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पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूप: कक्षा 6, अध्याय 6

पर्वत, पठार और मैदान एक ही 3D भू-दृश्य में; मुड़ती परतों वाले वलित पर्वत, उठते-धँसते खंडों वाले भ्रंशोत्थ पर्वत, धुआँ उगलता ज्वालामुखी; जलप्रपात, खदान और मिट्टी बिछाती नदी: NCERT किताब के अनुसार पूरे नोट्स के साथ।

कक्षा 6 · पुरानी किताब · अध्याय 6NCERT · कक्षा 6पुरानी किताब · अध्याय 63D मॉडल
दृश्य 1 / 5स्थलरूप

पर्वत, पठार और मैदान

पृथ्वी की सतह हर जगह एक जैसी नहीं है। तीन प्रमुख स्थलरूप हैं: पर्वत (आस-पास से बहुत ऊँचे, नुकीली चोटी), पठार (ऊँची, ऊपर से सपाट भूमि) और मैदान (समतल, आमतौर पर 200 मी. से कम ऊँचे)। स्थलरूप आंतरिक प्रक्रियाओं (उत्थान और धँसाव) और बाहरी प्रक्रियाओं (अपरदन और निक्षेपण) से बनते और बदलते रहते हैं।

पर्वत तीन प्रकार के होते हैं: वलित (हिमालय, आल्प्स; प्राचीन: अरावली), भ्रंशोत्थ (राइन घाटी, वॉस्जेस) और ज्वालामुखी (किलिमंजारो, फ़ूजीयामा)। पठार खनिजों से भरपूर होते हैं, और नदियों की लाई मिट्टी से बने मैदान सबसे उपजाऊ और घने बसे होते हैं।

याद रखें

  • आंतरिक प्रक्रिया: उत्थान, धँसाव; बाहरी: अपरदन (घिसना), निक्षेपण (जमाना)।
  • पर्वत-श्रेणी: एक पंक्ति में लगे पर्वत; हिमनद: पर्वतों पर बर्फ़ की नदी।
  • पर्वत के प्रकार: वलित, भ्रंशोत्थ (होर्स्ट-ग्राबेन), ज्वालामुखी।
  • सबसे ऊँचा पठार: तिब्बत (4,000-6,000 मी.); पुराना: दक्कन।
  • मैदान: 200 मी. से कम; नदियों से बने; सबसे उपजाऊ, सबसे घनी आबादी।

नोट्सपढ़ने और पढ़ाने के लिए पूरी जानकारी

NCERT कक्षा 6 · पृथ्वी: हमारा आवास (पुरानी किताब) · अध्याय 6: पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूप

1स्थलरूप क्या हैं और कैसे बनते हैं?

ऊँचाई के क्रम में: सबसे ऊँचे पर्वत, उनसे नीचे पठार, सबसे नीचे मैदान; नदी ढलान के साथ नीचे बहती है
  • पृथ्वी की सतह हर जगह एक जैसी नहीं है। कहीं ऊँचे पर्वत हैं, कहीं सपाट पठार, कहीं समतल मैदान।
  • पृथ्वी पर अनगिनत तरह के स्थलरूप हैं। कुछ भाग खुरदरे हैं, कुछ समतल।
  • स्थलरूप लगातार चलने वाली दो प्रक्रियाओं से बनते हैं:
आंतरिक प्रक्रियाएँ (उत्थान, धँसाव) और बाहरी प्रक्रियाएँ (अपरदन, निक्षेपण)
प्रक्रियाकहाँ सेक्या होता है
आंतरिक प्रक्रियापृथ्वी के भीतर सेसतह कहीं ऊपर उठती (उत्थान) है, कहीं नीचे धँसती है
बाहरी प्रक्रियापृथ्वी की सतह परसतह लगातार घिसती (अपरदन) है और फिर जमती (निक्षेपण) है
  • अपरदन: पृथ्वी की सतह का घिस जाना। इसके कारक हैं बहता जल, हिमनद (बर्फ़) और पवन।
  • निक्षेपण: घिसे हुए पदार्थ का दूसरी जगह जम जाना।
  • अपरदन से सतह नीची होती है, और निक्षेपण से फिर ऊँची (बनती) होती है। दोनों प्रक्रियाएँ साथ-साथ चलती रहती हैं।
  • स्थलरूपों की ऊँचाई और ढाल के आधार पर उन्हें पर्वत, पठार और मैदान में बाँटा जाता है।
  • (3D मॉडल का दृश्य 1: किसी भी भाग को छूकर जानकारी देखिए।)

2पर्वत

NCERT: पर्वत पृथ्वी की सतह की प्राकृतिक ऊँचाई है। पर्वत का शिखर छोटा तथा आधार चौड़ा होता है। यह आस-पास के क्षेत्र से बहुत ऊँचा होता है।

  • कुछ पर्वत बादलों से भी ऊँचे होते हैं।
  • जैसे-जैसे ऊपर जाते हैं, जलवायु ठंडी होती जाती है।
  • कुछ पर्वतों पर हमेशा बर्फ़ जमी रहती है, जिसे हिमनद (बर्फ़ की नदी) कहते हैं।
  • कुछ पर्वत समुद्र के भीतर भी हैं, जिन्हें हम देख नहीं पाते।
  • कठोर जलवायु के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में कम लोग रहते हैं। ढाल खड़ी होने से खेती के लिए ज़मीन भी कम होती है।
  • पर्वत एक पंक्ति में भी हो सकते हैं, जिसे पर्वत-श्रेणी कहते हैं। कई पर्वत-तंत्र एक श्रृंखला में होते हैं।
पर्वत-श्रेणीमहाद्वीप
हिमालयएशिया
आल्प्सयूरोप
एंडीज़दक्षिणी अमेरिका
रॉकीउत्तरी अमेरिका
  • पर्वत और पहाड़ी में अंतर: मुख्य अंतर ऊँचाई का है। पहाड़ी कम ऊँची होती है।

3पर्वत के तीन प्रकार

पर्वत तीन प्रकार के होते हैं: वलित पर्वत, भ्रंशोत्थ (ब्लॉक) पर्वत और ज्वालामुखी पर्वत।

1. वलित पर्वत

दोनों ओर के दबाव से चट्टानों की परतें मुड़ जाती हैं
  • दबाव से चट्टानों की परतें मुड़कर (वलित होकर) ऊपर उठ जाती हैं।
  • हिमालय और आल्प्स नवीन वलित पर्वत हैं: ऊबड़-खाबड़ और ऊँची शंक्वाकार चोटियाँ।
  • भारत की अरावली श्रेणी विश्व की सबसे पुरानी वलित पर्वत-श्रेणियों में से एक है। अपरदन से यह घिस गई है।
  • उत्तरी अमेरिका के अप्लेशियन और रूस के यूराल पर्वत भी पुराने वलित पर्वत हैं: गोल आकार और कम ऊँचाई वाले।

2. भ्रंशोत्थ (ब्लॉक) पर्वत

दरारों (भ्रंश) के बीच ऊपर उठा खंड होर्स्ट, नीचे धँसा खंड ग्राबेन
  • जब बहुत बड़ा भू-भाग टूट जाता है और ऊर्ध्वाधर (ऊपर-नीचे) रूप से विस्थापित हो जाता है, तब भ्रंशोत्थ पर्वत बनते हैं।
  • ऊपर उठे खंड को उत्खंड (होर्स्ट) और नीचे धँसे खंड को द्रोणिका भ्रंश (ग्राबेन) कहते हैं।
  • यूरोप की राइन घाटी और वॉस्जेस पर्वत इसके उदाहरण हैं।

3. ज्वालामुखी पर्वत

ज्वालामुखी से निकला लावा और राख जमकर शंकु के आकार का पर्वत बनाते हैं
  • ये ज्वालामुखी क्रियाओं से बनते हैं: लावा, राख और चट्टानों के टुकड़े जमते-जमते शंकु बना देते हैं।
  • अफ्रीका का माउंट किलिमंजारो और जापान का फ़ूजीयामा इसके उदाहरण हैं।
प्रकारकैसे बनेउदाहरण
वलितपरतें मुड़कर उठींहिमालय, आल्प्स; अरावली, अप्लेशियन, यूराल (प्राचीन)
भ्रंशोत्थभू-भाग टूटकर ऊपर उठा या धँसाराइन घाटी, वॉस्जेस
ज्वालामुखीलावा-राख जमकर शंकुकिलिमंजारो, फ़ूजीयामा
  • (3D मॉडल का दृश्य 2: तीनों प्रकार चलते हुए देखिए।)

4पर्वत हमारे लिए उपयोगी

पर्वतों के छह उपयोग
  • पर्वत जल के भंडार हैं। बहुत-सी नदियों का स्रोत पर्वतों के हिमनदों में होता है।
  • जलाशयों का पानी लोगों के काम आता है। पर्वतों के पानी से जलविद्युत बनाई जाती है।
  • नदी घाटियाँ और सीढ़ीदार खेत खेती के लिए उपयोगी हैं।
  • पर्वतों पर विभिन्न प्रकार के वन हैं: इनसे ईंधन, चारा, आश्रय और गोंद, रेज़िन जैसी चीज़ें मिलती हैं।
  • पर्वत पर्यटकों के लिए अच्छे स्थान हैं: लोग सुंदर दृश्यों के लिए यहाँ जाते हैं।
  • खेल: पैराग्लाइडिंग, हैंग ग्लाइडिंग, रिवर राफ़्टिंग और स्कीइंग पर्वतों के प्रचलित खेल हैं।

क्या आप जानते हैं?

  • कंचनजंगा, नंदा देवी जैसी भारत की ऊँची चोटियाँ हिमालय में हैं।
  • हिमालय की गंगोत्री हिमनद से गंगा निकलती है।

5पठार

पठार: ऊपर से सपाट, किनारे खड़े; जलप्रपात और खदान

NCERT: पठार ऊँची एवं समतल भूमि है। यह आस-पास के क्षेत्रों से ऊपर उठा हुआ और ऊपर से सपाट होता है, जैसे कोई मेज़।

  • पठार की एक या एक से अधिक भुजाएँ खड़ी ढाल वाली होती हैं।
  • पठारों की ऊँचाई कुछ सौ मीटर से लेकर कई हज़ार मीटर तक हो सकती है।
  • पर्वतों की तरह पठार भी नवीन या पुराने हो सकते हैं।
  • भारत का दक्कन का पठार विश्व के सबसे पुराने पठारों में से एक है।
  • केन्या, तंज़ानिया और युगांडा का पूर्वी अफ्रीकी पठार, और ऑस्ट्रेलिया का पश्चिमी पठार अन्य उदाहरण हैं।
  • तिब्बत का पठार विश्व का सबसे ऊँचा पठार है: माध्य समुद्र तल से 4,000 से 6,000 मीटर ऊँचा।

पठार हमारे लिए उपयोगी

  • पठार खनिजों से भरपूर होते हैं। इसलिए विश्व के बहुत-से खनन क्षेत्र पठारों पर हैं।
  • अफ्रीका का पठार सोने और हीरों के खनन के लिए प्रसिद्ध है।
  • भारत में छोटानागपुर के पठार पर लोहा, कोयला और मैंगनीज़ के बड़े भंडार हैं।
  • पठारों पर कई जलप्रपात होते हैं, क्योंकि नदियाँ पठार के खड़े किनारे से गिरती हैं।
  • हुंडरू जलप्रपात: छोटानागपुर पठार पर सुवर्णरेखा नदी पर (झारखंड)। जोग जलप्रपात: कर्नाटक में।
  • लावा पठारों में काली मिट्टी होती है, जो बहुत उपजाऊ है और खेती के लिए अच्छी है।
  • बहुत-से पठारों के सुंदर दृश्य पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
  • (3D मॉडल का दृश्य 3: पठार, जलप्रपात और खदान देखिए।)

6मैदान

नदी पर्वतों से मिट्टी लाती है और बिछाकर मैदान बनाती है

NCERT: मैदान समतल भूमि के बहुत बड़े भाग होते हैं। ये सामान्यतः माध्य समुद्र तल से 200 मीटर से अधिक ऊँचे नहीं होते।

  • कुछ मैदान बहुत समतल होते हैं; कुछ थोड़े ऊबड़-खाबड़ और ऊँचे-नीचे हो सकते हैं।
  • अधिकतर मैदान नदियों और उनकी सहायक नदियों से बने हैं।
  • नदियाँ पर्वतों की ढालों पर नीचे की ओर बहती हैं और उन्हें अपरदित (घिसती) करती हैं।
  • अपरदित पदार्थ को नदियाँ अपने साथ आगे ले जाती हैं और घाटियों में जमा (निक्षेपित) करती जाती हैं। इन्हीं निक्षेपों से मैदान बनते हैं।

मैदान हमारे लिए उपयोगी

  • मैदान बहुत उपजाऊ होते हैं। यहाँ खेती सबसे अच्छी होती है।
  • यहाँ यातायात के साधन (सड़क, रेल) बनाना आसान है।
  • इसलिए मैदान विश्व के सबसे घने बसे क्षेत्र हैं।
  • भारत में गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों से बने मैदान, और चीन में यांग्त्सी नदी के मैदान, बहुत घनी आबादी वाले हैं।
  • (3D मॉडल का दृश्य 4: नदी में बहती मिट्टी देखिए।)

7स्थलरूप और लोग

पर्वतपठारमैदान
ऊँचाईबहुत ऊँचेकुछ सौ से हज़ारों मीटर200 मी. से कम
सतहऊबड़-खाबड़, खड़ी ढालऊपर सपाट, किनारे खड़ेसमतल
जीवनकठिन, कम लोगखनन, पशुपालन, कुछ खेतीखेती, उद्योग, शहर
आबादीविरलमध्यमसबसे घनी
उपयोगजल, बिजली, वन, पर्यटनखनिज, जलप्रपात, काली मिट्टीखेती, यातायात
  • लोग अलग-अलग स्थलरूपों पर अलग-अलग तरीके से रहते हैं। मैदानों में जीवन आसान, पर्वतों पर कठिन है।
  • कभी-कभी प्राकृतिक आपदाएँ (भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट, बाढ़, भूस्खलन) बहुत नुकसान करती हैं। इनके बारे में जानकारी और तैयारी से नुकसान घटाया जा सकता है।
  • हमारी ज़िम्मेदारी: पर्वतों और पठारों पर पेड़ न काटें; नदियों में कचरा न फेंकें; भूमि का सोच-समझकर उपयोग करें।

8महत्त्वपूर्ण शब्द

शब्दअर्थ
स्थलरूपपृथ्वी की सतह की आकृतियाँ: पर्वत, पठार, मैदान
आंतरिक प्रक्रियापृथ्वी के भीतर से सतह का उठना या धँसना
बाहरी प्रक्रियासतह का घिसना (अपरदन) और जमना (निक्षेपण)
अपरदनबहते जल, हिमनद, पवन द्वारा सतह का घिसना
निक्षेपणघिसे पदार्थ का दूसरी जगह जमना
पर्वतआस-पास से बहुत ऊँची प्राकृतिक ऊँचाई; छोटा शिखर, चौड़ा आधार
पर्वत-श्रेणीएक पंक्ति में लगे पर्वत
हिमनदपर्वतों पर जमी बर्फ़ की नदी
वलित पर्वतपरतें मुड़कर बने पर्वत (हिमालय)
भ्रंशोत्थ पर्वतभू-भाग टूटकर ऊपर उठा या धँसा (होर्स्ट, ग्राबेन)
होर्स्टऊपर उठा खंड (उत्खंड)
ग्राबेननीचे धँसा खंड (द्रोणिका भ्रंश)
ज्वालामुखी पर्वतलावा-राख से बना शंकु (किलिमंजारो)
पठारऊँची, ऊपर से सपाट भूमि (मेज़ जैसी)
मैदानसमतल भूमि; 200 मी. से कम; नदियों से बनी

9पाठ्यपुस्तक के अभ्यास-प्रश्नों के उत्तरपरीक्षा के प्रश्न

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

(क) पर्वत और पठार में मुख्य अंतर क्या है? पर्वत आस-पास से बहुत ऊँचा होता है, उसका शिखर छोटा और नुकीला तथा ढाल खड़ी होती है। पठार भी ऊँचा होता है, पर उसका ऊपरी भाग सपाट (मेज़ जैसा) होता है और केवल किनारे खड़ी ढाल वाले होते हैं।

(ख) पर्वतों के विभिन्न प्रकार कौन-से हैं? तीन प्रकार: (i) वलित पर्वत (हिमालय, आल्प्स), (ii) भ्रंशोत्थ पर्वत (राइन घाटी, वॉस्जेस), (iii) ज्वालामुखी पर्वत (किलिमंजारो, फ़ूजीयामा)।

(ग) मनुष्यों के लिए पर्वत कैसे उपयोगी हैं? पर्वत जल के भंडार हैं; नदियाँ हिमनदों से निकलती हैं; जलाशय और जलविद्युत; नदी घाटियों और सीढ़ीदार खेतों में खेती; वनों से ईंधन, चारा, आश्रय, गोंद; पर्यटन; पैराग्लाइडिंग, रिवर राफ़्टिंग, स्कीइंग जैसे खेल।

(घ) मैदान किस प्रकार बनते हैं? अधिकतर मैदान नदियों से बनते हैं। नदियाँ पर्वतों की ढालों को घिसती (अपरदन) हैं, घिसा हुआ पदार्थ बहाकर ले जाती हैं और घाटियों में जमा (निक्षेपण) करती हैं। इन्हीं निक्षेपों से मैदान बनते हैं।

(ङ) नदी के मैदानों में घनी आबादी क्यों होती है? नदी के मैदान बहुत उपजाऊ होते हैं, समतल होने से खेती आसान है, पानी मिलता है, और सड़क-रेल बनाना आसान है। इसलिए यहाँ सबसे घनी आबादी होती है।

(च) पर्वतों में कम लोग क्यों रहते हैं? पर्वतों की जलवायु कठोर (बहुत ठंडी) है, ढाल खड़ी है, खेती के लिए समतल ज़मीन कम है और आना-जाना कठिन है। इसलिए यहाँ कम लोग रहते हैं।

2. सही उत्तर चिह्नित (✓) कीजिए।

(क) पर्वत, पहाड़ियों से किस मामले में अलग हैं? (i) ऊँचाई (ii) ढाल (iii) दिशा

(i) ऊँचाई

(ख) हिमनद कहाँ पाए जाते हैं? (i) पर्वतों में (ii) मैदानों में (iii) पठारों में

(i) पर्वतों में

(ग) दक्कन का पठार कहाँ है? (i) केन्या (ii) ऑस्ट्रेलिया (iii) भारत

(iii) भारत

(घ) यांग्त्सी नदी कहाँ बहती है? (i) दक्षिणी अमेरिका (ii) ऑस्ट्रेलिया (iii) चीन

(iii) चीन

(ङ) यूरोप की एक महत्त्वपूर्ण पर्वत-श्रेणी है: (i) एंडीज़ (ii) आल्प्स (iii) रॉकी

(ii) आल्प्स

3. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।

  • (क) मैदान एक अखंड समतल या निम्न भूमि है।
  • (ख) हिमालय और आल्प्स वलित प्रकार के पर्वतों के उदाहरण हैं।
  • (ग) पठारी क्षेत्र खनिजों से भरपूर होते हैं।
  • (घ) पर्वत-श्रेणी पर्वतों की एक पंक्ति है।
  • (ङ) मैदानी क्षेत्र खेती के लिए सबसे उपयोगी होते हैं।

10आओ कुछ करें: मानचित्र कार्यपरीक्षा के प्रश्न

विश्व के रेखा-मानचित्र पर दिखाइए:

  • पर्वत-श्रेणियाँ: हिमालय, आल्प्स, एंडीज़, रॉकी, अरावली (भारत के मानचित्र पर)।
  • पठार: तिब्बत, दक्कन, छोटानागपुर, पूर्वी अफ्रीका, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया।
  • मैदान: गंगा-ब्रह्मपुत्र का मैदान, यांग्त्सी का मैदान।
  • ज्वालामुखी पर्वत: किलिमंजारो, फ़ूजीयामा।
  • (3D मॉडल के दृश्य 5 "विश्व में" से मिलाकर देखिए।)

आओ करके देखें: वलित पर्वत बनाइए

  • अलग-अलग रंग के चार कपड़े या रंगीन कागज़ एक के ऊपर एक रखिए। ये चट्टान की परतें हैं।
  • दोनों किनारों से धीरे-धीरे अंदर की ओर दबाइए: परतें मुड़कर ऊपर उठ जाएँगी। यही वलित पर्वत बनने का तरीका है।

आओ करके देखें: मैदान कैसे बनता है

  • एक ट्रे में एक ओर गीली मिट्टी का टीला बनाइए और ऊपर से धीरे-धीरे पानी डालिए।
  • पानी मिट्टी बहाकर नीचे ले जाएगा और ट्रे के निचले भाग में बिछा देगा: यह छोटा मैदान है।

11अभ्यास: 25 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (उत्तर सहित)परीक्षा के प्रश्न

  1. पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूप कितने हैं? (क) 2 (ख) 3 (ग) 4 (घ) 5 → (ख) 3
  2. सतह का घिसना कहलाता है: (क) निक्षेपण (ख) अपरदन (ग) उत्थान (घ) धँसाव → (ख) अपरदन
  3. अपरदन का कारक नहीं है: (क) बहता जल (ख) हिमनद (ग) पवन (घ) भूकंप → (घ) भूकंप
  4. उत्थान और धँसाव हैं: (क) आंतरिक प्रक्रियाएँ (ख) बाहरी प्रक्रियाएँ (ग) दोनों (घ) कोई नहीं → (क) आंतरिक प्रक्रियाएँ
  5. पर्वत का शिखर होता है: (क) चौड़ा (ख) छोटा (ग) सपाट (घ) गोल → (ख) छोटा
  6. पर्वतों पर जमी बर्फ़ की नदी: (क) झील (ख) हिमनद (ग) जलप्रपात (घ) डेल्टा → (ख) हिमनद
  7. एक पंक्ति में लगे पर्वत: (क) पठार (ख) पर्वत-श्रेणी (ग) मैदान (घ) घाटी → (ख) पर्वत-श्रेणी
  8. एंडीज़ किस महाद्वीप में है? (क) उत्तरी अमेरिका (ख) दक्षिणी अमेरिका (ग) यूरोप (घ) एशिया → (ख) दक्षिणी अमेरिका
  9. रॉकी पर्वत किस महाद्वीप में हैं? (क) उत्तरी अमेरिका (ख) अफ्रीका (ग) यूरोप (घ) ऑस्ट्रेलिया → (क) उत्तरी अमेरिका
  10. हिमालय किस प्रकार का पर्वत है? (क) वलित (ख) भ्रंशोत्थ (ग) ज्वालामुखी (घ) अवशिष्ट → (क) वलित
  11. विश्व की सबसे पुरानी वलित पर्वत-श्रेणियों में से एक: (क) हिमालय (ख) आल्प्स (ग) अरावली (घ) रॉकी → (ग) अरावली
  12. अप्लेशियन पर्वत कहाँ हैं? (क) उत्तरी अमेरिका (ख) रूस (ग) भारत (घ) जापान → (क) उत्तरी अमेरिका
  13. ऊपर उठा खंड कहलाता है: (क) ग्राबेन (ख) होर्स्ट (ग) शंकु (घ) डेल्टा → (ख) होर्स्ट
  14. राइन घाटी किसका उदाहरण है? (क) वलित (ख) भ्रंशोत्थ (ग) ज्वालामुखी (घ) मैदान → (ख) भ्रंशोत्थ
  15. किलिमंजारो किस महाद्वीप में है? (क) एशिया (ख) अफ्रीका (ग) यूरोप (घ) दक्षिणी अमेरिका → (ख) अफ्रीका
  16. फ़ूजीयामा किस देश में है? (क) चीन (ख) जापान (ग) भारत (घ) नेपाल → (ख) जापान
  17. ऊँची, ऊपर से सपाट भूमि: (क) पर्वत (ख) पठार (ग) मैदान (घ) घाटी → (ख) पठार
  18. विश्व का सबसे ऊँचा पठार: (क) दक्कन (ख) तिब्बत (ग) छोटानागपुर (घ) पूर्वी अफ्रीका → (ख) तिब्बत
  19. तिब्बत पठार की ऊँचाई: (क) 200-500 मी. (ख) 1,000-2,000 मी. (ग) 4,000-6,000 मी. (घ) 8,848 मी. → (ग) 4,000-6,000 मी.
  20. छोटानागपुर पठार में किसके बड़े भंडार हैं? (क) सोना-हीरा (ख) लोहा, कोयला, मैंगनीज़ (ग) पेट्रोल (घ) नमक → (ख) लोहा, कोयला, मैंगनीज़
  21. हुंडरू जलप्रपात किस नदी पर है? (क) गंगा (ख) सुवर्णरेखा (ग) दामोदर (घ) कोसी → (ख) सुवर्णरेखा
  22. लावा पठारों की मिट्टी: (क) लाल (ख) काली (ग) रेतीली (घ) पीली → (ख) काली
  23. मैदान की सामान्य ऊँचाई: (क) 200 मी. से कम (ख) 500 मी. (ग) 1,000 मी. (घ) 2,000 मी. से अधिक → (क) 200 मी. से कम
  24. अधिकतर मैदान किससे बने हैं? (क) हिमनद (ख) पवन (ग) नदियाँ (घ) ज्वालामुखी → (ग) नदियाँ
  25. विश्व में सबसे घनी आबादी कहाँ है? (क) पर्वत (ख) पठार (ग) मैदान (घ) मरुस्थल → (ग) मैदान

12सही/गलत, लघु, दीर्घ और HOTS प्रश्नपरीक्षा के प्रश्न

सही या गलत

  1. सभी पर्वत समुद्र तल से ऊपर दिखाई देते हैं। → गलत (कुछ समुद्र के भीतर भी हैं)
  2. पर्वत पर ऊपर जाने पर ठंड बढ़ती है। → सही
  3. अरावली नवीन वलित पर्वत है। → गलत (सबसे पुराने वलित पर्वतों में से)
  4. पठार खनिजों से भरपूर होते हैं। → सही
  5. मैदानों में यातायात के साधन बनाना कठिन है। → गलत (आसान है)

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. अपरदन और निक्षेपण में अंतर बताइए। अपरदन में बहता जल, हिमनद और पवन सतह को घिसते हैं; निक्षेपण में घिसा हुआ पदार्थ दूसरी जगह जम जाता है।

2. होर्स्ट और ग्राबेन क्या हैं? भ्रंशोत्थ पर्वत बनते समय ऊपर उठे खंड को होर्स्ट (उत्खंड) और नीचे धँसे खंड को ग्राबेन (द्रोणिका भ्रंश) कहते हैं।

3. पठारों पर जलप्रपात क्यों होते हैं? पठारों के किनारे खड़ी ढाल वाले होते हैं। नदियाँ पठार के सपाट भाग से बहते हुए इन किनारों से नीचे गिरती हैं, जिससे जलप्रपात बनते हैं (जैसे हुंडरू)।

4. नवीन और प्राचीन वलित पर्वतों में अंतर बताइए। नवीन वलित पर्वत (हिमालय, आल्प्स) ऊँचे, ऊबड़-खाबड़ और नुकीली चोटियों वाले हैं। प्राचीन वलित पर्वत (अरावली, अप्लेशियन, यूराल) लंबे समय से घिसकर नीचे और गोल हो गए हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. पठारों का वर्णन कीजिए और बताइए कि वे हमारे लिए कैसे उपयोगी हैं। पठार ऊँची, ऊपर से सपाट भूमि है (मेज़ जैसी), जिसके किनारे खड़े होते हैं; ऊँचाई कुछ सौ से कई हज़ार मीटर। उदाहरण: दक्कन (पुराना), तिब्बत (सबसे ऊँचा), पूर्वी अफ्रीका, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया। उपयोग: खनिजों का भंडार (छोटानागपुर में लोहा-कोयला-मैंगनीज़, अफ्रीका में सोना-हीरा), जलप्रपात (हुंडरू, जोग) और बिजली, लावा पठारों की उपजाऊ काली मिट्टी, पर्यटन।

2. मैदान कैसे बनते हैं? मैदान मनुष्यों के लिए सबसे उपयोगी क्यों हैं? (ऊपर के "मैदान" वाले नोट्स से: नदियों का अपरदन, बहाव और निक्षेपण; उपजाऊ मिट्टी, समतल भूमि, आसान यातायात, घनी आबादी; गंगा-ब्रह्मपुत्र और यांग्त्सी के उदाहरण।)

HOTS (सोचिए और बताइए)

  1. अगर पृथ्वी पर केवल मैदान होते तो क्या होता? हिमनद नहीं होते, तो नदियों का पानी कम होता; खनिज कम मिलते; जलविद्युत नहीं बनती; मौसम और वर्षा भी बदल जाती।
  2. झारखंड के छोटानागपुर में उद्योग अधिक क्यों हैं? यहाँ लोहा, कोयला, मैंगनीज़ जैसे खनिज पास-पास मिलते हैं, जो लोहा-इस्पात जैसे उद्योगों के लिए ज़रूरी हैं।
  3. पर्वतों पर पेड़ काटने से मैदानों के लोगों को क्या नुकसान होता है? मिट्टी तेज़ी से बहती है, भूस्खलन और बाढ़ बढ़ते हैं, नदियों में गाद भरती है।

13याद रखेंयाद रखें

  • तीन स्थलरूप: पर्वत, पठार, मैदान।
  • आंतरिक: उत्थान-धँसाव; बाहरी: अपरदन-निक्षेपण (जल, हिमनद, पवन)।
  • पर्वत-श्रेणियाँ: हिमालय (एशिया), आल्प्स (यूरोप), एंडीज़ (द. अमेरिका), रॉकी (उ. अमेरिका)।
  • वलित: हिमालय, आल्प्स; प्राचीन: अरावली, अप्लेशियन, यूराल।
  • भ्रंशोत्थ: होर्स्ट (उठा), ग्राबेन (धँसा); राइन घाटी, वॉस्जेस। ज्वालामुखी: किलिमंजारो, फ़ूजीयामा।
  • पठार: तिब्बत (सबसे ऊँचा), दक्कन (पुराना), छोटानागपुर (लोहा, कोयला, मैंगनीज़), हुंडरू (सुवर्णरेखा)।
  • मैदान: 200 मी. से कम; गंगा-ब्रह्मपुत्र, यांग्त्सी; सबसे घनी आबादी।

© Pankaj Bediya · TGT Geography · Geoland.in

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