ध्रुवों की ओर घटती है। कौन-से सही हैं?

(2) और (3)। (1) ग़लत: केवल भूमध्य रेखा बृहत् वृत्त है।

भारतीय मानक याम्योत्तर किस राज्य से नहीं गुज़रता? (a) ओडिशा (b) आंध्र प्रदेश (c) झारखंड (d) छत्तीसगढ़

(c) झारखंड।

कर्क रेखा किस राज्य से नहीं गुज़रती? (a) त्रिपुरा (b) ओडिशा (c) मिज़ोरम (d) झारखंड

(b) ओडिशा।

कौन-सा प्रक्षेप समुद्री दिशा-निर्धारण के लिए सबसे उपयुक्त है? (a) मॉलवाइड (b) गॉल-पीटर्स (c) मर्केटर (d) ध्रुवीय खमध्य

(c) मर्केटर।

और कथन वाले प्रश्न

विचार कीजिए: (1) नक्षत्र दिवस सौर दिवस से लगभग 4 मिनट छोटा है। (2) 1° देशांतर की दूरी 60° अक्षांश पर भूमध्य रेखा की आधी है। (3) मर्केटर प्रक्षेप पर बृहत् वृत्त सीधी रेखा बनते हैं। सही कथन?

(1) और (2)। मर्केटर पर रंब रेखाएँ सीधी होती हैं; बृहत् वृत्त नोमोनिक पर सीधे होते हैं।

भारत के संदर्भ में: (1) देश का अक्षांशीय और देशांतरीय विस्तार लगभग बराबर है। (2) फिर भी उत्तर-दक्षिण लंबाई पूर्व-पश्चिम चौड़ाई से अधिक है। (3) कारण यह है कि भारत में अक्षांश रेखाओं की लंबाई ध्रुवों की ओर बढ़ती है। सही?

(1) और (2)। (3) ग़लत: कारण यह है कि ध्रुवों की ओर देशांतरों के बीच की दूरी घटती है।

NavIC के बारे में: (1) यह वैश्विक तंत्र है। (2) NVS श्रृंखला में L1 बैंड जोड़ा गया है। (3) यह स्थिति के साथ समय-सेवा भी देता है। सही?

(2) और (3)। NavIC क्षेत्रीय तंत्र है।

24इस विषय से प्रश्न किस तरह आते हैंUPSC विशेष

यह टॉपिक पूरे भूगोल की नींव है, इसलिए हर स्तर की परीक्षा में आता है:

  • गणना वाले प्रश्न: दो स्थानों का समय, देशांतर का अंतर, तिथि रेखा पार करने पर दिन; मापनी बदलना (RF)।
  • मानचित्र पर स्थान: "उत्तर से दक्षिण का सही क्रम", कर्क रेखा या 82½° पू. किन राज्यों से गुज़रती है, भारत के छोर।
  • कथन वाले प्रश्न: बृहत् वृत्त, अक्षांश-देशांतर की विशेषताएँ, प्रक्षेप के गुण।
  • ताज़ा घटनाओं से जोड़कर: IST नियम 2026, NavIC, DIGIPIN, दो समय क्षेत्र की माँग, "Correct The Map"।
  • मेन्स (GS-1) में विश्लेषण: भारत के विस्तार का प्रभाव, मानक समय, प्रक्षेप की सीमाएँ; GS-3 में NavIC और अंतरिक्ष।
  • वैकल्पिक भूगोल और राज्य सेवाएँ: प्रक्षेप की रचना, टिसॉट सूचक, जियोइड; सिद्धांत के साथ आरेख।

तैयारी का तरीका: पहले NCERT टैब और सारे हल किए उदाहरण; फिर यह टैब; हर आरेख को एक बार हाथ से बनाकर देखें, क्योंकि मेन्स में आरेख से अंक बढ़ते हैं।

25UPSC मेन्स: पूरे आदर्श उत्तरUPSC विशेष

भारत के विशाल देशांतरीय विस्तार के प्रभाव बताइए। क्या भारत को दो समय क्षेत्र अपनाने चाहिए? (15 अंक, 250 शब्द)

भूमिका: भारत 68°7' पू. से 97°25' पू. तक, लगभग 29° देशांतर में फैला है। 1° = 4 मिनट के हिसाब से पूर्वी और पश्चिमी छोर के स्थानीय समय में लगभग 2 घंटे का अंतर है। फिर भी पूरे देश में एक ही समय, IST (82½° पू., UTC + 5:30), चलता है; अगस्त 2026 के विधिक माप विज्ञान (IST) नियमों ने इसे एकमात्र कानूनी समय संदर्भ बनाया है।

प्रभाव: (1) पूर्वोत्तर में सूर्य लगभग 2 घंटे पहले उगता और डूबता है; सर्दियों में शाम 4:30 बजे तक अँधेरा, जबकि दफ़्तर 10 बजे खुलते हैं; दिन के उजाले का नुक़सान। (2) शाम को बिजली की माँग जल्दी बढ़ती है; अध्ययनों के अनुसार अलग समय से बिजली की बचत हो सकती है। (3) लोगों की जैविक घड़ी और नींद पर असर। (4) पश्चिम (गुजरात) में उलटी स्थिति: सुबह देर तक अँधेरा। दो समय क्षेत्र के पक्ष: ऊर्जा की बचत, कार्य-उत्पादकता, असम का "चाय बागान समय" (IST से एक घंटा आगे) पहले से उदाहरण; अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़े देशों में कई क्षेत्र। विपक्ष: रेल-हवाई समय-सारणी और सिग्नल में भ्रम और दुर्घटना का ख़तरा; बैंकिंग, शेयर बाज़ार और प्रसारण में दो घड़ियाँ; समय-सीमा वाले क्षेत्र राज्यों के बीच से गुज़रेंगे; राष्ट्रीय एकता का प्रतीकात्मक प्रश्न। CSIR-NPL के वैज्ञानिकों ने 2018 में दो समय क्षेत्र (पूर्वोत्तर के लिए एक घंटा आगे) तकनीकी रूप से संभव बताए थे, पर सरकार ने एक ही समय रखा है। निष्कर्ष: बीच का रास्ता बेहतर लगता है: पूर्वोत्तर में दफ़्तर-स्कूल का समय एक घंटा पहले करना, जिससे एकता और सुविधा दोनों बने रहें। (उत्तर के साथ भारत का छोटा रेखाचित्र बनाकर 68°, 82½° और 97° पू. याम्योत्तर दिखाएँ।)

"हर मानचित्र किसी-न-किसी रूप में ग़लत होता है।" मानचित्र प्रक्षेप के संदर्भ में विवेचना कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)

भूमिका: गोलाकार सतह को बिना खींचे या फाड़े समतल नहीं किया जा सकता (गणितज्ञ गाउस का प्रमेय; संतरे के छिलके का उदाहरण)। इसलिए हर प्रक्षेप आकार, क्षेत्रफल, दूरी और दिशा में से कुछ ही गुण सही रख पाता है।

मुख्य भाग: (1) सतह के आधार पर: बेलनाकार (भूमध्य रेखा के पास सही), शंक्वाकार (मानक अक्षांश पर सही), खमध्य (केंद्र बिंदु के पास सही)। (2) गुण के आधार पर: समक्षेत्र (गॉल-पीटर्स, मॉलवाइड) में आकृति बिगड़ती है; शुद्ध आकृतिक (मर्केटर) में क्षेत्रफल, जैसे ग्रीनलैंड अफ़्रीका जितना दिखता है जबकि अफ़्रीका लगभग 14 गुना बड़ा है; समदूरस्थ में केवल केंद्र से दूरी सही। (3) टिसॉट सूचक से विकृति नापी जाती है। (4) 2025 का "Correct The Map" अभियान दिखाता है कि प्रक्षेप का चुनाव लोगों की सोच को भी प्रभावित करता है। निष्कर्ष: कोई प्रक्षेप सबसे अच्छा नहीं; उद्देश्य के अनुसार चुनाव ही सही मानचित्रकला है: नौसंचालन के लिए मर्केटर, वितरण के लिए समक्षेत्र, ध्रुवों के लिए खमध्य।

अक्षांश किसी स्थान की जलवायु को कैसे प्रभावित करता है? भारत के उदाहरण सहित समझाइए। (10 अंक, 150 शब्द)

भूमिका: अक्षांश से सूर्य की किरणों का कोण और दिन की लंबाई तय होती है; यही सूर्यातप और तापमान का मूल आधार है।

मुख्य भाग: (1) किरणों का कोण: निम्न अक्षांशों पर किरणें सीधी, कम क्षेत्र पर फैलती और कम वायुमंडल पार करती हैं, इसलिए अधिक गर्मी; उच्च अक्षांशों पर तिरछी। (2) दिन की लंबाई: कन्याकुमारी में साल भर लगभग बराबर; श्रीनगर में गर्मियों में लंबे दिन, सर्दियों में छोटे; इससे वार्षिक तापांतर बढ़ता है। (3) ताप कटिबंध: कर्क रेखा भारत को लगभग बीच से बाँटती है; दक्षिण उष्ण कटिबंध में, उत्तर उपोष्ण में। (4) दबाव और हवाएँ: अक्षांश के अनुसार दबाव पेटियाँ बनती हैं, जिनके खिसकने से मानसून जुड़ा है। (5) सीमाएँ: ऊँचाई (ऊटी, शिमला), समुद्र से दूरी (मुंबई बनाम दिल्ली), हिमालय की रुकावट भी उतनी ही अहम हैं; इसीलिए कर्क रेखा के उत्तर का भारत भी उष्ण मानसूनी है। निष्कर्ष: अक्षांश जलवायु का पहला, पर अकेला नहीं, नियंत्रक है।

भारत के लिए अपने उपग्रह नेविगेशन तंत्र (NavIC) का क्या महत्त्व है? इसकी चुनौतियाँ बताइए। (15 अंक, 250 शब्द)

भूमिका: NavIC ISRO का क्षेत्रीय उपग्रह नेविगेशन तंत्र है, जो भारत और उसके चारों ओर लगभग 1,500 किमी तक स्थान और समय बताता है। इसमें आम लोगों के लिए मानक सेवा और सुरक्षा बलों के लिए कूटबद्ध प्रतिबंधित सेवा है।

महत्त्व: (1) सामरिक स्वायत्तता: युद्ध या संकट में विदेशी तंत्र (GPS) का संकेत रुकने का ख़तरा नहीं। (2) समय-संप्रभुता: बैंकिंग, शेयर बाज़ार, दूरसंचार और बिजली ग्रिड को सटीक समय; IST नियम 2026 इसे देशी समय स्रोत मानते हैं। (3) आम उपयोग: मछुआरों को सीमा और मौसम चेतावनी, वाहन ट्रैकिंग, रेल, आपदा प्रबंधन, कृषि और सर्वेक्षण। (4) उद्योग: देशी चिप और उपकरण, अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था; पड़ोसी देशों को सेवा देकर कूटनीतिक लाभ। चुनौतियाँ: (1) पहली पीढ़ी के उपग्रहों में आयातित परमाणु घड़ियों की ख़राबी। (2) प्रक्षेपण विफलताएँ: IRNSS-1H (2017) और NVS-02 (2025)। (3) परिणाम: 2026 में केवल 3 उपग्रह काम में, अकेले स्थिति सेवा रुकी। (4) मोबाइल फ़ोनों में NavIC चिप का कम प्रसार (L1 बैंड से सुधार की उम्मीद)। (5) केवल क्षेत्रीय कवरेज। आगे का रास्ता: NVS-03, 04, 05 का समय पर प्रक्षेपण; अतिरिक्त (स्टैंडबाय) उपग्रह; देशी परमाणु घड़ी; फ़ोन कंपनियों के लिए NavIC अनिवार्य करना; भविष्य में अधिक उपग्रहों से क्षेत्र बढ़ाना। निष्कर्ष: NavIC केवल नक्शे का साधन नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा और डिजिटल अर्थव्यवस्था का आधार है; इसकी निरंतरता सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए।

अभ्यास के लिए और प्रश्न (उत्तर का ढाँचा)

अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा की आवश्यकता क्यों है? यह सीधी क्यों नहीं है? (150 शब्द)

180° पर पूर्व और पश्चिम से आने वाले समय में 24 घंटे का अंतर; तारीख़ बदलने का नियम; टेढ़ापन द्वीप-देशों को एक दिन में रखने के लिए; किरिबाती (1995), समोआ (2011), डायोमीड द्वीप; आरेख।

बृहत् वृत्त मार्ग क्या है? विमानन और नौपरिवहन में इसका महत्त्व समझाइए। (150 शब्द)

परिभाषा; सबसे छोटी दूरी; रंब रेखा से तुलना; नोमोनिक और मर्केटर का साथ में उपयोग; ध्रुवीय उड़ानें; ईंधन और समय की बचत।

पृथ्वी के अक्ष के झुकाव के भौगोलिक परिणामों की चर्चा कीजिए। (150 शब्द)

23½° झुकाव; विशेष अक्षांश रेखाएँ; ऋतुएँ; दिन-रात की लंबाई; ताप कटिबंध; मध्यरात्रि का सूर्य; झुकाव के बदलने से दीर्घकालीन जलवायु परिवर्तन (मिलनकोविच)।

26ताज़ा घटनाक्रम (अक्टूबर 2026 तक)UPSC विशेष

विषयक्या हुआकिस बात से जुड़ा
IST नियम, 2026अगस्त 2026 में विधिक माप विज्ञान (भारतीय मानक समय) नियम अधिसूचित; IST एकमात्र कानूनी समय संदर्भ, 180 दिन में पालनमानक समय, NPL
NavICजुलाई 2026 तक केवल 3 उपग्रह काम में; स्वतंत्र स्थिति सेवा रुकी, समय-सेवा जारी; NVS-03 का प्रक्षेपण 2026 के अंत में तयउपग्रह नेविगेशन
NVS-0229 जनवरी 2025 को GSLV-F15 से प्रक्षेपण (श्रीहरिकोटा का 100वाँ), पर वाल्व की ख़राबी से तय कक्षा नहीं मिलीISRO
DIGIPIN2025 में डाक विभाग का 10 अक्षरों वाला, 4 मी × 4 मी ग्रिड पर आधारित डिजिटल पताअक्षांश-देशांतर ग्रिड
Correct The Mapअगस्त 2025 में अफ़्रीकी संघ का समर्थन; मर्केटर की जगह इक्वल अर्थ जैसे समक्षेत्र प्रक्षेप की माँगमानचित्र प्रक्षेप
लीप सेकंड2022 के CGPM निर्णय के अनुसार 2035 तक बंद होंगेUTC, समय
एवरेस्ट की ऊँचाई2020 का नेपाल-चीन संयुक्त मान 8,848.86 मीजियोइड, ऊँचाई

यह भाग समय के साथ बदलता है; परीक्षा से पहले हर पंक्ति की ताज़ा स्थिति अवश्य देखें।

27अभ्यास: 50 बहुविकल्पीय प्रश्न (व्याख्या सहित)परीक्षा के प्रश्न

पृथ्वी का सबसे सही आकार कौन-सा शब्द बताता है? (a) गोला (b) भू-आभ (जियोइड) (c) अंडाकार (d) बेलन

(b) भू-आभ। "लघ्वक्ष गोलाभ" भी सही दिशा में है, पर जियोइड वास्तविक असमान सतह है।

भूमध्यरेखीय और ध्रुवीय त्रिज्या का अंतर लगभग: (a) 2 किमी (b) 21 किमी (c) 210 किमी (d) 2,100 किमी

(b) 21 किमी (6,378 − 6,357)। बहुत छोटा अंतर, इसलिए अंतरिक्ष से पृथ्वी गोल ही दिखती है।

पृथ्वी के केंद्र से सबसे दूर का बिंदु: (a) एवरेस्ट (b) K2 (c) चिम्बोराज़ो (d) किलिमंजारो

(c) चिम्बोराज़ो, क्योंकि यह भूमध्य रेखा के उभार पर है। एवरेस्ट समुद्र तल से सबसे ऊँचा है।

एराटोस्थनीज़ ने अलेक्ज़ेंड्रिया में छाया का कोण कितना पाया? (a) 23.5° (b) 7.2° (c) 15° (d) 1°

(b) 7.2°, जो 360° का 1/50 है; इसी से परिधि = 50 × दोनों नगरों की दूरी।

पृथ्वी का अक्ष कक्षा तल से कितना कोण बनाता है? (a) 23½° (b) 66½° (c) 90° (d) 45°

(b) 66½°। 23½° का झुकाव कक्षा तल पर बने लंब से है; दोनों का योग 90°।

नक्षत्र दिवस की लंबाई: (a) 24 घंटे (b) 23 घंटे 56 मिनट 4 सेकंड (c) 24 घंटे 4 मिनट (d) 23 घंटे

(b)। सौर दिवस औसतन 24 घंटे का है; अंतर कक्षा में रोज़ लगभग 1° आगे बढ़ने से।

भूमध्य रेखा पर पृथ्वी के घूर्णन की चाल लगभग: (a) 167 किमी/घंटा (b) 1,670 किमी/घंटा (c) 16,700 किमी/घंटा (d) 29.8 किमी/से.

(b) 1,670 किमी/घंटा। 29.8 किमी/से. परिक्रमा की चाल है।

निम्न में कौन बृहत् वृत्त नहीं है? (a) भूमध्य रेखा (b) 0° और 180° याम्योत्तर मिलकर (c) कर्क रेखा (d) प्रदीप्ति वृत्त

(c) कर्क रेखा लघु वृत्त है; भूमध्य रेखा के अलावा कोई अक्षांश रेखा बृहत् वृत्त नहीं।

दो स्थानों के बीच सबसे छोटा रास्ता किस पर होता है? (a) अक्षांश रेखा (b) रंब रेखा (c) बृहत् वृत्त (d) देशांतर रेखा ही हमेशा

(c) बृहत् वृत्त। रंब रेखा दिशा एक-सी रखती है पर लंबी होती है।

किस प्रक्षेप पर सभी बृहत् वृत्त सीधी रेखा बनते हैं? (a) मर्केटर (b) नोमोनिक (c) मॉलवाइड (d) गॉल-पीटर्स

(b) नोमोनिक (प्रकाश ग्लोब के केंद्र पर)। मर्केटर पर रंब रेखाएँ सीधी होती हैं।

अक्षांश किस प्रकार की राशि है? (a) किलोमीटर में दूरी (b) कोणीय दूरी (c) समय (d) ऊँचाई

(b) कोणीय दूरी, पृथ्वी के केंद्र से नापी गई; किमी उससे निकाले जाते हैं।

1° अक्षांश की दूरी कहाँ सबसे अधिक होती है? (a) भूमध्य रेखा (b) 45° (c) ध्रुवों के पास (d) सब जगह बिल्कुल बराबर

(c) ध्रुवों के पास (लगभग 111.7 किमी), क्योंकि वहाँ पृथ्वी चपटी है और वक्रता कम है।

1° के अंतर पर कुल अक्षांश रेखाएँ (ध्रुव छोड़कर): (a) 180 (b) 179 (c) 360 (d) 181

(b) 179: 89 उत्तर + 89 दक्षिण + भूमध्य रेखा।

किसी स्थान पर ध्रुव तारा क्षितिज से 25° ऊपर दिखता है। अक्षांश? (a) 65° उ. (b) 25° उ. (c) 25° द. (d) 115°

(b) 25° उ.। ध्रुव तारे की ऊँचाई = अक्षांश; दक्षिणी गोलार्ध में वह दिखता ही नहीं।

21 जून को 40° उ. पर दोपहर के सूर्य की ऊँचाई: (a) 50° (b) 73.5° (c) 26.5° (d) 63.5°

(b) 73.5° = 90 − (40 − 23.5)।

22 दिसंबर को दोपहर का सूर्य कहाँ सिर के ठीक ऊपर? (a) कर्क रेखा (b) भूमध्य रेखा (c) मकर रेखा (d) आर्कटिक वृत्त

(c) मकर रेखा। उस दिन उत्तरी गोलार्ध में सबसे छोटा दिन।

कर्क रेखा पर सूर्य साल में कितनी बार दोपहर में सिर के ठीक ऊपर आता है? (a) कभी नहीं (b) एक बार (c) दो बार (d) हर दिन

(b) एक बार (21 जून)। कर्क और मकर रेखा के बीच के स्थानों पर दो बार।

आर्कटिक वृत्त किस अक्षांश पर है? (a) 23½° उ. (b) 66½° उ. (c) 90° उ. (d) 60° उ.

(b) 66½° = 90° − 23½°।

कर्क रेखा धीरे-धीरे किस ओर खिसक रही है? (a) उत्तर की ओर (b) भूमध्य रेखा (दक्षिण) की ओर (c) पूर्व की ओर (d) बिल्कुल स्थिर है

(b) दक्षिण की ओर, लगभग 14-15 मीटर प्रति वर्ष, क्योंकि अभी अक्ष का झुकाव घट रहा है।

पृथ्वी की सतह का सबसे बड़ा एकल ताप कटिबंध: (a) उत्तरी शीतोष्ण (b) उष्ण (c) उत्तरी शीत (d) दक्षिणी शीतोष्ण

(b) उष्ण कटिबंध, लगभग 40% (sin 23½° ≈ 0.40)।

पृथ्वी पर सबसे ऊँचे तापमान प्रायः कहाँ मिलते हैं? (a) भूमध्य रेखा पर (b) उपोष्ण मरुस्थलों में (c) ध्रुवों पर (d) 60° अक्षांश पर

(b) उपोष्ण मरुस्थल (सहारा, थार); भूमध्य रेखा पर बादल और वर्षा अधिक होने से अधिकतम तापमान कम रहता है।

सभी देशांतर रेखाओं के बारे में सही: (a) समानांतर हैं (b) बराबर लंबाई की हैं (c) पूर्ण वृत्त हैं (d) भूमध्य रेखा पर मिलती हैं

(b) बराबर लंबाई (अर्धवृत्त); ये ध्रुवों पर मिलती हैं, इसलिए समानांतर नहीं।

60° अक्षांश पर 1° देशांतर की दूरी लगभग: (a) 111 किमी (b) 96 किमी (c) 56 किमी (d) 0

(c) 56 किमी (111.3 × cos 60°)।

प्रधान याम्योत्तर किस सम्मेलन में तय हुआ? (a) पेरिस 1850 (b) वॉशिंगटन 1884 (c) लंदन 1900 (d) जिनेवा 1919

(b) वॉशिंगटन, 1884, अंतर्राष्ट्रीय याम्योत्तर सम्मेलन।

समुद्र में देशांतर निकालने की समस्या किसके आविष्कार से हल हुई? (a) दूरबीन (b) समुद्री क्रोनोमीटर (c) कंपास (d) सेक्सटैंट

(b) जॉन हैरिसन का समुद्री क्रोनोमीटर (H4)। सेक्सटैंट से अक्षांश नापा जाता था।

नई दिल्ली (28°37' उ., 77°13' पू.) का प्रति-ध्रुवीय बिंदु: (a) 28°37' द., 77°13' प. (b) 28°37' द., 102°47' प. (c) 61°23' द., 102°47' प. (d) 28°37' उ., 102°47' प.

(b)। अक्षांश वही पर उलटा; देशांतर 180° − 77°13' = 102°47' और दिशा उलटी।

DIGIPIN भारत को लगभग किस आकार के खानों में बाँटता है? (a) 1 किमी × 1 किमी (b) 100 मी × 100 मी (c) 4 मी × 4 मी (d) 1 मी × 1 मी

(c) 4 मी × 4 मी, 10 अक्षरों के कोड से।

भारत किन गोलार्धों में है? (a) उत्तरी और पश्चिमी (b) उत्तरी और पूर्वी (c) दक्षिणी और पूर्वी (d) केवल उत्तरी

(b) उत्तरी और पूर्वी गोलार्ध में पूरी तरह।

ग्रीनविच में दोपहर 12 बजे हैं; 45° प. पर समय? (a) दोपहर 3 बजे (b) सुबह 9 बजे (c) सुबह 3 बजे (d) शाम 4:30

(b) सुबह 9 बजे: 45 × 4 = 180 मिनट पीछे।

ग्रीनविच में सोमवार रात 10 बजे; 90° पू. पर? (a) सोमवार शाम 4 बजे (b) मंगलवार सुबह 4 बजे (c) सोमवार रात 4 बजे (d) मंगलवार सुबह 10 बजे

(b) मंगलवार सुबह 4 बजे: 6 घंटे आगे, तारीख़ बदल गई।

दो स्थानों के समय में 2 घंटे 20 मिनट का अंतर; देशांतर का अंतर? (a) 35° (b) 20° (c) 70° (d) 140°

(a) 35° = 140 मिनट ÷ 4।

जहाज़ पर स्थानीय दोपहर है और ग्रीनविच घड़ी सुबह 8 बजे बताती है। देशांतर? (a) 60° प. (b) 60° पू. (c) 120° पू. (d) 8° पू.

(b) 60° पू.: स्थानीय समय 4 घंटे आगे है, यानी स्थान पूर्व में।

भारतीय मानक याम्योत्तर: (a) 82° पू. (b) 82°30' पू. (c) 80°30' पू. (d) 85° पू.

(b) 82°30' पू., मिर्ज़ापुर के पास; 7½° का गुणज होने से समय UTC + 5:30।

भारतीय मानक याम्योत्तर किस राज्य से नहीं गुज़रता? (a) मध्य प्रदेश (b) छत्तीसगढ़ (c) बिहार (d) आंध्र प्रदेश

(c) बिहार। पाँच राज्य: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्र प्रदेश।

विधिक माप विज्ञान (IST) नियम 2026 किस अधिनियम के अंतर्गत बने? (a) भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम 2016 (b) विधिक माप विज्ञान अधिनियम 2009 (c) सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 (d) उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019

(b) विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009 (उपभोक्ता मामले विभाग)।

भारत में IST कौन-सी संस्था रखती है? (a) ISRO (b) CSIR-NPL, नई दिल्ली (c) भारतीय सर्वेक्षण विभाग (d) IMD

(b) CSIR-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला, परमाणु घड़ियों से।

नेपाल का मानक समय: (a) UTC + 5:30 (b) UTC + 5:45 (c) UTC + 6:00 (d) UTC + 5:00

(b) UTC + 5:45; यह दुनिया के गिने-चुने पौने घंटे वाले समयों में है।

अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा को पूर्व से पश्चिम (अमेरिका से जापान की ओर) पार करने पर: (a) एक दिन घटाएँ (b) एक दिन जोड़ें (c) कुछ न बदले (d) 12 घंटे जोड़ें

(b) एक दिन जोड़ें। पश्चिम से पूर्व पार करने पर एक दिन घटाएँ।

2011 में तिथि रेखा का पक्ष बदलकर किस देश ने 30 दिसंबर छोड़ दिया? (a) फ़िजी (b) टोंगा (c) समोआ (d) किरिबाती

(c) समोआ। किरिबाती ने 1995 में रेखा पूर्व की ओर करवाई।

अब तक कुल कितने लीप सेकंड जोड़े गए हैं? (a) 10 (b) 27 (c) 37 (d) 72

(b) 27 (1972 से 2016 तक); 2035 तक इन्हें बंद करने का निर्णय है।

सही स्थान बताने के लिए कम-से-कम कितने नेविगेशन उपग्रहों के संकेत चाहिए? (a) 2 (b) 3 (c) 4 (d) 7

(c) 4: तीन से अक्षांश, देशांतर, ऊँचाई; चौथा घड़ी की ग़लती के लिए।

NavIC का कवरेज क्षेत्र: (a) पूरा विश्व (b) भारत और उसके लगभग 1,500 किमी आगे तक (c) केवल भारत की भूमि (d) पूरा एशिया

(b)। यह क्षेत्रीय तंत्र है।

निम्न में वैश्विक नेविगेशन तंत्र नहीं है: (a) Galileo (b) BeiDou (c) GLONASS (d) QZSS

(d) QZSS जापान का क्षेत्रीय तंत्र है।

1 : 50,000 के नक्शे पर 6.4 सेमी की असली दूरी: (a) 32 किमी (b) 3.2 किमी (c) 0.32 किमी (d) 320 किमी

(b) 3.2 किमी = 6.4 × 50,000 सेमी।

निम्न में सबसे बड़ी मापनी कौन-सी है? (a) 1 : 10,00,000 (b) 1 : 2,50,000 (c) 1 : 50,000 (d) 1 : 10,000

(d) 1 : 10,000। भिन्न जितना बड़ा (हर जितना छोटा), मापनी उतनी बड़ी और विवरण अधिक।

भारतीय सर्वेक्षण विभाग का मुख्यालय: (a) कोलकाता (b) देहरादून (c) हैदराबाद (d) नई दिल्ली

(b) देहरादून; स्थापना 1767। NATMO कोलकाता में है।

मर्केटर प्रक्षेप पर 60° अक्षांश के पास क्षेत्रफल लगभग कितना गुना दिखता है? (a) 2 (b) 4 (c) 1.33 (d) 15

(b) 4 गुना (sec² 60° = 4); 75° पर लगभग 15 गुना।

पूर्व-पश्चिम फैले मध्य अक्षांश के देश के लिए उपयुक्त प्रक्षेप: (a) बेलनाकार (b) शंक्वाकार (c) ध्रुवीय खमध्य (d) नोमोनिक

(b) शंक्वाकार, जो मानक अक्षांश के पास सबसे सही होता है।

2025 में अफ़्रीकी संघ ने किस प्रक्षेप के उपयोग का समर्थन किया? (a) मर्केटर (b) इक्वल अर्थ (c) नोमोनिक (d) प्लेट कैरी

(b) इक्वल अर्थ (समक्षेत्र), "Correct The Map" अभियान के तहत।

भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु: (a) कन्याकुमारी (b) इंदिरा पॉइंट (c) रामेश्वरम (d) मिनिकॉय

(b) इंदिरा पॉइंट (ग्रेट निकोबार, लगभग 6°45' उ.)। कन्याकुमारी मुख्य भूमि का दक्षिणी सिरा है।

28एक नज़र मेंयाद रखें

  • पृथ्वी: लघ्वक्ष गोलाभ / भू-आभ; त्रिज्या 6,378 (भूमध्य) और 6,357 किमी (ध्रुव); परिधि लगभग 40,075 किमी।
  • धुरी 23½° झुकी (कक्षा-तल से 66½°); घूर्णन पश्चिम से पूर्व, लगभग 24 घंटे।
  • अक्षांश: 0° से 90° उ./द.; पूर्ण वृत्त, समानांतर, ध्रुवों की ओर छोटे; 179 रेखाएँ; 1° ≈ 111 किमी।
  • देशांतर: 0° से 180° पू./प.; अर्धवृत्त, बराबर लंबे, ध्रुवों पर मिलते; 360 रेखाएँ; दूरी cos(अक्षांश) के साथ घटती।
  • कर्क 23½° उ. (21 जून), मकर 23½° द. (22 दिसंबर), आर्कटिक 66½° उ., अंटार्कटिक 66½° द.।
  • ताप कटिबंध: उष्ण (लगभग 40%), शीतोष्ण (लगभग 52%), शीत (लगभग 8%)।
  • 1° = 4 मिनट, 15° = 1 घंटा; पूर्व में समय आगे; एक गोलार्ध में देशांतर घटाएँ, अलग में जोड़ें।
  • IST: 82½° पू., मिर्ज़ापुर, GMT + 5:30, 5 राज्य; प्रधान याम्योत्तर: ग्रीनविच, 1884।
  • तिथि रेखा: लगभग 180°; पश्चिम से पूर्व पार करें तो एक दिन घटाएँ।
  • प्रक्षेप: बेलनाकार/शंक्वाकार/खमध्य; मर्केटर = दिशा सही, क्षेत्रफल ग़लत।
  • भारत: 8°4'-37°6' उ., 68°7'-97°25' पू.; 32.8 लाख वर्ग किमी (2.4%), सातवाँ; कर्क रेखा 8 राज्यों से (झारखंड सहित)।
  • नया जोड़: नक्षत्र दिवस 23 घं 56 मि 4 से.; दोपहर के सूर्य की ऊँचाई = 90° − |अक्षांश − क्रांति|; कर्क रेखा हर वर्ष लगभग 15 मी दक्षिण की ओर।
  • ताज़ा: IST नियम 2026 (एक राष्ट्र, एक समय); NavIC में 3 उपग्रह काम में, NVS-03 बाकी; DIGIPIN 4 मी × 4 मी; लीप सेकंड 2035 तक बंद; Correct The Map (2025)।

© Pankaj Bediya · TGT Geography · geoland.in

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