भारत का भौतिक स्वरूप: छह विभाग, एक-दूसरे के पूरक
भारत में लगभग हर तरह की भू-आकृति मिलती है: पर्वत, मैदान, पठार, मरुस्थल, तट और द्वीप। ये अलग-अलग भूगर्भीय कालों में बनी हैं। प्रायद्वीपीय पठार पृथ्वी के सबसे पुराने भूभागों में से एक है, जबकि हिमालय और उत्तरी मैदान सबसे नए हैं।
प्लेट विवर्तनिकी के अनुसार गोंडवाना से टूटकर उत्तर की ओर खिसकी भारत-ऑस्ट्रेलियाई प्लेट जब यूरेशियाई प्लेट से टकराई, तो बीच के टेथिस की परतदार चट्टानें मुड़कर हिमालय बनीं, और आगे बने गर्त में नदियों के जलोढ़ से उत्तरी मैदान बना।
याद रखें
- छह भौतिक विभाग: हिमालय, उत्तरी मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, भारतीय मरुस्थल, तटीय मैदान, द्वीप समूह।
- हिमालय: नवीन वलित पर्वत; लंबाई लगभग 2,400 किमी; चौड़ाई कश्मीर में 400 किमी, अरुणाचल में 150 किमी।
- तीन श्रेणियाँ: हिमाद्रि (औसत 6,000 मी), हिमाचल (3,700-4,500 मी), शिवालिक (900-1,100 मी); बीच की घाटियाँ दून।
- उत्तरी मैदान: लगभग 7 लाख वर्ग किमी; भाबर (8-16 किमी), तराई, बांगर (पुराना जलोढ़), खादर (नया जलोढ़)।
- पठार: मध्य उच्चभूमि (नर्मदा के उत्तर) और दक्कन का पठार (दक्षिण); अनाईमुडी 2,695 मी, महेंद्रगिरि 1,501 मी।
- मरुस्थल: वर्षा 150 मिमी से कम; बरखान टीले; लूनी एकमात्र बड़ी नदी।
- तट: पश्चिम में कोंकण, कन्नड़, मालाबार; पूर्व में उत्तरी सरकार, कोरोमंडल; चिल्का सबसे बड़ी खारे पानी की झील।
- द्वीप: लक्षद्वीप (प्रवाल, 32 वर्ग किमी, कवरत्ती); अंडमान-निकोबार (डूबी पर्वत श्रेणियाँ)।
नोट्सपढ़ने और पढ़ाने के लिए पूरी जानकारी
NCERT कक्षा 9 · समकालीन भारत 1 (भूगोल) · अध्याय 2: भारत का भौतिक स्वरूप
1भूमिका: इतनी विविधता क्यों?
- भारत एक विशाल देश है और यहाँ सभी प्रकार की भू-आकृतियाँ मिलती हैं: पर्वत, मैदान, मरुस्थल, पठार और द्वीप समूह।
- भारत की भूमि में बहुत अधिक भौतिक विभिन्नताएँ हैं। भूगर्भशास्त्र के अनुसार प्रायद्वीपीय पठार पृथ्वी की सतह का सबसे प्राचीन भाग है। इसे स्थिर भूभाग माना जाता है।
- हिमालय और उत्तरी मैदान सबसे नवीनतम भू-आकृतियाँ हैं। भूगर्भशास्त्र की दृष्टि से हिमालय पर्वत अस्थिर भाग है।
- हिमालय की पूरी पर्वत श्रृंखला युवा स्थलाकृति है, जिसमें ऊँची चोटियाँ, गहरी घाटियाँ और तेज़ बहने वाली नदियाँ हैं।
- उत्तरी मैदान जलोढ़ निक्षेपों से बने हैं। प्रायद्वीपीय पठार आग्नेय तथा रूपांतरित चट्टानों से बना है, जिनमें धीरे-धीरे उठी पहाड़ियाँ और चौड़ी घाटियाँ हैं।
2प्रमुख भू-आकृतियों की उत्पत्ति: प्लेट विवर्तनिकी
NCERT: प्लेट विवर्तनिकी के सिद्धांत के अनुसार पृथ्वी की ऊपरी पर्पटी सात बड़ी और कुछ छोटी प्लेटों से बनी है। प्लेटों की गति से प्लेटों के अंदर और ऊपर की महाद्वीपीय चट्टानों में दबाव पैदा होता है; इससे वलन, भ्रंश और ज्वालामुखी क्रियाएँ होती हैं।
प्लेटों की तीन तरह की गति
- अभिसारी (पास आना): कुछ प्लेटें एक-दूसरे के पास आकर टकराती हैं (हिमालय यहीं बना)।
- अपसारी (दूर जाना): कुछ प्लेटें एक-दूसरे से दूर जाती हैं।
- रूपांतर (अगल-बगल खिसकना): कुछ प्लेटें एक-दूसरे के अगल-बगल खिसकती हैं।
- प्लेटों की गति से पृथ्वी पर महाद्वीपों की स्थिति और आकार लाखों वर्षों में बदलते रहे हैं।
गोंडवाना से हिमालय तक
- सबसे प्राचीन भूभाग, यानी प्रायद्वीपीय भाग, गोंडवाना भूमि का हिस्सा था। गोंडवाना भूमि में भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ़्रीका, दक्षिण अमेरिका और अंटार्कटिका शामिल थे।
- संवहनीय धाराओं ने पर्पटी को अनेक टुकड़ों में बाँट दिया। गोंडवाना से अलग होकर भारत-ऑस्ट्रेलियाई प्लेट उत्तर की ओर खिसकने लगी।
- उत्तर की ओर खिसकने से यह प्लेट अपने से कहीं बड़ी यूरेशियाई प्लेट से टकराई।
- इस टक्कर से इन दोनों प्लेटों के बीच स्थित टेथिस भू-अभिनति (Tethys) की अवसादी (परतदार) चट्टानें वलित होकर हिमालय और पश्चिम एशिया की पर्वत श्रृंखलाओं के रूप में विकसित हो गईं।
- टेथिस के हिमालय के रूप में ऊपर उठने और प्रायद्वीपीय पठार के उत्तरी किनारे के नीचे धँसने से एक बड़ी द्रोणी (गर्त) बनी। समय के साथ उत्तर के पर्वतों और दक्षिण के प्रायद्वीपीय पठार से बहने वाली नदियों के अवसादों से यह बेसिन भर गया। इस तरह जलोढ़ निक्षेपों से बना समतल उत्तरी मैदान विकसित हुआ।
- हिमालय के नीचे क्या है? टक्कर में भारतीय प्लेट की पर्पटी तिब्बत के नीचे घुसती गई। ऊपर की परतें दबकर मुड़ीं, एक के ऊपर एक चढ़ीं, और पर्पटी बहुत मोटी हो गई। यह मोटा भाग नीचे मैंटल में धँसकर पर्वत की जड़ बनाता है (3D मॉडल का दृश्य 2 देखिए)।
- हिमालय अब भी बढ़ रहा है: भारतीय प्लेट आज भी लगभग 5 सेमी प्रति वर्ष उत्तर की ओर खिसक रही है। इसी कारण हिमालय क्षेत्र में भूकंप आते हैं।
3भारत के प्रमुख भौतिक विभाग
NCERT: भारत की भौतिक आकृतियों को निम्नलिखित भू-आकृतिक विभागों में बाँटा जा सकता है:
- हिमालय पर्वत श्रृंखला
- उत्तरी मैदान
- प्रायद्वीपीय पठार
- भारतीय मरुस्थल
- तटीय मैदान
- द्वीप समूह
- (3D मॉडल का दृश्य 1: किसी विभाग का नाम दबाइए; वह भाग असली धरातल पर रंग से उभरेगा।)
4हिमालय पर्वत
- हिमालय भारत की उत्तरी सीमा पर फैली भूगर्भीय रूप से युवा एवं वलित पर्वत श्रृंखला है। ये पर्वत श्रृंखलाएँ पश्चिम-पूर्व दिशा में सिंधु से ब्रह्मपुत्र तक फैली हैं।
- हिमालय विश्व की सबसे ऊँची पर्वत श्रेणी है और सबसे ऊबड़-खाबड़ भी।
- ये एक अर्धवृत्त के आकार में लगभग 2,400 किमी की लंबाई में फैले हैं। इनकी चौड़ाई कश्मीर में 400 किमी और अरुणाचल प्रदेश में 150 किमी है।
- पश्चिमी भाग की तुलना में पूर्वी भाग की ऊँचाई में अधिक विविधता पाई जाती है।
- अपने देशांतरीय विस्तार के साथ हिमालय को तीन भागों में बाँटा जा सकता है।
तीन समानांतर श्रृंखलाएँ
| श्रृंखला | दूसरा नाम | ऊँचाई | पहचान |
|---|---|---|---|
| हिमाद्रि | महान या आंतरिक हिमालय | औसत 6,000 मी | सबसे लगातार; सबसे ऊँची चोटियाँ; भीतरी भाग ग्रेनाइट; सदा बर्फ़ से ढकी; अनेक हिमनद |
| हिमाचल | लघु हिमालय | 3,700 से 4,500 मी; औसत चौड़ाई 50 किमी | अत्यधिक संपीडित और परिवर्तित चट्टानें; पीर पंजाल (सबसे लंबी), धौलाधार, महाभारत श्रृंखलाएँ; कश्मीर, कांगड़ा, कुल्लू घाटियाँ; पर्वतीय नगर |
| शिवालिक | बाह्य हिमालय | 900 से 1,100 मी; चौड़ाई 10 से 50 किमी | नदियों की लाई असंपिंडित (ढीली) तलछट से बनी |
- हिमाद्रि के वलय असममित प्रकार के हैं।
- दून: लघु हिमालय और शिवालिक के बीच की लंबवत् (अनुदैर्ध्य) घाटी को दून कहते हैं। जैसे देहरादून, कोटलीदून, पाटलीदून।
प्रमुख चोटियाँ
| चोटी | देश | ऊँचाई (मी) |
|---|---|---|
| माउंट एवरेस्ट | नेपाल | 8,848 |
| कंचनजंगा | भारत | 8,598 |
| मकालू | नेपाल | 8,481 |
| धौलागिरि | नेपाल | 8,172 |
| नंगा पर्वत | भारत | 8,126 |
| अन्नपूर्णा | नेपाल | 8,078 |
| नंदा देवी | भारत | 7,817 |
| कामेत | भारत | 7,756 |
| नामचा बरवा | भारत | 7,756 |
| गुरला मांधाता | नेपाल | 7,728 |
पश्चिम से पूर्व: नदी घाटियों के आधार पर विभाग
| विभाग | किन नदियों के बीच | दूसरे नाम |
|---|---|---|
| पंजाब हिमालय | सिंधु और सतलुज | पश्चिम से पूर्व: कश्मीर और हिमाचल हिमालय |
| कुमाऊँ हिमालय | सतलुज और काली | |
| नेपाल हिमालय | काली और तिस्ता | |
| असम हिमालय | तिस्ता और दिहांग |
- ब्रह्मपुत्र हिमालय की सबसे पूर्वी सीमा बनाती है। दिहांग महाखड्ड के बाद हिमालय दक्षिण की ओर तेज़ी से मुड़कर भारत की पूर्वी सीमा बनाता है।
- इन्हें पूर्वांचल या पूर्वी पहाड़ियाँ और पर्वत कहते हैं। ये पहाड़ियाँ उत्तर-पूर्वी राज्यों से होकर गुज़रती हैं और मज़बूत बलुआ पत्थरों (अवसादी शैल) से बनी हैं। ये घने जंगलों से ढकी हैं और अधिकतर समानांतर श्रृंखलाओं एवं घाटियों के रूप में फैली हैं।
- पूर्वांचल में पटकाई, नागा, मिज़ो और मणिपुर की पहाड़ियाँ शामिल हैं।
5उत्तरी मैदान
- उत्तरी मैदान तीन प्रमुख नदी-तंत्रों, सिंधु, गंगा एवं ब्रह्मपुत्र, तथा इनकी सहायक नदियों से बना है। यह मैदान जलोढ़ मृदा से बना है।
- लाखों वर्षों में हिमालय के गिरिपाद में स्थित बहुत बड़े बेसिन (द्रोणी) में जलोढ़ का निक्षेप हुआ, जिससे यह उपजाऊ मैदान बना।
- इसका विस्तार 7 लाख वर्ग किमी पर है। यह मैदान लगभग 2,400 किमी लंबा और 240 से 320 किमी चौड़ा है।
- यह सघन जनसंख्या वाला भौगोलिक क्षेत्र है। समृद्ध मृदा, पर्याप्त जल और अनुकूल जलवायु के कारण कृषि की दृष्टि से यह भारत का अत्यधिक उत्पादक क्षेत्र है।
- नदियाँ निचले भागों में ढाल कम होने से धीमी हो जाती हैं और नदीय द्वीप बनाती हैं। माजुली (ब्रह्मपुत्र में) विश्व का सबसे बड़ा बसा हुआ नदीय द्वीप है।
- निचले भाग में नदियाँ कई धाराओं में बँट जाती हैं: इन्हें वितरिकाएँ कहते हैं।
तीन भाग (पश्चिम से पूर्व)
| भाग | नदियाँ | कहाँ |
|---|---|---|
| पंजाब का मैदान (पश्चिमी भाग) | सिंधु और उसकी सहायक: झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, सतलुज | बड़ा भाग पाकिस्तान में; यहाँ दोआब बहुत हैं |
| गंगा का मैदान | घग्गर और तिस्ता नदियों के बीच | हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड का कुछ भाग, पश्चिम बंगाल |
| ब्रह्मपुत्र का मैदान | ब्रह्मपुत्र | मुख्यतः असम |
- दोआब = "दो" (दो) + "आब" (पानी): दो नदियों के बीच का भाग।
उच्चावच के आधार पर चार भाग
| भाग | पहचान |
|---|---|
| भाबर | शिवालिक की ढाल के समानांतर 8 से 16 किमी चौड़ी पट्टी; नदियाँ यहाँ कंकड़-पत्थर जमा करती हैं; सभी धाराएँ भाबर में लुप्त हो जाती हैं |
| तराई | भाबर के दक्षिण में धाराएँ फिर निकल आती हैं; नम, दलदली क्षेत्र; पहले घने वन और वन्य प्राणी; बँटवारे के बाद पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को खेती के लिए वन काटकर भूमि दी गई |
| बांगर | मैदान का सबसे बड़ा भाग पुराने जलोढ़ का; बाढ़ वाले मैदान से ऊपर वेदिका जैसा; मिट्टी में चूनेदार निक्षेप (कंकड़) |
| खादर | बाढ़ वाले मैदानों के नए, युवा निक्षेप; लगभग हर साल पुनर्निर्माण; बहुत उपजाऊ, गहन खेती के लिए आदर्श |
6प्रायद्वीपीय पठार
- प्रायद्वीपीय पठार एक मेज़ की आकृति वाला स्थल है, जो पुराने क्रिस्टलीय, आग्नेय तथा रूपांतरित शैलों से बना है।
- यह गोंडवाना भूमि के टूटने और अपवाह के कारण बना था, इसलिए यह प्राचीनतम भूभाग का एक हिस्सा है।
- इस पठारी भाग में चौड़ी तथा छिछली घाटियाँ एवं गोलाकार पहाड़ियाँ हैं।
- इस पठार के दो मुख्य भाग हैं: मध्य उच्चभूमि और दक्कन का पठार।
मध्य उच्चभूमि
- नर्मदा नदी के उत्तर में प्रायद्वीपीय पठार का वह भाग जो मालवा पठार के अधिकतर भागों पर फैला है।
- इसके दक्षिण में विंध्य श्रृंखला है (जो दक्षिण में सतपुड़ा से और उत्तर-पश्चिम में अरावली से घिरी है)। पश्चिम में यह धीरे-धीरे राजस्थान के बलुई और पथरीले मरुस्थल से मिल जाता है।
- इस क्षेत्र में बहने वाली नदियाँ चंबल, सिंध, बेतवा तथा केन दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर बहती हैं; यह इस क्षेत्र के ढाल को दर्शाता है।
- मध्य उच्चभूमि पश्चिम में चौड़ी और पूर्व में संकीर्ण है। इसके पूर्वी विस्तार को स्थानीय रूप से बुंदेलखंड तथा बघेलखंड कहते हैं। इसके और पूर्व के विस्तार को दामोदर नदी द्वारा अपवाहित छोटानागपुर पठार दर्शाता है।
दक्कन का पठार
- नर्मदा नदी के दक्षिण में एक त्रिभुजाकार भूभाग। उत्तर में इसके चौड़े आधार पर सतपुड़ा की श्रृंखला है।
- पूर्व में महादेव, कैमूर की पहाड़ियाँ तथा मैकाल श्रृंखला इसके पूर्वी विस्तार हैं।
- दक्कन का पठार पश्चिम में ऊँचा है और पूर्व की ओर कम ढाल वाला है।
- इसका एक भाग उत्तर-पूर्व में भी है, जिसे मेघालय पठार, कार्बी-एंगलोंग पठार तथा उत्तर कचार पहाड़ी के नाम से जाना जाता है। यह एक भ्रंश द्वारा छोटानागपुर पठार से अलग हो गया है। पश्चिम से पूर्व की ओर तीन महत्वपूर्ण पहाड़ियाँ: गारो, खासी और जयंतिया।
पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट
| आधार | पश्चिमी घाट | पूर्वी घाट |
|---|---|---|
| स्थिति | पश्चिमी तट के समानांतर | महानदी घाटी से दक्षिण में नीलगिरि तक |
| निरंतरता | लगातार; केवल दर्रों (थाल, भोर, पाल घाट) से पार | अनियमित, टूटे हुए; बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियों ने काट दिया |
| ऊँचाई | औसत 900 से 1,600 मी; उत्तर से दक्षिण की ओर ऊँचाई बढ़ती है | औसत 600 मी |
| सबसे ऊँची चोटी | अनाईमुडी (2,695 मी), दोड्डाबेट्टा (2,637 मी) | महेंद्रगिरि (1,501 मी) |
| वर्षा पर असर | नम हवाओं को रोककर पश्चिमी ढाल पर पर्वतीय वर्षा | कम असर |
- पूर्वी घाट के दक्षिण-पूर्व में शेवराॅय तथा जावेडी की पहाड़ियाँ हैं। उदगमंडलम (ऊटी) और कोडाईकनाल प्रसिद्ध पर्वतीय नगर हैं।
- दक्कन ट्रैप: प्रायद्वीपीय पठार की एक विशेषता यहाँ पाई जाने वाली काली मृदा है। यह ज्वालामुखी से बनी है, इसलिए इसके शैल आग्नेय हैं। समय के साथ इन शैलों का अनाच्छादन हुआ है, जिससे काली मृदा बनी।
- अरावली की पहाड़ियाँ प्रायद्वीपीय पठार के पश्चिमी एवं उत्तर-पश्चिमी किनारे पर हैं। ये बहुत अधिक अपरदित एवं खंडित पहाड़ियाँ हैं, जो गुजरात से दिल्ली तक दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व दिशा में फैली हैं।
7भारतीय मरुस्थल
- भारतीय मरुस्थल अरावली पहाड़ी के पश्चिमी किनारे पर स्थित है।
- यह बालू के टिब्बों (टीलों) से ढका एक तरंगित (ऊबड़-खाबड़) मैदान है।
- इस क्षेत्र में प्रति वर्ष 150 मिमी से भी कम वर्षा होती है। इसलिए यहाँ की जलवायु शुष्क है और वनस्पति बहुत कम है।
- वर्षा ऋतु में ही कुछ सरिताएँ दिखती हैं और उसके बाद वे बालू में ही विलीन हो जाती हैं; उन्हें समुद्र तक पहुँचने के लिए पर्याप्त जल नहीं मिल पाता।
- लूनी इस क्षेत्र की एकमात्र बड़ी नदी है।
- बरखान (अर्धचंद्राकार बालू के टीले) का विस्तार अधिक क्षेत्रों में है। भारत-पाकिस्तान सीमा के समीप लंबवत् (अनुदैर्ध्य) टीले प्रमुख हैं।
8तटीय मैदान
- प्रायद्वीपीय पठार के किनारों पर संकीर्ण तटीय पट्टियों का विस्तार है: पश्चिम में अरब सागर से पूर्व में बंगाल की खाड़ी तक।
- पश्चिमी तट: पश्चिमी घाट और अरब सागर के बीच स्थित एक संकीर्ण मैदान है। इसके तीन भाग हैं:
- उत्तरी भाग: कोंकण (मुंबई तथा गोवा),
- मध्य भाग: कन्नड़ मैदान,
- दक्षिणी भाग: मालाबार तट।
- पूर्वी तट: बंगाल की खाड़ी के साथ का मैदान चौड़ा एवं समतल है।
- उत्तरी भाग: उत्तरी सरकार,
- दक्षिणी भाग: कोरोमंडल तट।
- महानदी, गोदावरी, कृष्णा एवं कावेरी जैसी बड़ी नदियों ने इस तट पर विशाल डेल्टा बनाए हैं।
- चिल्का झील पूर्वी तट पर स्थित एक महत्वपूर्ण भू-आकृति है। यह भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है। यह ओडिशा में महानदी डेल्टा के दक्षिण में स्थित है।
9द्वीप समूह
लक्षद्वीप (अरब सागर)
- केरल के मालाबार तट के पास स्थित यह द्वीप समूह छोटे प्रवाल द्वीपों से बना है।
- पहले इन्हें लकादीव, मिनीकॉय तथा अमीनदीव के नाम से जाना जाता था। 1973 में इनका नाम लक्षद्वीप रखा गया।
- यह 32 वर्ग किमी के छोटे-से क्षेत्र में फैला है। कवरत्ती द्वीप लक्षद्वीप का प्रशासनिक मुख्यालय है।
- इस द्वीप समूह पर पादप तथा जंतुओं के बहुत से प्रकार पाए जाते हैं। पिट्टी द्वीप, जहाँ मनुष्य नहीं रहते, वहाँ एक पक्षी अभयारण्य है।
- प्रवाल: छोटे समुद्री जीवों (पॉलिप) के कंकाल से बनी चट्टान; ये उथले, गर्म और साफ़ समुद्री जल में पनपते हैं।
अंडमान एवं निकोबार (बंगाल की खाड़ी)
- बंगाल की खाड़ी में उत्तर से दक्षिण की ओर फैले हुए द्वीपों की श्रृंखला। ये द्वीप आकार में बड़े, संख्या में अधिक तथा बिखरे हुए हैं।
- इन्हें दो भागों में बाँटा गया है: उत्तर में अंडमान और दक्षिण में निकोबार।
- ऐसा माना जाता है कि ये द्वीप निमग्न (डूबी हुई) पर्वत श्रेणियों के शिखर हैं।
- ये द्वीप देश के लिए सामरिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं। यहाँ पादप एवं जंतुओं में बहुत विविधता है और विषुवतीय वनस्पति पाई जाती है।
- बैरन द्वीप (अंडमान सागर) पर भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है।
10निष्कर्ष: सभी विभाग एक-दूसरे के पूरक
- भारत के विस्तृत भौतिक विभागों की विस्तृत भौगोलिक विशेषताएँ स्पष्ट रूप से दिखाती हैं कि हर क्षेत्र एक-दूसरे का पूरक है और देश को प्राकृतिक संसाधनों में समृद्ध बनाता है।
- उत्तरी पर्वत: जल और वन संपदा के प्रमुख स्रोत।
- उत्तरी मैदान: देश के अन्न भंडार; प्राचीन सभ्यताओं के विकास का आधार।
- पठार: खनिजों का भंडार; देश के औद्योगीकरण में बड़ी भूमिका।
- तटीय क्षेत्र और द्वीप समूह: मछली पकड़ने और पत्तन (बंदरगाह) संबंधी क्रियाकलापों के लिए स्थान।
11पाठ्यपुस्तक के प्रश्न: उत्तरपरीक्षा के प्रश्न
1. सही विकल्प चुनिए
(i) एक स्थलीय भाग, जो तीन ओर से समुद्र से घिरा हो: (क) तट (ख) द्वीप (ग) प्रायद्वीप (घ) इनमें से कोई नहीं → प्रायद्वीप
(ii) भारत की पूर्वी सीमा पर म्यांमार से मिलने वाली पर्वत श्रेणियों का सम्मिलित नाम: (क) हिमाचल (ख) उत्तराखंड (ग) पूर्वांचल (घ) इनमें से कोई नहीं → पूर्वांचल
(iii) गोवा के दक्षिण में स्थित पश्चिमी तटीय पट्टी: (क) कोरोमंडल (ख) कोंकण (ग) कन्नड़ (घ) उत्तरी सरकार → कन्नड़
(iv) पूर्वी घाट का सबसे ऊँचा शिखर: (क) अनाईमुडी (ख) कंचनजंगा (ग) महेंद्रगिरि (घ) खासी → महेंद्रगिरि
2. संक्षेप में उत्तर दीजिए
(i) भाबर क्या है? शिवालिक की ढाल के समानांतर 8 से 16 किमी चौड़ी पट्टी, जहाँ पर्वतों से उतरती नदियाँ कंकड़-पत्थर जमा करती हैं। इस पट्टी में सभी धाराएँ लुप्त (भूमिगत) हो जाती हैं।
(ii) हिमालय के तीन प्रमुख विभागों के नाम उत्तर से दक्षिण के क्रम में बताइए। हिमाद्रि (महान हिमालय) → हिमाचल (लघु हिमालय) → शिवालिक (बाह्य हिमालय)।
(iii) अरावली और विंध्य की श्रृंखलाओं के बीच कौन-सा पठार स्थित है? मालवा का पठार (मध्य उच्चभूमि का भाग)।
(iv) भारत के उस द्वीप समूह का नाम बताइए जो प्रवाल भित्ति के कारण बना है। लक्षद्वीप।
3. अंतर स्पष्ट कीजिए
(i) बांगर और खादर
| बांगर | खादर |
|---|---|
| पुराना जलोढ़ | नया, युवा जलोढ़ |
| बाढ़ के मैदान से ऊपर, वेदिका जैसा | नदी के पास, बाढ़ वाला नीचा मैदान |
| मिट्टी में चूनेदार निक्षेप (कंकड़) | लगभग हर साल नई परत; कंकड़ नहीं |
| अपेक्षाकृत कम उपजाऊ | बहुत उपजाऊ, गहन खेती के लिए आदर्श |
| मैदान का सबसे बड़ा भाग | नदियों के साथ की पट्टियाँ |
(ii) पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट
| पश्चिमी घाट | पूर्वी घाट |
|---|---|
| पश्चिमी तट के समानांतर, लगातार | अनियमित, टूटे हुए; नदियों ने काटा |
| केवल दर्रों (थाल, भोर, पाल घाट) से पार | कई नदी घाटियाँ बीच से निकलती हैं |
| अधिक ऊँचे: औसत 900 से 1,600 मी | कम ऊँचे: औसत 600 मी |
| ऊँचाई उत्तर से दक्षिण बढ़ती है | महानदी घाटी से नीलगिरि तक |
| सबसे ऊँची चोटी अनाईमुडी (2,695 मी) | सबसे ऊँची चोटी महेंद्रगिरि (1,501 मी) |
| नम हवाओं से पर्वतीय वर्षा | वर्षा पर कम असर |
4. भारत के प्रमुख भू-आकृतिक विभाग कौन-से हैं? हिमालय क्षेत्र और प्रायद्वीपीय पठार के उच्चावच में मुख्य अंतर
छह विभाग: हिमालय पर्वत श्रृंखला, उत्तरी मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, भारतीय मरुस्थल, तटीय मैदान, द्वीप समूह।
| हिमालय क्षेत्र | प्रायद्वीपीय पठार |
|---|---|
| नवीन वलित पर्वत; भूगर्भीय रूप से अस्थिर (भूकंप) | सबसे पुराना, स्थिर भूभाग |
| टेथिस की अवसादी चट्टानों के वलन से बना | क्रिस्टलीय, आग्नेय, रूपांतरित चट्टानें; गोंडवाना का भाग |
| ऊँची चोटियाँ (8,000 मी से ऊपर), गहरी घाटियाँ, तेज़ नदियाँ | चौड़ी, छिछली घाटियाँ, गोलाकार पहाड़ियाँ; मेज़ जैसा |
| बर्फ़ से ढकी चोटियाँ, हिमनद; नदियाँ सदानीरा | नदियाँ वर्षा पर निर्भर (मौसमी) |
| सबसे ऊँची चोटी: कंचनजंगा (भारत में) 8,598 मी | सबसे ऊँची चोटी: अनाईमुडी 2,695 मी |
5. भारत के उत्तरी मैदान का वर्णन कीजिए
(ऊपर "उत्तरी मैदान" के नोट्स से: तीन नदी-तंत्र; जलोढ़ से बना; 7 लाख वर्ग किमी, 2,400 × 240-320 किमी; घनी आबादी, उपजाऊ; पंजाब, गंगा, ब्रह्मपुत्र के मैदान; दोआब; भाबर, तराई, बांगर, खादर; नदीय द्वीप माजुली; वितरिकाएँ।)
6. संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए
(i) भारतीय मरुस्थल: अरावली के पश्चिम में बालू के टीलों से ढका तरंगित मैदान; वर्षा 150 मिमी से कम; शुष्क जलवायु, कम वनस्पति; सरिताएँ बालू में विलीन; लूनी एकमात्र बड़ी नदी; बरखान और अनुदैर्ध्य टीले।
(ii) मध्य उच्चभूमि: नर्मदा के उत्तर; मालवा पठार का बड़ा भाग; दक्षिण में विंध्य (सतपुड़ा की सीमा), उत्तर-पश्चिम में अरावली; चंबल, सिंध, बेतवा, केन दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व बहती हैं; पश्चिम में चौड़ी, पूर्व में संकीर्ण; पूर्वी विस्तार बुंदेलखंड, बघेलखंड, छोटानागपुर (दामोदर)।
(iii) भारत के द्वीप समूह: लक्षद्वीप: अरब सागर, प्रवाल द्वीप, 32 वर्ग किमी, कवरत्ती मुख्यालय, पिट्टी पक्षी अभयारण्य। अंडमान-निकोबार: बंगाल की खाड़ी, बड़े और बिखरे, निमग्न पर्वत श्रेणियों के शिखर, सामरिक महत्व, विषुवतीय वनस्पति।
मानचित्र कौशल
भारत के रेखा-मानचित्र पर दिखाइए: पर्वत और पहाड़ियाँ: काराकोरम, ज़ास्कर, पटकाई बूम, जयंतिया, विंध्य, अरावली, कार्डामम (इलायची) पहाड़ियाँ। चोटियाँ: K2, कंचनजंगा, नंगा पर्वत, अनाईमुडी। पठार: छोटानागपुर, मालवा। भारतीय मरुस्थल, पश्चिमी घाट, लक्षद्वीप। (3D मॉडल के दृश्य 1, 5 और 6 में इनमें से अधिकतर नाम असली धरातल पर दिखते हैं।)
12अभ्यास: MCQ, सही-गलत, HOTSपरीक्षा के प्रश्न
बहुविकल्पीय प्रश्न (सही उत्तर मोटे अक्षरों में)
- भू-गर्भीय रूप से सबसे पुराना भूभाग: (क) हिमालय (ख) उत्तरी मैदान (ग) प्रायद्वीपीय पठार (घ) तटीय मैदान
- हिमालय किसकी अवसादी चट्टानों के वलन से बना? (क) अरब सागर (ख) टेथिस (ग) बंगाल की खाड़ी (घ) गोंडवाना
- हिमाद्रि की औसत ऊँचाई: (क) 1,000 मी (ख) 3,700 मी (ग) 6,000 मी (घ) 8,848 मी
- हिमाचल की सबसे लंबी और महत्वपूर्ण श्रृंखला: (क) धौलाधार (ख) पीर पंजाल (ग) महाभारत (घ) शिवालिक
- "दून" कहाँ मिलते हैं? (क) हिमाद्रि और हिमाचल के बीच (ख) हिमाचल और शिवालिक के बीच (ग) शिवालिक और मैदान के बीच (घ) पठार में
- कुमाऊँ हिमालय किन नदियों के बीच है? (क) सिंधु-सतलुज (ख) सतलुज-काली (ग) काली-तिस्ता (घ) तिस्ता-दिहांग
- विश्व का सबसे बड़ा बसा हुआ नदीय द्वीप: (क) श्रीहरिकोटा (ख) माजुली (ग) कवरत्ती (घ) बैरन
- चूनेदार निक्षेप (कंकड़) किसमें मिलते हैं? (क) खादर (ख) बांगर (ग) तराई (घ) भाबर
- भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील: (क) सांभर (ख) डल (ग) चिल्का (घ) वुलर
- भारतीय मरुस्थल की एकमात्र बड़ी नदी: (क) घग्गर (ख) लूनी (ग) चंबल (घ) माही
सही या गलत
- शिवालिक श्रेणी असंपिंडित तलछट से बनी है। → सही
- पूर्वी घाट पश्चिमी घाट से अधिक ऊँचे और लगातार हैं। → गलत (पश्चिमी घाट ऊँचे और लगातार)
- दक्कन का पठार पूर्व की ओर ढलता है। → सही
- अंडमान-निकोबार प्रवाल द्वीप हैं। → गलत (लक्षद्वीप प्रवाल; अंडमान-निकोबार डूबी पर्वत श्रेणियों के शिखर)
- मेघालय पठार प्रायद्वीपीय पठार का ही भाग है। → सही (एक भ्रंश द्वारा छोटानागपुर से अलग)
HOTS (सोचिए और बताइए)
- हिमालय में भूकंप अधिक क्यों आते हैं, जबकि दक्कन का पठार अपेक्षाकृत शांत है? भारतीय प्लेट आज भी यूरेशियाई प्लेट की ओर खिसक रही है; हिमालय इसी टक्कर वाली सीमा पर है, इसलिए वहाँ दबाव और भ्रंश बनते रहते हैं। दक्कन प्लेट के भीतर का पुराना, स्थिर भाग है।
- दक्कन की बड़ी नदियाँ (गोदावरी, कृष्णा, कावेरी) बंगाल की खाड़ी में क्यों गिरती हैं, जबकि नर्मदा-तापी अरब सागर में? दक्कन पश्चिम में ऊँचा (पश्चिमी घाट) और पूर्व की ओर ढला है, इसलिए अधिकतर नदियाँ पूर्व बहती हैं। नर्मदा और तापी भ्रंश घाटियों में बहती हैं, जो पश्चिम की ओर ढली हैं।
- तराई के वन कटने का क्या असर हुआ होगा? खेती की ज़मीन और बस्तियाँ बढ़ीं, पर वन्य प्राणियों के आवास घटे, दलदल सूखे और जैव विविधता कम हुई। (आज दुधवा जैसे उद्यान बचे भागों की रक्षा करते हैं।)
- समुद्र तल से 5,000 मी ऊँचे हिमालय की चट्टानों में समुद्री जीवों के जीवाश्म क्यों मिलते हैं? ये चट्टानें कभी टेथिस सागर के तल पर जमी तलछट थीं; टक्कर से वलित होकर ऊपर उठीं, इसलिए समुद्री जीवाश्म आज ऊँचे पहाड़ों पर हैं।
13याद रखेंयाद रखें
- विभाग: हिमालय, उत्तरी मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, भारतीय मरुस्थल, तटीय मैदान, द्वीप समूह।
- उत्पत्ति: गोंडवाना → भारत-ऑस्ट्रेलियाई प्लेट उत्तर → यूरेशियाई प्लेट से टक्कर → टेथिस की परतें वलित → हिमालय; आगे का गर्त जलोढ़ से भरा → उत्तरी मैदान।
- हिमालय: 2,400 किमी; हिमाद्रि 6,000 मी (ग्रेनाइट, हिमनद), हिमाचल 3,700-4,500 मी (पीर पंजाल, धौलाधार, महाभारत), शिवालिक 900-1,100 मी; दून।
- विभाग (पश्चिम-पूर्व): पंजाब (सिंधु-सतलुज), कुमाऊँ (सतलुज-काली), नेपाल (काली-तिस्ता), असम (तिस्ता-दिहांग); पूर्वांचल: पटकाई, नागा, मिज़ो, मणिपुर।
- मैदान: 7 लाख वर्ग किमी; पंजाब, गंगा, ब्रह्मपुत्र; भाबर (8-16 किमी), तराई, बांगर (कंकड़), खादर (उपजाऊ); माजुली; दोआब।
- पठार: मध्य उच्चभूमि (मालवा, ढाल द-प से उ-पू), दक्कन (पूर्व की ओर ढाल); पश्चिमी घाट 900-1,600 मी, पूर्वी घाट 600 मी; अनाईमुडी 2,695, दोड्डाबेट्टा 2,637, महेंद्रगिरि 1,501 मी; दक्कन ट्रैप।
- मरुस्थल: 150 मिमी से कम; बरखान; लूनी। तट: कोंकण, कन्नड़, मालाबार; उत्तरी सरकार, कोरोमंडल; चिल्का। द्वीप: लक्षद्वीप (प्रवाल, 1973, कवरत्ती, 32 वर्ग किमी); अंडमान-निकोबार (बैरन: सक्रिय ज्वालामुखी)।
© Pankaj Bediya · TGT Geography · Geoland.in
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